🌸व्रत एवं त्यौहारप्रामाणिक वैदिक शास्त्र सूत्र

तुलसी विवाह 2026 कब है? पूजा विधि, सामग्री और शुभ मुहूर्त

तुलसी विवाह 2026 शनिवार 21 नवंबर (द्वादशी) को है। द्वादशी का समय, शाम का शुभ मुहूर्त, पूरी सामग्री सूची, मंत्रों सहित विवाह विधि और वृंदा की कथा।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·6 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 9 अक्टू॰ 2026
WhatsApp शेयर
0%
तुलसी विवाह 2026 कब है? पूजा विधि, सामग्री और शुभ मुहूर्त
✨प्रामाणिक वैदिक संदर्भ सचित्र

मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

तुलसी विवाह 2026 शनिवार 21 नवंबर (द्वादशी) को है। द्वादशी का समय, शाम का शुभ मुहूर्त, पूरी सामग्री सूची, मंत्रों सहित विवाह विधि और वृंदा की कथा।

📜 प्रामाणिक ग्रंथ सूत्र⏱️ 6 मिनट में पूर्ण समझ🙏 सटीक ज्योतिषीय उपाय

तुलसी विवाह 2026: संक्षिप्त उत्तर

तुलसी विवाह 2026 शनिवार, 21 नवंबर 2026 को कार्तिक शुक्ल द्वादशी पर है (नई दिल्ली में द्वादशी तिथि 21 नवंबर सुबह 6:31 से 22 नवंबर सुबह 4:56 बजे तक)। यह विवाह परंपरागत रूप से शाम को सूर्यास्त के आसपास (गोधूलि बेला) में किया जाता है — दिल्ली में सूर्यास्त लगभग शाम 5:25 बजे है। अनेक परिवारों में तुलसी विवाह देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) की शाम किया जाता है, और कुछ क्षेत्रों में कार्तिक पूर्णिमा (24 नवंबर) तक किसी भी दिन।

विवरणसमय (नई दिल्ली)
तुलसी विवाहशनिवार, 21 नवंबर 2026
द्वादशी तिथि21 नवंबर सुबह 6:31 – 22 नवंबर सुबह 4:56
श्रेष्ठ समयशाम, सूर्यास्त (लगभग 5:25) के आसपास गोधूलि बेला
देवउठनी एकादशीशुक्रवार, 20 नवंबर
कार्तिक पूर्णिमामंगलवार, 24 नवंबर

गोधूलि बेला के बारे में पढ़ें — गोधूलि मुहूर्त क्या है?। विवाह के शुभ मुहूर्त कैसे देखें — विवाह मुहूर्त कैसे देखें?

तुलसी विवाह क्या है?

तुलसी विवाह पवित्र तुलसी के पौधे (मां लक्ष्मी / वृंदा का स्वरूप) का भगवान विष्णु के शालिग्राम (या श्रीकृष्ण) स्वरूप के साथ विधिवत विवाह है। यह चातुर्मास के बाद भगवान विष्णु के जागने और विवाह के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है। मान्यता है कि तुलसी विवाह कराने, विशेषकर तुलसी का कन्यादान करने से कन्यादान के समान पुण्य मिलता है — इसलिए जिन दंपतियों की बेटी नहीं है, वे भी यह पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। यह भी माना जाता है कि तुलसी विवाह कराने से घर में सुख-समृद्धि आती है और विवाह योग्य युवक-युवतियों के विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

वृंदा की कथा

वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त और पतिव्रता स्त्री थी, जिसका विवाह असुरराज जालंधर से हुआ था। जालंधर की शक्ति का स्रोत वृंदा का सतीत्व था, इसलिए देवता उसे पराजित नहीं कर पा रहे थे। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण करके वृंदा का सतीत्व भंग किया, और युद्ध में भगवान शिव ने जालंधर का वध कर दिया।

