दिवाली 2027: संक्षिप्त उत्तर
दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 2027 शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 को है। नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 6:34 से 7:05 तक है — केवल 31 मिनट — क्योंकि अमावस्या शाम 7:05 पर समाप्त हो रही है। जयपुर में अनुशंसित समय शाम 5:46 से 7:05 तक है। प्रदोष काल शाम 5:39 से 8:13 (दिल्ली) और वृषभ काल शाम 6:34 से 8:30 तक है। अमावस्या तिथि 28 अक्टूबर रात 8:47 से 29 अक्टूबर शाम 7:05 तक रहेगी।
| विवरण | दिल्ली | जयपुर |
|---|---|---|
| लक्ष्मी पूजा | शाम 6:34 – 7:05 | शाम 5:46 – 7:05 (अनुशंसित) |
| प्रदोष काल | शाम 5:39 – रात 8:13 | शाम 5:46 – रात 8:20 |
| वृषभ काल (स्थिर लग्न) | शाम 6:34 – रात 8:30 | शाम 6:43 – रात 8:40 |
| अमावस्या तिथि | 28 अक्टूबर रात 8:47 – 29 अक्टूबर शाम 7:05 | वही |
| महानिशीथ काल | रात 11:39 – 12:31 (अमावस्या नहीं) | रात 11:45 – 12:36 |
| सिंह लग्न | — | रात 1:13 – 3:28 |
अन्य शहरों का समय [पंचांग](/panchang) में देखें। दिवाली पर्व की जानकारी — [दिवाली](/festivals/diwali)।
2027 में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त इतना छोटा क्यों?
शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी पूजा का सबसे श्रेष्ठ समय वह है, जब तीन बातें एक साथ हों:
- 1प्रदोष काल — सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 24 मिनट।
- 2स्थिर लग्न — विशेषकर वृषभ लग्न, ताकि लक्ष्मी घर में "स्थिर" रहें।
- 3अमावस्या तिथि — कार्तिक अमावस्या ही दिवाली की तिथि है।
2027 में दिल्ली में वृषभ लग्न शाम 6:34 से शुरू होता है, लेकिन अमावस्या शाम 7:05 पर समाप्त हो जाती है — इसलिए तीनों का मेल केवल 31 मिनट का है। इसी कारण कई पंडित सलाह देते हैं कि प्रदोष काल शुरू होते ही (दिल्ली में 5:39, जयपुर में 5:46) पूजा की तैयारी और गणेश-कलश पूजन शुरू कर दें, और मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजा शाम 7:05 से पहले पूरी कर लें। जयपुर में वृषभ लग्न 6:43 से शुरू होता है, इसलिए वहां पूरा प्रदोष-अमावस्या काल (5:46–7:05) अनुशंसित है।
महानिशीथ काल (रात 11:39–12:31, दिल्ली) में इस वर्ष अमावस्या नहीं है, इसलिए तांत्रिक या काली पूजा करने वाले अपनी परंपरा के आचार्य से सलाह लें।
दिवाली 29 अक्टूबर को ही क्यों?
दिवाली उस दिन मनाई जाती है, जिस दिन प्रदोष काल में अमावस्या हो। 28 अक्टूबर को अमावस्या रात 8:47 से शुरू होती है — उस दिन प्रदोष काल (शाम 5:40 से 8:14) चतुर्दशी में है। 29 अक्टूबर को प्रदोष काल का शुरुआती भाग अमावस्या में है (7:05 तक)। इसलिए दिवाली 29 अक्टूबर को ही है। अमावस्या के बारे में पढ़ें — अमावस्या क्या होती है?
