गणगौर 2027: संक्षिप्त उत्तर
गणगौर 2027 शुक्रवार, 9 अप्रैल 2027 (चैत्र शुक्ल तृतीया) को है। तृतीया तिथि 9 अप्रैल सुबह 3:10 से 10 अप्रैल रात 1:31 तक रहेगी। गणगौर का पूजन होलिका दहन के अगले दिन — धुलंडी, सोमवार 22 मार्च 2027 — से शुरू होगा और लगभग 16 से 18 दिन चलकर गणगौर के दिन पूर्ण होगा। सिंजारा गुरुवार, 8 अप्रैल को है, और जयपुर में दूसरे दिन की सवारी (बूढ़ी गणगौर) शनिवार, 10 अप्रैल को निकलेगी।
| अवसर | 2027 |
|---|---|
| होलिका दहन | रविवार, 21 मार्च |
| गणगौर पूजन आरंभ (धुलंडी) | सोमवार, 22 मार्च |
| शीतला अष्टमी (बासोड़ा) | मंगलवार, 30 मार्च |
| चैत्र नवरात्रि आरंभ | बुधवार, 7 अप्रैल |
| सिंजारा | गुरुवार, 8 अप्रैल |
| गणगौर (तीज) | शुक्रवार, 9 अप्रैल |
| बूढ़ी गणगौर (जयपुर) | शनिवार, 10 अप्रैल |
तिथि समय दृक् पंचांग (नई दिल्ली) पर आधारित है; राजस्थान में तिथि का समय यही रहता है। अपने शहर का सूर्योदय और दैनिक पंचांग — [पंचांग](/panchang)।
गणगौर 9 अप्रैल को ही क्यों?
गणगौर चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। 2027 में तृतीया 9 अप्रैल की सुबह 3:10 से शुरू होती है, यानी 9 अप्रैल को सूर्योदय के समय तृतीया है — इसलिए उदया तिथि के नियम से गणगौर 9 अप्रैल को है। तृतीया 10 अप्रैल की रात 1:31 तक रहती है, इसलिए 9 अप्रैल का पूरा दिन और शाम तृतीया में है। उदया तिथि के नियम के बारे में — सूर्योदय के अनुसार व्रत की तारीख कैसे तय होती है?
2026 से तुलना: 2026 में गणगौर 21 मार्च को थी, जबकि 2027 में 9 अप्रैल को है — लगभग 19 दिन बाद। कारण यह है कि 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास था, जिससे चैत्र 2026 से चैत्र 2027 तक का चांद्र वर्ष 13 महीनों का हो गया — इसलिए 2027 का चैत्र मास (और उसके साथ गणगौर) लगभग 19 दिन देर से आ रहा है। विस्तार से — हिंदू कैलेंडर कैसे चलता है?
गणगौर क्या है?
"गण" का अर्थ है भगवान शिव (ईसर) और "गौर" का अर्थ है माता पार्वती (गौरी)। गणगौर ईसर-गौर के रूप में शिव-पार्वती की पूजा का पर्व है। मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तप से शिव को पति रूप में पाया, और गणगौर पर वे अपने मायके आकर सुहागिनों को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं।
- •विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य के लिए व्रत रखती हैं।
- •कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना से गणगौर पूजती हैं।
- •नवविवाहिताएं पहली गणगौर अपने मायके में पूजती हैं — यह राजस्थान की एक प्रिय परंपरा है।
2027 में गणगौर चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन (मां चंद्रघंटा) को पड़ रही है, इसलिए देवी पूजा का दोहरा संयोग है। नवरात्रि की जानकारी — नवरात्रि 2027 कब है?
