करवा चौथ सामग्री 2026: संक्षिप्त उत्तर
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को करवा चौथ के लिए ये सामग्री तैयार रखें: (1) सरगी — फेनी/सेवइयां, मेवे, फल, मिठाई, नारियल पानी; (2) पूजा सामग्री — ढक्कन वाले दो मिट्टी या धातु के करवे, गौरी की प्रतिमा या करवा चौथ का चित्र, रोली, अक्षत, कलावा, सिंदूर, घी का दीपक, धूप, फूल; (3) थाली — मिठाई, मठरी, जल का लोटा, छलनी; (4) सोलह श्रृंगार — अपने लिए और मां गौरी के लिए; (5) बायना — सास के लिए मिठाई, वस्त्र, श्रृंगार और शगुन। सारी खरीदारी 28 अक्टूबर तक कर लें; ताज़े फूल और मिठाई 29 अक्टूबर की सुबह लें।
करवा चौथ 2026: एक नज़र में
| विवरण | दिल्ली | जयपुर |
|---|---|---|
| पूजा मुहूर्त | शाम 5:38 – 6:56 | शाम 5:46 – 7:03 |
| चंद्रोदय | रात 8:17 | रात 8:28 |
पूरी जानकारी — करवा चौथ 2026 कब है?
1. सरगी की सामग्री
- •दूध में पकी फेनी या सेवइयां
- •मेवे — बादाम, काजू, किशमिश, खजूर
- •फल — केला, सेब, अनार, पपीता
- •मिठाई (सास की ओर से)
- •नारियल पानी, दूध
- •मठरी या पराठा (पारिवारिक परंपरा के अनुसार)
सरगी में ऐसी चीज़ें रखें जो दिन भर ऊर्जा दें और प्यास कम लगाएं। बहुत नमकीन या तली चीज़ें प्यास बढ़ाती हैं। विस्तार से पढ़ें — करवा चौथ व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं।
2. पूजा सामग्री
- •ढक्कन वाले दो करवे (मिट्टी या धातु के) — एक जल के लिए, एक गेहूं/मिठाई के लिए
- •गौरी की प्रतिमा (पीली मिट्टी से बनी) या करवा चौथ का छपा चित्र
- •लकड़ी की चौकी और लाल कपड़ा
- •रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत
- •कलावा (मौली)
- •मां गौरी के लिए सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां
- •घी का दीपक, रुई की बत्तियां, धूप, कपूर
- •फूल और माला
- •गंगाजल और जल
- •कथा के समय हाथ में रखने के लिए गेहूं के दाने या अक्षत
- •करवा चौथ व्रत कथा की पुस्तक
करवा कैसा हो?
परंपरागत रूप से मिट्टी का टोंटीदार करवा उपयोग होता है, जो पांच तत्वों का प्रतीक माना जाता है। कई परिवार तांबे, पीतल या चांदी के करवे भी उपयोग करते हैं। नया करवा खरीदें तो उसे एक रात पहले पानी में भिगो दें, ताकि रिसाव न हो। करवे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और कलावा बांधें। कुछ क्षेत्रों में करवे को रंगों और गोटे से सजाया जाता है।
3. पूजा की थाली
- •मिठाई (कई परिवारों में 8 या 13 मठरी/पुए)
- •अर्घ्य के लिए जल का लोटा
- •छलनी
- •छलनी में रखने के लिए छोटा दीपक
- •थोड़ा कच्चा दूध (अर्घ्य में मिलाने के लिए)
- •चीनी या बताशे
थाली को लाल कपड़े या कागज़ और गोटे से सजाया जाता है। थाली के बीच में दीपक रखें और उसके चारों ओर रोली, अक्षत, सिंदूर और मिठाई सजाएं।
4. सोलह श्रृंगार
| श्रृंगार | श्रृंगार |
|---|---|
| सिंदूर | मांग टीका |
| मंगलसूत्र | झुमके/कर्णफूल |
| बिंदी | पायल |
| मेहंदी | बिछिया |
| लाल चूड़ियां | काजल |
| नथ | आलता/महावर |
| गजरा | लाल साड़ी/लहंगा |
| इत्र | कंघी |
मां गौरी को अर्पित करने के लिए भी सुहाग की सामग्री का एक अलग छोटा सेट रखें — सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी और महावर।
5. सास के लिए बायना
- •मिठाई, मेवे और मठरी से भरी थाली
- •साड़ी या सूट
- •श्रृंगार की सामग्री
- •कुछ नकद राशि (शगुन)
कथा के बाद यह बायना सास को देकर उनके चरण स्पर्श किए जाते हैं। सास न हों तो जेठानी, ननद या किसी बड़ी सुहागिन को बायना दिया जाता है।
6. व्रत खोलने के लिए
- •पति के हाथ से पिलाने के लिए जल का गिलास
- •मिठाई का एक टुकड़ा
- •हल्का भोजन — दाल, सब्जी, रोटी या खिचड़ी (पहले से तैयार रखें)
व्रत खोलने की विधि पढ़ें — करवा चौथ का व्रत कब खोलें?
