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प्रदोष व्रत क्या है? त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल कैसे देखें?

प्रदोष व्रत क्या है, प्रदोष काल में त्रयोदशी से तारीख कैसे तय होती है, सोम, भौम और शनि प्रदोष के लाभ, पूजा विधि, और 2027 की सभी 25 प्रदोष तिथियां पूजा समय सहित।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·6 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 9 अक्टू॰ 2026
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प्रदोष व्रत क्या है? त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल कैसे देखें?
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मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

प्रदोष व्रत क्या है, प्रदोष काल में त्रयोदशी से तारीख कैसे तय होती है, सोम, भौम और शनि प्रदोष के लाभ, पूजा विधि, और 2027 की सभी 25 प्रदोष तिथियां पूजा समय सहित।

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प्रदोष व्रत क्या है? संक्षिप्त उत्तर

प्रदोष व्रत भगवान शिव का व्रत है, जो हर पक्ष की त्रयोदशी (तेरहवीं तिथि) को — यानी महीने में दो बार — रखा जाता है। मुख्य नियम यह है कि व्रत उस दिन रखा जाता है, जिस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि हो — प्रदोष काल वह गोधूलि के बाद का समय है, जो सूर्यास्त से शुरू होकर लगभग ढाई घंटे तक रहता है; इसी समय शिव पूजा की जाती है। इसलिए कभी-कभी प्रदोष व्रत सूर्योदय वाली त्रयोदशी से एक दिन पहले भी पड़ जाता है। प्रदोष का नाम वार के अनुसार होता है — सोम प्रदोष (सोमवार), भौम प्रदोष (मंगलवार) और शनि प्रदोष (शनिवार) विशेष महत्वपूर्ण माने जाते हैं। 2027 में कुल 25 प्रदोष व्रत हैं।

प्रदोष काल क्या है?

प्रदोष का अर्थ है "रात्रि का आरंभ"। सूर्यास्त के बाद का वह समय, जब दिन और रात मिलते हैं, प्रदोष काल कहलाता है। सामान्यतः इसे सूर्यास्त से लगभग 2 घंटे 24 मिनट (छह घटी) तक माना जाता है; कुछ परंपराएं सूर्यास्त से 45 मिनट पहले से 45 मिनट बाद तक के समय को मुख्य प्रदोष मानती हैं। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव कैलाश पर आनंद तांडव करते हैं और सभी देवता उनकी स्तुति करते हैं — इसलिए यह शिव पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय है। दिवाली की लक्ष्मी पूजा भी प्रदोष काल में ही होती है। पढ़ें — दिवाली पूजा का मुहूर्त कैसे देखें?

प्रदोष व्रत की तारीख कैसे तय होती है?

  1. 1अपने शहर का सूर्यास्त समय देखें।
  2. 2देखें कि सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में कौन सी तिथि है।
  3. 3जिस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी हो, वही प्रदोष व्रत का दिन है।

चूंकि यह सूर्यास्त पर निर्भर है, इसलिए दो शहरों में प्रदोष व्रत की तारीख कभी-कभी अलग हो सकती है। सूर्योदय-आधारित तिथि नियम से अलग इस नियम के बारे में पढ़ें — सूर्योदय के अनुसार व्रत की तारीख कैसे तय होती है?

प्रदोष व्रत 2027 की सूची (नई दिल्ली)

तारीखवारप्रदोषपूजा समय
5 जनवरीमंगलवारभौम प्रदोषशाम 5:38 – 8:21
20 जनवरीबुधवारबुध प्रदोषशाम 5:50 – 8:31
3 फरवरीबुधवारबुध प्रदोषशाम 6:02 – 8:39
18 फरवरीगुरुवारगुरु प्रदोषशाम 6:13 – 8:46
5 मार्चशुक्रवारशुक्र प्रदोषशाम 6:23 – 8:51
20 मार्चशनिवारशनि प्रदोषशाम 6:32 – 8:45
4 अप्रैलरविवाररवि प्रदोषशाम 6:40 – 8:58
18 अप्रैलरविवाररवि प्रदोषशाम 6:48 – 9:01
3 मईसोमवारसोम प्रदोषरात 8:03 – 9:06
17 मईसोमवारसोम प्रदोषशाम 7:06 – 9:10
2 जूनबुधवारबुध प्रदोषशाम 7:15 – 9:17
16 जूनबुधवारबुध प्रदोषशाम 7:21 – 9:21
1 जुलाईगुरुवारगुरु प्रदोषशाम 7:23 – 9:24
15 जुलाईगुरुवारगुरु प्रदोषशाम 7:21 – 9:23
31 जुलाईशनिवारशनि प्रदोषशाम 7:13 – 9:19
14 अगस्तशनिवारशनि प्रदोषशाम 7:02 – 9:11
29 अगस्तरविवाररवि प्रदोषशाम 6:46 – 9:01
13 सितंबरसोमवारसोम प्रदोषशाम 6:29 – 8:48
27 सितंबरसोमवारसोम प्रदोषशाम 6:12 – 8:36
12 अक्टूबरमंगलवारभौम प्रदोषशाम 5:55 – 8:24
27 अक्टूबरबुधवारबुध प्रदोष (धनतेरस)शाम 5:40 – 8:14
11 नवंबरगुरुवारगुरु प्रदोषशाम 5:30 – 8:08
25 नवंबरगुरुवारगुरु प्रदोषशाम 5:24 – 8:06
11 दिसंबरशनिवारशनि प्रदोषशाम 5:25 – 8:09
25 दिसंबरशनिवारशनि प्रदोषशाम 5:31 – 8:15

