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करवा चौथ पर चांद को अर्घ्य देने की सही विधि

29 अक्टूबर 2026 करवा चौथ पर चांद को अर्घ्य देने की सही विधि — चंद्रोदय समय, जल में क्या मिलाएं, दिशा, मंत्र, छलनी की रस्म और बादल हों तो क्या करें।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·6 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 9 अक्टू॰ 2026
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करवा चौथ पर चांद को अर्घ्य देने की सही विधि
✨प्रामाणिक वैदिक संदर्भ सचित्र

मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

29 अक्टूबर 2026 करवा चौथ पर चांद को अर्घ्य देने की सही विधि — चंद्रोदय समय, जल में क्या मिलाएं, दिशा, मंत्र, छलनी की रस्म और बादल हों तो क्या करें।

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करवा चौथ पर चंद्र अर्घ्य: संक्षिप्त उत्तर

29 अक्टूबर 2026 को चंद्रोदय (दिल्ली रात 8:17, जयपुर रात 8:28) के बाद पूर्व दिशा की ओर खुले स्थान पर जाएं। करवे या लोटे में जल लें, उसमें थोड़ा कच्चा दूध, अक्षत, रोली और एक सफेद फूल मिलाएं। दोनों हाथों से छाती की ऊंचाई पर पकड़कर चंद्रमा की ओर धीरे-धीरे पतली धार से जल अर्पित करें और मंत्र बोलें — "गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥" फिर छलनी में दीपक रखकर उससे पहले चांद और फिर पति को देखें, छोटी आरती करें और पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलें। चतुर्थी तिथि रात 10:09 बजे तक है।

अर्घ्य का समय (प्रमुख शहर)

शहरचंद्रोदय (29 अक्टूबर)
नई दिल्लीरात 8:17
जयपुररात 8:28
जोधपुररात 8:41
उदयपुररात 8:43
लखनऊरात 8:06
मुंबईरात 9:00
कोलकाताशाम 7:47

अर्घ्य क्या है और क्यों दिया जाता है?

अर्घ्य का अर्थ है सम्मानपूर्वक जल अर्पित करना। जैसे सूर्य को सुबह अर्घ्य दिया जाता है, वैसे ही करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है। ज्योतिष में चंद्रमा मन, शीतलता, सौंदर्य और दांपत्य सुख का कारक है। चतुर्थी पर चंद्र दर्शन और अर्घ्य से गणेश जी और चंद्र देव — दोनों की कृपा मानी जाती है। इसीलिए अर्घ्य मंत्र में चंद्रमा को "गणेश प्रतिरूप" कहा गया है। करवा चौथ के दिन संकष्टी चतुर्थी भी है, इसलिए यह अर्घ्य और भी विशेष है।

आवश्यक सामग्री

  • •जल से भरा करवा या लोटा
  • •थोड़ा कच्चा दूध, अक्षत, रोली, सफेद फूल, थोड़ी चीनी (वैकल्पिक)
  • •छलनी और घी का छोटा दीपक
  • •मिठाई वाली पूजा की थाली
  • •व्रत खोलने के लिए जल का गिलास

अर्घ्य देने की चरणबद्ध विधि

  1. 1चंद्रोदय की प्रतीक्षा करें: अपने शहर के चंद्रोदय समय से 5-10 मिनट पहले छत पर पहुंच जाएं।
  2. 2पूर्व दिशा की ओर मुख करें: चांद पूर्व से उगता है; साफ स्थान पर खड़ी हों या बैठें।
  3. 3चंद्र दर्शन: चांद दिखाई देने पर हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
  4. 4अर्घ्य: करवे या लोटे को दोनों हाथों से पकड़कर पतली धार में जल गिराएं, ताकि गिरते जल के बीच से चांद का प्रतिबिंब दिखे। मंत्र बोलें या 'ॐ सोमाय नमः' का जाप करें।
  5. 5परिक्रमा: कई परिवारों में अर्घ्य के बाद अपनी जगह पर घड़ी की दिशा में एक बार घूमकर परिक्रमा की जाती है।
  6. 6छलनी की रस्म: छलनी में या उसके पीछे दीपक रखें; पहले छलनी से चांद देखें, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखें।
  7. 7आरती: चंद्रमा और पति की थाली से छोटी आरती करें; पति को तिलक लगाएं।
  8. 8व्रत खोलना: पति अपने हाथ से जल और मिठाई दें; पत्नी पति के चरण स्पर्श करके आशीर्वाद ले।

अर्घ्य के मंत्र

मुख्य मंत्र:

ॐवैदिक शास्त्र सूत्र एवं श्लोक (Scriptural Shloka)
गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते।
गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥

अर्थ: हे आकाश रूपी समुद्र के माणिक्य, दक्ष प्रजापति की पुत्रियों (27 नक्षत्रों) के स्वामी, गणेश के प्रतिरूप चंद्रदेव — मेरे द्वारा दिया गया यह अर्घ्य स्वीकार करें।

सरल मंत्र: 'ॐ चन्द्रमसे नमः' या 'ॐ सोमाय नमः'।

लोक प्रार्थना: कई क्षेत्रों में महिलाएं अर्घ्य देते समय कहती हैं — "हे चंद्र देव, जैसे आप आकाश में अमर हैं, वैसे ही मेरा सुहाग अमर रहे।"

जल में दूध और अक्षत क्यों?

