हमारी पंचांग गणना कैसे होती है?
पंचांग गणना दृक सिद्धान्त एवं भारतीय मानक समय (IST) पर आधारित है। यह ज्योतिष सलाह नहीं है।
दृक सिद्धान्त
तिथि, नक्षत्र, योग और करण सूर्य व चंद्रमा की खगोलीय स्थिति से निकलते हैं — दीवार के कैलेंडर की आधी रात से नहीं। यही दृक (दृश्य) गणित है।
सूर्योदय और समय क्षेत्र
हर शहर के अक्षांश-देशांतर से सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त निकलते हैं। सभी घड़ियाँ एशिया/कोलकाता (IST) में दिखाई जाती हैं।
तिथि, नक्षत्र, योग, करण
तिथि सूर्य-चंद्र के कोण से, नक्षत्र चंद्र की द्राघिमा से, योग सूर्य+चंद्र से, करण तिथि के आधे भाग से। नाम सूर्योदय पर पढ़े जाते हैं; समाप्ति समय अलग दिखता है।
राहुकाल, गुलिक, यमगंड, अभिजित
ये स्थानीय दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) को आठ या पंद्रह भागों में बाँटकर निकलते हैं। इसलिए जयपुर और जोधपुर मिनट-दर-मिनट नहीं मिलते।
अयनांश एवं खगोलीय स्रोत (Ayanamsa & Ephemeris)
वैदिक राशियाँ निरयण (Sidereal) हैं। अपना पंचांग भारत सरकार के राष्ट्रीय पंचांग द्वारा स्वीकृत लाहिरी / चित्रापक्ष अयनांश (Lahiri / Chitrapaksha Ayanamsa) का उपयोग करता है। सौर एवं ग्रहीय गणनाओं हेतु VSOP87 तथा चंद्र गणनाओं हेतु ELP2000-82 खगोलीय सिद्धांतों का उपयोग किया जाता है।
मुख्य पंचांग परामर्शदाता एवं समीक्षक
पंडित आचार्य सत्येंद्र शर्मा (Pt. Acharya Satyendra Sharma) — वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य एवं पंचांग गणितज्ञ (सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी; 28+ वर्षों का अनुभव)। सभी दैनिक पंचांग गणनाएँ एवं मुहूर्त नियम सुयोग एकेडमी के वैदिक अनुसंधान प्रकोष्ठ द्वारा नियमित रूप से समीक्षित एवं सत्यापित किए जाते हैं।
अपडेट एवं सत्यापन
दैनिक पंचांग आधी रात के बाद स्वतः निर्मित होता है। तकनीकी विनिर्देश: अयनांश: लाहिरी (Chitrapaksha) · पंचांग इंजन: VSOP87 / ELP2000 · अक्षांश-देशांतर डेटाबेस: 296+ भारतीय नगर · अंतिम सत्यापन: सितम्बर 2026।
