करवा चौथ पूजा विधि: संक्षिप्त उत्तर
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को करवा चौथ व्रत का क्रम इस प्रकार है: सूर्योदय से पहले सरगी → संकल्प → दिन भर व्रत → सोलह श्रृंगार → शाम को करवे के साथ गौरी (पार्वती), शिव, गणेश और कार्तिकेय की पूजा (दिल्ली में मुहूर्त शाम 5:38 से 6:56, जयपुर में 5:46 से 7:03) → करवा फेरना और कथा → चंद्रोदय के बाद अर्घ्य (दिल्ली रात 8:17, जयपुर रात 8:28) → छलनी से चांद और पति के दर्शन → पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलना।
| चरण | समय (दिल्ली) |
|---|---|
| सरगी | सुबह 6:31 (सूर्योदय) से पहले |
| व्रत आरंभ | सुबह 6:31 |
| पूजा और कथा | शाम 5:38 – 6:56 |
| चंद्रोदय और अर्घ्य | रात 8:17 के बाद |
| चतुर्थी समाप्त | रात 10:09 |
अन्य शहरों का समय — करवा चौथ 2026 चंद्रोदय समय।
चरण 1: सरगी (सूर्योदय से पहले)
सास द्वारा दी गई सरगी सूर्योदय (दिल्ली में लगभग 6:31) से पहले ग्रहण करें — इसमें सेवइयां या फेनी, मेवे, फल, मिठाई और जल होता है। सास के चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें। जिनकी सास न हों या दूर रहती हों, वे स्वयं या परिवार की किसी बड़ी महिला से सरगी लेकर व्रत आरंभ कर सकती हैं। सरगी में क्या खाएं, यह पढ़ें — करवा चौथ व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं।
चरण 2: संकल्प
स्नान के बाद पूजा स्थान के सामने बैठकर हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प लें:
अर्थ: मैं सुख, अखंड सौभाग्य, संतान और स्थिर समृद्धि की प्राप्ति के लिए करक चतुर्थी (करवा चौथ) का व्रत करूंगी। संस्कृत न आए तो सरल शब्दों में बोलें — "मैं अपने पति की लंबी आयु और परिवार के सुख के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हूं।" संकल्प का जल भूमि पर छोड़ दें।
चरण 3: दिन में क्या करें
- •दिन भर मन को शांत रखें, भजन सुनें या मंत्र जाप करें।
- •दोपहर में मेहंदी लगाना और सोलह श्रृंगार की तैयारी करना परंपरा है।
- •दिन में सोने, झगड़ा करने, किसी की निंदा करने और कैंची-सुई जैसी नुकीली वस्तुओं के उपयोग से लोक मान्यता में परहेज़ किया जाता है।
- •स्वास्थ्य कारणों से आवश्यकता हो तो जल या फल ले सकती हैं — यह व्रत भाव का है, कष्ट का नहीं।
चरण 4: पूजा स्थान की तैयारी
- •दीवार पर या चौकी पर गौरी-शिव, गणेश, कार्तिकेय और चंद्रमा का चित्र बनाएं, या करवा चौथ का छपा हुआ चित्र (करवा चौथ का कैलेंडर) लगाएं।
- •पीली मिट्टी से गौरी बनाएं या प्रतिमा रखें।
- •करवे में जल भरें (कई परिवार एक करवा जल से और एक गेहूं या मिठाई से भरते हैं) और ढक्कन पर मिठाई रखें।
- •करवे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और कलावा बांधें।
- •पूजा की थाली तैयार रखें: रोली, अक्षत, कलावा, दीपक, मिठाई, सिंदूर, फूल, छलनी, अर्घ्य का लोटा।
पूरी सूची देखें — करवा चौथ व्रत की पूजा सामग्री लिस्ट 2026।
चरण 5: शाम की पूजा (मुहूर्त में)
1. सोलह श्रृंगार करें; अनेक महिलाएं लाल वस्त्र या विवाह का जोड़ा पहनती हैं। राजस्थान में लहरिया और चुनरी पहनने की परंपरा है।
2. घी का दीपक जलाएं और सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें।
3. गौरी, शिव और कार्तिकेय की रोली, अक्षत, फूल, सिंदूर और नैवेद्य से पूजा करें। मंत्र:
4. मां गौरी को सुहाग की सामग्री — सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, महावर, मेहंदी — अर्पित करें।
5. करवे पर तिलक लगाकर उसकी भी पूजा करें।
मां गौरी से प्रार्थना:
अर्थ: हे शिवप्रिया शर्वाणी, भक्ति से युक्त नारियों को सौभाग्य और शुभ संतान प्रदान करें।
चरण 6: करवा फेरना और कथा
महिलाएं समूह में गोल घेरा बनाकर बैठती हैं और पारंपरिक गीत गाते हुए अपनी थालियां एक-दूसरे को सात बार घुमाती हैं — इसे "करवा फेरना" या "थाली बटाना" कहते हैं। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है — हाथ में अक्षत या गेहूं के दाने लेकर। कथा के बाद करवा और मिठाई (बायना) सास या किसी बड़ी सुहागिन को देकर उनके चरण स्पर्श किए जाते हैं।
चरण 7: चंद्रमा को अर्घ्य
चंद्रोदय के बाद खुली छत पर जाकर करवे या लोटे से चंद्रमा को जल (जिसमें अक्षत, रोली और थोड़ा दूध मिला हो) अर्पित करें और यह मंत्र बोलें:
अर्थ: हे आकाश रूपी सागर के माणिक्य, दक्ष-कन्याओं के स्वामी चंद्रमा, गणेश के प्रतिरूप — मेरे द्वारा दिया गया अर्घ्य स्वीकार करें।
छलनी में दीपक रखकर पहले छलनी से चांद को देखें, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखें। विस्तृत विधि — करवा चौथ पर चांद को अर्घ्य देने की सही विधि।
चरण 8: व्रत खोलना
पति पत्नी को जल पिलाएं और मिठाई खिलाएं। पत्नी पति और घर के बड़ों के चरण स्पर्श करके आशीर्वाद ले। इसके बाद हल्का भोजन करें। पूरी जानकारी — करवा चौथ का व्रत कब खोलें?
