दिवाली पर दीपक कहां जलाएं: संक्षिप्त उत्तर
दिवाली की रात (रविवार, 8 नवंबर 2026) लक्ष्मी पूजा (दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50) के बाद मुख्य पूजा दीपक से दीये जलाकर इन स्थानों पर रखें: (1) मुख्य द्वार के दोनों ओर, (2) पूजा घर, (3) तुलसी का पौधा, (4) रसोई, (5) जल स्थान, (6) तिजोरी या उत्तर दिशा, (7) आंगन और छत, (8) खिड़कियां और बालकनी, (9) पिछला दरवाज़ा, और (10) पास का मंदिर या पीपल का पेड़। पूजा का दीपक रात भर जलता रहे। धनतेरस (6 नवंबर) को मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर मुख वाला अलग यम दीपक जलाया जाता है।
दीपक रखने के स्थान: पूरी तालिका
| स्थान | क्यों | सुझाव |
|---|---|---|
| मुख्य द्वार (दोनों ओर) | मां लक्ष्मी का स्वागत, नकारात्मकता का प्रवेश रोकना | नीचे रंगोली बनाएं; सबसे पहले यही दीया जलाएं |
| पूजा घर | मां की उपस्थिति | घी का बड़ा दीपक, रात भर जलता रहे |
| तुलसी का पौधा | तुलसी को लक्ष्मी स्वरूपा माना गया है | जड़ के पास घी या तेल का दीया |
| रसोई | मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद, अन्न की कमी न हो | चूल्हे के पास, गैस से दूर |
| जल स्थान (नल, टंकी, कुआं) | वरुण देव का आशीर्वाद और शुद्धता | थाली में रखें, पानी के छींटों से दूर |
| तिजोरी / उत्तर दिशा | कुबेर की दिशा | उत्तर की ओर मुख वाला छोटा दीया |
| आंगन | घर की ऊर्जा का केंद्र | पांच दीयों का समूह रख सकते हैं |
| छत के कोने | दूर से दिखता प्रकाश, स्वागत का संकेत | हवा से बचाव करें |
| खिड़कियां और बालकनी | हर द्वार प्रकाशित — अंधकार का प्रवेश नहीं | पर्दों से दूर रखें |
| पिछला दरवाज़ा / पिछवाड़ा | उपेक्षित कोनों का अंधकार दूर | एक दीया पर्याप्त |
| अध्ययन कक्ष, पुस्तकें | मां सरस्वती का आशीर्वाद | छोटा दीया |
| वाहन, दुकान, दफ्तर | कार्य में समृद्धि | वाहन या कैश काउंटर के पास दीया |
| पास का मंदिर / पीपल | दीपदान का पुण्य | घर की पूजा से पहले या बाद में |
हर स्थान का महत्व विस्तार से
मुख्य द्वार मान्यता है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी घर-घर विचरण करती हैं और जिस घर का द्वार प्रकाशित और स्वच्छ होता है, वहां प्रवेश करती हैं। इसलिए मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपक, रंगोली, तोरण और स्वास्तिक का विशेष महत्व है। द्वार की चौखट पर हल्दी-कुमकुम से छोटे चरण चिह्न बनाने की परंपरा भी है, जो घर की ओर आते हुए मां लक्ष्मी के पदचिह्नों का प्रतीक हैं।
पूजा घर पूजा स्थान पर घी का बड़ा दीपक रात भर जलना चाहिए। इसमें इतना घी रखें कि सुबह तक चले। दीपक को चिमनी या कांच के कवर से ढक दें, ताकि हवा से बुझे नहीं।
तुलसी तुलसी को लक्ष्मी स्वरूपा माना गया है और कार्तिक मास में तुलसी के पास दीपदान का विशेष पुण्य है। दिवाली पर तुलसी के पास दीपक जलाकर परिक्रमा करें।
रसोई रसोई मां अन्नपूर्णा का स्थान है। यहां दीपक जलाने से घर में अन्न-धन की कमी नहीं होती। ध्यान रखें कि दीया गैस सिलेंडर और चूल्हे से सुरक्षित दूरी पर हो।
जल स्थान नल, पानी की टंकी, कुआं या घड़ा — जहां भी जल रखा जाता है, वहां दीपक जलाना वरुण देव और जल की पवित्रता के प्रति कृतज्ञता है।
तिजोरी और उत्तर दिशा उत्तर दिशा कुबेर की मानी जाती है। तिजोरी या धन रखने के स्थान के पास उत्तर की ओर मुख वाला दीपक रखना धन-वृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।
छत और आंगन छत के चारों कोनों पर दीपक रखने से घर दूर से प्रकाशित दिखता है — यह अयोध्यावासियों द्वारा श्रीराम के स्वागत में जलाई गई दीपमालाओं की याद दिलाता है।
दीपक की लौ किस दिशा में हो?