चंद्रमा का रंग श्वेत है और दूध चंद्रमा से जुड़ा माना जाता है, इसलिए अर्घ्य के जल में थोड़ा कच्चा दूध मिलाया जाता है। अक्षत पूर्णता और अखंडता का प्रतीक है — अखंड सौभाग्य की कामना। सफेद फूल और चीनी चंद्रमा की शीतलता और मिठास के प्रतीक हैं। ध्यान रखें कि दूध की मात्रा बहुत कम हो; अर्घ्य का मुख्य तत्व जल है।

अर्घ्य देते समय क्या न करें

  • •चंद्रोदय से पहले अर्घ्य न दें — यही वीरावती की कथा की सीख है। कथा पढ़ें — करवा चौथ की कथा: वीरावती की पूरी कहानी।
  • •अर्घ्य का जल पैरों पर न गिरे; नीचे एक बर्तन या गमला रख सकते हैं, जिसका जल बाद में पौधों में डाल दें।
  • •जल्दबाजी में अर्घ्य न दें; शांत मन से मंत्र बोलें।
  • •छत की मुंडेर या खतरनाक किनारों पर खड़ी होकर अर्घ्य न दें; सुरक्षा का ध्यान रखें।
  • •दीपक को साड़ी या दुपट्टे से दूर रखें।

बादल हों या चांद न दिखे तो?

  • •अपने शहर के चंद्रोदय समय के बीत जाने तक प्रतीक्षा करें।
  • •चंद्रोदय का समय बीतने के बाद पूर्व दिशा की ओर अर्घ्य दिया जा सकता है।
  • •कुछ परिवार भगवान शिव के चित्र में उनके मस्तक पर स्थित चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं।
  • •चंद्रोदय से पहले व्रत कभी न खोलें, और प्रयास करें कि अर्घ्य चतुर्थी समाप्ति (रात 10:09) से पहले हो जाए।

पति के साथ न होने पर

यदि पति दूर हों, तो चांद को अर्घ्य देने के बाद छलनी से उनकी तस्वीर देखें या वीडियो कॉल पर उनका चेहरा देखें, और फिर स्वयं जल ग्रहण करके व्रत खोलें। भाव ही सबसे महत्वपूर्ण है।

चंद्रमा का ज्योतिषीय महत्व

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता, शीतलता और सौंदर्य का कारक माना गया है। सुखी वैवाहिक जीवन के लिए मन की शांति और भावनात्मक संतुलन आवश्यक है, इसलिए करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा का गहरा अर्थ है। चंद्रमा को सोलह कलाओं से युक्त माना गया है, और सुहागिनें अपने सौभाग्य की पूर्णता के लिए उसकी आराधना करती हैं। अपनी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति जानने के लिए कुंडली देखें।

अर्घ्य के बाद की रस्में

  • •अर्घ्य के बाद पति को तिलक लगाकर उनकी आरती करें।
  • •पति के चरण स्पर्श करें और घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।
  • •करवे का बचा जल अगले दिन तुलसी या किसी पौधे में डालें।
  • •पूजा की मिठाई पहले परिवार को प्रसाद रूप में बांटें।

एक साथ अर्घ्य: सोसाइटी और परिवार में

कई सोसाइटियों और मोहल्लों में महिलाएं छत या पार्क में एक साथ चंद्र अर्घ्य देती हैं। ऐसे में:

  • •सभी के लिए पर्याप्त जगह हो, ताकि दीपक और साड़ियां एक-दूसरे से दूर रहें।
  • •एक व्यक्ति चंद्रोदय का समय और चांद दिखने की सूचना सबको दे।
  • •बच्चे और बुजुर्ग सीढ़ियों और मुंडेर से दूर रहें।
  • •सामूहिक आरती और शुभकामनाओं के बाद सभी अपने-अपने पति के साथ व्रत खोलें।

पहली करवा चौथ पर अर्घ्य

नवविवाहिताएं पहली करवा चौथ पर विवाह का जोड़ा पहनकर अर्घ्य देती हैं। कई परिवारों में इस दिन सास या ननद अर्घ्य की विधि सिखाती हैं। पहली बार अर्घ्य देते समय घबराएं नहीं — मंत्र न आए, तो सरल शब्दों में चंद्रदेव से अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें।

सारांश

29 अक्टूबर 2026 को चंद्रोदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके मंत्र के साथ दूध मिले जल का अर्घ्य दें, छलनी से चांद और पति के दर्शन करें, आरती करें और पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलें — चतुर्थी (रात 10:09) समाप्त होने से पहले। व्रत खोलने के बाद क्या करें, यह पढ़ें — करवा चौथ का व्रत कब खोलें?

अखंड सौभाग्यवती भव!

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

करवा चौथ पर चांद को अर्घ्य कब दें?

29 अक्टूबर 2026 को चंद्रोदय के बाद — दिल्ली में रात 8:17 और जयपुर में रात 8:28 बजे के बाद, चतुर्थी समाप्ति (रात 10:09) से पहले।

चंद्रमा को अर्घ्य देने का मंत्र क्या है?

'गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥' सरल विकल्प 'ॐ सोमाय नमः' है।

अर्घ्य के जल में क्या मिलाते हैं?

जल में थोड़ा कच्चा दूध, अक्षत, रोली, सफेद फूल और चाहें तो थोड़ी चीनी मिलाई जाती है।

अर्घ्य किस दिशा में दें?

चांद पूर्व दिशा से उगता है, इसलिए पूर्व की ओर मुख करके अर्घ्य दें।

छलनी से पहले चांद देखें या पति को?

पहले छलनी से चांद को देखें, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखें।

बादल होने पर अर्घ्य कैसे दें?

चंद्रोदय का समय बीत जाने के बाद पूर्व दिशा की ओर अर्घ्य दें; कुछ परिवार शिव जी के मस्तक के चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं।

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