करवा चौथ का व्रत कब खोलें: संक्षिप्त उत्तर
29 अक्टूबर 2026 को करवा चौथ का व्रत केवल चंद्रोदय के बाद और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही खोलें — नई दिल्ली में रात 8:17 और जयपुर में रात 8:28 के बाद (कोलकाता 7:47, लखनऊ 8:06, मुंबई 9:00)। सही क्रम है: चंद्रमा को अर्घ्य → छलनी से चांद और फिर पति के दर्शन → आरती → पति के हाथ से जल और मिठाई → पति और बड़ों के चरण स्पर्श → हल्का भोजन। यह सब चतुर्थी तिथि के रात 10:09 बजे समाप्त होने से पहले पूरा करने का प्रयास करें।
शहरवार व्रत खोलने का समय
| शहर | चंद्रोदय / इसके बाद व्रत खोलें |
|---|---|
| नई दिल्ली | रात 8:17 |
| जयपुर | रात 8:28 |
| जोधपुर | रात 8:41 |
| उदयपुर | रात 8:43 |
| कोटा | रात 8:32 |
| बीकानेर | रात 8:35 |
| अजमेर | रात 8:34 |
| लखनऊ | रात 8:06 |
| चंडीगढ़ | रात 8:12 |
| मुंबई | रात 9:00 |
| कोलकाता | शाम 7:47 |
| बेंगलुरु | रात 8:55 |
पूरी सूची — करवा चौथ 2026 चंद्रोदय समय।
व्रत चंद्रोदय के बाद ही क्यों खोला जाता है?
करवा चौथ का व्रत चंद्र दर्शन और अर्घ्य से ही पूर्ण होता है। वीरावती की कथा इसी नियम की याद दिलाती है — भाइयों द्वारा दिखाए नकली चांद को देखकर व्रत तोड़ने पर उसे भारी दुख झेलना पड़ा था। इसलिए असली चंद्रमा के दर्शन किए बिना व्रत खोलना उचित नहीं माना जाता। कथा पढ़ें — करवा चौथ की कथा: वीरावती की पूरी कहानी।
शास्त्रीय दृष्टि से यह व्रत "चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी" का है — यानी जिस चतुर्थी में चंद्रोदय हो, उसी में चंद्र पूजन करके पारण किया जाता है। 2026 में चतुर्थी रात 10:09 बजे तक है, इसलिए अधिकांश शहरों में चंद्रोदय के बाद लगभग डेढ़ से दो घंटे का समय उपलब्ध रहेगा।
व्रत खोलने की चरणबद्ध विधि
- 1अर्घ्य: मंत्र के साथ चंद्रमा को दूध मिले जल का अर्घ्य दें। विधि पढ़ें — करवा चौथ पर चांद को अर्घ्य देने की सही विधि।
- 2छलनी से दर्शन: दीपक वाली छलनी से पहले चांद, फिर पति को देखें।
- 3आरती और तिलक: पति की आरती करें और उन्हें तिलक लगाएं।
- 4जल: पति करवे या गिलास से जल पिलाएं — धीरे-धीरे घूंट लें।
- 5मिठाई: पति अपने हाथ से मिठाई या खजूर खिलाएं।
- 6आशीर्वाद: पति और घर के बड़ों के चरण स्पर्श करें। सास को प्रणाम करके आशीर्वाद लें।
- 7पहले भोग: भोजन का थोड़ा भाग मां गौरी को भोग लगाएं, फिर ग्रहण करें।
- 8हल्का भोजन: दाल, सब्जी, रोटी या खिचड़ी, दही।
व्रत खोलने के बाद पहले क्या खाएं?
