🌸व्रत एवं त्यौहारप्रामाणिक वैदिक शास्त्र सूत्र

धनतेरस 2027 कब है? पूजा मुहूर्त, यम दीपदान और ख़रीदारी

धनतेरस 2027 बुधवार 27 अक्टूबर को है। पूजा मुहूर्त शाम 6:42–8:14 (दिल्ली), प्रदोष और वृषभ काल, त्रयोदशी तिथि, यम दीपदान, धन्वंतरि पूजा और क्या ख़रीदें।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·6 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 9 अक्टू॰ 2026
WhatsApp शेयर
0%
धनतेरस 2027 कब है? पूजा मुहूर्त, यम दीपदान और ख़रीदारी
✨प्रामाणिक वैदिक संदर्भ सचित्र

मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

धनतेरस 2027 बुधवार 27 अक्टूबर को है। पूजा मुहूर्त शाम 6:42–8:14 (दिल्ली), प्रदोष और वृषभ काल, त्रयोदशी तिथि, यम दीपदान, धन्वंतरि पूजा और क्या ख़रीदें।

📜 प्रामाणिक ग्रंथ सूत्र⏱️ 6 मिनट में पूर्ण समझ🙏 सटीक ज्योतिषीय उपाय

धनतेरस 2027: संक्षिप्त उत्तर

धनतेरस (धनत्रयोदशी) 2027 बुधवार, 27 अक्टूबर 2027 को है। नई दिल्ली में पूजा मुहूर्त शाम 6:42 से रात 8:14 तक (1 घंटा 32 मिनट) है। प्रदोष काल शाम 5:40 से 8:14 और वृषभ काल शाम 6:42 से 8:38 तक है। त्रयोदशी तिथि 27 अक्टूबर रात 1:03 से रात 10:49 तक है — इसलिए 27 अक्टूबर का पूरा दिन ख़रीदारी के लिए शुभ है।

विवरण2027 (दिल्ली)
धनतेरसबुधवार, 27 अक्टूबर
पूजा मुहूर्तशाम 6:42 – रात 8:14
प्रदोष कालशाम 5:40 – रात 8:14
वृषभ कालशाम 6:42 – रात 8:38
त्रयोदशी तिथि27 अक्टूबर रात 1:03 – रात 10:49
इसी दिनबुध प्रदोष व्रत, काली चौदस, हनुमान पूजा
गोवत्स द्वादशीमंगलवार, 26 अक्टूबर

जयपुर में प्रदोष और वृषभ काल दिल्ली से लगभग 7–9 मिनट बाद शुरू होंगे — अपने शहर का समय [पंचांग](/panchang) में देखें।

धनतेरस 27 अक्टूबर को ही क्यों?

धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाई जाती है, और इसकी पूजा प्रदोष काल में त्रयोदशी होने पर की जाती है। 2027 में त्रयोदशी 27 अक्टूबर की रात 1:03 (यानी 26-27 की मध्यरात्रि के बाद) से शुरू होकर 27 अक्टूबर रात 10:49 तक है — यानी 27 अक्टूबर का पूरा दिन और प्रदोष काल त्रयोदशी में है। इसलिए धनतेरस 27 अक्टूबर को है।

इस वर्ष का विशेष संयोग: त्रयोदशी रात 10:49 पर समाप्त होकर चतुर्दशी शुरू हो जाती है, इसलिए 27 अक्टूबर की रात ही काली चौदस और हनुमान पूजा भी है। साथ ही बुधवार होने से इस दिन बुध प्रदोष व्रत भी है। प्रदोष के बारे में — प्रदोष व्रत क्या है?

धनतेरस का महत्व

  • •धन्वंतरि जयंती: समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि — आयुर्वेद के देवता — अमृत कलश लेकर इसी दिन प्रकट हुए थे। इसलिए धनतेरस आरोग्य (स्वास्थ्य) का पर्व भी है।
  • •लक्ष्मी और कुबेर पूजा: धन और समृद्धि की कामना से माता लक्ष्मी और धनाध्यक्ष कुबेर की पूजा की जाती है।
  • •यम दीपदान: इस दिन यमराज के निमित्त दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
  • •दीपोत्सव का आरंभ: धनतेरस से पांच दिन का दिवाली उत्सव शुरू होता है।

धनतेरस पूजा विधि

  1. 1शाम को घर साफ करके मुख्य द्वार पर रंगोली और दीपक सजाएं।
  2. 2उत्तर दिशा में चौकी पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।
  3. 3प्रदोष काल (शाम 6:42–8:14) में पूजा करें — रोली, अक्षत, फूल, धूप-दीप अर्पित करें।
  4. 4भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई और औषधीय पौधे (तुलसी, गिलोय) अर्पित करें; मंत्र — "ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः"।
  5. 5कुबेर मंत्र — "ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा"।
  6. 6नए ख़रीदे बर्तन या सिक्के पूजा में रखें।
  7. 7आरती करके प्रसाद बांटें।

यम दीपदान विधि

  • •आटे का चौमुखा दीपक बनाकर उसमें सरसों का तेल डालें।
  • •प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें।
  • •यमराज से परिवार की रक्षा और अकाल मृत्यु से बचाव की प्रार्थना करें।
  • •दीपक रखने के बाद उसे पलटकर न देखें — ऐसी परंपरा है।

धनतेरस पर क्या ख़रीदें?

