प्रदोष व्रत क्या है? संक्षिप्त उत्तर
प्रदोष व्रत भगवान शिव का व्रत है, जो हर पक्ष की त्रयोदशी (तेरहवीं तिथि) को — यानी महीने में दो बार — रखा जाता है। मुख्य नियम यह है कि व्रत उस दिन रखा जाता है, जिस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि हो — प्रदोष काल वह गोधूलि के बाद का समय है, जो सूर्यास्त से शुरू होकर लगभग ढाई घंटे तक रहता है; इसी समय शिव पूजा की जाती है। इसलिए कभी-कभी प्रदोष व्रत सूर्योदय वाली त्रयोदशी से एक दिन पहले भी पड़ जाता है। प्रदोष का नाम वार के अनुसार होता है — सोम प्रदोष (सोमवार), भौम प्रदोष (मंगलवार) और शनि प्रदोष (शनिवार) विशेष महत्वपूर्ण माने जाते हैं। 2027 में कुल 25 प्रदोष व्रत हैं।
प्रदोष काल क्या है?
प्रदोष का अर्थ है "रात्रि का आरंभ"। सूर्यास्त के बाद का वह समय, जब दिन और रात मिलते हैं, प्रदोष काल कहलाता है। सामान्यतः इसे सूर्यास्त से लगभग 2 घंटे 24 मिनट (छह घटी) तक माना जाता है; कुछ परंपराएं सूर्यास्त से 45 मिनट पहले से 45 मिनट बाद तक के समय को मुख्य प्रदोष मानती हैं। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव कैलाश पर आनंद तांडव करते हैं और सभी देवता उनकी स्तुति करते हैं — इसलिए यह शिव पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय है। दिवाली की लक्ष्मी पूजा भी प्रदोष काल में ही होती है। पढ़ें — दिवाली पूजा का मुहूर्त कैसे देखें?
प्रदोष व्रत की तारीख कैसे तय होती है?
- 1अपने शहर का सूर्यास्त समय देखें।
- 2देखें कि सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में कौन सी तिथि है।
- 3जिस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी हो, वही प्रदोष व्रत का दिन है।
चूंकि यह सूर्यास्त पर निर्भर है, इसलिए दो शहरों में प्रदोष व्रत की तारीख कभी-कभी अलग हो सकती है। सूर्योदय-आधारित तिथि नियम से अलग इस नियम के बारे में पढ़ें — सूर्योदय के अनुसार व्रत की तारीख कैसे तय होती है?
प्रदोष व्रत 2027 की सूची (नई दिल्ली)
| तारीख | वार | प्रदोष | पूजा समय |
|---|---|---|---|
| 5 जनवरी | मंगलवार | भौम प्रदोष | शाम 5:38 – 8:21 |
| 20 जनवरी | बुधवार | बुध प्रदोष | शाम 5:50 – 8:31 |
| 3 फरवरी | बुधवार | बुध प्रदोष | शाम 6:02 – 8:39 |
| 18 फरवरी | गुरुवार | गुरु प्रदोष | शाम 6:13 – 8:46 |
| 5 मार्च | शुक्रवार | शुक्र प्रदोष | शाम 6:23 – 8:51 |
| 20 मार्च | शनिवार | शनि प्रदोष | शाम 6:32 – 8:45 |
| 4 अप्रैल | रविवार | रवि प्रदोष | शाम 6:40 – 8:58 |
| 18 अप्रैल | रविवार | रवि प्रदोष | शाम 6:48 – 9:01 |
| 3 मई | सोमवार | सोम प्रदोष | रात 8:03 – 9:06 |
| 17 मई | सोमवार | सोम प्रदोष | शाम 7:06 – 9:10 |
| 2 जून | बुधवार | बुध प्रदोष | शाम 7:15 – 9:17 |
| 16 जून | बुधवार | बुध प्रदोष | शाम 7:21 – 9:21 |
| 1 जुलाई | गुरुवार | गुरु प्रदोष | शाम 7:23 – 9:24 |
| 15 जुलाई | गुरुवार | गुरु प्रदोष | शाम 7:21 – 9:23 |
| 31 जुलाई | शनिवार | शनि प्रदोष | शाम 7:13 – 9:19 |
| 14 अगस्त | शनिवार | शनि प्रदोष | शाम 7:02 – 9:11 |
| 29 अगस्त | रविवार | रवि प्रदोष | शाम 6:46 – 9:01 |
| 13 सितंबर | सोमवार | सोम प्रदोष | शाम 6:29 – 8:48 |
| 27 सितंबर | सोमवार | सोम प्रदोष | शाम 6:12 – 8:36 |
| 12 अक्टूबर | मंगलवार | भौम प्रदोष | शाम 5:55 – 8:24 |
| 27 अक्टूबर | बुधवार | बुध प्रदोष (धनतेरस) | शाम 5:40 – 8:14 |
| 11 नवंबर | गुरुवार | गुरु प्रदोष | शाम 5:30 – 8:08 |
