दशहरा 2027: संक्षिप्त उत्तर
दशहरा (विजयादशमी) 2027 शनिवार, 9 अक्टूबर 2027 को है। नई दिल्ली में विजय मुहूर्त दोपहर 2:05 से 2:52 तक (47 मिनट) और जयपुर में दोपहर 2:11 से 2:58 तक है। दशमी तिथि 9 अक्टूबर सुबह 9:01 से 10 अक्टूबर सुबह 11:40 तक, और श्रवण नक्षत्र 9 अक्टूबर सुबह 10:17 से 10 अक्टूबर दोपहर 1:25 तक रहेगा। बंगाल में बिजोया दशमी (दुर्गा विसर्जन) रविवार, 10 अक्टूबर को है।
| विवरण | दिल्ली | जयपुर |
|---|---|---|
| दशहरा | शनिवार, 9 अक्टूबर | शनिवार, 9 अक्टूबर |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 2:05 – 2:52 | दोपहर 2:11 – 2:58 |
| दशमी तिथि | 9 अक्टूबर सुबह 9:01 – 10 अक्टूबर सुबह 11:40 | वही |
| श्रवण नक्षत्र | 9 अक्टूबर सुबह 10:17 – 10 अक्टूबर दोपहर 1:25 | वही |
| नवरात्रि पारण | 9 अक्टूबर, नवमी समाप्ति (सुबह 9:01) के बाद | वही |
| बंगाल बिजोया दशमी | रविवार, 10 अक्टूबर | — |
रावण दहन 9 अक्टूबर को सूर्यास्त के बाद (लगभग शाम 6 बजे के बाद) होगा; अपने शहर का सूर्यास्त [पंचांग](/panchang) में देखें। दशहरा पर्व की जानकारी — [दशहरा](/festivals/dussehra)।
दशहरा 9 अक्टूबर को ही क्यों?
दशहरा आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाता है, और नियम यह है कि जिस दिन अपराह्न (दोपहर बाद) में दशमी हो, उसी दिन विजयादशमी मनाई जाए। 9 अक्टूबर को दशमी सुबह 9:01 से शुरू होकर पूरी दोपहर रहती है, और इसी दिन श्रवण नक्षत्र भी है, जो विजयादशमी के लिए विशेष शुभ माना गया है। इसलिए उत्तर भारत में दशहरा 9 अक्टूबर को है। बंगाल में दुर्गा विसर्जन उदया तिथि (सूर्योदय की दशमी) के आधार पर 10 अक्टूबर को होगा। विजय मुहूर्त के बारे में विस्तार से — विजय मुहूर्त क्या है?
2026 और 2027 के दशहरे में अंतर
2026 में दशहरा 20 अक्टूबर को था, जबकि 2027 में 9 अक्टूबर को है — लगभग 11 दिन पहले। कारण यह है कि 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास था, जिससे सभी त्योहार आगे खिसक गए थे; 2027 में अधिक मास नहीं है। इस बारे में पढ़ें — हिंदू कैलेंडर कैसे चलता है?
नवरात्रि 2027 से संबंध
शारदीय नवरात्रि 2027 गुरुवार, 30 सितंबर से शुरू होकर नवमी (8 अक्टूबर) पर समाप्त होगी। नवमी तिथि 8 अक्टूबर सुबह 6:27 से 9 अक्टूबर सुबह 9:01 तक है, इसलिए नवरात्रि व्रत का पारण 9 अक्टूबर को सुबह 9:01 के बाद — दशहरे के दिन — किया जाएगा। पूरा कैलेंडर — नवरात्रि 2027 कब है?
दशहरा पूजा विधि
1. शस्त्र पूजा (आयुध पूजा) सुबह स्नान करके घर के शस्त्र, औज़ार, वाहन, किताबें, कंप्यूटर और व्यापार के उपकरण साफ करें। उन पर रोली, अक्षत, फूल चढ़ाकर पूजा करें। क्षत्रिय परंपरा में इस दिन शस्त्र पूजा का विशेष महत्व है।
2. अपराजिता पूजा घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में चंदन से अष्टदल कमल बनाकर देवी अपराजिता का आवाहन करें। साथ में जया और विजया देवियों की पूजा करें, और विजय व सुरक्षा की प्रार्थना करें।
3. शमी पूजा अपराह्न में, विशेषकर विजय मुहूर्त (दिल्ली में 2:05–2:52) के आसपास, शमी वृक्ष की पूजा करें। मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के समय अपने शस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाए थे। शमी की परिक्रमा करें और इस मंत्र से प्रार्थना करें: "शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥"
4. सीमोल्लंघन प्राचीन काल में राजा इस दिन विजय यात्रा के लिए राज्य की सीमा पार करते थे। आज भी कई स्थानों पर गांव की सीमा तक जाकर लौटने की परंपरा है।
5. रावण दहन सूर्यास्त के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन होता है। यह असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।
दशहरा का महत्व
- •श्रीराम की विजय: भगवान श्रीराम ने इसी दिन लंका में रावण का वध किया था।
- •मां दुर्गा की विजय: देवी दुर्गा ने नौ दिन के युद्ध के बाद दसवें दिन महिषासुर का वध किया — इसीलिए "विजयादशमी"।
- •अबूझ मुहूर्त: दशहरा साढ़े तीन अबूझ मुहूर्तों में से एक है — इस दिन नया व्यवसाय, वाहन, भूमि या सोना ख़रीदना और शिक्षा आरंभ करना शुभ माना जाता है।
- •नीलकंठ दर्शन: दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है।
दशहरे पर क्या करें?
