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दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शहर के अनुसार शुभ समय

दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शहर अनुसार — दिल्ली, जयपुर, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, बेंगलुरु सहित 11 शहर, प्रदोष काल और निशीथ काल के साथ।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·7 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 9 अक्टू॰ 2026
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दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शहर के अनुसार शुभ समय
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मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शहर अनुसार — दिल्ली, जयपुर, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, बेंगलुरु सहित 11 शहर, प्रदोष काल और निशीथ काल के साथ।

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शहर के अनुसार लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 2026: संक्षिप्त उत्तर

दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर को है। सबसे श्रेष्ठ समय वह है जब प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न एक साथ हों। नई दिल्ली में यह शाम 5:54 से 7:50 बजे तक है; जयपुर में 6:03–7:59, मुंबई में 6:27–8:27, कोलकाता में 5:20–7:18 और बेंगलुरु में 6:17–8:20। अमावस्या तिथि 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे से 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे तक है — यह पूरे भारत में एक ही समय है; केवल सूर्यास्त और लग्न का समय शहर के अनुसार बदलता है।

शहरवार पूरी तालिका (8 नवंबर 2026)

शहरलक्ष्मी पूजा मुहूर्तप्रदोष कालवृषभ काल
नई दिल्लीशाम 5:54 – 7:505:31 – 8:095:54 – 7:50
जयपुरशाम 6:03 – 7:595:40 – 8:166:03 – 7:59
लखनऊशाम 5:42 – 7:395:19 – 7:565:42 – 7:39
चंडीगढ़शाम 5:52 – 7:465:30 – 8:095:52 – 7:46
मुंबईशाम 6:27 – 8:276:02 – 8:346:27 – 8:27
पुणेशाम 6:24 – 8:245:59 – 8:316:24 – 8:24
अहमदाबादशाम 6:22 – 8:205:58 – 8:326:22 – 8:20
कोलकाताशाम 5:20 – 7:184:56 – 7:295:20 – 7:18
हैदराबादशाम 6:07 – 8:085:42 – 8:136:07 – 8:08
बेंगलुरुशाम 6:17 – 8:205:51 – 8:206:17 – 8:20
चेन्नईशाम 6:06 – 8:095:40 – 8:096:06 – 8:09

स्रोत: प्रमुख पंचांगों में प्रयुक्त दृक् गणना। अन्य कस्बों और शहरों के लिए अपने शहर का [पंचांग](/panchang) देखें।

राजस्थान के लिए विशेष जानकारी

जयपुर में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शाम 6:03 से 7:59 बजे तक है और प्रदोष काल शाम 5:40 से 8:16 बजे तक। राजस्थान के पश्चिमी शहरों (जैसे जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर) में सूर्यास्त जयपुर से कुछ मिनट बाद होता है, इसलिए वहां मुहूर्त थोड़ा आगे खिसकता है; पूर्वी शहरों (जैसे भरतपुर, अलवर) में थोड़ा पहले। सटीक समय के लिए अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें। राजस्थान में दिवाली पर व्यापारी वर्ग बही-खाता पूजन (चोपड़ा पूजन) भी इसी स्थिर लग्न में करता है।

शहरों के अनुसार समय अलग क्यों होता है?

  1. 1सूर्यास्त का समय बदलता है — प्रदोष काल सूर्यास्त से शुरू होता है, जो पूर्व में जल्दी (कोलकाता में लगभग 4:56) और पश्चिम में देर से (मुंबई में लगभग 6:02) होता है।
  2. 2वृषभ लग्न के उदय का समय बदलता है — लग्न देशांतर और अक्षांश के अनुसार बदलता है, इसलिए स्थिर वृषभ लग्न की अवधि भी हर शहर में अलग होती है।
  3. 3तिथि का समय नहीं बदलता — अमावस्या पूरे भारत में एक ही क्षण शुरू और समाप्त होती है (8 नवंबर सुबह 11:27 से 9 नवंबर दोपहर 12:31, भारतीय समय)।

प्रदोष काल और स्थिर लग्न ही क्यों?

