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देवउठनी एकादशी पर कौन से काम शुभ माने जाते हैं?

देवउठनी एकादशी (20 नवंबर 2026) पर शुभ कार्य — भगवान विष्णु को जगाना, तुलसी पूजा, दीपदान, दान, विवाह व गृह प्रवेश की शुरुआत, सरल उपाय और किन कामों से बचें।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·6 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 9 अक्टू॰ 2026
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देवउठनी एकादशी पर कौन से काम शुभ माने जाते हैं?
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मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

देवउठनी एकादशी (20 नवंबर 2026) पर शुभ कार्य — भगवान विष्णु को जगाना, तुलसी पूजा, दीपदान, दान, विवाह व गृह प्रवेश की शुरुआत, सरल उपाय और किन कामों से बचें।

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देवउठनी एकादशी पर शुभ कार्य: संक्षिप्त उत्तर

देवउठनी एकादशी, शुक्रवार 20 नवंबर 2026 (वैष्णव: 21 नवंबर) को सबसे शुभ कार्य हैं: एकादशी का व्रत; शाम को गन्ने, ऋतुफल, शंख और 'उत्तिष्ठ गोविन्द' मंत्र से भगवान विष्णु को जगाना; तुलसी की पूजा और दीपक; दीपदान; विष्णु सहस्रनाम का पाठ; अन्न, वस्त्र और दीपक का दान; और विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों की योजना, जो चातुर्मास के बाद फिर से आरंभ होते हैं। चावल, तुलसी तोड़ने, तामसिक भोजन और क्रोध से बचें। पारण 21 नवंबर, दोपहर 1:11 से 3:18 (दिल्ली) के बीच करें।

विवरणसमय (नई दिल्ली)
देवउठनी एकादशीशुक्रवार, 20 नवंबर 2026
एकादशी तिथि20 नवंबर सुबह 7:15 – 21 नवंबर सुबह 6:31
पारण21 नवंबर, दोपहर 1:11 – 3:18
तुलसी विवाहशनिवार, 21 नवंबर

देवउठनी एकादशी पर करने योग्य 12 शुभ कार्य

1. एकादशी का व्रत अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जला, फलाहारी या एक समय भोजन वाला व्रत रखें। मान्यता है कि प्रबोधिनी एकादशी का व्रत हज़ार अश्वमेध यज्ञों के समान पुण्य देता है और पापों का नाश करता है।

2. भगवान विष्णु को जगाना शाम को घंटी और शंख बजाते हुए 'उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते' मंत्र से भगवान को जगाएं। यह इस दिन का मुख्य अनुष्ठान है।

3. गन्ने का मंडप और ऋतुफल गन्नों से मंडप बनाकर भगवान को गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद, बेर, आंवला और अमरूद जैसे नई ऋतु के फल अर्पित करें। लोक परंपरा में देवउठनी के बाद ही नया गन्ना खाना शुरू किया जाता है।

4. तुलसी पूजा सुबह तुलसी में जल अर्पित करें (पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रखें) और शाम को तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं। कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व है।

5. दीपदान घर, तुलसी, मंदिर और जल स्थानों पर दीपक जलाएं। कार्तिक मास दीपदान का मास है, और देवउठनी एकादशी इसका एक प्रमुख दिन है।

6. विष्णु सहस्रनाम या गीता पाठ विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता या विष्णु पुराण का पाठ करें। समय कम हो तो 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का 108 बार जाप करें।

7. शालिग्राम पूजा घर में शालिग्राम हो तो पंचामृत से अभिषेक करके तुलसी दल अर्पित करें।

8. दान अन्न, गर्म कपड़े, कंबल (सर्दी शुरू हो रही होती है), दीपक और तिल का दान करें। ब्राह्मणों और ज़रूरतमंदों को भोजन कराएं।

9. गौ सेवा गाय को गुड़, हरा चारा और रोटी खिलाएं; गौशाला में दान दें।

10. मांगलिक कार्यों की योजना चातुर्मास समाप्त होने के साथ विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई और नए व्यापार जैसे कार्यों के मुहूर्त फिर से उपलब्ध हो जाते हैं। इसी दिन से इनकी योजना और तैयारी शुरू करना शुभ माना जाता है। मुहूर्त देखें — [शुभ मुहूर्त](/muhurat), [गृह प्रवेश मुहूर्त](/guides/griha-pravesh-muhurat) और [विवाह मुहूर्त कैसे देखें?](/guides/vivah-muhurat-kaise-dekhein)

11. रात्रि जागरण रात में भजन-कीर्तन और जागरण करें — जिस दिन भगवान जागते हैं, उस रात भक्त का जागना विशेष फलदायी माना गया है।

12. तुलसी विवाह द्वादशी (21 नवंबर) को या एकादशी की शाम तुलसी विवाह कराएं। विधि पढ़ें — [तुलसी विवाह 2026 कब है?](/guides/tulsi-vivah-2026-puja-vidhi-samagri)

सरल उपाय (पारंपरिक मान्यताएं)

  • •सुखी दांपत्य जीवन के लिए: तुलसी जी को लाल चुनरी और सुहाग सामग्री अर्पित करें।
  • •विवाह में देरी हो तो: तुलसी विवाह में भाग लें और भगवान विष्णु को हल्दी व पीले फूल अर्पित करें।
  • •समृद्धि के लिए: तुलसी के पास घी का दीपक जलाकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का 108 बार जाप करें।
  • •घर की नकारात्मकता दूर करने के लिए: शाम को पूरे घर में शंख बजाएं और गंगाजल छिड़कें।
  • •रोग से राहत के लिए: भगवान विष्णु को पीले फल अर्पित करके ज़रूरतमंदों में बांटें।

ये उपाय लोक परंपरा पर आधारित हैं; इन्हें श्रद्धा से करें, अंधविश्वास से नहीं।

देवउठनी एकादशी पर क्या न करें?

