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दीपावली 2026 पूजा विधि: लक्ष्मी-गणेश पूजा की पूरी विधि

दीपावली 2026 की संपूर्ण शास्त्रीय पूजा विधि — चौकी स्थापना, संकल्प, गणेश व कलश पूजन, मंत्रों सहित षोडशोपचार लक्ष्मी पूजन, कुबेर, बही-खाता और दीपमालिका पूजन।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·7 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 9 अक्टू॰ 2026
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दीपावली 2026 पूजा विधि: लक्ष्मी-गणेश पूजा की पूरी विधि
✨प्रामाणिक वैदिक संदर्भ सचित्र

मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

दीपावली 2026 की संपूर्ण शास्त्रीय पूजा विधि — चौकी स्थापना, संकल्प, गणेश व कलश पूजन, मंत्रों सहित षोडशोपचार लक्ष्मी पूजन, कुबेर, बही-खाता और दीपमालिका पूजन।

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दीपावली 2026 पूजा विधि: संक्षिप्त उत्तर

रविवार, 8 नवंबर 2026 को दीपावली की संपूर्ण पूजा इस क्रम में होती है: चौकी स्थापना → पवित्रीकरण और संकल्प → गणेश पूजन → कलश (वरुण) पूजन → नवग्रह स्मरण → षोडशोपचार (सोलह उपचार) लक्ष्मी पूजन → सरस्वती (बही-खाता व कलम) और कुबेर पूजन → तिजोरी पूजन → दीपमालिका पूजन → आरती, पुष्पांजलि और क्षमा प्रार्थना। यह पूजा प्रदोष काल में स्थिर वृषभ लग्न के दौरान करें — नई दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50 बजे तक। तैयारी कम से कम एक घंटा पहले शुरू कर दें।

इस लेख में पूर्ण पारंपरिक (शास्त्रीय) विधि दी गई है। यदि आप छोटी और पहली बार पूजा करने वालों के लिए सरल विधि चाहते हैं, तो पढ़ें — दिवाली पर लक्ष्मी पूजा कैसे करें? घर पर पूजा की पूरी विधि।

दीपावली 2026 पूजा मुहूर्त (प्रमुख शहर)

शहरलक्ष्मी पूजा मुहूर्त
नई दिल्लीशाम 5:54 – 7:50
जयपुरशाम 6:03 – 7:59
लखनऊशाम 5:42 – 7:39
मुंबईशाम 6:27 – 8:27
कोलकाताशाम 5:20 – 7:18
बेंगलुरुशाम 6:17 – 8:20

पूजा से पहले: चौकी की स्थापना

  1. 1घर के ईशान कोण या उत्तर दिशा में पूजा स्थान को साफ करें और गंगाजल छिड़कें।
  2. 2लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं (कुछ परिवार गणेश जी के नीचे पीला कपड़ा रखते हैं)।
  3. 3पूजा करने वाले की ओर से देखने पर गणेश जी को बाईं ओर और लक्ष्मी जी को दाईं ओर स्थापित करें — यदि आपकी कुल परंपरा अलग हो, तो उसका पालन करें। कई परिवार साथ में मां सरस्वती और कुबेर जी को भी स्थापित करते हैं।
  4. 4लक्ष्मी जी के दाहिनी ओर चावल की ढेरी पर कलश रखें — जल, सिक्का, सुपारी, अक्षत और आम के पत्तों से भरा, ऊपर नारियल के साथ।
  5. 5नवग्रह के लिए अक्षत की नौ छोटी ढेरियां और षोडश मातृका के लिए गेहूं या चावल की सोलह ढेरियां बनाएं (वैकल्पिक)।
  6. 6बही-खाते, कलम, दवात, तिजोरी या कैश बॉक्स और आभूषण एक ओर रखें।
  7. 7एक बड़ा घी का दीपक, ग्यारह या अधिक छोटे दीपक और पूरी सामग्री व्यवस्थित कर लें। सूची देखें — दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट 2026।

चरणबद्ध शास्त्रीय पूजा विधि

1. पवित्रीकरण और आचमन

अपने ऊपर जल छिड़कते हुए यह मंत्र पढ़ें:

ॐवैदिक शास्त्र सूत्र एवं श्लोक (Scriptural Shloka)
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

फिर 'ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः' बोलते हुए तीन बार जल ग्रहण करें और 'ॐ हृषीकेशाय नमः' बोलकर हाथ धो लें। आसन पर जल छिड़ककर आसन शुद्धि करें।

2. संकल्प

हाथ में जल, अक्षत, फूल और एक सिक्का लेकर संकल्प करें — "आज कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष, अमावस्या तिथि, विक्रम संवत 2083 के दिन, मैं (अपना नाम), (अपना गोत्र) गोत्र में उत्पन्न, अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और कल्याण के लिए महालक्ष्मी पूजन का संकल्प लेता/लेती हूं।" फिर जल भूमि पर छोड़ दें। विक्रम संवत के बारे में पढ़ें — पंचांग पर विक्रम संवत् क्या है?