छलनी का महत्व
छलनी से चांद देखने के पीछे वीरावती की कथा है, जिसमें भाइयों ने छलनी में दीपक रखकर नकली चांद दिखाया था। आज छलनी का उपयोग इस बात का प्रतीक है कि व्रती महिला सच्चे चंद्रमा को ही देखकर व्रत खोलती है। एक भाव यह भी है कि छलनी की तरह जीवन से बुराइयां छन जाएं और केवल प्रेम व सौभाग्य शेष रहे।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए
- •पहली करवा चौथ पर मायके से "बायना" और श्रृंगार की सामग्री आती है।
- •विवाह का जोड़ा पहनकर पूजा करने की परंपरा है।
- •सास को सरगी और करवा देकर आशीर्वाद लें।
- •यदि पूजा की विधि न आती हो, तो परिवार या मोहल्ले की अनुभवी महिलाओं के साथ सामूहिक पूजा में शामिल हों।
करवा चौथ पर गाए जाने वाले पारंपरिक गीत
करवा फेरते समय महिलाएं पारंपरिक लोकगीत गाती हैं, जिनमें व्रत के नियम और सुहाग की मंगलकामना होती है। उत्तर भारत और पंजाब के पारंपरिक करवा गीतों में बताया जाता है कि व्रत के दिन कातना, सिलना, सोना और रूठना मना है, और हर फेरे के साथ सुहाग की मंगलकामना की जाती है। राजस्थान में चौथ माता के भजन गाए जाते हैं। ये गीत सामूहिक पूजा का आनंद बढ़ाते हैं और परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाते हैं।
सामूहिक पूजा बनाम घर पर पूजा
| सामूहिक पूजा | घर पर पूजा |
|---|---|
| अनुभवी महिलाओं से विधि सीखने का अवसर | अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार शांत पूजा |
| करवा फेरने और कथा का सामूहिक आनंद | सास या परिवार की बड़ी महिला के साथ |
| मंदिर या सोसाइटी में आयोजन | समय की सुविधा |
दोनों ही रूप पूर्ण हैं — महत्व भाव और नियम का है।
पति के लिए सुझाव
अब कई पति भी पत्नी के साथ व्रत रखते हैं। यदि आप व्रत न भी रखें, तो दिन में पत्नी का ध्यान रखें, शाम की पूजा की तैयारी में सहायता करें, चंद्रोदय के समय साथ रहें और व्रत खुलवाने के बाद उसके लिए हल्का भोजन तैयार रखें — यही इस पर्व की सच्ची भावना है।
करवा चौथ पूजा में होने वाली आम गलतियां
- •पूजा मुहूर्त से बहुत पहले या चंद्रोदय के बाद जल्दबाजी में पूजा करना।
- •गणेश पूजन के बिना सीधे गौरी पूजा शुरू करना।
- •कथा अधूरी सुनना या बीच में उठ जाना।
- •चंद्रोदय से पहले अर्घ्य देना।
- •करवे को खाली रखना — उसमें जल या अनाज अवश्य भरें।
- •व्रत खोलने के बाद तुरंत भारी भोजन करना।
सारांश
29 अक्टूबर 2026 को करवा चौथ पूजा का क्रम: सरगी, संकल्प, मुहूर्त में शाम को गौरी-गणेश पूजा, करवा फेरना और कथा, चंद्रोदय के बाद छलनी से दर्शन और अर्घ्य, और पति के हाथ से जल पीकर व्रत पारण। मां गौरी आपके सौभाग्य को अखंड रखें।
अखंड सौभाग्यवती भव!