- •शमी या आपटा के पत्ते "सोने" के रूप में एक-दूसरे को देकर शुभकामनाएं दें।
- •बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लें।
- •पान का बीड़ा खाने की परंपरा है — यह विजय और सम्मान का प्रतीक है।
- •अपने भीतर के "रावण" — अहंकार, क्रोध, लोभ — को त्यागने का संकल्प लें।
राजस्थान में दशहरा
राजस्थान में कोटा का दशहरा मेला देश के सबसे प्रसिद्ध दशहरा उत्सवों में से एक है, जहां विशाल रावण के पुतले का दहन होता है और कई दिनों तक मेला चलता है। जयपुर में आदर्श नगर और विद्याधर नगर स्टेडियम के रावण दहन कार्यक्रम प्रमुख हैं।
रामलीला की परंपरा
नवरात्रि के नौ दिनों में देश भर में रामलीला का मंचन होता है, जिसका समापन दशहरे पर रावण वध और दहन के साथ होता है। रामनगर (वाराणसी) की रामलीला लगभग एक महीने चलती है और इसे यूनेस्को ने "रामलीला" परंपरा के रूप में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया है। दिल्ली के लाल किला मैदान और रामलीला मैदान की रामलीलाएं भी प्रसिद्ध हैं।
भारत के प्रसिद्ध दशहरा उत्सव
- •मैसूर दशहरा (कर्नाटक): मैसूर पैलेस की रोशनी और विजयादशमी पर चामुंडेश्वरी देवी की स्वर्ण हौदे वाली जंबू सवारी विश्व प्रसिद्ध है।
- •कुल्लू दशहरा (हिमाचल प्रदेश): यह विजयादशमी से शुरू होता है और लगभग एक सप्ताह चलता है; घाटी के सैकड़ों देवी-देवता भगवान रघुनाथ जी के रथ के साथ ढालपुर मैदान में जुटते हैं। यहां रावण दहन नहीं होता।
- •बस्तर दशहरा (छत्तीसगढ़): लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव देवी दंतेश्वरी को समर्पित है।
- •बंगाल की बिजोया दशमी: दुर्गा विसर्जन, सिंदूर खेला और बड़ों को प्रणाम — 2027 में 10 अक्टूबर को।
दशहरा: दस बुराइयों पर विजय
रावण के दस सिर दस बुराइयों के प्रतीक माने जाते हैं — काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद (अहंकार), मत्सर (ईर्ष्या), स्वार्थ, अन्याय, अमानवता और असत्य। दशहरा हमें याद दिलाता है कि असली विजय अपने भीतर की इन बुराइयों पर विजय है। इस दिन कम से कम एक बुरी आदत छोड़ने का संकल्प लेना इस पर्व का सबसे सार्थक उपयोग है।
दशहरा 2027: एक नज़र में मुख्य बातें
- •तारीख: शनिवार, 9 अक्टूबर 2027
- •विजय मुहूर्त: दोपहर 2:05–2:52 (दिल्ली), 2:11–2:58 (जयपुर)
- •सुबह: नवरात्रि पारण (9:01 के बाद) और शस्त्र पूजा
- •दोपहर: अपराजिता और शमी पूजा
- •शाम: सूर्यास्त के बाद रावण दहन
- •बंगाल: बिजोया दशमी 10 अक्टूबर
- •इसके बाद: शरद पूर्णिमा 14 अक्टूबर, करवा चौथ 18 अक्टूबर, दिवाली 29 अक्टूबर
सारांश
दशहरा 2027 शनिवार, 9 अक्टूबर को है; विजय मुहूर्त दिल्ली में दोपहर 2:05–2:52 और जयपुर में 2:11–2:58। सुबह शस्त्र पूजा, दोपहर में शमी व अपराजिता पूजा, और शाम को रावण दहन करें। इसके बाद करवा चौथ — करवा चौथ 2027 कब है?
विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं!