3. गणेश पूजन

किसी भी पूजा से पहले विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा होती है:

ॐवैदिक शास्त्र सूत्र एवं श्लोक (Scriptural Shloka)
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

गणेश जी को रोली, अक्षत, दूर्वा, फूल और मोदक या लड्डू अर्पित करें। 'ॐ गं गणपतये नमः' का 11 बार जाप करें। गणेश पूजन का महत्व पढ़ें — दिवाली पर गणेश जी की पूजा क्यों की जाती है?

4. कलश पूजन

कलश में वरुण देव और पवित्र नदियों का आवाहन करें — 'ॐ वरुणाय नमः'। साथ में बोलें — 'गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥' कलश को रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।

5. नवग्रह स्मरण

ॐवैदिक शास्त्र सूत्र एवं श्लोक (Scriptural Shloka)
ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥

नवग्रह की ढेरियों पर रोली-अक्षत और फूल अर्पित करें।

6. षोडशोपचार लक्ष्मी पूजन

क्रमउपचारक्या अर्पित करेंमंत्र (संक्षिप्त)
1आवाहनमां को आमंत्रित करेंॐ महालक्ष्म्यै नमः, आवाहयामि
2आसनफूल/अक्षत का आसनआसनं समर्पयामि
3पाद्यचरण धोने को जलपाद्यं समर्पयामि
4अर्घ्यजल में फूल-अक्षतअर्घ्यं समर्पयामि
5आचमनआचमन का जलआचमनीयं समर्पयामि
6स्नानजल, फिर पंचामृत, फिर शुद्ध जलस्नानं समर्पयामि
7वस्त्रलाल चुनरी/वस्त्रवस्त्रं समर्पयामि
8आभूषणआभूषण, श्रृंगारआभूषणानि समर्पयामि
9गंधचंदन, रोली, कुमकुमगन्धं समर्पयामि
10पुष्पकमल, गुलाब, मालापुष्पाणि समर्पयामि
11धूपधूप-अगरबत्तीधूपम् आघ्रापयामि
12दीपघी का दीपकदीपं दर्शयामि
13नैवेद्यखील-बताशे, मिठाई, फलनैवेद्यं निवेदयामि
14तांबूलपान, सुपारी, लौंग, इलायचीताम्बूलं समर्पयामि
15दक्षिणासिक्के/नोटदक्षिणां समर्पयामि
16आरती, पुष्पांजलिआरती, दोनों हथेलियों में फूलपुष्पाञ्जलिं समर्पयामि

यदि मूर्ति पर जल या पंचामृत अर्पित करना संभव न हो (जैसे चित्र या धातु के लक्ष्मी-गणेश), तो एक कटोरी में पान के पत्ते से जल छिड़ककर प्रतीकात्मक स्नान कराएं।

मुख्य लक्ष्मी मंत्र (108 बार):

ॐवैदिक शास्त्र सूत्र एवं श्लोक (Scriptural Shloka)
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥

सरल विकल्प: 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः'। अन्य मंत्रों के लिए पढ़ें — दिवाली की रात कौन से मंत्र पढ़ें?

7. सरस्वती और बही-खाता पूजन

नए बही-खाते के पहले पृष्ठ पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और "शुभ-लाभ" या "श्री" लिखें। कई व्यापारी "श्री गणेशाय नमः" लिखकर पहली प्रविष्टि करते हैं। कलम और दवात की 'ॐ सरस्वत्यै नमः' मंत्र से पूजा करें। आजकल लैपटॉप और बिलिंग मशीन की भी पूजा की जाती है।

8. कुबेर और तिजोरी पूजन

तिजोरी या कैश बॉक्स पर स्वास्तिक बनाएं, रोली-अक्षत और फूल अर्पित करें और कुबेर मंत्र पढ़ें:

ॐवैदिक शास्त्र सूत्र एवं श्लोक (Scriptural Shloka)
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

तिजोरी में हल्दी की गांठ, कमल गट्टे, चांदी का सिक्का और पूजा के कुछ अक्षत लाल कपड़े में बांधकर रखें।

9. दीपमालिका पूजन

थाली में रखे दीपकों पर रोली-अक्षत और फूल चढ़ाकर उनकी पूजा करें, फिर मुख्य दीपक से उन्हें प्रज्वलित करें। इसके बाद इन्हें पूरे घर में रखें — मुख्य द्वार पर, रसोई में, जल स्थान के पास, तुलसी पर और छत पर। विस्तार से पढ़ें — दिवाली 2026 पर घर में दीपक कहां-कहां जलाएं?