16–18 दिन का गणगौर पूजन
गणगौर एक दिन का नहीं, बल्कि लगभग 18 दिनों का उत्सव है:
- 1धुलंडी (22 मार्च) से आरंभ: होली की राख या मिट्टी से (या लकड़ी की रंगी हुई प्रतिमाओं से) ईसर-गौर की स्थापना की जाती है।
- 2रोज़ सुबह पूजन: कन्याएं और महिलाएं बगीचे से दूब (दूर्वा) और फूल लाकर, कलश में जल भरकर, गणगौर के गीत गाते हुए पूजा करती हैं।
- 3सातवें दिन (शीतला सप्तमी/अष्टमी के आसपास): कई परिवारों में मिट्टी की नई गणगौर बनाई जाती है।
- 4सिंजारा (8 अप्रैल): गणगौर से एक दिन पहले बेटियों और बहुओं को मायके से घेवर, मेहंदी, वस्त्र, आभूषण और श्रृंगार का सामान भेजा जाता है। इस दिन मेहंदी लगाने और सजने-संवरने की परंपरा है।
- 5गणगौर (9 अप्रैल): व्रत, विशेष पूजा, कथा, और शाम को गणगौर को पानी पिलाना व विसर्जन।
गणगौर व्रत विधि (9 अप्रैल 2027)
- 1सुबह स्नान करके नए वस्त्र और सोलह श्रृंगार धारण करें; व्रत का संकल्प लें।
- 2पूजा स्थान पर ईसर-गौर की प्रतिमा को सजाएं — गौर को चुनरी, गहने और श्रृंगार अर्पित करें।
- 3दीवार पर कुमकुम, मेहंदी और काजल की 16-16 बिंदियां लगाएं।
- 4दूब से जल के छींटे देते हुए पूजा करें; रोली, अक्षत, फूल, फल और गुने (आटे-गुड़ के तले हुए मीठे पकवान) अर्पित करें।
- 5गणगौर की कथा सुनें और सुहाग की वस्तुएं (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर) अर्पित करें।
- 6दिन में एक समय भोजन करें — परंपरा के अनुसार गणगौर का प्रसाद पुरुषों को नहीं दिया जाता।
- 7दोपहर बाद या शाम को गणगौर को कुएं, बावड़ी, तालाब या झील पर ले जाकर पानी पिलाएं और विदाई दें।
पूजा की विस्तृत विधि — गणगौर पूजा 2027: ईसर-गौर की पूजा विधि।
जयपुर और उदयपुर की गणगौर सवारी
- •जयपुर: गणगौर (9 अप्रैल) और बूढ़ी गणगौर (10 अप्रैल) को पूर्व राजपरिवार की शाही गणगौर सवारी सिटी पैलेस के त्रिपोलिया गेट से निकलकर त्रिपोलिया बाज़ार, छोटी चौपड़ और गणगौरी बाज़ार होते हुए आगे जाती है। सजे हुए हाथी-घोड़े, ऊंट, लोक कलाकार और बैंड इसकी शोभा बढ़ाते हैं; पर्यटन विभाग भी इस अवसर पर गणगौर उत्सव आयोजित करता है।
- •उदयपुर: पिछोला झील का गणगौर घाट इस पर्व का केंद्र है, जहां महिलाएं गणगौर को लेकर पहुंचती हैं और झील किनारे उत्सव होता है।
- •जोधपुर: गणगौर के बाद धींगा गवर का अनोखा उत्सव होता है, जिसमें महिलाएं रात में विभिन्न वेश धारण करके निकलती हैं।
नवविवाहिता की पहली गणगौर
राजस्थान में नवविवाहिता की पहली गणगौर का विशेष महत्व है:
गणगौर पर क्या करें और क्या न करें
करें:
न करें:
बीकानेर, नाथद्वारा और अन्य शहरों की गणगौर
- •बीकानेर: पुराने शहर में गणगौर के मेले और गीतों की परंपरा प्रसिद्ध है; यहां के कुछ परिवारों की पीढ़ियों पुरानी गणगौर प्रतिमाओं के दर्शन के लिए भीड़ उमड़ती है।
- •नाथद्वारा: श्रीनाथजी की नगरी में गणगौर के आसपास कई दिनों तक अलग-अलग रंगों की गणगौर सवारी निकालने की परंपरा है।
- •शेखावाटी और मारवाड़: गांवों में कन्याएं समूह में गीत गाते हुए दूब लेने जाती हैं और कुओं-बावड़ियों पर गणगौर को पानी पिलाती हैं।
सारांश
गणगौर 2027 शुक्रवार, 9 अप्रैल को है (तृतीया 9 अप्रैल सुबह 3:10 से 10 अप्रैल रात 1:31 तक)। गणगौर पूजन 22 मार्च (धुलंडी) से शुरू होगा, सिंजारा 8 अप्रैल को है, और जयपुर में बूढ़ी गणगौर की सवारी 10 अप्रैल को निकलेगी। ईसर-गौर आपके परिवार को अखंड सौभाग्य दें!



