राजस्थान में दशहरा 2026: संक्षिप्त उत्तर
दशहरा (विजयादशमी) 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। राजस्थान में विजय मुहूर्त जयपुर में दोपहर 2:06 से 2:51, जोधपुर में 2:17 से 3:03, उदयपुर में 2:15 से 3:01, कोटा में 2:06 से 2:52 और बीकानेर में 2:15 से 3:01 तक है (हर शहर में लगभग 46 मिनट)। दशमी तिथि 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 से 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 तक है, और श्रवण नक्षत्र 20 अक्टूबर शाम 6:02 तक रहेगा।
| शहर | विजय मुहूर्त |
|---|---|
| जयपुर | दोपहर 2:06 – 2:51 |
| कोटा | दोपहर 2:06 – 2:52 |
| उदयपुर | दोपहर 2:15 – 3:01 |
| बीकानेर | दोपहर 2:15 – 3:01 |
| जोधपुर | दोपहर 2:17 – 3:03 |
समय दृक् पंचांग की गणना पर आधारित हैं। अन्य शहरों के लिए [पंचांग](/panchang) देखें; अजमेर का समय जयपुर और जोधपुर के बीच होगा।
विजय मुहूर्त क्या है और राजस्थान में समय अलग क्यों?
विजय मुहूर्त दिन के 15 मुहूर्तों में से 11वां मुहूर्त है, जो दोपहर बाद आता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने इसी मुहूर्त में लंका पर विजय के लिए प्रस्थान किया था, इसलिए दशहरे पर नया काम, यात्रा, वाहन या संपत्ति की ख़रीद और शस्त्र पूजा इसी समय शुभ मानी जाती है। चूंकि मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त से गिना जाता है, इसलिए पूर्वी राजस्थान (जयपुर, कोटा) में यह पश्चिमी राजस्थान (जोधपुर, बीकानेर) से लगभग 10–11 मिनट पहले आता है। विस्तार से — विजय मुहूर्त क्या है?
20 अक्टूबर का दिन: नवमी और दशहरा साथ
2026 में 20 अक्टूबर की सुबह नवमी तिथि है, जो दोपहर 12:50 पर समाप्त होगी। इसलिए राजस्थान के परिवारों का दिन कुछ इस तरह रहेगा:
| समय | क्या करें |
|---|---|
| सुबह – दोपहर 12:50 तक | नवमी पूजा, हवन, कन्या पूजन |
| दोपहर 12:50 के बाद | नवरात्रि पारण, जवारे और कलश विसर्जन |
| विजय मुहूर्त (जयपुर 2:06–2:51) | शमी पूजा, अपराजिता पूजा, शस्त्र पूजा, नया काम |
| सूर्यास्त के बाद | रावण दहन, बड़ों का आशीर्वाद |
दशहरा 2026 की पूरी जानकारी — दशहरा 2026 कब है?
कोटा का राष्ट्रीय दशहरा मेला
राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध दशहरा उत्सव कोटा का राष्ट्रीय दशहरा मेला है, जो देश के सबसे बड़े दशहरा मेलों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत कोटा के पूर्व राजपरिवार के समय हुई थी। मेले में:
- •विशाल रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन दशहरे की शाम होता है, जिसे देखने आसपास के ज़िलों से लाखों लोग आते हैं।
- •कई दिनों तक चलने वाले मेले में कवि सम्मेलन, सांस्कृतिक संध्याएं, भजन संध्या और हस्तशिल्प-व्यापार के स्टॉल लगते हैं।
- •मेला दशहरे के बाद भी कई दिनों तक चलता है; कार्यक्रमों की सटीक तारीखें नगर निगम कोटा घोषित करता है।
जोधपुर: जहां रावण दामाद माने जाते हैं
जोधपुर के पास स्थित मंडोर को एक लोक-मान्यता के अनुसार रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका माना जाता है। इसी मान्यता के कारण शहर के कुछ श्रीमाली (गोधा) ब्राह्मण परिवार स्वयं को रावण का वंशज/संबंधी मानते हैं और दशहरे पर रावण दहन का उत्सव मनाने के बजाय शोक और श्राद्ध-तर्पण करते हैं। जोधपुर में रावण का एक मंदिर भी है। यह राजस्थान की विविध लोक-परंपराओं का अनूठा उदाहरण है — जबकि शहर के बाकी हिस्सों में रावण दहन धूमधाम से होता है।
