राहु काल दिन का वह समय है जिसे राजस्थान के अधिकतर हिन्दू घर नए काम, यात्रा या संस्कार शुरू करने के लिए अशुभ मानते हैं। यह आकाश में दिखने वाला ग्रह गोचर नहीं है। यह आपके शहर के उस दिन के सूर्योदय और सूर्यास्त से निकला हुआ घड़ी का अंतराल है।
नियम सीधा है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को आठ बराबर भागों में बाँटें। हर वार राहु काल को इनमें से एक भाग देता है। सोमवार दूसरा भाग, मंगलवार सातवाँ, बुधवार पाँचवाँ, गुरुवार छठा, शुक्रवार चौथा, शनिवार तीसरा, और रविवार आठवाँ। जैसलमेर का सूर्योदय भरतपुर से मिनट भर अलग होता है, इसलिए एक ही कैलेंडर तिथि पर शहर बदलते ही समय बदल जाता है।
अपना पंचांग पर राहु काल ऊपर चुने हुए शहर के शुरू और अंत समय के रूप में लिखा होता है। RPSC या RSMSSB परीक्षा के लिए यात्रा हो तो केंद्र के नज़दीकी शहर देखें, केवल घर का शहर नहीं। यदि परिवार यह मान्यता रखता है, तो घर से निकलना राहु काल के अंदर न रखें।
राहु काल गुलिक काल या यमगंड नहीं है। वे उसी दिन के अन्य आठवें भाग हैं। अभिजित मुहूर्त दोपहर का छोटा शुभ समय माना जाता है — अक्सर दोपहर के आसपास — और पंचांग में अलग से आता है।
पंचांग यह नहीं बताता कि परीक्षा कैसी जाएगी। वह केवल पारंपरिक घड़ियाँ दिखाता है। हॉल टिकट और रिपोर्टिंग समय आधिकारिक RPSC या RSSB साइट पर सुनिश्चित करें, फिर उसी समय के इर्द-गिर्द राहु काल को परिवार की योजना के रूप में देखें।



