गोधूलि मुहूर्त (Godhuli Muhurat) सनातन परंपरा और वैदिक मुहूर्त शास्त्र में संध्या काल का अत्यंत पावन और कल्याणकारी समय माना गया है। 'गो' का अर्थ है गाय और 'धूलि' का अर्थ है धूल। प्राचीन काल में जब गौमाताएं दिन भर चरने के बाद सूर्यास्त के समय घर लौटती थीं, तो उनके खुरों से उड़ने वाली पवित्र धूलि से संध्या का आकाश स्वर्णमयी हो उठता था। इसी से इस समय का नाम 'गोधूलि' पड़ा।
खगोलीय गणना और समय का निर्धारण
गोधूलि मुहूर्त का निर्धारण पूर्णतः स्थानीय सूर्यास्त के समय पर निर्भर करता है:
• यह सूर्यास्त से लगभग 12 से 24 मिनट पूर्व प्रारंभ होता है और सूर्यास्त के 12 से 24 मिनट बाद तक रहता है (कुल अवधि लगभग 24 से 48 मिनट)।
• उदाहरण के लिए, यदि जोधपुर में सूर्यास्त शाम 6:40 बजे है, तो गोधूलि मुहूर्त लगभग शाम 6:28 से 7:04 बजे तक माना जाएगा।
गोधूलि मुहूर्त को 'दोषहर्ता' क्यों माना गया है?
मुहूर्त चिंतामणि और ज्योतिषीय ग्रंथों के अनुसार, गोधूलि मुहूर्त को विशेष 'अपवाद मुहूर्त' का दर्जा प्राप्त है। यदि किसी विवाह, गृह प्रवेश या मांगलिक कार्य के लिए कोई निर्दोष लग्न या तिथि नहीं मिल पा रही हो, तो गोधूलि वेला में कार्य संपन्न किया जा सकता है। मान्यता है कि गौमाता के खुरों की धूलि और संध्या के सात्विक वातावरण से अनेक छोटे-मोटे ग्रह दोष स्वतः निष्प्रभावी हो जाते हैं।
क्या करें और क्या न करें?
• प्रशस्त कार्य: विवाह संस्कार, संध्या दीप प्रज्वलन, गृह में लक्ष्मी का आह्वान, तुलसी पूजन, गृह प्रवेश का प्रारंभिक कलश स्वागत।
• सावधानी: इस समय सोना, भोजन करना या कटु वचन बोलना शास्त्रों में वर्जित माना गया है, क्योंकि यह संध्या वंदन और ईश्वर आराधना का संधिकाल है।
अपना पंचांग पर आप प्रतिदिन अपने शहर के सटीक सूर्यास्त अनुसार गोधूलि मुहूर्त की घड़ियाँ देख सकते हैं।