  • •एकादशी के दिन चावल न खाएं।
  • •एकादशी या द्वादशी को तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
  • •प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से दूर रहें।
  • •दिन में सोना, झगड़ा और झूठ बोलना वर्जित माना गया है।
  • •किसी का अपमान न करें — विशेषकर बड़ों और महिलाओं का।
  • •पारण का समय न चूकें; हरि वासर में पारण न करें।

चातुर्मास के बाद शुभ कार्यों का आरंभ क्यों?

चातुर्मास में वर्षा ऋतु के कारण यात्रा कठिन होती थी, कृषि कार्य चरम पर होते थे और संक्रमण का खतरा अधिक रहता था — इसलिए बड़े आयोजन टाले जाते थे। धार्मिक दृष्टि से इस दौरान भगवान के शयन के कारण विवाह आदि नहीं होते। देवउठनी पर भगवान के जागने, नई फसल आने और मौसम सुहाना होने के साथ समाज फिर से उत्सवों की ओर लौटता है। इसी कारण देवउठनी के बाद विवाह का मौसम आरंभ होता है।

राजस्थान में "बड़ी ग्यारस"

राजस्थान में देवउठनी एकादशी को "देव उठनी ग्यारस" या "बड़ी ग्यारस" कहा जाता है। यहां इस दिन बड़ी संख्या में विवाह होते हैं, और कई समुदायों में इसे अबूझ सावा माना जाता है। आंगन में मांडणे बनाए जाते हैं, और गांवों में महिलाएं थाली बजाते हुए "उठो देव" के गीत गाती हैं।

देवउठनी एकादशी के बाद विवाह के मुहूर्त

चातुर्मास के बाद विवाह के शुभ मुहूर्त फिर से शुरू होते हैं। विवाह मुहूर्त तय करते समय पंचांग में शुक्र और गुरु का उदय (अस्त न होना), शुभ नक्षत्र, तिथि, लग्न और वर-वधू की कुंडली का मिलान देखा जाता है। इसलिए हर तारीख विवाह के लिए उपयुक्त नहीं होती। अपने लिए सही तारीख चुनने के लिए किसी योग्य पंडित से परामर्श लें और हमारा शुभ मुहूर्त पेज और गुण मिलान टूल देखें।

व्रत न रख सकें तो?

यदि स्वास्थ्य, आयु या कार्य के कारण व्रत संभव न हो, तब भी देवउठनी एकादशी का पुण्य प्राप्त किया जा सकता है — शाम को भगवान को जगाने की पूजा करें, तुलसी के पास दीपक जलाएं, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें और यथाशक्ति दान दें। उस दिन चावल न खाएं और सात्विक भोजन करें। भक्ति और भाव ही सबसे बड़ा व्रत है।

देवउठनी एकादशी और नई शुरुआत

जिस प्रकार भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं, उसी प्रकार यह दिन हमें भी अपने भीतर जागने का संदेश देता है — आलस्य त्यागने, अधूरे कार्य पूरे करने और नए लक्ष्य तय करने का। कई लोग इस दिन से नया अभ्यास शुरू करते हैं — जैसे सुबह जल्दी उठना, योग, या किसी अच्छे ग्रंथ का नियमित पाठ। यह आध्यात्मिक के साथ-साथ व्यावहारिक जीवन में भी नई शुरुआत का दिन है।

सारांश

20 नवंबर 2026 को व्रत रखें, गन्ने और 'उत्तिष्ठ' मंत्र से भगवान विष्णु को जगाएं, तुलसी पूजा करें, दीपक जलाएं, दान दें और मांगलिक कार्यों की योजना बनाएं — और 21 नवंबर को दोपहर 1:11 से 3:18 (दिल्ली) के बीच पारण करें। इसके बाद कार्तिक पूर्णिमा (24 नवंबर) पर स्नान-दान का पर्व है — पढ़ें कार्तिक पूर्णिमा 2026 कब है?

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यह आलेख महर्षि पराशर विरचित वृहत्पाराशर होराशास्त्र, नारद संहिता, मुहूर्त चिंतामणि एवं शास्त्रीय सूर्यसिद्धांत के सूत्रों के गहन अध्ययन व शोध के आधार पर संकलित किया गया है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

देवउठनी एकादशी पर क्या करना शुभ होता है?

व्रत, भगवान विष्णु को जगाना, तुलसी पूजा, दीपदान, विष्णु सहस्रनाम पाठ, दान, गौ सेवा, रात्रि जागरण और तुलसी विवाह शुभ माने जाते हैं।

देवउठनी एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?

चावल खाना, तुलसी के पत्ते तोड़ना, प्याज-लहसुन-मांस-मदिरा का सेवन, दिन में सोना, झगड़ा और झूठ बोलना वर्जित माना जाता है।

देवउठनी एकादशी के बाद कौन से कार्य शुरू होते हैं?

चातुर्मास समाप्त होने के बाद विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन और नए व्यापार जैसे मांगलिक कार्य फिर से आरंभ होते हैं।

देवउठनी एकादशी पर क्या दान करें?

अन्न, गर्म कपड़े, कंबल, दीपक, तिल और गायों के लिए चारा दान करना शुभ माना जाता है।

देवउठनी एकादशी 2026 का पारण कब है?

21 नवंबर 2026 को दिल्ली में दोपहर 1:11 से 3:18 बजे तक पारण का समय है।

देवउठनी एकादशी पर गन्ने का मंडप क्यों बनाते हैं?

गन्ना नई फसल और मिठास का प्रतीक है; गन्ने के मंडप के नीचे भगवान को ऋतुफल अर्पित करके जगाने की परंपरा है।

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