| 25 नवंबर | गुरुवार | गुरु प्रदोष | शाम 5:24 – 8:06 |
| 11 दिसंबर | शनिवार | शनि प्रदोष | शाम 5:25 – 8:09 |
| 25 दिसंबर | शनिवार | शनि प्रदोष | शाम 5:31 – 8:15 |
स्रोत: प्रमुख पंचांगों की दृक् गणना (नई दिल्ली)। अपने शहर का सूर्यास्त और प्रदोष समय [पंचांग](/panchang) में देखें। कुछ तिथियों पर पूजा समय सूर्यास्त के कुछ देर बाद शुरू होता है, क्योंकि त्रयोदशी तभी आरंभ होती है।
वार के अनुसार प्रदोष व्रत का फल (पारंपरिक मान्यता)
| प्रदोष | मान्यता |
|---|---|
| रवि प्रदोष | आरोग्य और दीर्घायु |
| सोम प्रदोष | मनोकामना पूर्ति, मन की शांति |
| भौम प्रदोष | ऋण मुक्ति और रोगों से राहत |
| बुध प्रदोष | सफलता और बुद्धि |
| गुरु प्रदोष | शत्रुओं पर विजय, ज्ञान |
| शुक्र प्रदोष | दांपत्य सुख, समृद्धि |
| शनि प्रदोष | संतान सुख, शनि पीड़ा से राहत |
प्रदोष व्रत की कथा
स्कंद पुराण में प्रदोष व्रत की कई कथाएं हैं। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार चंद्रमा को दक्ष प्रजापति के श्राप से क्षय रोग हो गया था। चंद्रमा ने त्रयोदशी के प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना की, और शिव जी ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण करके रोग से मुक्त किया। एक अन्य कथा के अनुसार समुद्र मंथन से निकले विष को पीकर भगवान शिव ने संसार की रक्षा की, और प्रसन्न देवताओं ने प्रदोष काल में उनकी स्तुति की, तब शिव जी ने आनंद तांडव किया। इसलिए प्रदोष काल शिव कृपा का समय माना जाता है।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
- 1सुबह: स्नान करके भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें; दिन भर फलाहार करें।
- 2सूर्यास्त से पहले: फिर से स्नान करें या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- 3प्रदोष काल में: शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
- 4अर्पण: बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, अक्षत, चंदन और भस्म अर्पित करें।
- 5मंत्र: 'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जाप या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
- 6कथा और आरती: उस वार की प्रदोष व्रत कथा सुनें और शिव आरती करें।
- 7पारण: पूजा के बाद सात्विक भोजन से व्रत खोलें; कई परंपराओं में अगले दिन सुबह पारण होता है।
प्रदोष व्रत के नियम
- •व्रत के दिन अनाज, नमक (कुछ परंपराओं में) और तामसिक भोजन से परहेज़।
- •शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर और तुलसी अर्पित नहीं की जाती।
- •11 या 26 प्रदोष व्रत करने के बाद उद्यापन करने की परंपरा है।
- •क्रोध, निंदा और कटु वचन से बचें।
प्रदोष और मासिक शिवरात्रि
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को होता है, और अगले दिन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि आती है। कई शिव भक्त दोनों व्रत लगातार रखते हैं। फाल्गुन मास की यही चतुर्दशी महाशिवरात्रि कहलाती है — 2027 में 5 मार्च को शुक्र प्रदोष और 6 मार्च को महाशिवरात्रि है। विस्तार से — महाशिवरात्रि 2027 कब है?
सारांश
प्रदोष व्रत भगवान शिव का त्रयोदशी व्रत है, जो उस दिन रखा जाता है जब शाम के प्रदोष काल में त्रयोदशी हो। 2027 में 25 प्रदोष व्रत हैं। अपने शहर का सूर्यास्त और प्रदोष समय पंचांग में देखें। महाशिवरात्रि के बारे में पढ़ें — महाशिवरात्रि 2027 कब है?



