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नक्षत्र क्या होता है?

नक्षत्र चंद्र का घर है — आकाश के 27 भाग। सूर्योदय का नाम और समाप्ति घड़ी दोनों क्यों चाहिए।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·6 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 12 अक्टू॰ 2026
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नक्षत्र क्या होता है?
✨प्रामाणिक वैदिक संदर्भ सचित्र

मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

नक्षत्र चंद्र का घर है — आकाश के 27 भाग। सूर्योदय का नाम और समाप्ति घड़ी दोनों क्यों चाहिए।

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वैदिक खगोलशास्त्र और ज्योतिष में नक्षत्र (Nakshatra) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। जहाँ पश्चिमी ज्योतिष सूर्य की गति पर आधारित 12 राशियों को प्रधानता देता है, वहीं वैदिक ज्योतिष चंद्रमा की गति पर आधारित 27 नक्षत्रों को आधार मानता है। सम्पूर्ण 360 अंश के भचक्र को 27 समान भागों में विभाजित किया गया है, जिसमें प्रत्येक नक्षत्र 13 अंश 20 कला (13°20') का विस्तार रखता है।

27 नक्षत्रों का भ्रमण चक्र

चंद्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा लगभग 27.3 दिनों में पूरी करता है। इस दौरान वह प्रतिदिन औसतन एक नक्षत्र से होकर गुजरता है। अश्विनी से प्रारंभ होकर रेवती तक कुल 27 नक्षत्र निम्नलिखित हैं:

1. अश्विनी, 2. भरणी, 3. कृत्तिका, 4. रोहिणी, 5. मृगशिरा, 6. आर्द्रा, 7. पुनर्वसु, 8. पुष्य, 9. आश्लेषा

10. मघा, 11. पूर्वाफाल्गुनी, 12. उत्तराफाल्गुनी, 13. हस्त, 14. चित्रा, 15. स्वाती, 16. विशाखा, 17. अनुराधा, 18. ज्येष्ठा

19. मूल, 20. पूर्वाषाढ़ा, 21. उत्तराषाढ़ा, 22. श्रवण, 23. धनिष्ठा, 24. शतभिषा, 25. पूर्वाभाद्रपद, 26. उत्तराभाद्रपद, 27. रेवती

नक्षत्र के चार चरण (Four Padas)

प्रत्येक नक्षत्र को चार बराबर भागों में बाँटा गया है, जिन्हें 'चरण' या 'पद' कहा जाता है। प्रत्येक चरण का मान 3°20' होता है:

• एक राशि में ठीक सवा दो नक्षत्र (9 चरण) समाहित होते हैं ($9 \times 3°20' = 30°$)।

• उदाहरण के लिए, मेष राशि में अश्विनी के 4 चरण, भरणी के 4 चरण और कृत्तिका का पहला चरण आता है।

• शिशु के जन्म समय चंद्रमा जिस नक्षत्र और चरण में स्थित होता है, उसी से उसकी जन्म चंद्र राशि और विंशोत्तरी महादशा का निर्धारण होता है।

दैनिक जीवन में नक्षत्र का महत्व

  1. 1नामकरण संस्कार: 27 नक्षत्रों के कुल 108 चरणों ($27 \times 4$) के लिए विशिष्ट नामाक्षर (अक्षर ध्वनियाँ) निर्धारित हैं। शिशु का नाम जन्म नक्षत्र चरण के अनुसार रखने से उसके स्वभाव और भाग्य में संतुलन बना रहता है।
  2. 2पंचक विचार: धनिष्ठा के उत्तरार्ध से लेकर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती तक के काल को पंचक कहा जाता है। इसमें गृह निर्माण, दक्षिण दिशा की यात्रा या तृण-काष्ठ संचय जैसे कार्यों में पारंपरिक सावधानी रखी जाती है।
  3. 3मूल/गंडमूल शांति: कर्क-सिंह, वृश्चिक-धनु, एवं मीन-मेष राशि की संधियों पर स्थित 6 नक्षत्रों (आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती, अश्विनी) को गंडमूल नक्षत्र कहा जाता है, जिनकी शांति का विधान ग्रंथों में मिलता है।

अपना पंचांग पर अपने नगर का सूर्योदय नक्षत्र एवं उसकी समाप्ति घड़ी प्रतिदिन सरलता से देख सकते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

नक्षत्र क्या होता है?

नक्षत्र राशिचक्र के 27 बराबर भागों में से एक है, जिनमें प्रत्येक 13°20' का है; चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वह उस दिन का नक्षत्र कहलाता है।

27 नक्षत्रों के नाम क्या हैं?

अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती।

गंडमूल नक्षत्र कौन से हैं?

अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती गंडमूल नक्षत्र हैं।

सबसे शुभ नक्षत्र कौन सा माना जाता है?

पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ माना जाता है, विशेषकर गुरुवार को पड़ने पर गुरु पुष्य योग बनता है।

जन्म नक्षत्र से क्या पता चलता है?

जन्म नक्षत्र से नाम का पहला अक्षर, विंशोत्तरी दशा का क्रम और कुंडली मिलान के नाड़ी, योनि, गण आदि तय होते हैं।

एक नक्षत्र में कितने चरण होते हैं?

हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, प्रत्येक 3°20' का; कुल 108 चरण होते हैं।

आज का पंचांग (जयपुर)2026-10-16
तिथिषष्ठी
नक्षत्रमूल
सूर्योदय06:26 AM
अभिजित मुहूर्त11:49 AM - 12:35 PM
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