🌸व्रत एवं त्यौहारप्रामाणिक वैदिक शास्त्र सूत्र

दिवाली पर घर की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कैसे देखें?

दिवाली पूजा का मुहूर्त स्वयं कैसे देखें — प्रदोष काल में अमावस्या, स्थिर लग्न, चौघड़िया, राहुकाल और निशीथ काल — 8 नवंबर 2026 के उदाहरण के साथ आसान भाषा में।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·7 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 9 अक्टू॰ 2026
WhatsApp शेयर
0%
दिवाली पर घर की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कैसे देखें?
✨प्रामाणिक वैदिक संदर्भ सचित्र

मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

दिवाली पूजा का मुहूर्त स्वयं कैसे देखें — प्रदोष काल में अमावस्या, स्थिर लग्न, चौघड़िया, राहुकाल और निशीथ काल — 8 नवंबर 2026 के उदाहरण के साथ आसान भाषा में।

📜 प्रामाणिक ग्रंथ सूत्र⏱️ 7 मिनट में पूर्ण समझ🙏 सटीक ज्योतिषीय उपाय

दिवाली पूजा का मुहूर्त कैसे देखें: संक्षिप्त उत्तर

दिवाली की लक्ष्मी पूजा का आदर्श मुहूर्त चार बातें क्रम से जांचकर निकाला जाता है: (1) कार्तिक अमावस्या तिथि हो; (2) प्रदोष काल हो — सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 24 मिनट; (3) स्थिर लग्न, प्रायः वृषभ, उदित हो; और (4) राहुकाल व अन्य अशुभ समय न हों। 8 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में अमावस्या सुबह 11:27 (8 नवंबर) से दोपहर 12:31 (9 नवंबर) तक, प्रदोष काल शाम 5:31 से 8:09 और वृषभ काल शाम 5:54 से 7:50 तक है — इसलिए सर्वश्रेष्ठ समय शाम 5:54 से 7:50 बजे है।

यह लेख आपको सिखाएगा कि आप स्वयं पंचांग देखकर किसी भी वर्ष और किसी भी शहर के लिए दिवाली का सही मुहूर्त कैसे समझ सकते हैं। पंचांग की मूल बातें — पंचांग क्या होता है?

चरण 1: अमावस्या तिथि की पुष्टि करें

दिवाली कार्तिक अमावस्या (अमांत पंचांग में आश्विन अमावस्या) को मनाई जाती है। सबसे पहले पंचांग में तिथि देखें। ध्यान रहे — तिथि का आरंभ और अंत पूरे भारत में एक ही समय होता है; केवल सूर्योदय-सूर्यास्त शहर के अनुसार बदलते हैं। तिथि को समझने के लिए पढ़ें — पंचांग में तिथि क्या होती है?

2026 में अमावस्या 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे आरंभ हो रही है, इसलिए 8 नवंबर की पूरी शाम अमावस्या में है। 9 नवंबर को अमावस्या दोपहर 12:31 बजे, यानी सूर्यास्त से पहले ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए दिवाली 8 नवंबर को है।

नियम याद रखें: दिवाली उस दिन होती है जिस दिन प्रदोष काल में अमावस्या हो। केवल सूर्योदय की तिथि (उदया तिथि) देखकर दिवाली तय नहीं की जाती — यही कारण है कि कुछ वर्षों में तारीख को लेकर भ्रम होता है। जब दोनों दिन प्रदोष में अमावस्या हो, तब पंचांगकार निर्णय सिंधु जैसे ग्रंथों के नियमों से अंतिम निर्णय करते हैं।

चरण 2: प्रदोष काल निकालें

प्रदोष काल सूर्यास्त से आरंभ होकर लगभग 2 घंटे 24 मिनट (छह घटी) तक का गोधूलि के बाद का समय है। शास्त्रों में अमावस्या के प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा का विधान है। 8 नवंबर 2026 को दिल्ली में सूर्यास्त शाम 5:31 बजे है, इसलिए प्रदोष काल शाम 5:31 से 8:09 बजे तक है।

शहरप्रदोष काल (8 नवंबर 2026)
नई दिल्लीशाम 5:31 – 8:09
जयपुरशाम 5:40 – 8:16
मुंबईशाम 6:02 – 8:34
कोलकाताशाम 4:56 – 7:29
बेंगलुरुशाम 5:51 – 8:20

गोधूलि बेला के बारे में भी पढ़ें — गोधूलि मुहूर्त क्या है?

