हनुमान जयंती 2027: संक्षिप्त उत्तर
हनुमान जयंती 2027 मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 को है, जो चैत्र पूर्णिमा का दिन है। पूर्णिमा तिथि 20 अप्रैल सुबह 4:51 से 21 अप्रैल सुबह 3:56 तक रहेगी, इसलिए 20 अप्रैल का पूरा दिन — सूर्योदय से — पूर्णिमा में है। यह दिन मंगलवार को पड़ रहा है, जो स्वयं हनुमान जी का दिन है, इसलिए 2027 की हनुमान जयंती विशेष रूप से शुभ और फलदायी मानी जा रही है।
| विवरण | 2027 |
|---|---|
| हनुमान जयंती (उत्तर भारत) | मंगलवार, 20 अप्रैल |
| पूर्णिमा आरंभ | 20 अप्रैल सुबह 4:51 |
| पूर्णिमा समाप्त | 21 अप्रैल सुबह 3:56 |
| तेलुगु हनुमान जयंती | सोमवार, 31 मई |
| कन्नड़ हनुमान जयंती (हनुमद् व्रत) | शनिवार, 11 दिसंबर |
| तमिल हनुमत् जयंती | सोमवार, 27 दिसंबर |
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हनुमान जयंती या हनुमान जन्मोत्सव?
कई विद्वान कहते हैं कि हनुमान जी चिरंजीवी (अमर) हैं, इसलिए "जयंती" (जो प्रायः दिवंगत महापुरुषों के लिए कहा जाता है) के बजाय "हनुमान जन्मोत्सव" कहना अधिक उचित है। हालांकि शास्त्रों में "जयंती" शब्द का अर्थ "जन्मदिवस का उत्सव" भी है, इसलिए दोनों नाम प्रचलित हैं। उत्तर भारत में आजकल "हनुमान जन्मोत्सव" शब्द तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है।
अलग-अलग क्षेत्रों में हनुमान जयंती
हनुमान जी के जन्म की तिथि को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं:
- •उत्तर और मध्य भारत (राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, दिल्ली): चैत्र पूर्णिमा — 2027 में 20 अप्रैल।
- •आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: वैशाख कृष्ण दशमी को, 41 दिन की हनुमान दीक्षा के समापन पर — 31 मई 2027।
- •कर्नाटक: मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी (हनुमद् व्रतम्) — 11 दिसंबर 2027।
- •तमिलनाडु और केरल: मार्गऴि माह की अमावस्या, मूल नक्षत्र में — 27 दिसंबर 2027।
- •कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी: कुछ परंपराओं (विशेषकर वाल्मीकि रामायण के कुछ टीकाकारों) के अनुसार हनुमान जी का जन्म दिवाली से एक दिन पहले हुआ था — 2027 में यह 27-28 अक्टूबर के आसपास है, जब हनुमान पूजा (काली चौदस) भी होती है।
हनुमान जयंती का महत्व
हनुमान जी भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने माता अंजना और वानरराज केसरी के पुत्र के रूप में जन्म लिया; पवनदेव की कृपा से उन्हें "पवनपुत्र" कहा जाता है। वे भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त, बल-बुद्धि-विद्या के दाता और संकटमोचन हैं। हनुमान जयंती पर पूजा करने से भय, रोग, शत्रु बाधा और ग्रह दोष — विशेषकर शनि और मंगल के कष्ट — शांत होने की मान्यता है। 2027 में यह पर्व मंगलवार को होने से मंगल दोष शांति के लिए भी विशेष माना जा रहा है।
पूजा सामग्री
- •हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र (श्रीराम दरबार के साथ उत्तम)
- •सिंदूर और चमेली का तेल (चोले के लिए)
- •लाल फूल, लाल वस्त्र, जनेऊ
- •बूंदी के लड्डू, गुड़-चना, केला
- •तुलसी दल (श्रीराम को अर्पित करके)
- •दीपक (घी या चमेली के तेल का), धूप
- •हनुमान चालीसा, सुंदरकांड
हनुमान जयंती पूजा विधि
- 1ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करके लाल या केसरिया वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- 2पूजा स्थल पर श्रीराम और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें — पहले श्रीराम की पूजा करें, क्योंकि हनुमान जी राम पूजा से ही प्रसन्न होते हैं।