शास्त्रों में कहा गया है कि दीपावली पर मां लक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल में करना चाहिए — यानी सूर्यास्त के बाद लगभग ढाई घंटे का समय, जब दिन और रात का मिलन होता है। साथ ही स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ) में पूजा करने से मान्यता है कि लक्ष्मी घर में स्थिर रहती हैं — "चंचला" लक्ष्मी स्थायी हो जाती हैं। दिवाली की शाम वृषभ लग्न प्रायः प्रदोष काल के भीतर ही उदित होता है, इसलिए यह संयोग सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पूरा तर्क समझने के लिए पढ़ें — दिवाली पर घर की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कैसे देखें?

महानिशीथ काल (रात्रि पूजा)

तांत्रिक साधना या काली पूजा की परंपरा में महानिशीथ काल का उपयोग होता है: दिल्ली में रात 11:39 से 12:31 बजे और चंडीगढ़ में रात 11:40 से 12:33 बजे। यह समय मुख्यतः अनुभवी साधकों और पुरोहितों के लिए उपयुक्त है; गृहस्थों को प्रदोष काल का मुहूर्त ही चुनना चाहिए। दिल्ली में सिंह काल (एक अन्य स्थिर लग्न) रात 12:25 से 2:42 बजे तक है। बंगाल और असम में इसी रात मां काली की पूजा की जाती है।

दुकान और दफ्तर के लिए चौघड़िया मुहूर्त (दिल्ली)

कालसमयचौघड़िया
प्रातः/दोपहरसुबह 11:27 – 12:05चर, लाभ, अमृत
अपराह्नदोपहर 1:26 – 2:48शुभ
सायंकालशाम 5:31 – रात 10:27शुभ, अमृत, चर
रात्रिरात 1:43 – 3:22 (9 नवंबर)लाभ
उषाकालसुबह 5:00 – 6:39 (9 नवंबर)शुभ

व्यापारी प्रायः दोपहर के शुभ चौघड़िया में दुकान पर संक्षिप्त पूजा करते हैं और परिवार के साथ मुख्य लक्ष्मी पूजा घर पर प्रदोष काल में करते हैं। चौघड़िया पढ़ने का तरीका जानें — चौघड़िया कैसे देखें?

यदि मुहूर्त छूट जाए तो?

  • •अपने शहर के प्रदोष काल में किसी भी समय पूजा कर लें।
  • •यदि वह भी छूट जाए, तो सायंकालीन चौघड़िया (दिल्ली में लगभग रात 10:27 तक) का उपयोग करें।
  • •लक्ष्मी पूजा अमावस्या तिथि रहते और आदर्श रूप से 8 नवंबर की रात ही करनी चाहिए।
  • •पूजा का भाव सबसे महत्वपूर्ण है — यदि किसी कारण से सही समय न मिले, तो मां से क्षमा मांगकर श्रद्धापूर्वक पूजा करें।

कामकाजी परिवारों के लिए सुझाव

8 नवंबर 2026 रविवार है, इसलिए अधिकांश लोगों के लिए मुहूर्त में पूजा करना सुविधाजनक रहेगा। फिर भी:

  • •पूजा की सारी तैयारी दोपहर तक पूरी कर लें — चौकी, मूर्तियां, कलश, दीपक और भोग।
  • •सूर्यास्त से पहले मुख्य द्वार पर रंगोली और तोरण लगा दें।
  • •प्रदोष काल शुरू होते ही दीपक जलाएं और वृषभ काल आरंभ होने पर मुख्य पूजा शुरू करें।
  • •पूजा के बाद घर भर में दीपक लगाएं और फिर पटाखे चलाएं।

विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए

विदेशों में दिवाली की तारीख और मुहूर्त वहां के स्थानीय सूर्यास्त और तिथि के अनुसार अलग हो सकते हैं। कुछ देशों में अमावस्या का प्रदोष काल 8 नवंबर के बजाय 7 या 9 नवंबर को पड़ सकता है। इसलिए विदेश में रहने वाले भक्त अपने शहर के लिए गणना किया गया पंचांग देखें और भारत के समय को सीधे न अपनाएं।

