दिवाली पर झाड़ू क्यों खरीदें: संक्षिप्त उत्तर
हिंदू लोक परंपरा में झाड़ू को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, क्योंकि यह घर से गंदगी, दरिद्रता और नकारात्मकता को दूर करती है — और मां लक्ष्मी केवल स्वच्छ घर में ही वास करती हैं। धनतेरस (शुक्रवार, 6 नवंबर 2026) पर नई झाड़ू खरीदकर दिवाली (8 नवंबर) पर उसकी पूजा करना लक्ष्मी के स्वागत और दुर्भाग्य को बाहर करने का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस पर झाड़ू खरीदने का सबसे अच्छा समय 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे त्रयोदशी तिथि आरंभ होने के बाद, और आदर्श रूप से सूर्यास्त से पहले है।
झाड़ू और मां लक्ष्मी का संबंध
शास्त्रों में मां लक्ष्मी को बार-बार पवित्रता और स्वच्छता से जोड़ा गया है। कहा जाता है कि जिस घर में गंदगी, कलह और अंधकार होता है, वहां से लक्ष्मी चली जाती हैं, और जहां स्वच्छता, प्रकाश और प्रेम होता है, वहां स्थिर रहती हैं। चूंकि झाड़ू ही वह साधन है जिससे यह स्वच्छता आती है, इसलिए लोक मान्यता में इसे सम्मान दिया जाता है — लगभग मां लक्ष्मी के प्रतीक के रूप में। यही कारण है कि झाड़ू को पैर लगाना या लांघना अशुभ माना जाता है, और गलती से पैर लग जाए तो लोग उसे प्रणाम करते हैं।
एक अन्य मान्यता के अनुसार झाड़ू घर से दरिद्रता (अलक्ष्मी) को बाहर निकालती है। समुद्र मंथन में लक्ष्मी से पहले उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी (दरिद्रता) प्रकट हुई थीं; लोक परंपरा में कहा जाता है कि जहां गंदगी है वहां अलक्ष्मी रहती हैं। इसलिए दिवाली से पहले घर की सफाई अलक्ष्मी को विदा करने और लक्ष्मी को आमंत्रित करने की तैयारी है।
धनतेरस पर ही झाड़ू क्यों?
धनतेरस दिवाली के पांच दिनों की शुरुआत है और समृद्धि लाने वाली नई वस्तुएं — धातु के बर्तन, सोना, चांदी और नई झाड़ू — खरीदने का दिन है। धनतेरस पर झाड़ू खरीदना पुराने वर्ष की दरिद्रता को बुहारकर बाहर करने और मुख्य पूजा से पहले स्वच्छ घर में मां लक्ष्मी को आमंत्रित करने का प्रतीक है। जो लोग महंगी वस्तुएं नहीं खरीद सकते, उनके लिए भी झाड़ू खरीदना धनतेरस की परंपरा निभाने का सरल और शुभ तरीका है।
धनतेरस 2026 की मुख्य बातें:
| विवरण | समय (नई दिल्ली) |
|---|---|
| धनतेरस | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 |
| त्रयोदशी तिथि | 6 नवंबर सुबह 10:30 – 7 नवंबर सुबह 10:47 |
| धनतेरस पूजा मुहूर्त | शाम 6:02 – 7:57 |
| प्रदोष काल | शाम 5:33 – 8:09 |
पूरी जानकारी — धनतेरस 2026 कब है?
दिवाली पर झाड़ू पूजा की विधि
- 1धनतेरस (6 नवंबर) पर नई झाड़ू खरीदें और उसे साफ स्थान पर रखें।
- 2दिवाली (8 नवंबर) पर मुख्य लक्ष्मी पूजा से पहले झाड़ू पर कलावा या सफेद धागा बांधें।
- 3रोली का छोटा तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें।
- 4प्रार्थना करें — "इस घर से सभी दरिद्रता और नकारात्मकता दूर हो, और मां लक्ष्मी का वास हो।"
- 5नई झाड़ू का उपयोग अगली सुबह (9 नवंबर) से शुरू करें।
कुछ परिवार पुरानी झाड़ू से दिवाली की शाम आखिरी बार घर साफ करके उसे अलग रख देते हैं, और लक्ष्मी पूजा के बाद से नई झाड़ू को स्थान देते हैं।
झाड़ू से जुड़े नियम और मान्यताएं
- •झाड़ू को छिपाकर रखें, सबके सामने नहीं, और खड़ी करके नहीं — लिटाकर रखें।
- •झाड़ू को लांघें नहीं और पैर से न छुएं।
- •झाड़ू को रसोई या पूजा घर में न रखें।
- •सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू न लगाने की परंपरागत मान्यता है (आवश्यक सफाई में कोई दोष नहीं)।
- •दिवाली की रात कई परिवार झाड़ू नहीं लगाते और कूड़ा बाहर नहीं फेंकते।
- •पुरानी झाड़ू को सम्मानपूर्वक हटाएं — कई लोग इसे शनिवार या अमावस्या को हटाते हैं — और उसे जलाएं नहीं।
- •अपनी उपयोग की हुई झाड़ू किसी को उपहार में न दें।
- •घर से किसी के बाहर निकलते ही तुरंत झाड़ू लगाना अशुभ माना जाता है।
- •टूटी हुई झाड़ू का उपयोग न करें।
झाड़ू कहां रखें?
| स्थान | सुझाव |
|---|---|
| दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम | लोक-वास्तु में उपयुक्त माना जाता है |
| दरवाज़े के पीछे | आम तौर पर छिपाकर रखने के लिए |
| ईशान कोण, रसोई, पूजा घर | न रखें |
| मुख्य द्वार के ठीक सामने | न रखें |
ये मान्यताएं लोक परंपरा और लोक-वास्तु पर आधारित हैं; इन्हें श्रद्धा और सुविधा के अनुसार अपनाएं।
कितनी और कैसी झाड़ू खरीदें?