- 3हनुमान जी को चोला चढ़ाएं — चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर प्रतिमा पर लेपें (यह परंपरा मंदिरों और पुरुष भक्तों में अधिक प्रचलित है)।
- 4लाल फूल, जनेऊ और लाल वस्त्र अर्पित करें।
- 5बूंदी के लड्डू, गुड़-चना और केले का भोग लगाएं।
- 6हनुमान चालीसा का 7, 11 या 108 बार पाठ करें; समय हो तो सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करें।
- 7घी या चमेली के तेल का दीपक जलाकर आरती करें और प्रसाद बांटें।
हनुमान जी के मंत्र
- •बीज मंत्र: "ॐ हं हनुमते नमः"
- •ध्यान मंत्र: "मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥"
- •संकट निवारण: "ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा"
व्रत के नियम
- •ब्रह्मचर्य का पालन करें; मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन से परहेज़।
- •दिन भर फलाहार या एक समय सात्विक भोजन।
- •किसी का अपमान या क्रोध न करें।
- •महिलाएं परंपरा के अनुसार हनुमान जी को चोला चढ़ाने और प्रतिमा का स्पर्श करने के बजाय दीपदान, पाठ और भोग से पूजा करती हैं।
राजस्थान के प्रसिद्ध हनुमान धाम
राजस्थान में मेहंदीपुर बालाजी (दौसा), सालासर बालाजी (चूरू) और जयपुर के खोले के हनुमान जी व चांदपोल हनुमान मंदिर में हनुमान जयंती पर भव्य मेले, सवामणी और भंडारे होते हैं। सालासर में इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
हनुमान जी के जन्म की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार अप्सरा पुंजिकस्थला श्राप के कारण वानर रूप में अंजना के नाम से जन्मीं और उनका विवाह वानरराज केसरी से हुआ। अंजना ने पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की। एक कथा के अनुसार राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ के प्रसाद (खीर) का एक अंश पवनदेव ने अंजना तक पहुंचाया, जिससे हनुमान जी का जन्म हुआ — इसीलिए वे पवनपुत्र और अंजनीपुत्र कहलाए।
बचपन में हनुमान जी ने उगते सूर्य को लाल फल समझकर निगलने के लिए छलांग लगा दी। इंद्र ने उन्हें रोकने के लिए वज्र से प्रहार किया, जो उनकी ठोड़ी (हनु) पर लगा — तभी से उनका नाम "हनुमान" पड़ा। इसके बाद सभी देवताओं ने उन्हें अनेक वरदान दिए, जिससे वे अजेय और चिरंजीवी बने।
हनुमान जी के 12 नाम
परंपरा में हनुमान जी के बारह नामों का सुबह-शाम पाठ करने से भय और संकट दूर होने की मान्यता है:
- 1हनुमान
- 2अंजनीसुत
- 3वायुपुत्र
- 4महाबल
- 5रामेष्ट
- 6फाल्गुनसखा
- 7पिंगाक्ष
- 8अमितविक्रम
- 9उदधिक्रमण
- 10सीताशोकविनाशन
- 11लक्ष्मणप्राणदाता
- 12दशग्रीवदर्पहा
हनुमान चालीसा पाठ के नियम
- •स्नान करके, साफ कपड़े पहनकर पाठ करें।
- •पाठ से पहले श्रीराम का स्मरण करें — "श्री राम जय राम जय जय राम"।
- •लाल आसन पर बैठकर, घी या चमेली के तेल का दीपक जलाकर पाठ करें।
- •पाठ के बीच में उठें या बात न करें।
- •हनुमान जयंती पर 7, 11, 21 या 108 पाठ की परंपरा है; समय कम हो तो एक पाठ भी पूरी श्रद्धा से करें।
- •पाठ के बाद गुड़-चने का प्रसाद बांटें।
सारांश
हनुमान जयंती 2027 मंगलवार, 20 अप्रैल को है (पूर्णिमा 20 अप्रैल सुबह 4:51 से)। सिंदूर, लाल फूल और बूंदी से पूजा करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे पहले राम नवमी — राम नवमी 2027 कब है?; पूर्णिमा के बारे में — पूर्णिमा क्या होती है?
जय बजरंगबली!