- •पूर्व: आरोग्य और दीर्घायु के लिए।
- •उत्तर: धन और समृद्धि (कुबेर) के लिए।
- •ईशान कोण: पूजा के मुख्य दीपक के लिए।
- •दक्षिण: दिवाली की रात सामान्यतः टाला जाता है; यह धनतेरस (6 नवंबर) के यम दीपक और पितरों के दीपक के लिए आरक्षित है।
दिवाली की रात दीपक जलाने का क्रम
- 1प्रदोष काल आरंभ होते ही (दिल्ली में शाम 5:31) पूजा का मुख्य दीपक और मुख्य द्वार पर पहला दीया जलाएं।
- 2लक्ष्मी-गणेश पूजा संपन्न करें।
- 3दीयों की थाली की पूजा (दीपमालिका पूजन) करें और मुख्य दीपक से उन्हें प्रज्वलित करें।
- 4इस क्रम में रखें: पूजा घर → मुख्य द्वार → तुलसी → रसोई → जल स्थान → तिजोरी → अन्य कमरे → छत → बाहर।
पूजा विधि पढ़ें — दीपावली 2026 पूजा विधि।
दिवाली 2026 के अन्य दिनों के दीपक
- •6 नवंबर (धनतेरस): यम दीपक — प्रदोष काल में मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर मुख वाला चार बत्तियों का दीपक। पढ़ें — धनतेरस 2026 कब है?
- •7 नवंबर (छोटी दिवाली/काली चौदस): कई परिवार शाम को 14 दीये जलाते हैं।
- •8 नवंबर (दिवाली): पूरे घर में मुख्य दीपदान।
- •10 नवंबर (गोवर्धन पूजा) और 11 नवंबर (भाई दूज): मुख्य द्वार और पूजा स्थान पर दीपक।
कितने दीपक जलाएं, यह जानने के लिए पढ़ें — दिवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए?
कौन सा तेल किस दीपक में?
| दीपक | ईंधन |
|---|---|
| पूजा का मुख्य दीपक | गाय का घी |
| मुख्य द्वार, तुलसी | घी या सरसों का तेल |
| अन्य स्थान | सरसों या तिल का तेल |
| यम दीपक (धनतेरस) | सरसों का तेल |
सुरक्षा के सुझाव
- •दीयों को पर्दों, कपड़ों, कागज़ और रंगोली के पाउडर से दूर रखें।
- •लकड़ी के फर्श पर सीधे न रखें; थाली या स्टैंड का उपयोग करें।
- •बच्चों और पालतू जानवरों के पास दीयों को बिना निगरानी के न छोड़ें।
- •पास में पानी या रेत रखें।
- •ऊंची इमारतों की बालकनी में ढके हुए दीपक या लालटेन का प्रयोग करें।
- •सिंथेटिक कपड़े पहनकर दीये न जलाएं; सूती वस्त्र सुरक्षित हैं।
दीपक जलाने का मंत्र और भाव
हर दीपक जलाते समय यह मंत्र बोल सकते हैं:
दीपक केवल प्रकाश नहीं, बल्कि ज्ञान का प्रतीक है। मिट्टी का दीया हमारा शरीर, तेल हमारे कर्म, बाती हमारा मन और ज्योति आत्मा का प्रकाश मानी जाती है। जब हम घर के हर कोने में दीपक रखते हैं, तो यह संकल्प भी लेते हैं कि जीवन के हर क्षेत्र से अज्ञान और नकारात्मकता दूर हो।
रंगोली और दीपक का संयोजन
मुख्य द्वार पर रंगोली के बीच या चारों कोनों पर दीपक रखना विशेष शुभ माना जाता है। कमल, स्वास्तिक, लक्ष्मी जी के चरण और शुभ-लाभ के चित्र रंगोली में लोकप्रिय हैं। राजस्थान में पारंपरिक मांडणा — गेरू की ज़मीन पर खड़िया से बनी आकृतियां — के बीच दीपक रखने की परंपरा है। रंगोली के पाउडर को दीपक की लौ से दूर रखें।
अपार्टमेंट में रहने वालों के लिए
बहुमंज़िला इमारतों में छत या आंगन नहीं होता, इसलिए मुख्य द्वार, बालकनी, खिड़कियों की चौखट, रसोई और पूजा स्थान पर ध्यान दें। सोसाइटी के कॉमन एरिया या मंदिर में सामूहिक दीपदान का आयोजन भी अच्छा विकल्प है। बालकनी में हवा तेज़ हो तो कांच के ढक्कन वाले दीयों या लालटेन का उपयोग करें।
दिवाली के बाद दीयों का क्या करें?
दिवाली के बाद मिट्टी के दीयों को फेंकें नहीं। उन्हें धोकर सुखा लें और अगले दिनों — गोवर्धन पूजा, भाई दूज और कार्तिक मास के दीपदान — में फिर उपयोग करें। टूटे दीयों को गमलों की मिट्टी में मिला दें। कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली मनाई जाती है, जब नदियों के घाटों पर लाखों दीपक जलाए जाते हैं — उस दिन भी इन दीयों का उपयोग हो सकता है। जले हुए दीयों का बचा तेल पौधों के पास न डालें; उसे कागज़ में सोखकर कचरे में डालें।
सारांश
8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा के बाद मुख्य द्वार, पूजा घर, तुलसी, रसोई, जल स्थान, तिजोरी, आंगन, छत, खिड़कियों और पिछले दरवाज़े पर दीपक जलाएं — लौ पूर्व या उत्तर की ओर रखें। पूजा का दीपक रात भर जलने दें, और धनतेरस (6 नवंबर) के दक्षिणमुखी यम दीपक को न भूलें।
शुभ दीपावली!