सच्चाई जानकर वृंदा ने भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का श्राप दिया — वही शालिग्राम है। फिर वृंदा ने अपने प्राण त्याग दिए और उसकी राख से तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि तुलसी सदा पूजनीय रहेगी, तुलसी के बिना उनकी कोई पूजा पूर्ण नहीं होगी, और हर वर्ष कार्तिक में वे शालिग्राम रूप में तुलसी से विवाह करेंगे। तभी से तुलसी विवाह की परंपरा चली आ रही है।

तुलसी विवाह की सामग्री

श्रेणीसामग्री
मुख्यसजा हुआ तुलसी का गमला, शालिग्राम या विष्णु/कृष्ण की प्रतिमा
मंडपचार गन्ने, आम के पत्ते, फूल
तुलसी का श्रृंगारलाल चुनरी, छोटी साड़ी, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, महावर
शालिग्राम के लिएपीला वस्त्र, जनेऊ, चंदन
पूजनहल्दी, रोली, अक्षत, कलावा, घी का दीपक, धूप, कपूर
मालाएंदो फूलों की मालाएं (वरमाला के लिए)
भोगआंवला, बेर, सिंघाड़ा, शकरकंद, अमरूद, मिठाई, पंचामृत, नारियल
अन्यजल से भरा कलश, चौकी, लाल कपड़ा, रंगोली के रंग

तुलसी विवाह की चरणबद्ध विधि

  1. 1स्थान की तैयारी: आंगन या छत साफ करें; तुलसी के गमले को चौकी पर रखें और चारों ओर रंगोली बनाएं।
  2. 2मंडप: तुलसी के ऊपर चार गन्नों से मंडप बनाएं और उसे आम के पत्तों व फूलों से सजाएं।
  3. 3श्रृंगार: तुलसी जी को लाल चुनरी ओढ़ाएं और दुल्हन की तरह श्रृंगार करें; दाहिनी ओर पीले वस्त्र पर शालिग्राम या विष्णु जी को स्थापित करें।
  4. 4गणेश और कलश पूजन: सबसे पहले गणेश जी और फिर कलश की पूजा करें।
  5. 5हल्दी की रस्म: तुलसी और शालिग्राम दोनों को हल्दी लगाएं, फिर रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।
  6. 6वरमाला: दोनों को फूलों की माला पहनाएं।
  7. 7कन्यादान: मेज़बान परिवार (प्रायः घर के बड़े दंपती) तुलसी जी का शालिग्राम को कन्यादान करें — हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर संकल्प के साथ।
  8. 8फेरे: घर का कोई पुरुष सदस्य शालिग्राम को हाथ में लेकर तुलसी के चारों ओर सात फेरे लगाए, जबकि महिलाएं मंगल गीत गाएं।
  9. 9भोग और आरती: ऋतुफल और मिठाई का भोग लगाएं, आरती करें और प्रसाद बांटें।

मंत्र:

  • तुलसी जी — 'ॐ तुलस्यै नमः'
  • भगवान विष्णु — 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'
  • तुलसी स्तुति:

    ॐवैदिक शास्त्र सूत्र एवं श्लोक (Scriptural Shloka)
    वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
    पुष्पसारा नन्दिनी च तुलसी कृष्णजीवनी॥

    यह श्लोक तुलसी के आठ नामों का स्मरण है, जिसके पाठ का विशेष महत्व माना जाता है।

    तुलसी विवाह के नियम

    • •तुलसी विवाह के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
    • •विवाह शाम को, गोधूलि बेला या प्रदोष काल में करना श्रेष्ठ है।
    • •पूजा में तुलसी के पौधे को स्वस्थ और हरा-भरा रखें; सूखा पौधा हो तो नया लगाएं।
    • •विवाह के बाद तुलसी की चुनरी और श्रृंगार किसी सुहागिन को दान करें।
    • •तामसिक भोजन और कलह से दूर रहें।

    राजस्थान और देश भर में तुलसी विवाह

    राजस्थान के कई क्षेत्रों में तुलसी विवाह पूरी बारात, गीतों और भोज के साथ धूमधाम से मनाया जाता है — कुछ गांवों में शालिग्राम की बारात मंदिर से निकलती है और तुलसी का "कन्यादान" किसी परिवार द्वारा किया जाता है। गुजरात और महाराष्ट्र में भी तुलसी विवाह के बाद ही विवाह का मौसम आरंभ माना जाता है। अनेक मंदिरों में सामूहिक तुलसी विवाह का आयोजन होता है।

    तुलसी विवाह के बाद क्या करें?

