नया वाहन (कार, बाइक, स्कूटर या व्यावसायिक ट्रक) खरीदना प्रत्येक परिवार के लिए एक बड़ा आर्थिक निवेश और उत्साह का अवसर होता है। वैदिक ज्योतिष में वाहन का विचार जन्म कुंडली के चतुर्थ भाव (वाहन सुख) से किया जाता है। इसके कारक ग्रह शुक्र (सुख-सुविधा व सौंदर्य) और मंगल (मशीनरी, लोहा व ऊर्जा) हैं।
शुभ मुहूर्त में वाहन खरीदने और उसकी डिलीवरी लेने से वाहन दीर्घायु रहता है, यात्राएं सुरक्षित रहती हैं और वह परिवार के लिए सुख-समृद्धि लेकर आता है।
वाहन क्रय के प्रमुख ज्योतिषीय घटक
1. शुभ नक्षत्र:
वाहन मूलतः गतिमान वस्तु है, अतः चर (गतिशील) और सौम्य नक्षत्र इसके लिए सर्वोत्तम माने गए हैं:
• चर नक्षत्र: स्वाती, पुनर्वसु, श्रवण, धनिष्ठा एवं शतभिषा।
• ध्रुव एवं मृदु नक्षत्र: रोहिणी, हस्त, चित्रा, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा एवं उत्तराभाद्रपद।
2. अनुकूल वार (दिन):
• सोमवार: पारिवारिक व घरेलू वाहन के लिए शुभ।
• बुधवार: व्यापारिक, कमर्शियल या डिलीवरी वाहन के लिए अत्यंत फलदायी।
• गुरुवार: वाहन की दीर्घायु, मान-सम्मान एवं सुरक्षा के लिए श्रेष्ठ।
• शुक्रवार: वाहन के कारक शुक्र देव का दिन होने से कार व निजी वाहन की डिलीवरी के लिए सर्वोत्तम।
• त्याज्य: मंगलवार और शनिवार को सामान्यतः नई गाड़ी की डिलीवरी या कागजी अनुबंध करने से बचना चाहिए।
3. चौघड़िया एवं राहु काल का ध्यान:
शोरूम से गाड़ी बाहर निकालते समय यह सुनिश्चित करें कि उस समय राहु काल न चल रहा हो। दिन के शुभ, लाभ या अमृत चौघड़िया अथवा अभिजित मुहूर्त में ही चाबी हाथ में लेना और पहला प्रस्थान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
नवीन वाहन पूजा विधि
गाड़ी लेने के पश्चात निकटतम मंदिर (विशेषकर श्री गणेश या हनुमान मंदिर) में वाहन पूजा कराएं:
1. बोनट और स्टीयरिंग पर कुमकुम से ॐ और स्वास्तिक का चिह्न बनाएं।
2. वाहन के चारों पहियों के नीचे नींबू रखें और वाहन को आगे बढ़ाकर नींबू दबाएं (विघ्न निवारण का प्रतीक)।
3. कर्पूर आरती करें, पुष्पमाला अर्पित करें और नारियल फोड़कर प्रसाद वितरित करें।
अपना पंचांग के चौघड़िया और राहुकाल पंचांग से अपने नगर का शुभ समय देखकर वाहन क्रय की योजना बनाएं।



