घर पर लक्ष्मी पूजा: संक्षिप्त उत्तर
आप बिना पंडित के भी घर पर लगभग 30 से 40 मिनट में दिवाली की लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं। रविवार, 8 नवंबर 2026 को प्रदोष-वृषभ मुहूर्त (दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50, जयपुर में 6:03 से 7:59) में पूजा आरंभ करें। सरल क्रम है: सफाई और तैयारी → दीपक जलाना → संकल्प → गणेश पूजा → कलश पूजा → लक्ष्मी पूजा (स्नान, चुनरी, तिलक, फूल, भोग) → मंत्र जाप → बही-खाता और तिजोरी पूजा → घर भर में दीपक → आरती → प्रसाद।
यह लेख उन परिवारों के लिए है जो पहली बार स्वयं पूजा कर रहे हैं या जिनके पास समय कम है। संपूर्ण शास्त्रीय षोडशोपचार विधि के लिए पढ़ें — दीपावली 2026 पूजा विधि: लक्ष्मी-गणेश पूजा की पूरी विधि।
8 नवंबर की शाम की योजना (दिल्ली का उदाहरण)
| समय | क्या करें |
|---|---|
| शाम 4:30 तक | स्नान, स्वच्छ वस्त्र, रंगोली और तोरण पूरे करें |
| शाम 5:00 | चौकी, मूर्तियां, कलश और सामग्री सजाएं |
| शाम 5:31 (प्रदोष आरंभ) | पूजा स्थान पर मुख्य दीपक और मुख्य द्वार पर पहला दीया जलाएं |
| शाम 5:54 | मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजा आरंभ करें |
| लगभग 6:40 | पूरे घर में दीपक लगाएं |
| शाम 7:50 से पहले | आरती और पुष्पांजलि |
| पूजा के बाद | प्रसाद, पटाखे (यदि हों), परिवार के साथ भोजन |
अन्य शहर: मुंबई 6:27–8:27, कोलकाता 5:20–7:18, लखनऊ 5:42–7:39, बेंगलुरु 6:17–8:20। पूरी सूची — शहर के अनुसार लक्ष्मी पूजा मुहूर्त।
पूजा से पहले की तैयारी (दोपहर तक)
- •पूरे घर, विशेषकर पूजा स्थान, मुख्य द्वार और रसोई की अच्छी तरह सफाई करें।
- •मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण और रंगोली बनाएं; द्वार के दोनों ओर स्वास्तिक और शुभ-लाभ लिखें।
- •मिट्टी के दीयों को पानी में भिगोकर सुखा लें और बत्तियां तैयार रखें।
- •भोग की थाली — खील-बताशे, मिठाई, फल — तैयार रखें।
- •पूजा की सारी सामग्री एक जगह इकट्ठा कर लें। सूची देखें — दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट 2026।
घर पर लक्ष्मी पूजा के 12 आसान चरण
चरण 1: स्थापना ईशान कोण या उत्तर दिशा में लाल कपड़ा बिछी चौकी रखें। अपनी ओर से देखने पर गणेश जी को बाईं ओर और लक्ष्मी जी को दाईं ओर रखें। पास में जल, सिक्का, सुपारी और आम के पत्तों वाला कलश रखें, ऊपर नारियल।
चरण 2: पवित्रीकरण अपने ऊपर, परिवार के सदस्यों पर और पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें। "ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः" बोलें।
चरण 3: मुख्य दीपक जलाएं मां के सामने घी का दीपक जलाएं और बोलें:
चरण 4: संकल्प हाथ में जल और अक्षत लेकर बोलें — "मैं अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए दीपावली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा कर रहा/रही हूं।" जल भूमि पर छोड़ दें।
चरण 5: गणेश पूजा गणेश जी को रोली, अक्षत, दूर्वा, फूल और एक लड्डू अर्पित करें। 'ॐ गं गणपतये नमः' का 11 बार जाप करें।
चरण 6: कलश पूजा 'ॐ वरुणाय नमः' बोलते हुए कलश को रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएं।
चरण 7: मां लक्ष्मी का स्नान पान के पत्ते से मां पर जल छिड़कें, फिर थोड़ा पंचामृत, और फिर से शुद्ध जल — यह प्रतीकात्मक स्नान है। चित्र हो तो केवल जल के छींटे दें।
चरण 8: श्रृंगार लाल चुनरी ओढ़ाएं, रोली-कुमकुम का तिलक लगाएं, चूड़ियां और बिंदी अर्पित करें।
चरण 9: फूल और विशेष सामग्री कमल या गुलाब के फूल, कमल गट्टे, चांदी का सिक्का और साबुत धनिया अर्पित करें।
चरण 10: भोग खील-बताशे, मिठाई, फल और लौंग-सुपारी वाला पान अर्पित करें।
चरण 11: मंत्र जाप 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार (समय कम हो तो 11 बार) जाप करें। पूरा परिवार साथ में जाप करे तो और भी शुभ।
चरण 12: बही-खाता, तिजोरी और दीपक तिजोरी और बही-खाते पर स्वास्तिक बनाएं, फिर मुख्य दीपक से सभी दीये जलाकर घर भर में रखें। 'ॐ जय लक्ष्मी माता' आरती करें, पुष्पांजलि दें और प्रसाद बांटें।
परिवार के सदस्यों की भूमिका
- •बुजुर्ग: संकल्प और आरती का नेतृत्व करें।
- •दंपती: मुख्य पूजा साथ बैठकर करें — पति-पत्नी का साथ पूजा करना शुभ माना जाता है।