ख़रीदेंमान्यता
सोना-चांदी, सिक्केलक्ष्मी का प्रतीक, धन वृद्धि
पीतल/तांबे के बर्तनधन्वंतरि का अमृत कलश
झाड़ूदरिद्रता दूर करना
साबुत धनियासमृद्धि; बोने से हरियाली
गोमती चक्र, कौड़ीलक्ष्मी कृपा
नया बही-खाताव्यापार में वृद्धि

न ख़रीदें (परंपरा के अनुसार): लोहे का सामान, धारदार वस्तुएं (चाकू, कैंची), कांच के बर्तन, काले रंग की वस्तुएं और प्लास्टिक। आजकल वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान ख़रीदना भी प्रचलित है — इसके लिए राहुकाल से बचें; बुधवार को राहुकाल सामान्यतः दोपहर 12 से 1:30 के आसपास होता है — राहु काल क्या होता है?। वाहन के लिए — गाड़ी ख़रीदने का मुहूर्त।

गोवत्स द्वादशी (वाघ बारस) 2027

धनतेरस से एक दिन पहले, मंगलवार, 26 अक्टूबर को गोवत्स द्वादशी है, जब गाय और बछड़े की पूजा की जाती है। महाराष्ट्र में इसे वसु बारस कहते हैं।

समुद्र मंथन और भगवान धन्वंतरि

देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकि नाग को रस्सी बनाकर क्षीरसागर का मंथन किया। मंथन से चौदह रत्न निकले — हलाहल विष, कामधेनु, उच्चैःश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, अप्सरा रंभा, माता लक्ष्मी, वारुणी, चंद्रमा, शंख, धनुष और अंत में अमृत कलश लेकर भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए। धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार और आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है। इसीलिए धनतेरस पर धन्वंतरि पूजा करके परिवार के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की जाती है — "पहला सुख निरोगी काया"।

यम दीपदान की कथा (राजा हिम के पुत्र की कथा)

राजा हिम के पुत्र की कुंडली में लिखा था कि विवाह के चौथे दिन सर्प-दंश से उसकी मृत्यु होगी। उसकी पत्नी ने उस रात कमरे के द्वार पर सोने-चांदी के आभूषणों और सिक्कों का ढेर लगा दिया, चारों ओर दीपक जला दिए और रात भर पति को कहानियां व गीत सुनाकर जगाए रखा। जब यमराज सर्प के रूप में आए, तो दीपकों और आभूषणों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं, और वे आभूषणों के ढेर पर बैठकर कहानियां सुनते रहे। सुबह होने पर वे बिना प्राण लिए लौट गए। तभी से धनतेरस की रात यमराज के लिए दीपक जलाने और नए धातु के सामान ख़रीदने की परंपरा मानी जाती है।

धनतेरस पर झाड़ू क्यों ख़रीदते हैं?

झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि यह घर से गंदगी और दरिद्रता को बाहर करती है। धनतेरस पर नई झाड़ू ख़रीदकर उस पर सफेद धागा बांधने और दिवाली की सुबह से उसका उपयोग शुरू करने की परंपरा है। ध्यान रखें — झाड़ू को पैर न लगाएं और उसे खड़ा न रखें, छिपाकर लिटाकर रखें।

धनतेरस पर कितने दीपक जलाएं?

परंपरा में धनतेरस की शाम 13 दीपक जलाने की बात कही जाती है — त्रयोदशी के प्रतीक के रूप में। इनमें से एक चौमुखा दीपक यमराज के लिए दक्षिण दिशा में, एक तुलसी के पास, एक मुख्य द्वार पर और बाकी घर के अलग-अलग कोनों में रखे जाते हैं।

धनतेरस 2027: एक नज़र में मुख्य बातें

  • •तारीख: बुधवार, 27 अक्टूबर 2027
  • •पूजा मुहूर्त: शाम 6:42 से 8:14 (दिल्ली)
  • •ख़रीदारी: त्रयोदशी रहते दिन भर (रात 10:49 तक), राहुकाल छोड़कर
  • •यम दीपदान: प्रदोष काल में, दक्षिण दिशा की ओर चौमुखा दीपक
  • •इसी दिन: बुध प्रदोष, और रात में काली चौदस व हनुमान पूजा
  • •अगले दिन: नरक चतुर्दशी (28 अक्टूबर) — अभ्यंग स्नान सुबह 5:06 से 6:30

धनतेरस का संदेश यह भी है कि असली धन स्वास्थ्य है — इसलिए इस दिन परिवार के स्वास्थ्य की जांच करवाने, किसी ज़रूरतमंद को दवा दिलाने या आयुर्वेदिक पौधा (तुलसी, गिलोय, एलोवेरा) लगाने का संकल्प भी लिया जा सकता है।

सारांश

धनतेरस 2027 बुधवार, 27 अक्टूबर को है; पूजा मुहूर्त दिल्ली में शाम 6:42 से 8:14। त्रयोदशी रात 10:49 तक रहने से पूरे दिन ख़रीदारी शुभ है; शाम को यम दीपदान अवश्य करें। आगे — दिवाली 2027 कब है?