दिवाली 2027: पांच दिनों का कैलेंडर
| दिन | तारीख | पर्व | मुख्य मुहूर्त (दिल्ली) |
|---|---|---|---|
| 1 | बुधवार, 27 अक्टूबर | धनतेरस | शाम 6:42 – 8:14 |
| 2 | गुरुवार, 28 अक्टूबर | नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) | अभ्यंग स्नान सुबह 5:06 – 6:30 |
| 3 | शुक्रवार, 29 अक्टूबर | दिवाली — लक्ष्मी पूजा | शाम 6:34 – 7:05 |
| 4 | शनिवार, 30 अक्टूबर | गोवर्धन पूजा / अन्नकूट | सुबह 6:31 – 8:45; दोपहर 3:25 – 5:38 |
| 5 | रविवार, 31 अक्टूबर | भाई दूज | दोपहर 1:11 – 3:24 |
दिन 1 — धनतेरस (27 अक्टूबर) त्रयोदशी 27 अक्टूबर रात 1:03 से रात 10:49 तक है। धन्वंतरि, कुबेर और लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में शाम 6:42 से 8:14 के बीच; यम दीपदान शाम को। विस्तार से — [धनतेरस 2027 कब है?](/guides/dhanteras-2027-kab-hai)
दिन 2 — नरक चतुर्दशी (28 अक्टूबर) चतुर्दशी 27 अक्टूबर रात 10:49 से 28 अक्टूबर रात 8:47 तक। सूर्योदय से पहले **अभ्यंग स्नान (सुबह 5:06–6:30)** — तिल के तेल की मालिश और उबटन के बाद स्नान। इसे रूप चौदस और छोटी दिवाली भी कहते हैं। (ध्यान दें — 2027 में काली चौदस और हनुमान पूजा 27 अक्टूबर की रात को है।)
दिन 3 — दिवाली (29 अक्टूबर) लक्ष्मी-गणेश पूजा शाम 7:05 से पहले। रात भर दीपक जलाने की परंपरा।
दिन 4 — गोवर्धन पूजा (30 अक्टूबर) प्रतिपदा 29 अक्टूबर शाम 7:05 से 30 अक्टूबर शाम 5:51 तक। गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा और अन्नकूट का भोग। इसी दिन **गुजराती नववर्ष** और **बलि प्रतिपदा** भी है।
दिन 5 — भाई दूज (31 अक्टूबर) द्वितीया 30 अक्टूबर शाम 5:51 से 31 अक्टूबर शाम 5:12 तक। बहनें दोपहर 1:11 से 3:24 के बीच भाई को तिलक करती हैं।
लक्ष्मी पूजा की सामग्री
- •लक्ष्मी-गणेश की नई प्रतिमा (मिट्टी की) या चित्र
- •चौकी, लाल कपड़ा, कलश, आम के पत्ते, नारियल
- •रोली, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, चंदन
- •कमल का फूल, गेंदे की माला
- •खील-बताशे, मिठाई, फल, पान, सुपारी
- •चांदी के सिक्के, बही-खाता, कलम
- •घी और तेल के दीपक (11 या 21), धूप, कपूर
दिवाली लक्ष्मी पूजा विधि (संक्षेप में)
- 1प्रदोष काल शुरू होते ही घर साफ करके द्वार पर रंगोली और तोरण सजाएं।
- 2ईशान कोण में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी जी को गणेश जी के दाईं ओर स्थापित करें।
- 3कलश स्थापित करें और संकल्प लें।
- 4पहले गणेश पूजा, फिर लक्ष्मी पूजा — कमल, कुमकुम, खील-बताशे अर्पित करें।
- 5कुबेर और बही-खाते की पूजा करें।
- 6शाम 7:05 से पहले मुख्य पूजा पूरी करें; "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का जाप करें।
- 7आरती करें, फिर घर भर में दीपक जलाएं।
2026 और 2027 की दिवाली
2026 में दिवाली 8 नवंबर को थी, जबकि 2027 में 29 अक्टूबर को है — लगभग 10 दिन पहले, क्योंकि 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास था।
दिवाली पर क्या करें और क्या न करें
करें:
न करें:
सुरक्षित और हरित दिवाली
- •प्रशासन द्वारा तय समय और नियमों के अनुसार ही पटाखे चलाएं; कई शहरों में केवल ग्रीन पटाखों की अनुमति होती है।
- •बच्चों को बड़ों की निगरानी में ही फुलझड़ी दें, और पास में पानी की बाल्टी रखें।
- •सूती कपड़े पहनें; सिंथेटिक कपड़े जल्दी आग पकड़ते हैं।
- •जलने पर ठंडा पानी डालें, बर्फ या टूथपेस्ट नहीं; गंभीर हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- •मिट्टी के दीयों का उपयोग करें — इससे स्थानीय कुम्हारों को भी सहारा मिलता है।
सारांश
दिवाली 2027 शुक्रवार, 29 अक्टूबर को है। लक्ष्मी पूजा शाम 7:05 से पहले करें — दिल्ली में 6:34–7:05, जयपुर में 5:46–7:05। पांच दिन का उत्सव धनतेरस (27 अक्टूबर) से भाई दूज (31 अक्टूबर) तक चलेगा। 2027 के सभी त्योहार — हिंदू कैलेंडर 2027।
शुभ दीपावली!