- •बच्चे: रंगोली बनाएं, दीये सजाएं, आरती में घंटी बजाएं।
- •सभी: मंत्र जाप और आरती साथ में करें।
पूजा में परिवार की सहभागिता से बच्चों में परंपरा के प्रति लगाव बढ़ता है और त्योहार का आनंद दोगुना हो जाता है।
फ्लैट या छोटे घर में पूजा
- •चौकी के स्थान पर छोटा स्टूल या साफ शेल्फ उपयोग करें।
- •कलश के स्थान पर पीतल का छोटा लोटा पर्याप्त है।
- •बालकनी और मुख्य द्वार पर मिट्टी के दीये रखें; पर्दों और कपड़ों से दूरी बनाए रखें।
- •सोसाइटी के नियमों के अनुसार पटाखे केवल निर्धारित स्थान पर चलाएं।
आम शंकाएं और उनके उत्तर
- •मूर्ति न हो तो? लक्ष्मी-गणेश का चित्र भी पूरी तरह मान्य है।
- •कलश न हो तो? जल और आम के पत्तों वाला लोटा पर्याप्त है।
- •क्या महिलाएं अकेले पूजा कर सकती हैं? हां, बिल्कुल। घर की गृहलक्ष्मी द्वारा की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
- •क्या पूजा से पहले भोजन कर सकते हैं? कई लोग पूजा तक व्रत रखते हैं; न रख सकें तो हल्का सात्विक भोजन करें।
- •मंत्र न आते हों तो? केवल 'जय मां लक्ष्मी' या 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' बोलकर भी श्रद्धा से पूजा करें।
- •पूजा के बाद मूर्ति कहां रखें? लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति को पूरे वर्ष पूजा स्थान पर रख सकते हैं।
पूजा के बाद की बातें
- •पूजा स्थान पर रात भर एक दीपक जलता रहने दें।
- •तिजोरी में पूजा के कमल गट्टे, सिक्का और धनिया लाल कपड़े में बांधकर रखें।
- •दिवाली की रात घर में झाड़ू न लगाएं और कूड़ा बाहर न फेंकें — यह पुरानी लोक मान्यता है।
- •पड़ोसियों और रिश्तेदारों को मिठाई और शुभकामनाएं दें।
पूजा में होने वाली गलतियों से बचने के लिए पढ़ें — दिवाली पर लक्ष्मी पूजा में कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?
बच्चों को पूजा में कैसे शामिल करें?
- •रंगोली प्रतियोगिता: दोपहर में बच्चों को मुख्य द्वार की रंगोली बनाने दें।
- •दीयों की सजावट: मिट्टी के दीयों पर रंग और गोटे से सजावट बच्चों का पसंदीदा काम होता है।
- •कथा: पूजा से पहले उन्हें श्रीराम के अयोध्या लौटने और मां लक्ष्मी के समुद्र मंथन से प्रकट होने की कहानी सुनाएं।
- •मंत्र: उन्हें 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' बोलना सिखाएं और आरती में घंटी बजाने दें।
- •सुरक्षा: पटाखे केवल बड़ों की निगरानी में, सूती कपड़े पहनकर और पानी की बाल्टी पास रखकर।
पूजा के दौरान बोलने योग्य सरल प्रार्थना
यदि संस्कृत मंत्र कठिन लगें, तो पूजा के अंत में परिवार के साथ यह सरल प्रार्थना करें — "हे मां लक्ष्मी, हमारे घर में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि का वास हो। हमें धन के साथ सद्बुद्धि दें, ताकि हम उसका सदुपयोग करें और ज़रूरतमंदों की सहायता कर सकें। हे गणेश जी, हमारे सभी कार्य निर्विघ्न पूरे हों।" भाव से की गई प्रार्थना ही सबसे बड़ा मंत्र है।
अगली सुबह (9 नवंबर) क्या करें?
सुबह स्नान के बाद पूजा स्थान पर दीपक जलाएं, मां की आरती करें और रात भर रखे भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। अमावस्या दोपहर 12:31 बजे तक है, इसलिए इस सुबह स्नान-दान का विशेष महत्व है। लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां पूजा स्थान पर ही रहने दें।
30 मिनट की पूजा का समय-विभाजन
| समय | कार्य |
|---|---|
| 0–3 मिनट | पवित्रीकरण, दीपक, संकल्प |
| 3–8 मिनट | गणेश पूजा और कलश पूजा |
| 8–15 मिनट | लक्ष्मी जी का स्नान, श्रृंगार, फूल, भोग |
| 15–22 मिनट | मंत्र जाप (108 या 11 बार) |
| 22–26 मिनट | बही-खाता, तिजोरी और दीपमालिका पूजन |
| 26–30 मिनट | आरती, पुष्पांजलि, क्षमा प्रार्थना, प्रसाद |
इस क्रम से पूजा व्यवस्थित रहती है और मुहूर्त के भीतर आराम से पूरी हो जाती है।
सारांश
8 नवंबर 2026 को आप प्रदोष-वृषभ मुहूर्त (दिल्ली में शाम 5:54–7:50) में 30–40 मिनट में घर पर संपूर्ण और सरल लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं। ऊपर दिए 12 चरणों का पालन करें, पूरे परिवार को शामिल करें और रात भर घर को प्रकाशित रखें। मां लक्ष्मी आपके घर में सदा वास करें।
शुभ दीपावली!



