करवा चौथ 2027: संक्षिप्त उत्तर
करवा चौथ 2027 सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 को है। नई दिल्ली में पूजा मुहूर्त शाम 5:49 से 7:04 तक, व्रत का समय सुबह 6:23 से शाम 7:35 तक, और चंद्रोदय शाम 7:35 बजे है। जयपुर में पूजा शाम 5:56 से 7:11, व्रत सुबह 6:28 से शाम 7:45, और चंद्रोदय शाम 7:45 पर है। चतुर्थी तिथि 18 अक्टूबर शाम 5:51 से 19 अक्टूबर शाम 4:42 तक रहेगी। इसी दिन संकष्टी चतुर्थी भी है।
| विवरण | दिल्ली | जयपुर |
|---|---|---|
| करवा चौथ | सोमवार, 18 अक्टूबर | सोमवार, 18 अक्टूबर |
| व्रत का समय | सुबह 6:23 – शाम 7:35 | सुबह 6:28 – शाम 7:45 |
| पूजा मुहूर्त | शाम 5:49 – 7:04 | शाम 5:56 – 7:11 |
| चंद्रोदय | शाम 7:35 | शाम 7:45 |
| चतुर्थी तिथि | 18 अक्टूबर शाम 5:51 – 19 अक्टूबर शाम 4:42 | वही |
चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार अलग होता है, और बादल होने पर चांद देर से दिख सकता है। अपने शहर का समय [पंचांग](/panchang) में देखें। पर्व की जानकारी — [करवा चौथ](/festivals/karva-chauth)।
सूर्योदय पर तृतीया — क्या व्रत 18 अक्टूबर को सही है?
हां। 2027 में 18 अक्टूबर को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि है, और चतुर्थी शाम 5:51 से शुरू हो रही है। इससे कई लोगों को भ्रम हो सकता है कि व्रत 19 अक्टूबर को होना चाहिए। लेकिन करवा चौथ का निर्णय चंद्रोदय के समय चतुर्थी से होता है, न कि सूर्योदय से — क्योंकि इस व्रत का मुख्य कर्म चंद्रमा को अर्घ्य देना है।
- •18 अक्टूबर: चंद्रोदय (शाम 7:35) के समय चतुर्थी है ✓
- •19 अक्टूबर: चतुर्थी शाम 4:42 पर समाप्त, चंद्रोदय के समय पंचमी ✗
इसलिए करवा चौथ 18 अक्टूबर को ही है। यही नियम संकष्टी चतुर्थी पर भी लागू होता है — संकष्टी चतुर्थी क्या है?। तिथि निर्णय के नियम — सूर्योदय के अनुसार व्रत की तारीख कैसे तय होती है?
2027 का विशेष संयोग
- •सोमवार: करवा चौथ सोमवार को पड़ रहा है — सोमवार चंद्रमा और भगवान शिव का दिन है, और इस व्रत में शिव-पार्वती व चंद्रमा की ही पूजा होती है।
- •संकष्टी चतुर्थी: कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी भी होती है, इसलिए गणेश पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।
- •2026 से पहले: 2026 में करवा चौथ 29 अक्टूबर को था; 2027 में लगभग 11 दिन पहले है।
करवा चौथ पूजा सामग्री
- •मिट्टी का करवा (टोंटीदार) और ढक्कन
- •छलनी, थाली, दीपक
- •करवा माता का चित्र (या दीवार पर बना चित्र)
- •रोली, कुमकुम, अक्षत, सिंदूर, मेहंदी
- •सोलह श्रृंगार का सामान
- •मिठाई, फल, मठरी, पानी का लोटा
- •सरगी (सास द्वारा दी जाने वाली)
करवा चौथ व्रत और पूजा विधि
- 1सरगी: सूर्योदय (दिल्ली में 6:23) से पहले सास द्वारा दी गई सरगी — फल, मेवे, मिठाई, फेनी — खाएं और व्रत का संकल्प लें।
- 2निर्जला व्रत: दिन भर बिना अन्न-जल के व्रत रखें। गर्भवती, बीमार या बुजुर्ग महिलाएं डॉक्टर की सलाह से फलाहार या जल ले सकती हैं।
- 3श्रृंगार: शाम को सोलह श्रृंगार करें; मेहंदी लगाने की परंपरा है।
- 4पूजा (शाम 5:49–7:04, दिल्ली): शिव-पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और करवा माता की पूजा करें। करवे में जल भरकर रखें।
