पूर्णिमा क्या है? संक्षिप्त उत्तर
पूर्णिमा पूर्ण चंद्रमा का दिन है — शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि, जब चंद्रमा सूर्य से 180 अंश पर होता है और पूरी तरह प्रकाशित दिखता है। यह लगभग हर 29.5 दिन में आती है और व्रत, सत्यनारायण पूजा, पवित्र स्नान, दान और चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए महीने के सबसे शुभ दिनों में गिनी जाती है। अनेक बड़े पर्व पूर्णिमा पर आते हैं — होली, हनुमान जयंती, बुद्ध पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, रक्षाबंधन, शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा। कभी-कभी पूर्णिमा व्रत (जिस दिन चंद्रोदय के समय पूर्णिमा हो) और स्नान-दान की पूर्णिमा (सूर्योदय की तिथि के अनुसार) अलग-अलग दिन पड़ते हैं।
पूर्णिमा का खगोलीय अर्थ
पूर्णिमा पर सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के विपरीत दिशाओं में होते हैं — चंद्रमा का पूरा प्रकाशित भाग पृथ्वी की ओर होता है। चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा को ही हो सकता है। पूर्णिमा पर समुद्र में ज्वार भी सबसे ऊंचा होता है, क्योंकि सूर्य और चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण एक सीध में काम करता है। उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में महीना पूर्णिमा पर समाप्त होता है, और महीनों के नाम पूर्णिमा के नक्षत्र पर रखे गए हैं — जैसे चित्रा नक्षत्र की पूर्णिमा वाला महीना चैत्र। पढ़ें — नक्षत्र क्या होता है?
पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व
पूर्ण चंद्रमा पूर्णता, शांति और प्रकाश का प्रतीक है। ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक है, और पूर्णिमा को वह सबसे बलवान होता है — इसलिए इस दिन की प्रार्थना, ध्यान और जप विशेष फलदायी माने जाते हैं। पूर्णिमा भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्र देव को समर्पित है। कई संत और महापुरुष — जैसे भगवान बुद्ध, गुरु नानक देव और हनुमान जी — की जयंती भी पूर्णिमा से जुड़ी है।
2027 की पूर्णिमा तिथियां (नई दिल्ली)
| तारीख | वार | पूर्णिमा | पर्व |
|---|---|---|---|
| 22 जनवरी | शुक्रवार | पौष पूर्णिमा | शाकंभरी पूर्णिमा, माघ स्नान आरंभ |
| 20 फरवरी | शनिवार | माघ पूर्णिमा | माघ पूर्णिमा स्नान |
| 22 मार्च | सोमवार | फाल्गुन पूर्णिमा | होली (होलिका दहन 21 मार्च) |
| 20 अप्रैल | मंगलवार | चैत्र पूर्णिमा | हनुमान जयंती |
| 20 मई | गुरुवार | वैशाख पूर्णिमा | बुद्ध पूर्णिमा |
| 18 जून | शुक्रवार | ज्येष्ठ पूर्णिमा | वट पूर्णिमा |
| 18 जुलाई | रविवार | आषाढ़ पूर्णिमा | गुरु पूर्णिमा |
| 16–17 अगस्त | सोम–मंगल | श्रावण पूर्णिमा | रक्षाबंधन 17 अगस्त (व्रत 16 अगस्त) |
| 15 सितंबर | बुधवार | भाद्रपद पूर्णिमा | पितृ पक्ष 16 सितंबर से |
| 14–15 अक्टूबर | गुरु–शुक्र | आश्विन पूर्णिमा | शरद पूर्णिमा 14 अक्टूबर |
| 13–14 नवंबर | शनि–रवि | कार्तिक पूर्णिमा | कार्तिक पूर्णिमा 14 नवंबर (व्रत 13 नवंबर), देव दीपावली |
| 13 दिसंबर | सोमवार | मार्गशीर्ष पूर्णिमा | दत्तात्रेय जयंती |
2026 की पूर्णिमाओं के लिए पढ़ें — पूर्णिमा 2026: सभी तिथियां।
पूर्णिमा व्रत और स्नान-दान का दिन अलग क्यों?
पूर्णिमा व्रत में शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है, इसलिए व्रत उस दिन रखा जाता है जब चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि हो। स्नान और दान सुबह किए जाते हैं, इसलिए वे उस दिन होते हैं जब सूर्योदय के समय पूर्णिमा हो। जब पूर्णिमा तिथि एक दिन दोपहर बाद शुरू होकर अगले दिन दोपहर तक रहती है, तो व्रत पहले दिन और स्नान-दान दूसरे दिन होता है — जैसे 2027 में श्रावण पूर्णिमा (व्रत 16 अगस्त, रक्षाबंधन 17 अगस्त) और कार्तिक पूर्णिमा (व्रत 13 नवंबर, स्नान 14 नवंबर)। पढ़ें — सूर्योदय के अनुसार व्रत की तारीख कैसे तय होती है?
