जयपुर में करवा चौथ 2026: संक्षिप्त उत्तर
करवा चौथ 2026 गुरुवार, 29 अक्टूबर को है। जयपुर में चांद रात 8:28 बजे निकलेगा, पूजा मुहूर्त शाम 5:46 से 7:03 तक (1 घंटा 17 मिनट) है, और व्रत सुबह 6:34 से रात 8:28 तक (13 घंटे 53 मिनट) रहेगा। चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर रात 1:06 से रात 10:09 तक है।
| विवरण (जयपुर) | समय |
|---|---|
| व्रत आरंभ (सूर्योदय) | सुबह 6:34 |
| पूजा मुहूर्त | शाम 5:46 – 7:03 |
| चंद्रोदय | रात 8:28 |
| चतुर्थी समाप्त | रात 10:09 |
| व्रत की अवधि | 13 घंटे 53 मिनट |
समय दृक् पंचांग की गणना पर आधारित हैं। जयपुर का दैनिक पंचांग — [पंचांग](/panchang)।
राजस्थान के शहरों में पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय
| शहर | पूजा मुहूर्त | चंद्रोदय |
|---|---|---|
| जयपुर | शाम 5:46 – 7:03 | रात 8:28 |
| सीकर | शाम 5:48 – 7:05 | रात 8:28 |
| कोटा | शाम 5:48 – 7:05 | रात 8:32 |
| बीकानेर | शाम 5:55 – 7:12 | रात 8:35 |
| जोधपुर | शाम 5:58 – 7:15 | रात 8:41 |
| उदयपुर | शाम 5:57 – 7:14 | रात 8:43 |
राजस्थान में चांद सबसे पहले पूर्वी शहरों (जयपुर, सीकर, कोटा) में और सबसे बाद में पश्चिमी-दक्षिणी शहरों (जोधपुर, उदयपुर) में निकलता है — दोनों में लगभग 15 मिनट का अंतर है। अलवर, दौसा और टोंक में चंद्रोदय जयपुर से 1–3 मिनट आगे-पीछे, और अजमेर में कुछ मिनट बाद होगा (अनुमानित)। सीकर का पूरा विवरण — सीकर में करवा चौथ 2026 चंद्रोदय समय। देश के अन्य शहर — करवा चौथ 2026 शहरवार चंद्रोदय।
जयपुर में चांद कहां और कैसे देखें?
करवा चौथ पर चांद पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा में उगता है। 8:28 का समय क्षितिज पर चंद्रोदय का है — असल में चांद तब दिखता है जब वह इमारतों और पेड़ों से ऊपर आ जाए, जिसमें 10 से 20 मिनट लग सकते हैं।
- •खुली छत: परकोटे के पुराने घरों की छतें, और मालवीय नगर, मानसरोवर, वैशाली नगर, जगतपुरा जैसे इलाकों की ऊंची छतें अच्छी जगह हैं।
- •पूर्व दिशा खुली हो: पूर्व की ओर ऊंची इमारत हो तो पड़ोसी की छत या पार्क का सहारा लें।
- •मोबाइल ऐप/कंपास: पूर्व दिशा पहचानने के लिए फ़ोन के कंपास का उपयोग करें।
- •धैर्य रखें: 8:28 पर चांद न दिखे तो घबराएं नहीं; चतुर्थी रात 10:09 तक है, लेकिन चांद दिखते ही अर्घ्य दे दें।
जयपुर में करवा चौथ की रौनक
- •बाज़ार: करवा चौथ से एक-दो दिन पहले बापू बाज़ार, जौहरी बाज़ार, चांदपोल और कॉलोनियों के बाज़ारों में मेहंदी लगाने वालों और चूड़ियों की दुकानों पर भारी भीड़ रहती है। भीड़ से बचना हो तो मेहंदी 27 या 28 अक्टूबर को लगवा लें।
- •सामूहिक पूजा: कई कॉलोनियों और सोसाइटियों में महिलाएं शाम को एक जगह इकट्ठी होकर कथा सुनती हैं और बाया फेरती हैं।
- •बायना: पूजा के बाद करवा, मिठाई, मेवे और साड़ी या सुहाग का सामान सास को बायने के रूप में दिया जाता है।
- •मंदिर: कई महिलाएं दिन में मोती डूंगरी गणेश जी या पास के शिव मंदिर में दर्शन करती हैं — करवा चौथ पर गणेश और शिव-पार्वती दोनों की पूजा होती है।
करवा चौथ पर गणेश पूजा क्यों?
करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को होता है, और हर कृष्ण चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी भी होती है। इसलिए करवा चौथ की पूजा में शिव-पार्वती, कार्तिकेय और करवा माता के साथ भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है, और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा होता है। संकष्टी के बारे में — संकष्टी चतुर्थी क्या है?
अर्घ्य की विधि (संक्षेप में)
- 1करवे या लोटे में जल, थोड़ा कच्चा दूध, अक्षत, रोली और सफेद फूल डालें।
- 2चांद की ओर मुख करके धीरे-धीरे अर्घ्य दें और "ॐ सों सोमाय नमः" बोलें।
- 3छलनी में दीपक रखकर पहले चांद और फिर पति को देखें।
- 4पति के हाथ से जल पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोलें; फिर हल्का भोजन करें।
विस्तार से — करवा चौथ पर चांद को अर्घ्य कैसे दें?
करवा चौथ की कथा (संक्षेप में)
वीरवती सात भाइयों की इकलौती लाड़ली बहन थी। विवाह के बाद पहली करवा चौथ पर वह मायके में थी और दिन भर निर्जला व्रत से व्याकुल हो गई। बहन की हालत देखकर भाइयों ने पेड़ के पीछे दीपक जलाकर छलनी की ओट से नकली चांद दिखा दिया। वीरवती ने उसे चंद्रोदय मानकर अर्घ्य दिया और व्रत खोल लिया — उसी समय उसे पति के गंभीर रूप से बीमार होने का समाचार मिला। अपनी भूल पर पछताते हुए उसने पूरे वर्ष हर चतुर्थी का व्रत श्रद्धा से रखा, और अगले करवा चौथ पर विधिपूर्वक व्रत करके माता पार्वती की कृपा से पति का स्वास्थ्य और जीवन वापस पाया। यह कथा बताती है कि व्रत का पालन धैर्य और नियम से करना चाहिए — असली चांद देखकर ही अर्घ्य दें। पूरी कथा — करवा चौथ व्रत कथा।
करवा चौथ की पूजा सामग्री
- •मिट्टी का करवा (टोंटीदार) और ढक्कन
- •छलनी, थाली, घी का दीपक
- •करवा माता का चित्र, शिव-पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमा
- •रोली, कुमकुम, अक्षत, सिंदूर, मेहंदी
- •सोलह श्रृंगार का सामान
- •मठरी, मिठाई, फल, जल का लोटा, कच्चा दूध
- •बायने के लिए वस्त्र, मेवे और मिठाई
करवा चौथ पर क्या न करें
- •सूर्योदय (6:34) के बाद कुछ न खाएं-पिएं; सरगी पहले ही ले लें।
- •दिन में किसी का अपमान, झगड़ा या कटु वचन न बोलें।
- •सफेद या काले रंग के कपड़े पहनने से बचें — लाल, गुलाबी, पीले जैसे शुभ रंग पहनें।
- •नुकीली वस्तुओं (कैंची, सुई) का प्रयोग टालने की परंपरा है।
- •नकली चांद या केवल फोटो/वीडियो देखकर अर्घ्य न दें — असली चांद दिखने का इंतज़ार करें, या बादल हों तो पंचांग के समय पर पूर्व दिशा में अर्घ्य दें।
- •चतुर्थी (रात 10:09) समाप्त होने से पहले अर्घ्य और पारण पूरा करें।
जयपुर में करवा चौथ का समय-क्रम
| समय | क्या करें |
|---|---|
| सुबह 6:34 से पहले | सरगी, संकल्प |
| दिन | निर्जला व्रत, आराम, श्रृंगार की तैयारी |
| शाम 5:46 – 7:03 | पूजा, कथा, बाया फेरना |
| रात 8:28 के बाद | चंद्र दर्शन, अर्घ्य, पति के हाथ से जल |
| रात 10:09 से पहले | पारण पूरा |
सारांश
जयपुर में करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है — पूजा शाम 5:46 से 7:03, और चांद रात 8:28 पर। जोधपुर (8:41), उदयपुर (8:43), कोटा (8:32) और बीकानेर (8:35) में चांद कुछ देर बाद निकलेगा। चतुर्थी रात 10:09 तक है।