लगभग 14 घंटे के निर्जला व्रत के बाद पेट खाली और शरीर में पानी कम होता है। इसलिए:
| क्रम | क्या लें | क्यों |
|---|---|---|
| 1 | पानी के छोटे घूंट | शरीर में धीरे-धीरे पानी की पूर्ति |
| 2 | मिठाई या 2-3 खजूर | तुरंत ऊर्जा |
| 3 | 10–15 मिनट विश्राम | पाचन तंत्र को तैयार होने दें |
| 4 | हल्का भोजन | दाल, सब्जी, रोटी, खिचड़ी, दही |
| 5 | सोने से पहले | एक गिलास गुनगुना दूध या पानी |
बचें: तुरंत तला भोजन, कोल्ड ड्रिंक, बहुत सारी मिठाई, बहुत मसालेदार खाना। विस्तार से पढ़ें — करवा चौथ व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं।
पारंपरिक भोजन
कई परिवारों में व्रत खोलने के बाद विशेष भोजन बनता है — उत्तर भारत में दाल, कढ़ी, पूरी, खीर और हलवा; राजस्थान में दाल-बाटी-चूरमा या गट्टे की सब्जी; पंजाब में मक्की की रोटी-सरसों का साग। व्रत के बाद ऐसे भारी व्यंजन थोड़ी मात्रा में ही लें, और पहले हल्की चीज़ों से शुरुआत करें।
विशेष परिस्थितियां
- •पति दूर हों: चांद को अर्घ्य देकर छलनी से उनकी तस्वीर देखें या वीडियो कॉल पर उनका चेहरा देखें, फिर स्वयं जल ग्रहण करें। कुछ परिवारों में सास या घर का कोई बड़ा सदस्य जल पिलाता है।
- •आसमान में बादल: चंद्रोदय का समय बीत जाने तक प्रतीक्षा करें, फिर पूर्व दिशा की ओर अर्घ्य दें।
- •स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति: चक्कर, कमज़ोरी या शुगर कम होने पर तुरंत पानी या ORS लें — स्वास्थ्य सर्वोपरि है, और ऐसी स्थिति में व्रत भंग का कोई दोष नहीं माना जाता।
- •अर्घ्य में देर हो जाए: यदि किसी कारण चतुर्थी (रात 10:09) बीत जाए, तब भी चंद्र दर्शन और अर्घ्य करके व्रत खोलें; भाव ही प्रधान है।
व्रत खोलने के बाद की परंपराएं
- •करवे का जल अगले दिन तुलसी या किसी पौधे में डाल दें।
- •पूजा की मिठाई और करवा अगले दिन किसी सुहागिन या ब्राह्मणी को दान करने की परंपरा है।
- •मां गौरी की प्रतिमा का अगले दिन सम्मानपूर्वक विसर्जन करें, या पूजा स्थान पर रखें।
- •पति-पत्नी साथ बैठकर भोजन करें — यह इस पर्व के प्रेम भाव को पूर्ण करता है।
व्रत खोलने के बाद क्या न करें?
- •तुरंत बहुत ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक न पिएं।
- •एक साथ बहुत सारा भोजन न करें; पेट दर्द या एसिडिटी हो सकती है।
- •भोजन के तुरंत बाद न सोएं; थोड़ा टहल लें।
- •बचे हुए प्रसाद और पूजा सामग्री का अनादर न करें।
चंद्रोदय से पहले व्रत क्यों नहीं खोलते?
शास्त्रीय रूप से करवा चौथ "चंद्रोदय व्यापिनी" चतुर्थी का व्रत है, जिसका पूर्ण फल चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बाद ही मिलता है। सूर्य दिन का और चंद्रमा रात का प्रतीक है — सूर्योदय से चंद्रोदय तक का व्रत दिन और रात के संधिकाल तक संयम का प्रतीक है। चंद्र दर्शन के बिना व्रत खोलना अधूरी साधना माना जाता है।
व्रत खोलने के बाद पारंपरिक रस्में
- •सास के चरण स्पर्श: व्रत खोलने के बाद सबसे पहले सास या घर की बड़ी महिला का आशीर्वाद लेने की परंपरा है।
- •बायना देना: यदि कथा के बाद बायना नहीं दिया, तो अब दें।
- •पति-पत्नी का साथ भोजन: परिवार के साथ बैठकर भोजन करना इस पर्व का सुंदर समापन है।
- •उपहार: कई पति इस दिन पत्नी को उपहार देते हैं — यह प्रेम और कृतज्ञता का प्रतीक है।
यदि व्रत बीच में टूट जाए तो?
स्वास्थ्य कारणों से या अनजाने में व्रत टूट जाए, तो घबराएं नहीं। मां गौरी से क्षमा प्रार्थना करें, शाम की पूजा और चंद्र अर्घ्य पूरी श्रद्धा से करें। वीरावती की कथा भी बताती है कि सच्ची श्रद्धा से किया गया प्रायश्चित फल देता है। अगले वर्ष नियम से व्रत रखने का संकल्प लें।
सारांश
29 अक्टूबर 2026 को केवल चंद्रोदय और अर्घ्य के बाद (दिल्ली रात 8:17, जयपुर रात 8:28) पति के हाथ से जल और मिठाई लेकर व्रत खोलें, फिर हल्का भोजन करें — आदर्श रूप से चतुर्थी समाप्ति (रात 10:09) से पहले। करवा चौथ की पूरी जानकारी — करवा चौथ 2026 कब है?
अखंड सौभाग्यवती भव!


