दीपावली 2026 पूजा विधि: संक्षिप्त उत्तर
रविवार, 8 नवंबर 2026 को दीपावली की संपूर्ण पूजा इस क्रम में होती है: चौकी स्थापना → पवित्रीकरण और संकल्प → गणेश पूजन → कलश (वरुण) पूजन → नवग्रह स्मरण → षोडशोपचार (सोलह उपचार) लक्ष्मी पूजन → सरस्वती (बही-खाता व कलम) और कुबेर पूजन → तिजोरी पूजन → दीपमालिका पूजन → आरती, पुष्पांजलि और क्षमा प्रार्थना। यह पूजा प्रदोष काल में स्थिर वृषभ लग्न के दौरान करें — नई दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50 बजे तक। तैयारी कम से कम एक घंटा पहले शुरू कर दें।
इस लेख में पूर्ण पारंपरिक (शास्त्रीय) विधि दी गई है। यदि आप छोटी और पहली बार पूजा करने वालों के लिए सरल विधि चाहते हैं, तो पढ़ें — दिवाली पर लक्ष्मी पूजा कैसे करें? घर पर पूजा की पूरी विधि।
दीपावली 2026 पूजा मुहूर्त (प्रमुख शहर)
| शहर | लक्ष्मी पूजा मुहूर्त |
|---|---|
| नई दिल्ली | शाम 5:54 – 7:50 |
| जयपुर | शाम 6:03 – 7:59 |
| लखनऊ | शाम 5:42 – 7:39 |
| मुंबई | शाम 6:27 – 8:27 |
| कोलकाता | शाम 5:20 – 7:18 |
| बेंगलुरु | शाम 6:17 – 8:20 |
अन्य शहरों के लिए पढ़ें — दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शहर के अनुसार।
पूजा से पहले: चौकी की स्थापना
- 1घर के ईशान कोण या उत्तर दिशा में पूजा स्थान को साफ करें और गंगाजल छिड़कें।
- 2लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं (कुछ परिवार गणेश जी के नीचे पीला कपड़ा रखते हैं)।
- 3पूजा करने वाले की ओर से देखने पर गणेश जी को बाईं ओर और लक्ष्मी जी को दाईं ओर स्थापित करें — यदि आपकी कुल परंपरा अलग हो, तो उसका पालन करें। कई परिवार साथ में मां सरस्वती और कुबेर जी को भी स्थापित करते हैं।
- 4लक्ष्मी जी के दाहिनी ओर चावल की ढेरी पर कलश रखें — जल, सिक्का, सुपारी, अक्षत और आम के पत्तों से भरा, ऊपर नारियल के साथ।
- 5नवग्रह के लिए अक्षत की नौ छोटी ढेरियां और षोडश मातृका के लिए गेहूं या चावल की सोलह ढेरियां बनाएं (वैकल्पिक)।
- 6बही-खाते, कलम, दवात, तिजोरी या कैश बॉक्स और आभूषण एक ओर रखें।
- 7एक बड़ा घी का दीपक, ग्यारह या अधिक छोटे दीपक और पूरी सामग्री व्यवस्थित कर लें। सूची देखें — दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट 2026।
चरणबद्ध शास्त्रीय पूजा विधि
1. पवित्रीकरण और आचमन
अपने ऊपर जल छिड़कते हुए यह मंत्र पढ़ें:
फिर 'ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः' बोलते हुए तीन बार जल ग्रहण करें और 'ॐ हृषीकेशाय नमः' बोलकर हाथ धो लें। आसन पर जल छिड़ककर आसन शुद्धि करें।
2. संकल्प
हाथ में जल, अक्षत, फूल और एक सिक्का लेकर संकल्प करें — "आज कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष, अमावस्या तिथि, विक्रम संवत 2083 के दिन, मैं (अपना नाम), (अपना गोत्र) गोत्र में उत्पन्न, अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और कल्याण के लिए महालक्ष्मी पूजन का संकल्प लेता/लेती हूं।" फिर जल भूमि पर छोड़ दें। विक्रम संवत के बारे में पढ़ें — पंचांग पर विक्रम संवत् क्या है?
3. गणेश पूजन
किसी भी पूजा से पहले विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा होती है:
गणेश जी को रोली, अक्षत, दूर्वा, फूल और मोदक या लड्डू अर्पित करें। 'ॐ गं गणपतये नमः' का 11 बार जाप करें। गणेश पूजन का महत्व पढ़ें — दिवाली पर गणेश जी की पूजा क्यों की जाती है?