    • •विवाह के बाद तुलसी की चुनरी और श्रृंगार की सामग्री किसी सुहागिन या ब्राह्मणी को दान करें।
    • •गन्ने के मंडप के गन्ने प्रसाद के रूप में बांटें।
    • •कार्तिक पूर्णिमा तक प्रतिदिन तुलसी के पास दीपक जलाएं।
    • •तुलसी के पौधे को स्वस्थ रखें — नियमित जल, धूप और सर्दी में पाले से बचाव।

    घर में तुलसी से जुड़े नियम

    • •तुलसी को घर के आंगन, बालकनी या उत्तर-पूर्व दिशा में रखें।
    • •रविवार, एकादशी और संध्या के बाद तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
    • •पत्ते तोड़ते समय नाखून न लगाएं; उंगलियों से धीरे से तोड़ें।
    • •तुलसी के सूखे पौधे को फेंकें नहीं — उसे सम्मानपूर्वक किसी पवित्र जल या मिट्टी में विसर्जित करें और नया पौधा लगाएं।
    • •तुलसी के पत्ते भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को अर्पित करें, पर गणेश जी को नहीं।

    सामूहिक तुलसी विवाह

    कई मंदिरों और सोसाइटियों में सामूहिक तुलसी विवाह का आयोजन होता है, जिसमें पूरी बारात, मंगल गीत, फेरे और भोज होते हैं। इसमें भाग लेने से परिवार के सदस्य — विशेषकर बच्चे — परंपरा से जुड़ते हैं। यदि घर में तुलसी विवाह संभव न हो, तो किसी नज़दीकी मंदिर के आयोजन में कन्यादान की सामग्री या भोज के लिए अन्न का दान करके भी पुण्य प्राप्त किया जा सकता है।

    सारांश

    तुलसी विवाह 2026 शनिवार, 21 नवंबर को है (अनेक परिवारों में 20 नवंबर की शाम)। शाम को तुलसी जी का दुल्हन की तरह श्रृंगार करें, गन्ने का मंडप बनाएं, शालिग्राम के साथ हल्दी, वरमाला, कन्यादान और सात फेरे की रस्में करें, और प्रसाद बांटें। देवउठनी एकादशी की जानकारी — देवउठनी एकादशी 2026 कब है?

    जय तुलसी माता!

    यूट्यूब शॉर्ट्स वीडियोनवीनतम सूत्र

    ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

    नित्य संध्या एवं पूजा में भगवान विष्णु की आरती का आध्यात्मिक महत्व।

    मात्र 60 सेकंड में संपूर्ण नियम व वैदिक सूत्र समझें
    प्रमाणिक गणना व सरल भाषा में व्याख्या
    ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा
    Shorts

    ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

    ▶ 60 सेकंड में देखेंYouTube पर खोलें
    🌸 व्रत एवं पर्व

    आगामी व्रत, त्यौहार व पूजा विधि की संपूर्ण सूची

    एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा, अमावस्या एवं सभी प्रमुख पर्वों की सटीक शास्त्रसम्मत तिथियां देखें।

    पर्व व त्यौहार कैलेंडर देखें →
    पाठक समीक्षा

    क्या यह ज्योतिषीय लेख आपके लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक रहा?

