दिवाली की रात के मंत्र: संक्षिप्त उत्तर
दिवाली की रात (8 नवंबर 2026) सबसे अधिक जपे जाने वाले मंत्र हैं: (1) गणेश मंत्र 'ॐ गं गणपतये नमः'; (2) महालक्ष्मी बीज मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः'; (3) सरल मंत्र 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः'; (4) लक्ष्मी गायत्री; (5) श्री सूक्त; (6) कुबेर मंत्र; और (7) दीप मंत्र। इनका जाप लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50) में करें, और चाहें तो निशीथ काल (रात 11:39 से 12:31) में फिर से करें।
1. गणेश मंत्र (सबसे पहले)
अर्थ: हे वक्र सूंड और विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेश जी, मेरे सभी कार्यों में सदा विघ्नों को दूर करें।
इसके बाद 'ॐ गं गणपतये नमः' का 11 या 108 बार जाप करें। किसी भी देवी-देवता की पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण अनिवार्य माना गया है। क्यों — पढ़ें दिवाली पर गणेश जी की पूजा क्यों की जाती है?
2. महालक्ष्मी बीज मंत्र
अर्थ: कमल में निवास करने वाली हे महालक्ष्मी, आपको नमन है — मुझ पर प्रसन्न हों। श्रीं मां लक्ष्मी का बीज मंत्र है और ह्रीं दैवी शक्ति (महामाया) का बीज। इसका कमल गट्टे या स्फटिक की माला से 108 बार जाप करें। यह दिवाली की रात का सबसे प्रसिद्ध और प्रभावी मंत्र माना जाता है।
3. सरल लक्ष्मी मंत्र
यह मंत्र पहली बार पूजा करने वालों, बच्चों और पूरे परिवार के सामूहिक जाप के लिए आदर्श है। उच्चारण सरल है और फल पूर्ण।
4. लक्ष्मी गायत्री मंत्र
अर्थ: हम महालक्ष्मी को जानते हैं, विष्णु पत्नी का ध्यान करते हैं — वे लक्ष्मी हमें प्रेरित और प्रकाशित करें। गायत्री मंत्र बुद्धि और धन — दोनों का आशीर्वाद मांगता है।
5. श्री सूक्त (पहले दो श्लोक)
अर्थ: हे अग्निदेव, स्वर्ण और रजत की मालाओं से सुशोभित, चंद्रमा के समान प्रकाशमान, स्वर्णमयी लक्ष्मी को मेरे पास लाइए — उस लक्ष्मी को जो कभी साथ न छोड़े, जिनकी कृपा से मुझे स्वर्ण, गौ, अश्व और श्रेष्ठ जन प्राप्त हों।
संपूर्ण श्री सूक्त ऋग्वेद के खिल सूक्तों में आता है और इसमें 15-16 ऋचाएं हैं। इसे लक्ष्मी उपासना का सर्वश्रेष्ठ स्तोत्र माना जाता है। दिवाली की रात श्री सूक्त का 1, 11 या 16 बार पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
6. महालक्ष्मी अष्टकम (प्रथम श्लोक)
अर्थ: हे महामाया, श्रीपीठ पर विराजमान, देवताओं द्वारा पूजित, हाथों में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है। संपूर्ण अष्टकम में आठ श्लोक और फलश्रुति है, जो इंद्र द्वारा रचित मानी जाती है।
7. कुबेर मंत्र
अर्थ: हे यक्षराज, वैश्रवण कुबेर, धन-धान्य के स्वामी, मुझे धन-धान्य की समृद्धि दें। यह मंत्र तिजोरी, कैश बॉक्स या बही-खाते के पास पढ़ा जाता है। कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं, जबकि लक्ष्मी धन की अधिष्ठात्री देवी — इसलिए दोनों की पूजा साथ की जाती है।
8. मां सरस्वती मंत्र (बही-खाते के लिए)
नए बही-खाते, कलम और दवात की पूजा के समय यह मंत्र बोला जाता है।
9. दीप मंत्र
अर्थ: जो ज्योति शुभ और कल्याण करती है, आरोग्य और धन-संपदा देती है, और शत्रु-बुद्धि (नकारात्मक विचारों) का नाश करती है — उस दीप ज्योति को नमस्कार। दीपमालिका पूजन के समय और प्रत्येक दीपक जलाते समय यह मंत्र बोलें।
10. क्षमा प्रार्थना (समापन)
अर्थ: हे परमेश्वरी, मैं न आवाहन जानता हूं, न विसर्जन, न ही पूजा की विधि — मेरी भूलों को क्षमा करें।
दिवाली पूजा में मंत्रों का क्रम
| क्रम | मंत्र | संख्या |
|---|---|---|
| 1 | गणेश मंत्र | 11 बार |
| 2 | कलश/वरुण मंत्र | 1 बार |
| 3 | महालक्ष्मी बीज मंत्र या सरल मंत्र | 108 बार |
| 4 | लक्ष्मी गायत्री | 11 बार |