चरण 3: स्थिर लग्न देखें

राशियों को तीन प्रकार में बांटा गया है — चर, स्थिर और द्विस्वभाव। चार स्थिर राशियां हैं: वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ। मान्यता है कि स्थिर लग्न में पूजा करने से "चंचला" लक्ष्मी घर में स्थिर हो जाती हैं। दिवाली की शाम वृषभ लग्न प्रायः प्रदोष काल के भीतर उदित होता है, इसलिए दोनों का संयोग सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त बनता है। 2026 में दिल्ली में वृषभ काल शाम 5:54 से 7:50 बजे तक है। अगला स्थिर लग्न सिंह आधी रात के आसपास (रात 12:25 से 2:42) उदित होगा, जो रात्रि साधना के लिए उपयुक्त है।

लग्न हर लगभग दो घंटे में बदलता है और शहर के अक्षांश-देशांतर पर निर्भर करता है। इसलिए जयपुर में वृषभ काल 6:03 से 7:59, मुंबई में 6:27 से 8:27 और कोलकाता में 5:20 से 7:18 है।

चरण 4: राहुकाल से बचें और चौघड़िया देखें

रविवार, 8 नवंबर को दिल्ली में राहुकाल लगभग दोपहर 4:09 से शाम 5:31 बजे तक है — यह सूर्यास्त पर समाप्त हो जाता है, इसलिए प्रदोष मुहूर्त पर इसका कोई प्रभाव नहीं है।

दुकानों और दफ्तरों के लिए अक्सर चौघड़िया देखा जाता है: दिल्ली में सायंकालीन शुभ-अमृत-चर चौघड़िया शाम 5:31 से रात 10:27 तक और दोपहर का शुभ चौघड़िया 1:26 से 2:48 तक है। प्रमुख पंचांग चौघड़िया को मुख्यतः व्यापार या यात्रा के लिए उपयुक्त मानते हैं; घर की पूजा के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न ही श्रेष्ठ है। पढ़ें — चौघड़िया कैसे देखें? और राहु काल क्या होता है?

चरण 5: निशीथ और महानिशीथ काल

आधी रात के समय (दिल्ली में महानिशीथ काल रात 11:39 से 12:31) का उपयोग काली पूजा और तांत्रिक साधना के लिए अनुभवी साधक करते हैं। सामान्य गृहस्थों की पूजा के लिए यह आवश्यक नहीं है। बंगाल, असम और ओडिशा में इसी रात मां काली की पूजा होती है।

उदाहरण: नई दिल्ली, 8 नवंबर 2026

जांचपरिणाम
अमावस्या✔ सुबह 11:27 (8 नवंबर) – दोपहर 12:31 (9 नवंबर)
प्रदोष कालशाम 5:31 – 8:09
वृषभ (स्थिर) लग्नशाम 5:54 – 7:50
दोनों का मेल = मुहूर्तशाम 5:54 – 7:50
राहुकाललगभग 4:09 – 5:31 (कोई टकराव नहीं)

घर, व्यापार और साधना के लिए अलग मुहूर्त

उद्देश्यसर्वश्रेष्ठ समय
घर की लक्ष्मी-गणेश पूजाप्रदोष काल + वृषभ लग्न
दुकान/दफ्तर पूजा, बही-खातादोपहर या शाम का चौघड़िया, या प्रदोष
काली पूजा, तांत्रिक साधनामहानिशीथ काल / सिंह लग्न

मुहूर्त देखते समय होने वाली आम गलतियां

  • •केवल कैलेंडर की तारीख देखना: दिवाली की तारीख प्रदोष में अमावस्या से तय होती है, सामान्य कैलेंडर से नहीं।
  • •दूसरे शहर का मुहूर्त अपनाना: टीवी या सोशल मीडिया पर दिखाया गया मुहूर्त अक्सर दिल्ली का होता है; अपने शहर का समय अवश्य देखें।
  • •चौघड़िया को ही अंतिम मानना: घर की पूजा के लिए प्रदोष और स्थिर लग्न अधिक महत्वपूर्ण हैं।
  • •विदेश में भारत का समय मानना: विदेशों में स्थानीय गणना से तारीख भी बदल सकती है।
  • •मुहूर्त के डर से पूजा न करना: यदि मुहूर्त छूट जाए, तो प्रदोष काल या रात में अमावस्या रहते श्रद्धापूर्वक पूजा करें।

अपना पंचांग से मुहूर्त कैसे देखें?

