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दिवाली 2026 पर घर में दीपक कहां-कहां जलाएं? पूरी जानकारी

दिवाली 2026 पर दीपक कहां रखें — मुख्य द्वार, पूजा घर, तुलसी, रसोई, जल स्थान, छत, तिजोरी और अन्य स्थान, सही दिशा, 8 नवंबर का समय और सुरक्षा के सुझाव।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·7 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 9 अक्टू॰ 2026
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दिवाली 2026 पर घर में दीपक कहां-कहां जलाएं? पूरी जानकारी
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मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

दिवाली 2026 पर दीपक कहां रखें — मुख्य द्वार, पूजा घर, तुलसी, रसोई, जल स्थान, छत, तिजोरी और अन्य स्थान, सही दिशा, 8 नवंबर का समय और सुरक्षा के सुझाव।

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दिवाली पर दीपक कहां जलाएं: संक्षिप्त उत्तर

दिवाली की रात (रविवार, 8 नवंबर 2026) लक्ष्मी पूजा (दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50) के बाद मुख्य पूजा दीपक से दीये जलाकर इन स्थानों पर रखें: (1) मुख्य द्वार के दोनों ओर, (2) पूजा घर, (3) तुलसी का पौधा, (4) रसोई, (5) जल स्थान, (6) तिजोरी या उत्तर दिशा, (7) आंगन और छत, (8) खिड़कियां और बालकनी, (9) पिछला दरवाज़ा, और (10) पास का मंदिर या पीपल का पेड़। पूजा का दीपक रात भर जलता रहे। धनतेरस (6 नवंबर) को मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर मुख वाला अलग यम दीपक जलाया जाता है।

दीपक रखने के स्थान: पूरी तालिका

स्थानक्योंसुझाव
मुख्य द्वार (दोनों ओर)मां लक्ष्मी का स्वागत, नकारात्मकता का प्रवेश रोकनानीचे रंगोली बनाएं; सबसे पहले यही दीया जलाएं
पूजा घरमां की उपस्थितिघी का बड़ा दीपक, रात भर जलता रहे
तुलसी का पौधातुलसी को लक्ष्मी स्वरूपा माना गया हैजड़ के पास घी या तेल का दीया
रसोईमां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद, अन्न की कमी न होचूल्हे के पास, गैस से दूर
जल स्थान (नल, टंकी, कुआं)वरुण देव का आशीर्वाद और शुद्धताथाली में रखें, पानी के छींटों से दूर
तिजोरी / उत्तर दिशाकुबेर की दिशाउत्तर की ओर मुख वाला छोटा दीया
आंगनघर की ऊर्जा का केंद्रपांच दीयों का समूह रख सकते हैं
छत के कोनेदूर से दिखता प्रकाश, स्वागत का संकेतहवा से बचाव करें
खिड़कियां और बालकनीहर द्वार प्रकाशित — अंधकार का प्रवेश नहींपर्दों से दूर रखें
पिछला दरवाज़ा / पिछवाड़ाउपेक्षित कोनों का अंधकार दूरएक दीया पर्याप्त
अध्ययन कक्ष, पुस्तकेंमां सरस्वती का आशीर्वादछोटा दीया
वाहन, दुकान, दफ्तरकार्य में समृद्धिवाहन या कैश काउंटर के पास दीया
पास का मंदिर / पीपलदीपदान का पुण्यघर की पूजा से पहले या बाद में

हर स्थान का महत्व विस्तार से

मुख्य द्वार मान्यता है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी घर-घर विचरण करती हैं और जिस घर का द्वार प्रकाशित और स्वच्छ होता है, वहां प्रवेश करती हैं। इसलिए मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपक, रंगोली, तोरण और स्वास्तिक का विशेष महत्व है। द्वार की चौखट पर हल्दी-कुमकुम से छोटे चरण चिह्न बनाने की परंपरा भी है, जो घर की ओर आते हुए मां लक्ष्मी के पदचिह्नों का प्रतीक हैं।

पूजा घर पूजा स्थान पर घी का बड़ा दीपक रात भर जलना चाहिए। इसमें इतना घी रखें कि सुबह तक चले। दीपक को चिमनी या कांच के कवर से ढक दें, ताकि हवा से बुझे नहीं।

