धनतेरस 2027: संक्षिप्त उत्तर
धनतेरस (धनत्रयोदशी) 2027 बुधवार, 27 अक्टूबर 2027 को है। नई दिल्ली में पूजा मुहूर्त शाम 6:42 से रात 8:14 तक (1 घंटा 32 मिनट) है। प्रदोष काल शाम 5:40 से 8:14 और वृषभ काल शाम 6:42 से 8:38 तक है। त्रयोदशी तिथि 27 अक्टूबर रात 1:03 से रात 10:49 तक है — इसलिए 27 अक्टूबर का पूरा दिन ख़रीदारी के लिए शुभ है।
| विवरण | 2027 (दिल्ली) |
|---|---|
| धनतेरस | बुधवार, 27 अक्टूबर |
| पूजा मुहूर्त | शाम 6:42 – रात 8:14 |
| प्रदोष काल | शाम 5:40 – रात 8:14 |
| वृषभ काल | शाम 6:42 – रात 8:38 |
| त्रयोदशी तिथि | 27 अक्टूबर रात 1:03 – रात 10:49 |
| इसी दिन | बुध प्रदोष व्रत, काली चौदस, हनुमान पूजा |
| गोवत्स द्वादशी | मंगलवार, 26 अक्टूबर |
जयपुर में प्रदोष और वृषभ काल दिल्ली से लगभग 7–9 मिनट बाद शुरू होंगे — अपने शहर का समय [पंचांग](/panchang) में देखें।
धनतेरस 27 अक्टूबर को ही क्यों?
धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाई जाती है, और इसकी पूजा प्रदोष काल में त्रयोदशी होने पर की जाती है। 2027 में त्रयोदशी 27 अक्टूबर की रात 1:03 (यानी 26-27 की मध्यरात्रि के बाद) से शुरू होकर 27 अक्टूबर रात 10:49 तक है — यानी 27 अक्टूबर का पूरा दिन और प्रदोष काल त्रयोदशी में है। इसलिए धनतेरस 27 अक्टूबर को है।
इस वर्ष का विशेष संयोग: त्रयोदशी रात 10:49 पर समाप्त होकर चतुर्दशी शुरू हो जाती है, इसलिए 27 अक्टूबर की रात ही काली चौदस और हनुमान पूजा भी है। साथ ही बुधवार होने से इस दिन बुध प्रदोष व्रत भी है। प्रदोष के बारे में — प्रदोष व्रत क्या है?
धनतेरस का महत्व
- •धन्वंतरि जयंती: समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि — आयुर्वेद के देवता — अमृत कलश लेकर इसी दिन प्रकट हुए थे। इसलिए धनतेरस आरोग्य (स्वास्थ्य) का पर्व भी है।
- •लक्ष्मी और कुबेर पूजा: धन और समृद्धि की कामना से माता लक्ष्मी और धनाध्यक्ष कुबेर की पूजा की जाती है।
- •यम दीपदान: इस दिन यमराज के निमित्त दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
- •दीपोत्सव का आरंभ: धनतेरस से पांच दिन का दिवाली उत्सव शुरू होता है।
धनतेरस पूजा विधि
- 1शाम को घर साफ करके मुख्य द्वार पर रंगोली और दीपक सजाएं।
- 2उत्तर दिशा में चौकी पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।
- 3प्रदोष काल (शाम 6:42–8:14) में पूजा करें — रोली, अक्षत, फूल, धूप-दीप अर्पित करें।
- 4भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई और औषधीय पौधे (तुलसी, गिलोय) अर्पित करें; मंत्र — "ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः"।
- 5कुबेर मंत्र — "ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा"।
- 6नए ख़रीदे बर्तन या सिक्के पूजा में रखें।
- 7आरती करके प्रसाद बांटें।
यम दीपदान विधि
- •आटे का चौमुखा दीपक बनाकर उसमें सरसों का तेल डालें।
- •प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें।
- •यमराज से परिवार की रक्षा और अकाल मृत्यु से बचाव की प्रार्थना करें।
- •दीपक रखने के बाद उसे पलटकर न देखें — ऐसी परंपरा है।
धनतेरस पर क्या ख़रीदें?