4. कलश पूजन
कलश में वरुण देव और पवित्र नदियों का आवाहन करें — 'ॐ वरुणाय नमः'। साथ में बोलें — 'गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥' कलश को रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।
5. नवग्रह स्मरण
नवग्रह की ढेरियों पर रोली-अक्षत और फूल अर्पित करें।
6. षोडशोपचार लक्ष्मी पूजन
| क्रम | उपचार | क्या अर्पित करें | मंत्र (संक्षिप्त) |
|---|---|---|---|
| 1 | आवाहन | मां को आमंत्रित करें | ॐ महालक्ष्म्यै नमः, आवाहयामि |
| 2 | आसन | फूल/अक्षत का आसन | आसनं समर्पयामि |
| 3 | पाद्य | चरण धोने को जल | पाद्यं समर्पयामि |
| 4 | अर्घ्य | जल में फूल-अक्षत | अर्घ्यं समर्पयामि |
| 5 | आचमन | आचमन का जल | आचमनीयं समर्पयामि |
| 6 | स्नान | जल, फिर पंचामृत, फिर शुद्ध जल | स्नानं समर्पयामि |
| 7 | वस्त्र | लाल चुनरी/वस्त्र | वस्त्रं समर्पयामि |
| 8 | आभूषण | आभूषण, श्रृंगार | आभूषणानि समर्पयामि |
| 9 | गंध | चंदन, रोली, कुमकुम | गन्धं समर्पयामि |
| 10 | पुष्प | कमल, गुलाब, माला | पुष्पाणि समर्पयामि |
| 11 | धूप | धूप-अगरबत्ती | धूपम् आघ्रापयामि |
| 12 | दीप | घी का दीपक | दीपं दर्शयामि |
| 13 | नैवेद्य | खील-बताशे, मिठाई, फल | नैवेद्यं निवेदयामि |
| 14 | तांबूल | पान, सुपारी, लौंग, इलायची | ताम्बूलं समर्पयामि |
| 15 | दक्षिणा | सिक्के/नोट | दक्षिणां समर्पयामि |
| 16 | आरती, पुष्पांजलि | आरती, दोनों हथेलियों में फूल | पुष्पाञ्जलिं समर्पयामि |
यदि मूर्ति पर जल या पंचामृत अर्पित करना संभव न हो (जैसे चित्र या धातु के लक्ष्मी-गणेश), तो एक कटोरी में पान के पत्ते से जल छिड़ककर प्रतीकात्मक स्नान कराएं।
मुख्य लक्ष्मी मंत्र (108 बार):
सरल विकल्प: 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः'। अन्य मंत्रों के लिए पढ़ें — दिवाली की रात कौन से मंत्र पढ़ें?
7. सरस्वती और बही-खाता पूजन
नए बही-खाते के पहले पृष्ठ पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और "शुभ-लाभ" या "श्री" लिखें। कई व्यापारी "श्री गणेशाय नमः" लिखकर पहली प्रविष्टि करते हैं। कलम और दवात की 'ॐ सरस्वत्यै नमः' मंत्र से पूजा करें। आजकल लैपटॉप और बिलिंग मशीन की भी पूजा की जाती है।
8. कुबेर और तिजोरी पूजन
तिजोरी या कैश बॉक्स पर स्वास्तिक बनाएं, रोली-अक्षत और फूल अर्पित करें और कुबेर मंत्र पढ़ें:
तिजोरी में हल्दी की गांठ, कमल गट्टे, चांदी का सिक्का और पूजा के कुछ अक्षत लाल कपड़े में बांधकर रखें।
9. दीपमालिका पूजन
थाली में रखे दीपकों पर रोली-अक्षत और फूल चढ़ाकर उनकी पूजा करें, फिर मुख्य दीपक से उन्हें प्रज्वलित करें। इसके बाद इन्हें पूरे घर में रखें — मुख्य द्वार पर, रसोई में, जल स्थान के पास, तुलसी पर और छत पर। विस्तार से पढ़ें — दिवाली 2026 पर घर में दीपक कहां-कहां जलाएं?
10. आरती और क्षमा प्रार्थना
'ॐ जय लक्ष्मी माता' आरती गाएं, पुष्पांजलि अर्पित करें और अंत में क्षमा प्रार्थना करें:
पूजा के बाद क्या करें?
- •मां के पास रात भर एक दीपक जलता रहने दें।
- •खील-बताशे और मिठाई का प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बांटें।
- •कई परिवार पूजा के बाद मुख्य द्वार थोड़ा खुला रखते हैं — मां लक्ष्मी के स्वागत के प्रतीक के रूप में।
- •दिवाली की रात घर में अंधेरा न रहने दें और जल्दी न सोएं; परिवार के साथ भजन-कीर्तन करें।
- •अगले दिन (9 नवंबर) सुबह पूजा स्थल पर फिर दीपक जलाकर मां की आरती करें।
पूजा में ध्यान रखने योग्य बातें
- •लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति हर वर्ष लेने की परंपरा है; पुरानी मूर्तियों को सम्मानपूर्वक विसर्जित करें या पूजा स्थान पर रखें।
- •गणेश जी को तुलसी अर्पित न करें; लक्ष्मी जी को कमल और गुलाब प्रिय हैं।
- •पूजा के दौरान घर के सभी सदस्य उपस्थित रहें तो उत्तम है।
- •पूजा में होने वाली सामान्य गलतियों के बारे में पढ़ें — दिवाली पर लक्ष्मी पूजा में कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?
पूजा में परिवार की भूमिका
शास्त्रीय पूजा में मुख्य यजमान (प्रायः घर के मुखिया या दंपती) संकल्प और मुख्य उपचार करते हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य मंत्र जाप, आरती और दीपमालिका पूजन में सहभागी होते हैं। बच्चों को घंटी बजाने, शंख बजाने और दीपक सजाने का कार्य दें — इससे परंपरा अगली पीढ़ी तक पहुंचती है।
सारांश
8 नवंबर 2026 को प्रदोष-वृषभ काल (दिल्ली में शाम 5:54–7:50) में संपूर्ण लक्ष्मी-गणेश पूजा करें: पवित्रीकरण, संकल्प, गणेश व कलश पूजन, नवग्रह, षोडशोपचार लक्ष्मी पूजन, बही-खाता, कुबेर व तिजोरी पूजन, दीपमालिका, आरती और क्षमा प्रार्थना। मां लक्ष्मी आपके घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास करें।
शुभ दीपावली!