    ॐ

    ज्योतिष अनुसंधान केंद्र

    प्रमाणित वैदिक शोध मंडल

    यह आलेख महर्षि पराशर विरचित वृहत्पाराशर होराशास्त्र, नारद संहिता, मुहूर्त चिंतामणि एवं शास्त्रीय सूर्यसिद्धांत के सूत्रों के गहन अध्ययन व शोध के आधार पर संकलित किया गया है।

    व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श

    क्या आपकी कुंडली में यह योग या दोष सक्रिय है?

    हमारे 24x7 दैविक AI ज्योतिषी से अपनी जन्म तिथि व समय के आधार पर सटीक विश्लेषण प्राप्त करें।

    AI ज्योतिषी से पूछें

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    तुलसी विवाह 2026 कब है?

    तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर 2026 (कार्तिक शुक्ल द्वादशी) को है। कई परिवार देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) की शाम भी तुलसी विवाह करते हैं।

    तुलसी विवाह किस समय करना चाहिए?

    शाम को सूर्यास्त के आसपास गोधूलि बेला या प्रदोष काल में; दिल्ली में 21 नवंबर को सूर्यास्त लगभग शाम 5:25 बजे है।

    तुलसी विवाह में किसके साथ विवाह होता है?

    तुलसी जी का विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप या श्रीकृष्ण की प्रतिमा के साथ होता है।

    तुलसी विवाह की सामग्री क्या है?

    तुलसी का गमला, शालिग्राम, गन्ने, लाल चुनरी, श्रृंगार, पीला वस्त्र, हल्दी, रोली, अक्षत, दीपक, मालाएं, ऋतुफल, मिठाई और कलश।

    तुलसी विवाह कराने का क्या फल है?

    मान्यता है कि तुलसी विवाह कराने और तुलसी का कन्यादान करने से कन्यादान के समान पुण्य मिलता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

    तुलसी को शालिग्राम से विवाह क्यों कराया जाता है?

    वृंदा की कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने वरदान दिया था कि वे हर वर्ष शालिग्राम रूप में तुलसी से विवाह करेंगे।

    आज का पंचांग (जयपुर)2026-10-17
    तिथिसप्तमी
    नक्षत्रपूर्वाषाढ़ा
    सूर्योदय06:27 AM
    अभिजित मुहूर्त11:49 AM - 12:35 PM
    आज का संपूर्ण पंचांग देखें
    @ApnaPanchang
    🪐विशेष सूत्र

    ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

    नित्य संध्या एवं पूजा में भगवान विष्णु की आरती का आध्यात्मिक महत्व।

    ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा
    Shorts

    ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

    ▶ 60 सेकंड में देखेंYouTube पर खोलें
    YouTube पर सब्सक्राइब करें
    नित्य पंचांग एवं वैदिक उपायसभी शॉर्ट्स
    आधिकारिक मोबाइल ऐप4.8·100K+ डाउनलोड्स
    पंचांग 2026: कुंडली एवं AI ज्योतिषी
    टॉप ज्योतिष ऐप

    पंचांग 2026: कुंडली एवं AI ज्योतिषी

    दैनिक पंचांग, चौघड़िया, व्रत-त्योहार, वैदिक जन्म कुंडली एवं 24/7 AI ज्योतिषी परामर्श।

    • सटीक दैनिक पंचांग व सूर्योदय गणना
    • चौघड़िया, अभिजित व राहुकाल मुहूर्त
    Google Play से निःशुल्क पाएं
    🔮 निःशुल्क जन्म पत्रिका

    अपनी संपूर्ण जन्म कुंडली बनाएं

    सटीक लग्न, नवमांश, चंद्र राशि, महादशा, कालसर्प व मांगलिक दोष की गणना तुरंत प्राप्त करें।

    कुंडली बनाएं (100% Free) →

    अन्य संबंधित ज्योतिष लेख

    सभी लेख →
    🌸 व्रत एवं त्यौहार6 min

    एकादशी क्या होती है?

    🌸 व्रत एवं त्यौहार5 min

    पुष्कर मेला और कार्तिक पंचांग