| 5 | श्री सूक्त / महालक्ष्मी अष्टकम | 1 पाठ |
| 6 | सरस्वती मंत्र (बही-खाता) | 11 बार |
| 7 | कुबेर मंत्र (तिजोरी) | 11 या 108 बार |
| 8 | दीप मंत्र | दीपमालिका पूजन पर |
| 9 | आरती, क्षमा प्रार्थना | समापन |
पूजा का पूरा क्रम पढ़ें — दीपावली 2026 पूजा विधि।
दिवाली की रात मंत्र जाप के नियम
- 1स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और ऊन या कुश के आसन पर पूर्व या उत्तर मुख होकर बैठें।
- 2कमल गट्टे, स्फटिक या रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें; सुमेरु (मुख्य मनका) को न लांघें।
- 3गणेश पूजा के बाद और आरती से पहले जाप करें।
- 4जाप के समय घी का दीपक जलता रहे।
- 5स्पष्ट उच्चारण करें; संदेह हो तो सरल 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' उपयोग करें।
- 6अनेक साधक रात भर जाप करते हैं — दिवाली को साधना की चार महारात्रियों में से एक माना गया है।
- 7जाप के बीच में बातचीत न करें और मोबाइल दूर रखें।
मंत्र जाप से पहले ध्यान
मंत्र जाप से पहले कुछ क्षण आंखें बंद करके मां लक्ष्मी के स्वरूप का ध्यान करें — लाल वस्त्र धारण किए, कमल पर विराजमान, चार भुजाओं में कमल और वरद-अभय मुद्रा, हाथ से स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा, और दोनों ओर सूंड में कलश लिए हुए श्वेत हाथी। यह स्वरूप "गज लक्ष्मी" कहलाता है और घर की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
कनकधारा स्तोत्र
आदि शंकराचार्य द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र लक्ष्मी उपासना का अत्यंत लोकप्रिय स्तोत्र है। कथा के अनुसार बाल्यावस्था में शंकराचार्य भिक्षा मांगने एक निर्धन ब्राह्मणी के घर गए। उसके पास देने को केवल एक सूखा आंवला था, जो उसने श्रद्धा से दे दिया। उसकी गरीबी देखकर शंकराचार्य ने मां लक्ष्मी की स्तुति में यह स्तोत्र रचा, और प्रसन्न होकर मां ने उस घर पर स्वर्ण के आंवलों की वर्षा कर दी। दिवाली की रात कनकधारा स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
मंत्र जाप के लाभ
नियमित मंत्र जाप से मन एकाग्र होता है, चिंता कम होती है और सकारात्मक सोच बढ़ती है। लक्ष्मी मंत्रों का जाप केवल धन की कामना नहीं, बल्कि कृतज्ञता, संतोष और सद्बुद्धि की प्रार्थना भी है। मान्यता है कि जो व्यक्ति धन का सदुपयोग करता है — परिवार की सेवा, दान और धर्म के कार्यों में — उसके यहां लक्ष्मी स्थिर रहती हैं।
रात्रि जागरण और भजन
दिवाली की रात परिवार के साथ भजन-कीर्तन करना, लक्ष्मी जी की आरती "ॐ जय लक्ष्मी माता" और "महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं" जैसे भजन गाना शुभ माना जाता है। देर रात तक जागकर मंत्र जाप करने वाले निशीथ काल (दिल्ली में रात 11:39 से 12:31) में अपनी साधना पूर्ण कर सकते हैं।
मां लक्ष्मी की आरती
पूजा के अंत में पूरा परिवार मिलकर "ॐ जय लक्ष्मी माता" आरती गाता है। इस आरती में मां लक्ष्मी को ब्रह्मा, विष्णु और महेश द्वारा पूजित, सुख-संपत्ति देने वाली और घर में शुभ गुणों का वास कराने वाली देवी के रूप में स्मरण किया जाता है। आरती की पुस्तक या परिवार की परंपरा के अनुसार पूरी आरती गाएं।
आरती करते समय दीपक को मां के चरणों में चार बार, नाभि पर दो बार, मुख पर एक बार और फिर पूरे स्वरूप पर सात बार घुमाने का विधान है। आरती के बाद दीपक पर दोनों हाथ घुमाकर आंखों और सिर से लगाएं।
सारांश
8 नवंबर 2026 को गणेश मंत्र से आरंभ करें, महालक्ष्मी बीज मंत्र या 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जाप करें, संभव हो तो लक्ष्मी गायत्री और श्री सूक्त जोड़ें, तिजोरी के पास कुबेर मंत्र पढ़ें और दीप मंत्र व क्षमा प्रार्थना से समापन करें। मां लक्ष्मी आपके घर को सुख-समृद्धि से भर दें।
शुभ दीपावली!