तुलसी तुलसी को लक्ष्मी स्वरूपा माना गया है और कार्तिक मास में तुलसी के पास दीपदान का विशेष पुण्य है। दिवाली पर तुलसी के पास दीपक जलाकर परिक्रमा करें।

रसोई रसोई मां अन्नपूर्णा का स्थान है। यहां दीपक जलाने से घर में अन्न-धन की कमी नहीं होती। ध्यान रखें कि दीया गैस सिलेंडर और चूल्हे से सुरक्षित दूरी पर हो।

जल स्थान नल, पानी की टंकी, कुआं या घड़ा — जहां भी जल रखा जाता है, वहां दीपक जलाना वरुण देव और जल की पवित्रता के प्रति कृतज्ञता है।

तिजोरी और उत्तर दिशा उत्तर दिशा कुबेर की मानी जाती है। तिजोरी या धन रखने के स्थान के पास उत्तर की ओर मुख वाला दीपक रखना धन-वृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।

छत और आंगन छत के चारों कोनों पर दीपक रखने से घर दूर से प्रकाशित दिखता है — यह अयोध्यावासियों द्वारा श्रीराम के स्वागत में जलाई गई दीपमालाओं की याद दिलाता है।

दीपक की लौ किस दिशा में हो?

  • •पूर्व: आरोग्य और दीर्घायु के लिए।
  • •उत्तर: धन और समृद्धि (कुबेर) के लिए।
  • •ईशान कोण: पूजा के मुख्य दीपक के लिए।
  • •दक्षिण: दिवाली की रात सामान्यतः टाला जाता है; यह धनतेरस (6 नवंबर) के यम दीपक और पितरों के दीपक के लिए आरक्षित है।

दिवाली की रात दीपक जलाने का क्रम

  1. 1प्रदोष काल आरंभ होते ही (दिल्ली में शाम 5:31) पूजा का मुख्य दीपक और मुख्य द्वार पर पहला दीया जलाएं।
  2. 2लक्ष्मी-गणेश पूजा संपन्न करें।
  3. 3दीयों की थाली की पूजा (दीपमालिका पूजन) करें और मुख्य दीपक से उन्हें प्रज्वलित करें।
  4. 4इस क्रम में रखें: पूजा घर → मुख्य द्वार → तुलसी → रसोई → जल स्थान → तिजोरी → अन्य कमरे → छत → बाहर।

पूजा विधि पढ़ें — दीपावली 2026 पूजा विधि।

दिवाली 2026 के अन्य दिनों के दीपक

  • •6 नवंबर (धनतेरस): यम दीपक — प्रदोष काल में मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर मुख वाला चार बत्तियों का दीपक। पढ़ें — धनतेरस 2026 कब है?
  • •7 नवंबर (छोटी दिवाली/काली चौदस): कई परिवार शाम को 14 दीये जलाते हैं।
  • •8 नवंबर (दिवाली): पूरे घर में मुख्य दीपदान।
  • •10 नवंबर (गोवर्धन पूजा) और 11 नवंबर (भाई दूज): मुख्य द्वार और पूजा स्थान पर दीपक।

कितने दीपक जलाएं, यह जानने के लिए पढ़ें — दिवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए?

कौन सा तेल किस दीपक में?

दीपकईंधन
पूजा का मुख्य दीपकगाय का घी
मुख्य द्वार, तुलसीघी या सरसों का तेल
अन्य स्थानसरसों या तिल का तेल
यम दीपक (धनतेरस)सरसों का तेल

सुरक्षा के सुझाव

  • •दीयों को पर्दों, कपड़ों, कागज़ और रंगोली के पाउडर से दूर रखें।
  • •लकड़ी के फर्श पर सीधे न रखें; थाली या स्टैंड का उपयोग करें।
  • •बच्चों और पालतू जानवरों के पास दीयों को बिना निगरानी के न छोड़ें।
  • •पास में पानी या रेत रखें।
  • •ऊंची इमारतों की बालकनी में ढके हुए दीपक या लालटेन का प्रयोग करें।
  • •सिंथेटिक कपड़े पहनकर दीये न जलाएं; सूती वस्त्र सुरक्षित हैं।

दीपक जलाने का मंत्र और भाव

हर दीपक जलाते समय यह मंत्र बोल सकते हैं:

ॐवैदिक शास्त्र सूत्र एवं श्लोक (Scriptural Shloka)
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥

दीपक केवल प्रकाश नहीं, बल्कि ज्ञान का प्रतीक है। मिट्टी का दीया हमारा शरीर, तेल हमारे कर्म, बाती हमारा मन और ज्योति आत्मा का प्रकाश मानी जाती है। जब हम घर के हर कोने में दीपक रखते हैं, तो यह संकल्प भी लेते हैं कि जीवन के हर क्षेत्र से अज्ञान और नकारात्मकता दूर हो।

रंगोली और दीपक का संयोजन

मुख्य द्वार पर रंगोली के बीच या चारों कोनों पर दीपक रखना विशेष शुभ माना जाता है। कमल, स्वास्तिक, लक्ष्मी जी के चरण और शुभ-लाभ के चित्र रंगोली में लोकप्रिय हैं। राजस्थान में पारंपरिक मांडणा — गेरू की ज़मीन पर खड़िया से बनी आकृतियां — के बीच दीपक रखने की परंपरा है। रंगोली के पाउडर को दीपक की लौ से दूर रखें।

अपार्टमेंट में रहने वालों के लिए

बहुमंज़िला इमारतों में छत या आंगन नहीं होता, इसलिए मुख्य द्वार, बालकनी, खिड़कियों की चौखट, रसोई और पूजा स्थान पर ध्यान दें। सोसाइटी के कॉमन एरिया या मंदिर में सामूहिक दीपदान का आयोजन भी अच्छा विकल्प है। बालकनी में हवा तेज़ हो तो कांच के ढक्कन वाले दीयों या लालटेन का उपयोग करें।

दिवाली के बाद दीयों का क्या करें?

दिवाली के बाद मिट्टी के दीयों को फेंकें नहीं। उन्हें धोकर सुखा लें और अगले दिनों — गोवर्धन पूजा, भाई दूज और कार्तिक मास के दीपदान — में फिर उपयोग करें। टूटे दीयों को गमलों की मिट्टी में मिला दें। कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली मनाई जाती है, जब नदियों के घाटों पर लाखों दीपक जलाए जाते हैं — उस दिन भी इन दीयों का उपयोग हो सकता है। जले हुए दीयों का बचा तेल पौधों के पास न डालें; उसे कागज़ में सोखकर कचरे में डालें।

सारांश

8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा के बाद मुख्य द्वार, पूजा घर, तुलसी, रसोई, जल स्थान, तिजोरी, आंगन, छत, खिड़कियों और पिछले दरवाज़े पर दीपक जलाएं — लौ पूर्व या उत्तर की ओर रखें। पूजा का दीपक रात भर जलने दें, और धनतेरस (6 नवंबर) के दक्षिणमुखी यम दीपक को न भूलें।

शुभ दीपावली!

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

दिवाली पर सबसे पहला दीपक कहां जलाएं?

सबसे पहले पूजा स्थान पर मुख्य दीपक और फिर मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं, क्योंकि मुख्य द्वार से ही मां लक्ष्मी का प्रवेश माना जाता है।

दिवाली पर दीपक की लौ किस दिशा में होनी चाहिए?

लौ पूर्व (आरोग्य) या उत्तर (धन) की ओर होनी चाहिए। दक्षिण दिशा धनतेरस के यम दीपक के लिए होती है।

क्या दिवाली पर रसोई में दीपक जलाना चाहिए?

हां, रसोई मां अन्नपूर्णा का स्थान है। चूल्हे से सुरक्षित दूरी पर दीपक जलाने से अन्न की कमी नहीं होती, ऐसी मान्यता है।

तुलसी के पास दीपक क्यों जलाते हैं?

तुलसी को लक्ष्मी स्वरूपा माना गया है और कार्तिक मास में तुलसी के पास दीपदान का विशेष पुण्य है।

क्या पूजा का दीपक रात भर जलना चाहिए?

हां, दिवाली की रात पूजा स्थान पर घी का दीपक रात भर जलता रहना शुभ माना जाता है।

यम दीपक 2026 में कब जलाएं?

यम दीपक धनतेरस, 6 नवंबर 2026 को प्रदोष काल (दिल्ली में शाम 5:33 से 8:09) में मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर जलाएं।

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