होली 2027: संक्षिप्त उत्तर
होलिका दहन 2027 रविवार, 21 मार्च को और रंगों की होली (धुलेंडी) सोमवार, 22 मार्च 2027 को है। होलिका दहन का मुहूर्त नई दिल्ली में शाम 6:33 से 8:55 और जयपुर में शाम 6:38 से 9:00 तक है (मुंबई में 6:50 से 9:12)। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 21 मार्च शाम 6:21 से 22 मार्च शाम 4:13 तक रहेगी। भद्रा मध्यरात्रि के बाद तक रहेगी — भद्रा पूंछ 22 मार्च रात 1:26 से 2:31 और भद्रा मुख रात 2:31 से 4:20; भद्रा मुख में होलिका दहन कभी नहीं किया जाता। कुछ उत्तर भारतीय पंडित भद्रा समाप्ति के बाद भोर का वैकल्पिक मुहूर्त — 22 मार्च सुबह 5:14 से 6:23 (दिल्ली) — सुझाते हैं।
| विवरण | दिल्ली | जयपुर |
|---|---|---|
| होलिका दहन | रविवार, 21 मार्च | रविवार, 21 मार्च |
| मुख्य मुहूर्त | शाम 6:33 – 8:55 | शाम 6:38 – 9:00 |
| वैकल्पिक (भद्रा के बाद) | 22 मार्च सुबह 5:14 – 6:23 | 22 मार्च सुबह 5:14 – 6:29 |
| भद्रा पूंछ | 22 मार्च रात 1:26 – 2:31 | वही |
| भद्रा मुख (वर्जित) | 22 मार्च रात 2:31 – 4:20 | वही |
| पूर्णिमा तिथि | 21 मार्च शाम 6:21 – 22 मार्च शाम 4:13 | वही |
| रंगों की होली | सोमवार, 22 मार्च | सोमवार, 22 मार्च |
होलिका दहन का शास्त्रीय नियम
होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा को प्रदोष काल में, भद्रा रहित समय में किया जाता है। भद्रा (विष्टि करण) को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। लेकिन जब भद्रा मध्यरात्रि के बाद तक रहे, तब शास्त्र प्रदोष काल में होलिका दहन की अनुमति देते हैं — केवल भद्रा मुख सर्वथा वर्जित है। इसी कारण 2027 का मुख्य मुहूर्त प्रदोष काल (शाम 6:33 से 8:55, दिल्ली) में दिया गया है। जो परिवार भद्रा को पूरी तरह टालना चाहते हैं, वे भद्रा समाप्त होने के बाद भोर में (5:14 से 6:23) दहन कर सकते हैं। अपने क्षेत्र की परंपरा और स्थानीय पुरोहित की सलाह मानें। भद्रा के बारे में पढ़ें — भद्रा काल क्या होता है?
होलिका दहन की पूजा सामग्री
- •जल से भरा लोटा
- •रोली, अक्षत, फूल, माला
- •कच्चा सूत (कलावा)
- •साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुड़
- •गुलाल
- •नारियल
- •नई फसल की गेहूं/जौ की बालियां (होला)
- •गोबर के उपले (बड़कुल्ले) की माला
होलिका दहन की पूजा विधि
- 1स्नान करके होलिका स्थल पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
- 2होलिका पर जल, रोली, अक्षत, फूल, कच्ची हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल और नारियल अर्पित करें।
- 3होलिका की परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत तीन या सात बार लपेटें।
- 4मुहूर्त में होलिका प्रज्वलित करें।
- 5नई फसल की बालियों को आग में भूनें और प्रसाद के रूप में बांटें।
- 6भगवान नृसिंह का स्मरण करें और भक्त प्रह्लाद की कथा सुनें।
- 7होलिका की राख घर लाकर अगले दिन माथे पर लगाने की परंपरा है।
होलिका दहन की कथा
असुरराज हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। पिता ने उसे विष्णु भक्ति छोड़ने के लिए अनेक यातनाएं दीं, पर प्रह्लाद अडिग रहा। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को वरदान था कि अग्नि उसे नहीं जला सकती। वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से होलिका जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित बच गया। बाद में भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध किया। होलिका दहन अहंकार पर भक्ति और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
होली कैसे मनाएं?