- 5कथा: करवा चौथ व्रत कथा (वीरवती की कथा) सुनें; महिलाएं समूह में थालियां घुमाने (बाया फेरना) की रस्म करती हैं।
- 6चंद्रोदय (7:35, दिल्ली): चंद्रमा को करवे से अर्घ्य दें, छलनी में दीपक रखकर चांद और फिर पति को देखें।
- 7व्रत खोलना: पति के हाथ से पानी पीकर और मिठाई खाकर व्रत पूरा करें; सास को बायना (उपहार) दें।
करवा चौथ व्रत कथा (संक्षेप में)
वीरवती सात भाइयों की इकलौती बहन थी। विवाह के बाद पहले करवा चौथ पर भूख-प्यास से व्याकुल बहन को देखकर भाइयों ने पेड़ के पीछे दीपक जलाकर नकली चांद दिखा दिया। वीरवती ने व्रत खोल लिया और उसके पति के प्राण संकट में पड़ गए। अपनी भूल समझकर उसने पूरे वर्ष श्रद्धा से चतुर्थी के व्रत किए और अगले करवा चौथ पर विधि से व्रत रखकर पति का जीवन वापस पाया। यह कथा व्रत की निष्ठा और नियम-पालन का महत्व बताती है।
सावधानियां
- •दिन भर निर्जला रहने से पहले रात को पर्याप्त पानी पिएं और सरगी में नारियल पानी, फल व मेवे लें।
- •चक्कर या कमज़ोरी लगे तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
- •बादल होने पर स्थानीय पंचांग के चंद्रोदय समय पर पूर्व दिशा में अर्घ्य देने की परंपरा है।
सरगी में क्या खाएं?
निर्जला व्रत को आसान बनाने के लिए सरगी (सूर्योदय से पहले, दिल्ली में 6:23 से पहले) में ऐसे खाद्य पदार्थ लें जो लंबे समय तक ऊर्जा और नमी दें:
- •फेनी या सेवइयां दूध में — पारंपरिक पंजाबी सरगी का मुख्य भाग।
- •भीगे हुए बादाम, अखरोट, किशमिश — धीरे-धीरे ऊर्जा देते हैं।
- •नारियल पानी और फल — केला, सेब, अनार, पपीता।
- •पराठा या पोहा के साथ दही — पेट भरा रखता है।
- •कम मीठा और कम नमक — ज़्यादा नमक और चाय-कॉफी से प्यास बढ़ती है।
पहली बार करवा चौथ — नवविवाहिताओं के लिए
- •पहले करवा चौथ पर सास या मायके की ओर से सरगी और बायना का विशेष महत्व है।
- •कई परिवारों में नवविवाहिता पहली बार ससुराल के करवे से ही पूजा करती है।
- •इस दिन सोलह श्रृंगार, विशेषकर लाल या चटकीले रंग का जोड़ा, चूड़ियां, सिंदूर और मेहंदी शुभ माने जाते हैं।
- •पहले करवा चौथ से जुड़े रिवाज क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग होते हैं — अपनी परंपरा बड़ों से पूछ लें।
करवा क्या है और इसका महत्व
"करवा" मिट्टी का टोंटीदार पात्र है, और "चौथ" का अर्थ है चतुर्थी — इसी से व्रत का नाम पड़ा। करवे को जल से भरकर उसमें चावल या गेहूं डालकर पूजा में रखा जाता है, और उसी से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा के बाद महिलाएं आपस में करवे बदलती हैं, और करवा सास या किसी सौभाग्यवती महिला को बायने के साथ भेंट किया जाता है। एक मान्यता के अनुसार यह पर्व रबी की बुआई के मौसम में आता है, जब मिट्टी के पात्र में भरे अन्न को समृद्धि का प्रतीक माना जाता था।
करवा चौथ के बाद: अहोई अष्टमी 2027
करवा चौथ के चार दिन बाद, शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2027 को अहोई अष्टमी है, जब माताएं संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखकर तारों को अर्घ्य देती हैं।
सारांश
करवा चौथ 2027 सोमवार, 18 अक्टूबर को है; चंद्रोदय दिल्ली में शाम 7:35 और जयपुर में 7:45, पूजा मुहूर्त शाम 5:49–7:04 (दिल्ली)। सूर्योदय पर तृतीया होने के बावजूद व्रत 18 अक्टूबर को ही है। आगे के त्योहार — धनतेरस 2027 और दिवाली 2027।