उदयपुर, जयपुर और बीकानेर में दशहरा
- •उदयपुर: मेवाड़ में दशहरे पर शस्त्र पूजा की प्राचीन राजपूत परंपरा है; शहर के प्रमुख मैदानों में रावण दहन होता है।
- •जयपुर: आदर्श नगर दशहरा मैदान, विद्याधर नगर स्टेडियम और शहर के अन्य मैदानों में बड़े रावण दहन कार्यक्रम होते हैं। पूर्व राजपरिवार की ओर से भी दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा निभाई जाती है।
- •बीकानेर: शहर में रावण दहन के साथ नवरात्रि के बाद करणी माता के दर्शन की परंपरा भी है।
शमी पूजा: राजस्थान का "खेजड़ी" वृक्ष
दशहरे पर जिस शमी वृक्ष की पूजा होती है, उसे राजस्थान में खेजड़ी कहा जाता है — और यह राजस्थान का राज्य वृक्ष भी है। रेगिस्तान में जीवन देने वाले इस वृक्ष की पूजा का दशहरे पर विशेष महत्व है:
- 1विजय मुहूर्त में खेजड़ी (शमी) वृक्ष के पास जाएं; न हो तो गमले के शमी पौधे की पूजा करें।
- 2जल, रोली, अक्षत, फूल और दीपक अर्पित करें; परिक्रमा करें।
- 3मंत्र — "शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥"
- 4शमी की कुछ पत्तियां घर लाकर तिजोरी या पूजा स्थान में रखें — इन्हें "सोना" मानकर बड़ों को भेंट करने की भी परंपरा है।
शस्त्र पूजा की विधि — विजयादशमी शस्त्र पूजा विधि।
अपराजिता पूजा की विधि
विजयादशमी पर देवी अपराजिता (जो कभी पराजित न हों) की पूजा का विधान है:
1. विजय मुहूर्त या अपराह्न में घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को साफ करें।
2. चंदन या रोली से अष्टदल कमल बनाएं।
3. बीच में अपराजिता देवी, दाईं ओर जया और बाईं ओर विजया देवी का आवाहन करें।
4. रोली, अक्षत, फूल (विशेषकर नीले अपराजिता के फूल), धूप-दीप अर्पित करें।
5. परिवार की सुरक्षा, विजय और कल्याण की प्रार्थना करें।
दशहरे पर क्या करें और क्या न करें
करें:
न करें:
शुभ कार्यों की सूची — दशहरा 2026 पर क्या शुभ काम करें।
रावण दहन में सुरक्षा
राजस्थान में कोटा, जयपुर, जोधपुर जैसे शहरों में रावण दहन देखने हज़ारों से लाखों लोग जुटते हैं। ध्यान रखें:
नया वाहन या संपत्ति: दशहरा 2026
दशहरा साढ़े तीन अबूझ मुहूर्तों में से एक है, इसलिए राजस्थान में इस दिन वाहन, सोना, ज़मीन-मकान की ख़रीद और नई दुकान का उद्घाटन बड़ी संख्या में होता है। 2026 में इसके लिए दोपहर 12:50 (दशमी शुरू होने) के बाद का समय लें, और सबसे श्रेष्ठ समय अपने शहर का विजय मुहूर्त है। मंगलवार का राहुकाल सामान्यतः दोपहर 3 से 4:30 के आसपास होता है (अनुमानित) — सटीक समय जयपुर राहुकाल में देखें। वाहन के लिए — गाड़ी ख़रीदने का मुहूर्त।
सारांश
राजस्थान में दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को है। शमी पूजा, शस्त्र पूजा और नए काम के लिए अपने शहर का विजय मुहूर्त अपनाएं — जयपुर 2:06–2:51, कोटा 2:06–2:52, उदयपुर 2:15–3:01, बीकानेर 2:15–3:01, जोधपुर 2:17–3:03। सुबह नवमी पूजा और कन्या पूजन 12:50 से पहले पूरे करें। विजयादशमी की शुभकामनाएं!