  1. 1अपना पंचांग खोलें और अपना शहर चुनें।
  2. 28 नवंबर 2026 की तारीख में तिथि, सूर्यास्त और लग्न की जानकारी देखें।
  3. 3प्रदोष काल (सूर्यास्त + लगभग 2 घंटे 24 मिनट) निकालें।
  4. 4उस अवधि में वृषभ लग्न का समय मिलाएं — यही आपका मुहूर्त है।
  5. 5शुभ मुहूर्त पेज पर अन्य कार्यों के मुहूर्त भी देख सकते हैं।

पंचांग के पांच अंग और दिवाली मुहूर्त

पंचांग के पांच अंग हैं — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। दिवाली के मुहूर्त में तिथि (अमावस्या) सबसे प्रमुख है, इसके बाद लग्न और प्रदोष काल। 2026 में 8 नवंबर को रविवार है, जो सूर्य का दिन है; दीपों के पर्व पर सूर्य के दिन का संयोग प्रकाश का सुंदर प्रतीक माना जा सकता है। नक्षत्र और योग की विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें — नक्षत्र क्या होता है?

मुहूर्त से जुड़े सामान्य प्रश्न

क्या मुहूर्त में ही पूरी पूजा खत्म करनी होगी? पूजा का आरंभ (संकल्प और गणेश पूजन) मुहूर्त में होना चाहिए; आरती और दीपदान मुहूर्त के कुछ बाद तक भी चल सकते हैं।

यदि परिवार के सदस्य देर से घर पहुंचें? पूजा प्रदोष काल के भीतर कभी भी आरंभ कर सकते हैं — दिल्ली में रात 8:09 तक। उसके बाद भी अमावस्या रहते पूजा मान्य है, बस प्रदोष का विशेष लाभ नहीं मिलता।

क्या दुकान और घर की पूजा का एक ही मुहूर्त है? नहीं, दुकान की पूजा प्रायः दिन के शुभ चौघड़िया में और घर की पूजा प्रदोष काल में होती है।

अपने शहर का प्रदोष काल स्वयं कैसे निकालें?

  1. 1अपने शहर का 8 नवंबर 2026 का सूर्यास्त समय पंचांग में देखें।
  2. 2उसमें लगभग 2 घंटे 24 मिनट जोड़ें — यही प्रदोष काल की अवधि है।
  3. 3उदाहरण: जयपुर में सूर्यास्त लगभग शाम 5:40 है, तो प्रदोष काल लगभग 5:40 से 8:16 तक होगा।
  4. 4फिर अपने शहर में वृषभ लग्न का समय देखें और दोनों का मेल निकालें।

यह तरीका हर वर्ष और हर शहर में काम आता है।

सारांश

दिवाली का मुहूर्त निकालने के लिए: अमावस्या की पुष्टि करें, सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल निकालें, उसमें स्थिर वृषभ लग्न देखें और राहुकाल से बचें। 8 नवंबर 2026 के लिए यह दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50 बनता है; अपने शहर का समय शहरवार तालिका में देखें।

शुभ दीपावली!

यूट्यूब शॉर्ट्स वीडियोनवीनतम सूत्र

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

नित्य संध्या एवं पूजा में भगवान विष्णु की आरती का आध्यात्मिक महत्व।

मात्र 60 सेकंड में संपूर्ण नियम व वैदिक सूत्र समझें
प्रमाणिक गणना व सरल भाषा में व्याख्या
ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा
Shorts

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

▶ 60 सेकंड में देखेंYouTube पर खोलें
🌸 व्रत एवं पर्व

आगामी व्रत, त्यौहार व पूजा विधि की संपूर्ण सूची

एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा, अमावस्या एवं सभी प्रमुख पर्वों की सटीक शास्त्रसम्मत तिथियां देखें।

पर्व व त्यौहार कैलेंडर देखें →
पाठक समीक्षा

क्या यह ज्योतिषीय लेख आपके लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक रहा?