- •प्राकृतिक झाड़ू (घास, फूल-झाड़ू या नारियल की सींक वाली) पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है।
- •लोक मान्यता में विषम संख्या (1 या 3) में झाड़ू खरीदना प्रचलित है।
- •प्लास्टिक की झाड़ू भी उपयोग कर सकते हैं, पर पूजा के लिए प्राकृतिक झाड़ू अधिक उपयुक्त मानी जाती है।
- •झाड़ू खरीदते समय मोलभाव में अधिक विवाद न करें — लोक मान्यता है कि लक्ष्मी स्वरूप वस्तु को सम्मान से लेना चाहिए।
दिवाली से पहले सफाई का महत्व
असली बात यह है कि घर स्वच्छ हो। दिवाली से पहले की सफाई केवल धार्मिक नहीं, वैज्ञानिक भी है — बरसात के बाद घरों में नमी, फफूंद और कीट बढ़ जाते हैं; सफाई और दीपक की गर्मी इनसे राहत देती है। अनुपयोगी और टूटी वस्तुएं — टूटे बर्तन, बंद घड़ियां, फटे कपड़े, पुराने अख़बार — दिवाली से पहले हटा दें या दान कर दें। मान्यता है कि अव्यवस्था और कबाड़ नकारात्मक ऊर्जा को रोककर रखते हैं।
दिवाली सफाई चेकलिस्ट:
धनतेरस पर और क्या खरीदें?
झाड़ू के साथ धनतेरस पर पीतल-तांबे के बर्तन, चांदी के सिक्के, सोना, धनिया के बीज, गोमती चक्र और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीदना भी शुभ माना जाता है। पूरी सूची पढ़ें — धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
झाड़ू से जुड़ी लोक मान्यताओं का व्यावहारिक पक्ष
कई लोक मान्यताओं के पीछे व्यावहारिक कारण भी रहे हैं। पुराने समय में बिजली नहीं होती थी, इसलिए सूर्यास्त के बाद झाड़ू न लगाने की परंपरा का एक कारण यह भी था कि अंधेरे में कोई कीमती वस्तु (जैसे आभूषण) गलती से कूड़े में न चली जाए। झाड़ू को छिपाकर रखने से घर साफ-सुथरा दिखता है। झाड़ू पर पैर न रखने से उसकी सींकें टूटती नहीं और सफाई के साधन का सम्मान बना रहता है। इस तरह परंपरा और व्यवहार — दोनों साथ चलते हैं।
दिवाली के बाद झाड़ू का उपयोग
नई झाड़ू का उपयोग दिवाली के अगले दिन (9 नवंबर) सुबह से शुरू करें। पहली बार झाड़ू लगाते समय घर के भीतर से बाहर की ओर बुहारें — यह घर से दरिद्रता को बाहर करने का प्रतीक है। कई परिवारों में दिवाली की अगली सुबह "दरिद्र भगाने" की परंपरा होती है, जिसमें सूप (छाज) बजाकर घर के कोनों से दरिद्रता को बाहर निकाला जाता है और कहा जाता है — "ईश्वर आए, दरिद्र जाए।"
धनतेरस और दिवाली पर सफाई से जुड़ी अन्य परंपराएं
- •मुख्य द्वार की देहरी: दिवाली की सुबह देहरी को धोकर हल्दी-कुमकुम से सजाया जाता है।
- •पुराने कपड़ों और वस्तुओं का दान: अनुपयोगी वस्तुएं ज़रूरतमंदों को दें; इससे घर की ऊर्जा हल्की होती है।
- •रसोई की सफाई: मां अन्नपूर्णा के स्थान को विशेष रूप से साफ और व्यवस्थित किया जाता है।
- •जल पात्रों की सफाई: मटके, टंकी और पानी के बर्तन साफ करके ताज़ा जल भरें।
- •दरिद्र भगाना: कई परिवारों में दिवाली की अगली भोर सूप बजाकर घर से "दरिद्र" को बाहर निकालने की लोक परंपरा है।
सारांश
झाड़ू को मां लक्ष्मी के प्रतीक के रूप में सम्मान दिया जाता है, क्योंकि यह घर से गंदगी और दरिद्रता दूर करती है। धनतेरस, 6 नवंबर 2026 (सुबह 10:30 के बाद) को नई झाड़ू खरीदें, दिवाली, 8 नवंबर को कलावा और तिलक से उसकी पूजा करें और अगले दिन से उसका उपयोग शुरू करें। सबसे बढ़कर — घर को स्वच्छ और प्रकाशित रखें।
शुभ दीपावली!