यूट्यूब शॉर्ट्स वीडियोनवीनतम सूत्र

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

नित्य संध्या एवं पूजा में भगवान विष्णु की आरती का आध्यात्मिक महत्व।

मात्र 60 सेकंड में संपूर्ण नियम व वैदिक सूत्र समझें
प्रमाणिक गणना व सरल भाषा में व्याख्या
ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा
Shorts

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

▶ 60 सेकंड में देखेंYouTube पर खोलें
🌸 व्रत एवं पर्व

आगामी व्रत, त्यौहार व पूजा विधि की संपूर्ण सूची

एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा, अमावस्या एवं सभी प्रमुख पर्वों की सटीक शास्त्रसम्मत तिथियां देखें।

पर्व व त्यौहार कैलेंडर देखें →
पाठक समीक्षा

क्या यह ज्योतिषीय लेख आपके लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक रहा?

ॐ

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र

प्रमाणित वैदिक शोध मंडल

यह आलेख महर्षि पराशर विरचित वृहत्पाराशर होराशास्त्र, नारद संहिता, मुहूर्त चिंतामणि एवं शास्त्रीय सूर्यसिद्धांत के सूत्रों के गहन अध्ययन व शोध के आधार पर संकलित किया गया है।

व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श

क्या आपकी कुंडली में यह योग या दोष सक्रिय है?

हमारे 24x7 दैविक AI ज्योतिषी से अपनी जन्म तिथि व समय के आधार पर सटीक विश्लेषण प्राप्त करें।

AI ज्योतिषी से पूछें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

धनतेरस 2027 कब है?

धनतेरस बुधवार, 27 अक्टूबर 2027 को है।

धनतेरस 2027 का पूजा मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में शाम 6:42 से रात 8:14 तक पूजा मुहूर्त है।

2027 में त्रयोदशी तिथि कब से कब तक है?

त्रयोदशी 27 अक्टूबर रात 1:03 से रात 10:49 तक है।

धनतेरस 2027 पर ख़रीदारी का शुभ समय क्या है?

त्रयोदशी पूरे दिन रहने से 27 अक्टूबर को दिन भर ख़रीदारी शुभ है; राहुकाल से बचें।

यम दीपदान कैसे करें?

आटे का चौमुखा दीपक सरसों के तेल से जलाकर प्रदोष काल में मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें।

धनतेरस पर क्या नहीं ख़रीदना चाहिए?

परंपरा के अनुसार लोहे का सामान, धारदार वस्तुएं, कांच और काले रंग की वस्तुएं नहीं ख़रीदी जातीं।

आज का पंचांग (जयपुर)2026-10-16
तिथिषष्ठी
नक्षत्रमूल
सूर्योदय06:26 AM
अभिजित मुहूर्त11:49 AM - 12:35 PM
आज का संपूर्ण पंचांग देखें
@ApnaPanchang
🪐विशेष सूत्र

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

नित्य संध्या एवं पूजा में भगवान विष्णु की आरती का आध्यात्मिक महत्व।

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा
Shorts

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

▶ 60 सेकंड में देखेंYouTube पर खोलें
YouTube पर सब्सक्राइब करें
नित्य पंचांग एवं वैदिक उपायसभी शॉर्ट्स
आधिकारिक मोबाइल ऐप4.8·100K+ डाउनलोड्स
पंचांग 2026: कुंडली एवं AI ज्योतिषी
टॉप ज्योतिष ऐप

पंचांग 2026: कुंडली एवं AI ज्योतिषी

दैनिक पंचांग, चौघड़िया, व्रत-त्योहार, वैदिक जन्म कुंडली एवं 24/7 AI ज्योतिषी परामर्श।

  • सटीक दैनिक पंचांग व सूर्योदय गणना
  • चौघड़िया, अभिजित व राहुकाल मुहूर्त
Google Play से निःशुल्क पाएं
🔮 निःशुल्क जन्म पत्रिका

अपनी संपूर्ण जन्म कुंडली बनाएं

सटीक लग्न, नवमांश, चंद्र राशि, महादशा, कालसर्प व मांगलिक दोष की गणना तुरंत प्राप्त करें।

कुंडली बनाएं (100% Free) →

अन्य संबंधित ज्योतिष लेख

सभी लेख →
🌸 व्रत एवं त्यौहार6 min

एकादशी क्या होती है?

🌸 व्रत एवं त्यौहार5 min

पुष्कर मेला और कार्तिक पंचांग