अमावस्या क्या है? संक्षिप्त उत्तर
अमावस्या नए चंद्रमा का दिन है — कृष्ण पक्ष की अंतिम और महीने की तीसवीं तिथि, जब सूर्य और चंद्रमा एक ही अंश पर होते हैं और चंद्रमा दिखाई नहीं देता। यह लगभग हर 29.5 दिन में आती है। अमावस्या पितरों को समर्पित है: इस दिन तर्पण, श्राद्ध, दान, पवित्र स्नान और पीपल के नीचे दीपक जलाने की परंपरा है, जबकि विवाह, गृह प्रवेश और बड़ी खरीदारी जैसे नए आरंभ परंपरागत रूप से टाले जाते हैं। विशेष अमावस्याओं में सोमवती (सोमवार), शनि (शनिवार), मौनी (माघ), सर्वपितृ (पितृ पक्ष का अंत) और दिवाली (कार्तिक) अमावस्या प्रमुख हैं।
अमावस्या का खगोलीय अर्थ
अमा का अर्थ है "साथ" और वस्या का अर्थ है "रहना" — यानी जिस दिन सूर्य और चंद्रमा साथ रहते हैं। इस दिन चंद्रमा का प्रकाशित भाग पूरी तरह सूर्य की ओर होता है और पृथ्वी की ओर वाला भाग अंधकारमय, इसलिए चांद दिखाई नहीं देता। सूर्य ग्रहण केवल अमावस्या को ही हो सकता है — जैसे 2027 में 6 फरवरी (वलयाकार) और 2 अगस्त (पूर्ण सूर्य ग्रहण) की अमावस्या पर। अमावस्या के बाद शुक्ल प्रतिपदा से चंद्रमा फिर बढ़ना शुरू होता है। अमांत पंचांग (गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत) में महीना अमावस्या पर ही समाप्त होता है। पढ़ें — तिथि क्या होती है?
अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार अमावस्या पितरों की तिथि है। मान्यता है कि इस दिन पितर अपने वंशजों से तर्पण और श्राद्ध की अपेक्षा करते हैं, और संतुष्ट होकर आशीर्वाद देते हैं। ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक है; अमावस्या को चंद्रमा के क्षीण होने से मन अस्थिर हो सकता है, इसलिए इस दिन साधना, मौन और संयम का विशेष महत्व है। तंत्र साधना में भी अमावस्या की रात को महत्वपूर्ण माना गया है — दिवाली की काली पूजा इसका उदाहरण है।
2027 की अमावस्या तिथियां (नई दिल्ली)
| तारीख | वार | अमावस्या |
|---|---|---|
| 7 जनवरी | गुरुवार | पौष अमावस्या |
| 6 फरवरी | शनिवार | माघ (मौनी) अमावस्या — शनि अमावस्या, वलयाकार सूर्य ग्रहण |
| 7–8 मार्च | रवि–सोम | फाल्गुन अमावस्या — 8 मार्च को सोमवती अमावस्या |
| 6 अप्रैल | मंगलवार | चैत्र अमावस्या (भौमवती) |
| 6 मई | गुरुवार | वैशाख अमावस्या |
| 4 जून | शुक्रवार | ज्येष्ठ अमावस्या — वट सावित्री व्रत, शनि जयंती |
| 3–4 जुलाई | शनि–रवि | आषाढ़ अमावस्या |
| 2 अगस्त | सोमवार | श्रावण अमावस्या — सोमवती अमावस्या, पूर्ण सूर्य ग्रहण |
| 31 अगस्त | मंगलवार | भाद्रपद अमावस्या (भौमवती) |
| 29–30 सितंबर | बुध–गुरु | आश्विन अमावस्या — 29 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या |
| 29 अक्टूबर | शुक्रवार | कार्तिक अमावस्या — दिवाली |
| 27–28 नवंबर | शनि–रवि | मार्गशीर्ष अमावस्या |
| 27 दिसंबर | सोमवार | पौष अमावस्या — सोमवती अमावस्या |
जहां दो तारीखें दी गई हैं, वहां पहली दर्श अमावस्या (शाम के अनुष्ठानों के लिए) और दूसरी स्नान-दान की अमावस्या है। ग्रहण की स्थानीय दृश्यता अलग से अवश्य जांचें।
प्रमुख अमावस्याएं और उनका महत्व
| अमावस्या | विशेषता |
|---|---|
| सोमवती अमावस्या | सोमवार को; सुहागिनें पति की दीर्घायु के लिए पीपल की 108 परिक्रमा करती हैं |
| शनि (शनैश्चरी) अमावस्या | शनिवार को; शनि दोष, साढ़े साती और ढैय्या से राहत के उपाय |
| भौमवती अमावस्या | मंगलवार को; मंगल दोष और ऋण मुक्ति के लिए हनुमान पूजा |
| मौनी अमावस्या | माघ मास में; मौन व्रत और प्रयागराज संगम स्नान |
| सर्वपितृ अमावस्या | पितृ पक्ष का अंतिम दिन; सभी पितरों का श्राद्ध |
| दिवाली अमावस्या | कार्तिक मास में; लक्ष्मी पूजा और काली पूजा |
| हरियाली अमावस्या | श्रावण में; वृक्षारोपण और प्रकृति पूजा |
अमावस्या के दिन क्या करें?