| ख़रीदें | मान्यता |
|---|---|
| सोना-चांदी, सिक्के | लक्ष्मी का प्रतीक, धन वृद्धि |
| पीतल/तांबे के बर्तन | धन्वंतरि का अमृत कलश |
| झाड़ू | दरिद्रता दूर करना |
| साबुत धनिया | समृद्धि; बोने से हरियाली |
| गोमती चक्र, कौड़ी | लक्ष्मी कृपा |
| नया बही-खाता | व्यापार में वृद्धि |
न ख़रीदें (परंपरा के अनुसार): लोहे का सामान, धारदार वस्तुएं (चाकू, कैंची), कांच के बर्तन, काले रंग की वस्तुएं और प्लास्टिक। आजकल वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान ख़रीदना भी प्रचलित है — इसके लिए राहुकाल से बचें; बुधवार को राहुकाल सामान्यतः दोपहर 12 से 1:30 के आसपास होता है — राहु काल क्या होता है?। वाहन के लिए — गाड़ी ख़रीदने का मुहूर्त।
गोवत्स द्वादशी (वाघ बारस) 2027
धनतेरस से एक दिन पहले, मंगलवार, 26 अक्टूबर को गोवत्स द्वादशी है, जब गाय और बछड़े की पूजा की जाती है। महाराष्ट्र में इसे वसु बारस कहते हैं।
समुद्र मंथन और भगवान धन्वंतरि
देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकि नाग को रस्सी बनाकर क्षीरसागर का मंथन किया। मंथन से चौदह रत्न निकले — हलाहल विष, कामधेनु, उच्चैःश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, अप्सरा रंभा, माता लक्ष्मी, वारुणी, चंद्रमा, शंख, धनुष और अंत में अमृत कलश लेकर भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए। धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार और आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है। इसीलिए धनतेरस पर धन्वंतरि पूजा करके परिवार के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की जाती है — "पहला सुख निरोगी काया"।
यम दीपदान की कथा (राजा हिम के पुत्र की कथा)
राजा हिम के पुत्र की कुंडली में लिखा था कि विवाह के चौथे दिन सर्प-दंश से उसकी मृत्यु होगी। उसकी पत्नी ने उस रात कमरे के द्वार पर सोने-चांदी के आभूषणों और सिक्कों का ढेर लगा दिया, चारों ओर दीपक जला दिए और रात भर पति को कहानियां व गीत सुनाकर जगाए रखा। जब यमराज सर्प के रूप में आए, तो दीपकों और आभूषणों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं, और वे आभूषणों के ढेर पर बैठकर कहानियां सुनते रहे। सुबह होने पर वे बिना प्राण लिए लौट गए। तभी से धनतेरस की रात यमराज के लिए दीपक जलाने और नए धातु के सामान ख़रीदने की परंपरा मानी जाती है।
धनतेरस पर झाड़ू क्यों ख़रीदते हैं?
झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि यह घर से गंदगी और दरिद्रता को बाहर करती है। धनतेरस पर नई झाड़ू ख़रीदकर उस पर सफेद धागा बांधने और दिवाली की सुबह से उसका उपयोग शुरू करने की परंपरा है। ध्यान रखें — झाड़ू को पैर न लगाएं और उसे खड़ा न रखें, छिपाकर लिटाकर रखें।
धनतेरस पर कितने दीपक जलाएं?
परंपरा में धनतेरस की शाम 13 दीपक जलाने की बात कही जाती है — त्रयोदशी के प्रतीक के रूप में। इनमें से एक चौमुखा दीपक यमराज के लिए दक्षिण दिशा में, एक तुलसी के पास, एक मुख्य द्वार पर और बाकी घर के अलग-अलग कोनों में रखे जाते हैं।
धनतेरस 2027: एक नज़र में मुख्य बातें
- •तारीख: बुधवार, 27 अक्टूबर 2027
- •पूजा मुहूर्त: शाम 6:42 से 8:14 (दिल्ली)
- •ख़रीदारी: त्रयोदशी रहते दिन भर (रात 10:49 तक), राहुकाल छोड़कर
- •यम दीपदान: प्रदोष काल में, दक्षिण दिशा की ओर चौमुखा दीपक
- •इसी दिन: बुध प्रदोष, और रात में काली चौदस व हनुमान पूजा
- •अगले दिन: नरक चतुर्दशी (28 अक्टूबर) — अभ्यंग स्नान सुबह 5:06 से 6:30
धनतेरस का संदेश यह भी है कि असली धन स्वास्थ्य है — इसलिए इस दिन परिवार के स्वास्थ्य की जांच करवाने, किसी ज़रूरतमंद को दवा दिलाने या आयुर्वेदिक पौधा (तुलसी, गिलोय, एलोवेरा) लगाने का संकल्प भी लिया जा सकता है।
सारांश
धनतेरस 2027 बुधवार, 27 अक्टूबर को है; पूजा मुहूर्त दिल्ली में शाम 6:42 से 8:14। त्रयोदशी रात 10:49 तक रहने से पूरे दिन ख़रीदारी शुभ है; शाम को यम दीपदान अवश्य करें। आगे — दिवाली 2027 कब है?



