हमारी पंचांग गणना कैसे होती है?
पंचांग गणना दृक सिद्धान्त एवं भारतीय मानक समय (IST) पर आधारित है। यह ज्योतिष सलाह नहीं है।
दृक सिद्धान्त
तिथि, नक्षत्र, योग और करण सूर्य व चंद्रमा की खगोलीय स्थिति से निकलते हैं — दीवार के कैलेंडर की आधी रात से नहीं। यही दृक (दृश्य) गणित है।
सूर्योदय और समय क्षेत्र
हर शहर के अक्षांश-देशांतर से सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त निकलते हैं। सभी घड़ियाँ एशिया/कोलकाता (IST) में दिखाई जाती हैं।
तिथि, नक्षत्र, योग, करण
तिथि सूर्य-चंद्र के कोण से, नक्षत्र चंद्र की द्राघिमा से, योग सूर्य+चंद्र से, करण तिथि के आधे भाग से। नाम सूर्योदय पर पढ़े जाते हैं; समाप्ति समय अलग दिखता है।
राहुकाल, गुलिक, यमगंड, अभिजित
ये स्थानीय दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) को आठ या पंद्रह भागों में बाँटकर निकलते हैं। इसलिए जयपुर और जोधपुर मिनट-दर-मिनट नहीं मिलते।
अयनांश
वैदिक राशियाँ निरयण हैं। इंजन वही अयनांश और खोज-चरण इस्तेमाल करता है जो सुयोग एकेडमी के Android पंचांग ऐप में है — संख्याएँ गोल नहीं की जातीं।
अपडेट कितनी बार
दैनिक पंचांग आधी रात के बाद स्वतः बनता है। अगर किसी शहर-तिथि की पंक्ति नहीं मिली, पृष्ठ उसी समय गणना कर संग्रहीत करता है — आज का पंचांग खाली नहीं रहना चाहिए।