- 1पितृ तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल, काले तिल और कुश से पितरों को तर्पण करें।
- 2पवित्र स्नान: नदी में स्नान करें, या घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- 3दान: अन्न, वस्त्र, काले तिल, गुड़ और कंबल का दान करें।
- 4जीव सेवा: गाय, कौवे, कुत्ते और चींटियों को भोजन दें — कौवे को पितरों का प्रतीक माना जाता है।
- 5पीपल पूजा: शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।
- 6देव आराधना: भगवान शिव, हनुमान जी या शनि देव की पूजा करें और मंत्र जाप करें।
- 7ब्राह्मण भोजन: संभव हो तो किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन कराएं।
अमावस्या के दिन क्या न करें?
- •विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार और बड़ी खरीदारी आरंभ न करें।
- •मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें।
- •झगड़ा न करें और बड़ों का अपमान न करें।
- •परंपरा के अनुसार इस दिन बाल और नाखून नहीं काटे जाते।
- •लोक मान्यता में रात को सुनसान स्थानों और श्मशान के पास जाने से बचने की सलाह दी जाती है।
- •पितरों के लिए रखा गया भोजन या जल अनादर से न फेंकें।
अमावस्या पर सरल उपाय (पारंपरिक मान्यताएं)
- •पितृ दोष शांति: पीपल के नीचे दीपक जलाकर "ॐ पितृभ्यः नमः" का जाप करें।
- •शनि पीड़ा: शनि अमावस्या पर शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाएं और काले तिल दान करें।
- •मानसिक शांति: शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करके "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें।
- •ऋण मुक्ति: भौमवती अमावस्या पर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
कुंडली में पितृ दोष या शनि की स्थिति जानने के लिए कुंडली देखें।
अमावस्या और पूर्णिमा में अंतर
अमावस्या पितरों, संयम और अंतर्मुखी साधना की तिथि है, जबकि पूर्णिमा देवताओं, उत्सव और पूर्णता की। दोनों की तुलना के लिए पढ़ें — अमावस्या और पूर्णिमा और पूर्णिमा क्या होती है?
अमावस्या पर पितृ तर्पण की सरल विधि
- 1सुबह स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- 2एक लोटे में जल, काले तिल, थोड़ा दूध और कुश (या सफेद फूल) डालें।
- 3दाहिने हाथ के अंगूठे और तर्जनी के बीच से (पितृ तीर्थ से) जल धीरे-धीरे गिराते हुए अपने पितरों का नाम लेकर तर्पण करें — नाम ज्ञात न हों तो "समस्त पितृभ्यो नमः" कहें।
- 4पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं और शाम को दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- 5गाय, कुत्ते, कौए और ज़रूरतमंद व्यक्ति को भोजन दें।
अमावस्या पर नए शुभ कार्य क्यों नहीं?
अमावस्या को चंद्रमा दिखाई नहीं देता, और ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक है — इसलिए इस दिन को "क्षीण चंद्र" का दिन मानकर विवाह, गृह प्रवेश और नए व्यवसाय जैसे शुभ आरंभ टाले जाते हैं। यह दिन पितरों, साधना और आत्मचिंतन का माना गया है। अपवाद भी हैं — दिवाली (कार्तिक अमावस्या) पर लक्ष्मी पूजा और नए बही-खाते की शुरुआत की जाती है, और हरियाली अमावस्या पर पौधे लगाना शुभ माना जाता है।
सारांश
अमावस्या नए चंद्रमा की तिथि है, जो पितरों को समर्पित है। इस दिन तर्पण करें, दान दें और दीपक जलाएं; नए कार्यों की शुरुआत से बचें। सोमवती, शनि, मौनी और सर्वपितृ अमावस्या विशेष महत्व रखती हैं। हर अमावस्या की तिथि और समय पंचांग में देखें।