10. आरती और क्षमा प्रार्थना

'ॐ जय लक्ष्मी माता' आरती गाएं, पुष्पांजलि अर्पित करें और अंत में क्षमा प्रार्थना करें:

ॐवैदिक शास्त्र सूत्र एवं श्लोक (Scriptural Shloka)
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि॥

पूजा के बाद क्या करें?

  • •मां के पास रात भर एक दीपक जलता रहने दें।
  • •खील-बताशे और मिठाई का प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बांटें।
  • •कई परिवार पूजा के बाद मुख्य द्वार थोड़ा खुला रखते हैं — मां लक्ष्मी के स्वागत के प्रतीक के रूप में।
  • •दिवाली की रात घर में अंधेरा न रहने दें और जल्दी न सोएं; परिवार के साथ भजन-कीर्तन करें।
  • •अगले दिन (9 नवंबर) सुबह पूजा स्थल पर फिर दीपक जलाकर मां की आरती करें।

पूजा में ध्यान रखने योग्य बातें

  • •लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति हर वर्ष लेने की परंपरा है; पुरानी मूर्तियों को सम्मानपूर्वक विसर्जित करें या पूजा स्थान पर रखें।
  • •गणेश जी को तुलसी अर्पित न करें; लक्ष्मी जी को कमल और गुलाब प्रिय हैं।
  • •पूजा के दौरान घर के सभी सदस्य उपस्थित रहें तो उत्तम है।
  • •पूजा में होने वाली सामान्य गलतियों के बारे में पढ़ें — दिवाली पर लक्ष्मी पूजा में कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

पूजा में परिवार की भूमिका

शास्त्रीय पूजा में मुख्य यजमान (प्रायः घर के मुखिया या दंपती) संकल्प और मुख्य उपचार करते हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य मंत्र जाप, आरती और दीपमालिका पूजन में सहभागी होते हैं। बच्चों को घंटी बजाने, शंख बजाने और दीपक सजाने का कार्य दें — इससे परंपरा अगली पीढ़ी तक पहुंचती है।

सारांश

8 नवंबर 2026 को प्रदोष-वृषभ काल (दिल्ली में शाम 5:54–7:50) में संपूर्ण लक्ष्मी-गणेश पूजा करें: पवित्रीकरण, संकल्प, गणेश व कलश पूजन, नवग्रह, षोडशोपचार लक्ष्मी पूजन, बही-खाता, कुबेर व तिजोरी पूजन, दीपमालिका, आरती और क्षमा प्रार्थना। मां लक्ष्मी आपके घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास करें।

शुभ दीपावली!

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यह आलेख महर्षि पराशर विरचित वृहत्पाराशर होराशास्त्र, नारद संहिता, मुहूर्त चिंतामणि एवं शास्त्रीय सूर्यसिद्धांत के सूत्रों के गहन अध्ययन व शोध के आधार पर संकलित किया गया है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

दीपावली पूजा का सही क्रम क्या है?

पवित्रीकरण, संकल्प, गणेश पूजन, कलश पूजन, नवग्रह स्मरण, षोडशोपचार लक्ष्मी पूजन, बही-खाता व कुबेर पूजन, दीपमालिका पूजन, आरती और क्षमा प्रार्थना।

दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा किस समय करें?

8 नवंबर 2026 को प्रदोष काल में स्थिर वृषभ लग्न में — दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50 बजे तक।

लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति किस दिशा में रखें?

पूजा स्थल ईशान कोण या उत्तर में हो; पूजा करने वाले की ओर से गणेश जी बाईं ओर और लक्ष्मी जी दाईं ओर रखना प्रचलित है।

षोडशोपचार पूजा क्या है?

आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, दक्षिणा और आरती — इन सोलह उपचारों से की जाने वाली पूजा।

लक्ष्मी पूजा का मुख्य मंत्र क्या है?

'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः' — इसका 108 बार जाप करें।

बही-खाता पूजन कैसे करें?

नए बही-खाते के पहले पृष्ठ पर रोली से स्वास्तिक बनाकर 'शुभ-लाभ' या 'श्री' लिखें और 'ॐ सरस्वत्यै नमः' मंत्र से कलम-दवात की पूजा करें।

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