पूर्णिमा व्रत की विधि
- 1स्नान: सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें और सूर्य को अर्घ्य दें।
- 2संकल्प: हाथ में जल लेकर पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें।
- 3व्रत: फलाहार या एक समय भोजन का व्रत रखें।
- 4पूजा: भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें — पीले फूल, तुलसी दल, पंचामृत और ऋतुफल अर्पित करें।
- 5सत्यनारायण कथा: अनेक परिवार पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा कराते हैं — केले के पत्तों का मंडप, पंजीरी और पंचामृत का प्रसाद।
- 6दान: अन्न, वस्त्र, मिठाई और दक्षिणा का दान करें।
- 7चंद्र अर्घ्य: चंद्रोदय के बाद दूध मिले जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें — 'ॐ सोमाय नमः'।
- 8पारण: अर्घ्य के बाद व्रत खोलें।
प्रमुख पूर्णिमाएं और उनका महत्व
- •माघ पूर्णिमा: प्रयागराज में कल्पवास का समापन और संगम स्नान।
- •फाल्गुन पूर्णिमा: होलिका दहन और रंगों की होली। पढ़ें — होली 2027 कब है?
- •चैत्र पूर्णिमा: हनुमान जयंती। पढ़ें — हनुमान जयंती 2027
- •वैशाख पूर्णिमा: भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान और निर्वाण।
- •आषाढ़ पूर्णिमा: गुरु पूर्णिमा — महर्षि वेदव्यास की जयंती और गुरु पूजन।
- •श्रावण पूर्णिमा: रक्षाबंधन।
- •आश्विन पूर्णिमा: शरद पूर्णिमा — चांदनी में खीर रखने और कोजागरी लक्ष्मी पूजा की परंपरा।
- •कार्तिक पूर्णिमा: देव दीपावली, गुरु नानक जयंती, पुष्कर स्नान। पढ़ें — कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान क्यों?
पूर्णिमा पर क्या न करें?
- •मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से बचें।
- •झगड़ा और कटु वचन से दूर रहें।
- •चंद्रोदय से पहले व्रत न खोलें (यदि चंद्र अर्घ्य का व्रत है)।
- •ग्रहण वाली पूर्णिमा पर सूतक के नियमों का पालन करें।
पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा
उत्तर भारत में पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा का विशेष प्रचलन है। इसकी सरल विधि:
- 1शाम को चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु (सत्यनारायण) का चित्र और कलश स्थापित करें।
- 2केले के पत्तों से मंडप सजाएं; पंचामृत, तुलसी, पीले फूल और फल अर्पित करें।
- 3प्रसाद: सवा के माप में आटे या सूजी का पंजीरी/शीरा, केला और पंचामृत।
- 4स्कंद पुराण के रेवा खंड पर आधारित सत्यनारायण कथा के पांच अध्याय पढ़ें या सुनें।
- 5आरती करके सबको प्रसाद बांटें — मान्यता है कि कथा का प्रसाद अवश्य ग्रहण करना चाहिए।
चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?
पूर्णिमा व्रत चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूरा किया जाता है:
- •चांदी या तांबे के लोटे में जल, कच्चा दूध, चावल और सफेद फूल डालें।
- •चंद्रमा की ओर मुख करके धीरे-धीरे अर्घ्य दें और "ॐ सों सोमाय नमः" मंत्र बोलें।
- •फिर दीपक दिखाकर प्रणाम करें और व्रत खोलें।
पूर्णिमा और प्रकृति
पूर्णिमा पर सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के विपरीत दिशा में होते हैं, जिससे समुद्र में ऊंचे ज्वार (स्प्रिंग टाइड) आते हैं — यह वैज्ञानिक तथ्य है। इसी कारण कई तटीय क्षेत्रों में पूर्णिमा के आसपास मछुआरे और नाविक विशेष सावधानी रखते हैं।
सारांश
पूर्णिमा पूर्ण चंद्रमा की तिथि है — व्रत, सत्यनारायण पूजा, दान और चंद्र अर्घ्य के लिए श्रेष्ठ — और अनेक पर्वों की तिथि भी। 2027 की पूरी सूची ऊपर देखें, और अमावस्या के बारे में पढ़ें — अमावस्या क्या होती है?