- •22 मार्च की सुबह एक-दूसरे को गुलाल लगाकर, गले मिलकर होली खेलें।
- •प्राकृतिक, हर्बल रंगों का उपयोग करें; रासायनिक रंगों से त्वचा और आंखों को नुकसान हो सकता है।
- •पानी की बर्बादी से बचें; सूखी होली एक अच्छा विकल्प है।
- •बुजुर्गों, बच्चों और पशुओं पर जबरदस्ती रंग न डालें।
- •गुझिया, मालपुआ, दही बड़े और ठंडाई होली के पारंपरिक व्यंजन हैं।
राजस्थान में होली
राजस्थान में होली के कई अनोखे रंग हैं — जयपुर में होली के अवसर पर पारंपरिक आयोजन, ब्रज से सटे भरतपुर-करौली क्षेत्र की ब्रज होली, बाड़मेर-जैसलमेर की गेर (डांडिया जैसा नृत्य), और शेखावाटी का चंग-ढप वाला फाग। होली के आठ दिन पहले से होलाष्टक माना जाता है, जिसमें शुभ कार्य टाले जाते हैं।
होलाष्टक 2027
होली से पहले फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक के आठ दिनों को होलाष्टक कहते हैं — 2027 में लगभग 14 से 21 मार्च तक। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। सटीक तिथि पंचांग में देखें।
होली और नई फसल
होलिका दहन मूल रूप से नई फसल का उत्सव भी है। फाल्गुन तक गेहूं और जौ की बालियां पकने लगती हैं, और इन्हें होलिका की अग्नि में भूनकर ("होला") सबसे पहले देवताओं को अर्पित किया जाता है — इसे प्राचीन ग्रंथों में "नवान्नेष्टि यज्ञ" से जोड़ा जाता है। इसीलिए किसान परिवारों में होलिका की आग में भुनी बालियों को प्रसाद मानकर घर लाया जाता है, और इसके बाद ही नई फसल का अन्न खाया जाता है।
होलिका दहन से जुड़ी मान्यताएं
- •होलिका की परिक्रमा के समय परिवार के सदस्य अपनी मनोकामना मन में कहते हैं।
- •नवविवाहिता को अपने ससुराल की पहली होली की अग्नि न देखने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में है।
- •होलिका की राख को अगले दिन माथे पर लगाना और घर के कोनों में छिड़कना शुभ माना जाता है।
- •होलिका दहन के समय नारियल और गेहूं की बालियां अर्पित की जाती हैं।
होली खेलते समय सावधानियां
- 1होली खेलने से पहले चेहरे, बालों और हाथों पर नारियल या सरसों का तेल लगाएं, ताकि रंग आसानी से छूटे।
- 2आंखों में रंग जाए तो साफ, ठंडे पानी से धोएं; रगड़ें नहीं। जलन बनी रहे तो डॉक्टर को दिखाएं।
- 3पूरी बाजू के पुराने कपड़े पहनें।
- 4भांग या नशे से बचें, खासकर वाहन चलाते समय।
- 5पालतू और आवारा पशुओं पर रंग न डालें — रंग उनके लिए ज़हरीला हो सकता है।
- 6रंग छुड़ाने के लिए बेसन, दही और हल्दी का उबटन कठोर साबुन से बेहतर है।
ब्रज की होली
मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव की होली विश्व प्रसिद्ध है — बरसाना की लट्ठमार होली, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की फूलों की होली और मथुरा की लड्डू होली होली से कई दिन पहले शुरू हो जाती हैं। भरतपुर और करौली जैसे राजस्थान के ब्रज-सीमावर्ती इलाकों में भी यही रंग दिखता है। सटीक तारीखें स्थानीय मंदिर प्रशासन घोषित करता है।
सारांश
होलिका दहन 2027: 21 मार्च, दिल्ली में शाम 6:33–8:55, जयपुर में 6:38–9:00 — भद्रा मुख (रात 2:31–4:20) में कभी नहीं। रंगों की होली 22 मार्च को खेलें। 2027 के सभी त्योहार — हिंदू कैलेंडर 2027।
होली की हार्दिक शुभकामनाएं!



