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पंचांग क्या होता है?

पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण — और राजस्थान के शहर का सूर्योदय घड़ियाँ क्यों बदलता है।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·6 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 12 अक्टू॰ 2026
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पंचांग क्या होता है?
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पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण — और राजस्थान के शहर का सूर्योदय घड़ियाँ क्यों बदलता है।

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पंचांग (Panchang) का शाब्दिक अर्थ है "पाँच अंग" (पंच + अंग)। प्राचीन भारतीय वैदिक ज्योतिष एवं खगोलशास्त्र (ज्योतिष वेद का नेत्र माना गया है) में समय के सूक्ष्म से विराट स्वरूप को समझने और मापने के लिए पंचांग का उपयोग किया जाता है। पंचांग सूर्य और चंद्रमा की खगोलीय गति, उनके पारस्परिक कोणीय अंतर तथा 27 नक्षत्रों की पृष्ठभूमि पर आधारित एक संपूर्ण दैनिक खगोलीय पंचांग है।

पंचांग के पाँच मूलभूत अंग

हिन्दू काल-गणना में प्रत्येक दिन का निर्धारण निम्नलिखित पाँच अंगों द्वारा होता है:

  1. 1तिथि (Tithi): सूर्य और चंद्रमा के बीच का कोणीय अंतर जब 12 अंश (degrees) बढ़ता है, तो एक तिथि का निर्माण होता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं: 15 शुक्ल पक्ष में (प्रतिपदा से पूर्णिमा तक) और 15 कृष्ण पक्ष में (प्रतिपदा से अमावस्या तक)। ग्रहों की गति में सूक्ष्म अंतर के कारण एक तिथि का मान लगभग 19 से 26 घंटे तक हो सकता है, जो दिन या रात के किसी भी समय प्रारंभ या समाप्त हो सकती है।
  1. 2वार (Vaar): सप्ताह के सात दिन जो नवग्रहों के आधिपत्य में हैं — रविवार (सूर्य), सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (बृहस्पति), शुक्रवार (शुक्र) एवं शनिवार (शनि)। वैदिक पद्धति में वार का आरंभ आधी रात 12 बजे से नहीं, बल्कि स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है।
  1. 3नक्षत्र (Nakshatra): सम्पूर्ण 360° भचक्र (राशि चक्र) को 27 समान भागों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक भाग 13 अंश 20 कला (13°20') का होता है जिसे नक्षत्र कहते हैं। जिस नक्षत्र में चंद्रमा भ्रमण कर रहा होता है, वही उस समय का नक्षत्र कहलाता है। नामकरण, जन्म राशि एवं शुभ कार्यों का चुनाव नक्षत्र पर निर्भर करता है।
  1. 4योग (Yoga): सूर्य और चंद्रमा के स्पष्ट भोगांशों (longitude) के योग को जब 13°20' से भाग दिया जाता है, तो योग प्राप्त होता है। कुल 27 योग होते हैं (जैसे प्रीति, आयुष्मान, शोभन, सुकर्मा, सिद्धि आदि शुभ योग तथा विष्कुम्भ, व्याघात, व्यतीपात जैसे त्याज्य योग)।
  1. 5करण (Karana): तिथि के आधे भाग (6 अंश के अंतर) को करण कहते हैं। एक तिथि में दो करण होते हैं, इस प्रकार एक चंद्र मास में कुल 60 करण होते हैं। इनमें 7 चर करण (बव, बालव, कौलव आदि) और 4 स्थिर करण (शकुनि, चतुष्पद आदि) होते हैं। विष्टि करण को ही लोकभाषा में 'भद्रा' कहा जाता है जिसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं।

स्थानीय सूर्योदय एवं दृक सिद्धान्त का महत्व

वैदिक पंचांग की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्थानीय (Local) होना है। पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने के कारण प्रत्येक शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार सूर्योदय और सूर्यास्त का समय भिन्न होता है। उदाहरण के लिए, राजस्थान के पूर्वी छोर (भरतपुर या धौलपुर) में सूर्योदय पश्चिमी छोर (जैसलमेर या बाड़मेर) की तुलना में 15 से 20 मिनट पहले होता है। अतः उसी दिन का चौघड़िया, राहुकाल और अभिजित मुहूर्त शहर बदलते ही बदल जाता है।

अपना पंचांग शुद्ध दृक सिद्धान्त (Drik Ganita) और आधुनिक उच्च-परिशुद्धता खगोलीय एल्गोरिदम के आधार पर राजस्थान के 40+ प्रमुख नगरों का प्रामाणिक पंचांग प्रस्तुत करता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

पंचांग क्या होता है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है जो हर दिन को पांच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — से बताता है और व्रत-त्योहार व शुभ मुहूर्त तय करने में उपयोग होता है।

पंचांग के पांच अंग कौन से हैं?

तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का पड़ाव), योग (सूर्य-चंद्र का संयोग) और करण (आधी तिथि)।

पंचांग में दिन कब शुरू होता है?

पंचांग में दिन सूर्योदय से शुरू होकर अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से नहीं।

भद्रा किसे कहते हैं?

विष्टि करण को भद्रा कहते हैं; इसमें विवाह, गृह प्रवेश, होलिका दहन और राखी जैसे शुभ कार्य टाले जाते हैं।

पंचांग अपने शहर का ही क्यों देखना चाहिए?

क्योंकि सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और मुहूर्त हर शहर में अलग होते हैं; दूसरे शहर का पंचांग गलत समय बता सकता है।

कितने योग और करण होते हैं?

पंचांग में 27 योग और 11 करण होते हैं — 7 चर करण और 4 स्थिर करण।

आज का पंचांग (जयपुर)2026-10-16
तिथिषष्ठी
नक्षत्रमूल
सूर्योदय06:26 AM
अभिजित मुहूर्त11:49 AM - 12:35 PM
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