ॐ

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र

प्रमाणित वैदिक शोध मंडल

यह आलेख महर्षि पराशर विरचित वृहत्पाराशर होराशास्त्र, नारद संहिता, मुहूर्त चिंतामणि एवं शास्त्रीय सूर्यसिद्धांत के सूत्रों के गहन अध्ययन व शोध के आधार पर संकलित किया गया है।

व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श

क्या आपकी कुंडली में यह योग या दोष सक्रिय है?

हमारे 24x7 दैविक AI ज्योतिषी से अपनी जन्म तिथि व समय के आधार पर सटीक विश्लेषण प्राप्त करें।

AI ज्योतिषी से पूछें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

दिवाली का मुहूर्त कैसे तय होता है?

जिस दिन प्रदोष काल में कार्तिक अमावस्या हो, उस दिन दिवाली होती है। मुहूर्त प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न के मेल से निकाला जाता है।

प्रदोष काल क्या है?

सूर्यास्त से आरंभ होकर लगभग 2 घंटे 24 मिनट का समय प्रदोष काल कहलाता है। 8 नवंबर 2026 को दिल्ली में यह शाम 5:31 से 8:09 तक है।

लक्ष्मी पूजा स्थिर लग्न में क्यों करते हैं?

मान्यता है कि स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) में पूजा करने से चंचल लक्ष्मी घर में स्थिर रहती हैं।

क्या दिवाली पूजा चौघड़िया से कर सकते हैं?

घर की पूजा के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न श्रेष्ठ है। चौघड़िया मुख्यतः दुकान, दफ्तर या यात्रा के लिए देखा जाता है।

8 नवंबर 2026 को राहुकाल कब है?

दिल्ली में राहुकाल लगभग दोपहर 4:09 से शाम 5:31 बजे तक है, जो लक्ष्मी पूजा मुहूर्त से पहले समाप्त हो जाता है।

निशीथ काल में पूजा किसे करनी चाहिए?

महानिशीथ काल (दिल्ली में रात 11:39 से 12:31) मुख्यतः काली पूजा और तांत्रिक साधना करने वाले अनुभवी साधकों के लिए है।

आज का पंचांग (जयपुर)2026-10-16
तिथिषष्ठी
नक्षत्रमूल
सूर्योदय06:26 AM
अभिजित मुहूर्त11:49 AM - 12:35 PM
आज का संपूर्ण पंचांग देखें
@ApnaPanchang
🪐विशेष सूत्र

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

नित्य संध्या एवं पूजा में भगवान विष्णु की आरती का आध्यात्मिक महत्व।

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा
Shorts

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

▶ 60 सेकंड में देखेंYouTube पर खोलें
YouTube पर सब्सक्राइब करें
नित्य पंचांग एवं वैदिक उपायसभी शॉर्ट्स
आधिकारिक मोबाइल ऐप4.8·100K+ डाउनलोड्स
पंचांग 2026: कुंडली एवं AI ज्योतिषी
टॉप ज्योतिष ऐप

पंचांग 2026: कुंडली एवं AI ज्योतिषी

दैनिक पंचांग, चौघड़िया, व्रत-त्योहार, वैदिक जन्म कुंडली एवं 24/7 AI ज्योतिषी परामर्श।

  • सटीक दैनिक पंचांग व सूर्योदय गणना
  • चौघड़िया, अभिजित व राहुकाल मुहूर्त
Google Play से निःशुल्क पाएं
🔮 निःशुल्क जन्म पत्रिका

अपनी संपूर्ण जन्म कुंडली बनाएं

सटीक लग्न, नवमांश, चंद्र राशि, महादशा, कालसर्प व मांगलिक दोष की गणना तुरंत प्राप्त करें।

कुंडली बनाएं (100% Free) →

अन्य संबंधित ज्योतिष लेख

सभी लेख →
🌸 व्रत एवं त्यौहार6 min

एकादशी क्या होती है?

🌸 व्रत एवं त्यौहार5 min

पुष्कर मेला और कार्तिक पंचांग