प्रमुख शहरों के लिए विशेष सुझाव

  • •दिल्ली-एनसीआर: नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में मुहूर्त दिल्ली से एक-दो मिनट ही अलग है; शाम 5:54 से 7:50 का समय मानें।
  • •मुंबई और पुणे: यहां सूर्यास्त देर से होता है, इसलिए पूजा शाम 6:24 के बाद ही आरंभ करें; जल्दी पूजा करने से वृषभ काल छूट सकता है।
  • •कोलकाता: मुहूर्त सबसे पहले (5:20) आरंभ होता है; उसी रात मां काली की पूजा भी होती है, जो महानिशीथ काल में की जाती है।
  • •बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद: दक्षिण भारत में मुख्य दीपावली स्नान नरक चतुर्दशी की भोर (8 नवंबर) को होता है और शाम को लक्ष्मी पूजा।
  • •अहमदाबाद: गुजरात में दिवाली के बाद 10 नवंबर को नया वर्ष (बेसतु वरस) और चोपड़ा पूजन की परंपरा है।

मुहूर्त के अनुसार पूजा की तैयारी का क्रम

  1. 1मुहूर्त आरंभ से 30 मिनट पहले स्नान करके पूजा स्थान पर बैठ जाएं।
  2. 2प्रदोष काल आरंभ होते ही मुख्य दीपक जलाएं।
  3. 3वृषभ काल शुरू होते ही गणेश पूजन से मुख्य पूजा आरंभ करें।
  4. 4मुहूर्त के मध्य तक लक्ष्मी पूजन और मंत्र जाप पूरा करें।
  5. 5मुहूर्त समाप्त होने से पहले आरती और दीपमालिका पूजन कर लें।

पूजा की पूरी विधि — दीपावली 2026 पूजा विधि।

8 नवंबर 2026 को राहुकाल और लक्ष्मी पूजा

रविवार को राहुकाल दिन के अंतिम आठवें भाग में आता है। 8 नवंबर को दिल्ली में राहुकाल लगभग दोपहर 4:09 से शाम 5:31 बजे तक है — यानी सूर्यास्त के साथ ही समाप्त हो जाता है। इसलिए प्रदोष काल और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त पर राहुकाल का कोई प्रभाव नहीं है। केवल यह ध्यान रखें कि दुकान या दफ्तर की दोपहर वाली पूजा शाम 4 बजे के बाद न करें। अपने शहर का राहुकाल यहां देखें — राहुकाल।

सारांश

दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर को है। अपने शहर के प्रदोष-वृषभ मुहूर्त का पालन करें — दिल्ली में शाम 5:54–7:50, जयपुर में 6:03–7:59, मुंबई में 6:27–8:27, कोलकाता में 5:20–7:18। रात्रि साधना के लिए महानिशीथ काल (दिल्ली में रात 11:39–12:31) है। दिवाली की पूरी जानकारी के लिए पढ़ें — दिवाली 2026 कब है?

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

दिल्ली में दिवाली 2026 का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में 8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक है।

मुंबई में लक्ष्मी पूजा 2026 का समय क्या है?

मुंबई में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 8 नवंबर को शाम 6:27 से 8:27 बजे तक है और प्रदोष काल 6:02 से 8:34 बजे तक।

कोलकाता में दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त क्या है?

कोलकाता में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शाम 5:20 से 7:18 बजे तक है।

शहरों में लक्ष्मी पूजा का समय अलग क्यों है?

क्योंकि हर शहर में सूर्यास्त और वृषभ लग्न के उदय का समय अलग होता है, जबकि अमावस्या तिथि पूरे भारत में एक ही समय रहती है।

दिवाली 2026 का निशीथ काल कब है?

दिल्ली में महानिशीथ काल 8 नवंबर की रात 11:39 से 12:31 बजे तक है, जो मुख्य रूप से तांत्रिक साधना और काली पूजा के लिए है।

बेंगलुरु और चेन्नई में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त क्या है?

बेंगलुरु में शाम 6:17 से 8:20 बजे तक और चेन्नई में शाम 6:06 से 8:09 बजे तक लक्ष्मी पूजा मुहूर्त है।

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