स्रोत: प्रमुख पंचांगों की दृक् गणना (नई दिल्ली)। अपने शहर का सूर्यास्त और प्रदोष समय [पंचांग](/panchang) में देखें। कुछ तिथियों पर पूजा समय सूर्यास्त के कुछ देर बाद शुरू होता है, क्योंकि त्रयोदशी तभी आरंभ होती है।

वार के अनुसार प्रदोष व्रत का फल (पारंपरिक मान्यता)

प्रदोषमान्यता
रवि प्रदोषआरोग्य और दीर्घायु
सोम प्रदोषमनोकामना पूर्ति, मन की शांति
भौम प्रदोषऋण मुक्ति और रोगों से राहत
बुध प्रदोषसफलता और बुद्धि
गुरु प्रदोषशत्रुओं पर विजय, ज्ञान
शुक्र प्रदोषदांपत्य सुख, समृद्धि
शनि प्रदोषसंतान सुख, शनि पीड़ा से राहत

प्रदोष व्रत की कथा

स्कंद पुराण में प्रदोष व्रत की कई कथाएं हैं। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार चंद्रमा को दक्ष प्रजापति के श्राप से क्षय रोग हो गया था। चंद्रमा ने त्रयोदशी के प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना की, और शिव जी ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण करके रोग से मुक्त किया। एक अन्य कथा के अनुसार समुद्र मंथन से निकले विष को पीकर भगवान शिव ने संसार की रक्षा की, और प्रसन्न देवताओं ने प्रदोष काल में उनकी स्तुति की, तब शिव जी ने आनंद तांडव किया। इसलिए प्रदोष काल शिव कृपा का समय माना जाता है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  1. 1सुबह: स्नान करके भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें; दिन भर फलाहार करें।
  2. 2सूर्यास्त से पहले: फिर से स्नान करें या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  3. 3प्रदोष काल में: शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
  4. 4अर्पण: बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, अक्षत, चंदन और भस्म अर्पित करें।
  5. 5मंत्र: 'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जाप या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
  6. 6कथा और आरती: उस वार की प्रदोष व्रत कथा सुनें और शिव आरती करें।
  7. 7पारण: पूजा के बाद सात्विक भोजन से व्रत खोलें; कई परंपराओं में अगले दिन सुबह पारण होता है।

प्रदोष व्रत के नियम

  • •व्रत के दिन अनाज, नमक (कुछ परंपराओं में) और तामसिक भोजन से परहेज़।
  • •शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर और तुलसी अर्पित नहीं की जाती।
  • •11 या 26 प्रदोष व्रत करने के बाद उद्यापन करने की परंपरा है।
  • •क्रोध, निंदा और कटु वचन से बचें।

प्रदोष और मासिक शिवरात्रि

प्रदोष व्रत त्रयोदशी को होता है, और अगले दिन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि आती है। कई शिव भक्त दोनों व्रत लगातार रखते हैं। फाल्गुन मास की यही चतुर्दशी महाशिवरात्रि कहलाती है — 2027 में 5 मार्च को शुक्र प्रदोष और 6 मार्च को महाशिवरात्रि है। विस्तार से — महाशिवरात्रि 2027 कब है?

सारांश

प्रदोष व्रत भगवान शिव का त्रयोदशी व्रत है, जो उस दिन रखा जाता है जब शाम के प्रदोष काल में त्रयोदशी हो। 2027 में 25 प्रदोष व्रत हैं। अपने शहर का सूर्यास्त और प्रदोष समय पंचांग में देखें। महाशिवरात्रि के बारे में पढ़ें — महाशिवरात्रि 2027 कब है?

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रदोष व्रत क्या है?

प्रदोष व्रत भगवान शिव का व्रत है, जो हर पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है और शाम के प्रदोष काल में शिव पूजा की जाती है।

प्रदोष काल कब होता है?

प्रदोष काल सूर्यास्त से शुरू होकर लगभग ढाई घंटे तक रहता है; इसे शिव पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है।

प्रदोष व्रत की तारीख कैसे तय होती है?

जिस दिन सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि हो, उसी दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है।

2027 में कितने प्रदोष व्रत हैं?

2027 में नई दिल्ली के अनुसार 25 प्रदोष व्रत हैं।

शनि प्रदोष 2027 में कब है?

2027 में शनि प्रदोष 20 मार्च, 31 जुलाई, 14 अगस्त, 11 दिसंबर और 25 दिसंबर को है।

सोम प्रदोष का क्या महत्व है?

सोमवार को पड़ने वाला सोम प्रदोष मनोकामना पूर्ति और मन की शांति के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

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