खरीदारी की समय-सारणी
| कब | क्या |
|---|---|
| 27 अक्टूबर तक | करवे, छलनी, चौकी, लाल कपड़ा, कथा पुस्तक, श्रृंगार सामग्री |
| 28 अक्टूबर | मेहंदी (शाम को या अगली दोपहर लगाएं), मेवे, फेनी |
| 29 अक्टूबर सुबह | ताज़े फूल, मिठाई, फल |
राजस्थान की विशेष परंपराएं
- •चौथ माता का चित्र: राजस्थान के कई परिवारों में करवा चौथ पर चौथ माता का चित्र या कैलेंडर लगाकर पूजा होती है।
- •लहरिया और चुनरी: महिलाएं लाल-पीली चुनरी या लहरिया पहनती हैं।
- •बायने में घेवर या फीणी: जयपुर में बायने में फीणी (फेनी) और घेवर देने का चलन है।
- •मिट्टी के करवे: कुम्हारों से हाथ के बने मिट्टी के करवे खरीदना शुभ माना जाता है।
सामग्री से जुड़े सुझाव
- •छलनी नई लें और पूजा के बाद इसे रसोई के उपयोग में न लाएं — कई परिवार इसे अगले वर्ष तक पूजा सामग्री के साथ रखते हैं।
- •मेहंदी में केमिकल वाली "ब्लैक मेहंदी" से बचें; प्राकृतिक मेहंदी सुरक्षित है।
- •दीपक में घी डालें और अतिरिक्त बत्तियां रखें — छत पर हवा से दीपक बुझ सकता है।
- •बायने की मिठाई में ऐसी चीज़ें रखें जो कुछ दिन टिक सकें।
पूजा की थाली कैसे सजाएं?
- 1थाली पर लाल कपड़ा या गोटे वाला कागज़ बिछाएं।
- 2बीच में घी का दीपक रखें।
- 3एक ओर छोटी कटोरियों में रोली, अक्षत, सिंदूर और हल्दी रखें।
- 4दूसरी ओर मिठाई, मठरी और फल रखें।
- 5थाली के किनारे फूल और कलावा रखें।
- 6छलनी और अर्घ्य का लोटा अलग से पास में रखें।
- 7थाली पर रोली से छोटा स्वास्तिक बनाएं।
सामग्री के प्रतीकात्मक अर्थ
| सामग्री | प्रतीक |
|---|---|
| करवा | पंच तत्व और जल — जीवन का आधार |
| छलनी | सत्य की परख; असली चांद के दर्शन |
| सिंदूर | अखंड सौभाग्य |
| दीपक | प्रेम और जीवन का प्रकाश |
| मठरी | पारंपरिक पकवान, समृद्धि |
| कलावा | रक्षा सूत्र, अटूट बंधन |
| गेहूं के दाने | अन्न, समृद्धि और कथा की साक्षी |
बजट के अनुसार न्यूनतम सामग्री
यदि बजट सीमित है, तो इन वस्तुओं से भी पूर्ण पूजा हो सकती है: एक मिट्टी का करवा, छलनी, रोली-अक्षत-सिंदूर, एक दीपक, कुछ फूल, थोड़ी मिठाई और जल का लोटा। सोलह श्रृंगार भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार करें — मां गौरी भाव की भूखी हैं, दिखावे की नहीं।
मिट्टी के करवे को व्रत के बाद क्या करें?
पूजा के बाद जल से भरे करवे का जल अगले दिन तुलसी या किसी पौधे में डाल दें। गेहूं या मिठाई से भरा करवा सास या किसी सुहागिन को बायने के रूप में दें। मिट्टी के खाली करवे को फेंकें नहीं — उसे पौधे के गमले के रूप में उपयोग कर सकते हैं या मिट्टी में मिला सकते हैं। धातु का करवा हो तो उसे साफ करके अगले वर्ष के लिए पूजा सामग्री के साथ रख लें।
राजस्थान के बाज़ारों में करवा चौथ की खरीदारी
जयपुर के जौहरी बाज़ार, बापू बाज़ार और चांदपोल जैसे बाज़ारों में करवा चौथ से पहले चूड़ियों, लहरिया-चुनरी, मेहंदी और पूजा सामग्री की विशेष रौनक रहती है। मिट्टी के करवे कुम्हार बस्तियों से सीधे खरीदने पर स्थानीय कारीगरों को भी लाभ होता है।
सारांश
29 अक्टूबर 2026 के लिए सामग्री के पांच समूह तैयार करें — सरगी, पूजा सामग्री, थाली, सोलह श्रृंगार और बायना — और चंद्रोदय से पहले छलनी, दीपक और अर्घ्य का लोटा तैयार रखें। पूजा विधि पढ़ें — करवा चौथ पूजा विधि 2026।
अखंड सौभाग्यवती भव!



