महाशिवरात्रि 2027: संक्षिप्त उत्तर
महाशिवरात्रि 2027 शनिवार, 6 मार्च 2027 को है। सबसे महत्वपूर्ण निशीथ काल पूजा नई दिल्ली में 7 मार्च की रात 12:07 से 12:57 तक (जयपुर में 12:13 से 1:02) है। चतुर्दशी तिथि 6 मार्च दोपहर 12:03 से 7 मार्च दोपहर 1:46 तक रहेगी, और पारण (व्रत खोलना) 7 मार्च को सुबह 6:40 से दोपहर 1:46 तक (जयपुर में 6:45 से 1:46) — चतुर्दशी समाप्त होने से पहले।
चार प्रहर की पूजा का समय
| प्रहर | नई दिल्ली | जयपुर |
|---|---|---|
| प्रथम प्रहर | शाम 6:24 – रात 9:28 (6 मार्च) | शाम 6:30 – रात 9:34 |
| द्वितीय प्रहर | रात 9:28 – 12:32 | रात 9:34 – 12:38 |
| तृतीय प्रहर | रात 12:32 – 3:36 (7 मार्च) | रात 12:38 – 3:42 |
| चतुर्थ प्रहर | सुबह 3:36 – 6:40 (7 मार्च) | सुबह 3:42 – 6:45 |
| निशीथ काल | रात 12:07 – 12:57 | रात 12:13 – 1:02 |
| पारण | 7 मार्च सुबह 6:40 – दोपहर 1:46 | सुबह 6:45 – दोपहर 1:46 |
समय प्रमुख पंचांगों की दृक् गणना पर आधारित हैं। अन्य शहरों के लिए [पंचांग](/panchang) देखें।
महाशिवरात्रि 6 मार्च को ही क्यों?
महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (अमांत में माघ कृष्ण चतुर्दशी) को मनाई जाती है, और इसकी तारीख इस नियम से तय होती है कि मध्यरात्रि (निशीथ काल) में चतुर्दशी हो। 2027 में चतुर्दशी 6 मार्च दोपहर 12:03 से शुरू हो रही है, इसलिए 6-7 मार्च की पूरी रात चतुर्दशी में है — यही महाशिवरात्रि की रात है। इस नियम के बारे में पढ़ें — सूर्योदय के अनुसार व्रत की तारीख कैसे तय होती है?
महाशिवरात्रि का महत्व
- •शिव-पार्वती विवाह: मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।
- •ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य: शिव पुराण के अनुसार इसी रात भगवान शिव अनंत ज्योति स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) के रूप में प्रकट हुए, जिसका आदि-अंत ब्रह्मा और विष्णु भी नहीं खोज पाए।
- •नीलकंठ: एक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को शिव ने इसी रात कंठ में धारण किया था।
- •साधना की रात: योग परंपरा में इस रात को ग्रहों की स्थिति के कारण आध्यात्मिक ऊर्जा के जागरण के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए रात भर जागरण और ध्यान किया जाता है।
2027 में महाशिवरात्रि शनिवार को है — शनि देव भगवान शिव के परम भक्त माने जाते हैं, इसलिए इस दिन शिव पूजा के साथ शनि दोष शांति के उपाय भी विशेष फलदायी माने जा रहे हैं।
महाशिवरात्रि पूजा सामग्री
- •शिवलिंग या शिव प्रतिमा
- •जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत)
- •बेलपत्र (तीन पत्तों वाले, बिना कटे-फटे)
- •धतूरा, आक के फूल, भांग (परंपरा अनुसार)
- •भस्म, चंदन, अक्षत, सफेद फूल
- •दीपक, धूप, कपूर
- •फल, मिठाई, बेर
चार प्रहर पूजा की विधि
- 1दिन में: व्रत रखें — निर्जला या फलाहारी, अपनी सामर्थ्य के अनुसार।
- 2प्रथम प्रहर: स्नान करके संकल्प लें; शिवलिंग का दूध से अभिषेक करें, बेलपत्र और फूल अर्पित करें।
- 3द्वितीय प्रहर: दही से अभिषेक, फिर जल; 'ॐ नमः शिवाय' का जाप।
- 4तृतीय प्रहर: घी से अभिषेक; निशीथ काल (दिल्ली में 12:07–12:57) में विशेष पूजा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप।
- 5चतुर्थ प्रहर: शहद से अभिषेक; भोर तक जागरण।
- 6पारण: 7 मार्च को सुबह 6:40 के बाद, दोपहर 1:46 से पहले व्रत खोलें।
मंत्र:
व्रत के नियम
- •शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर, कुमकुम, तुलसी और केतकी (केवड़ा) के फूल नहीं चढ़ाए जाते।
- •बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखकर चढ़ाएं।
- •शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती — जलाधारी (सोमसूत्र) को लांघा नहीं जाता; आधी परिक्रमा करके लौटें।
- •अनाज, प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन से परहेज़।
- •रात्रि जागरण में भजन-कीर्तन और शिव पुराण का पाठ।
राजस्थान में महाशिवरात्रि
राजस्थान में एकलिंगजी (उदयपुर), परशुराम महादेव (पाली-राजसमंद), अचलेश्वर महादेव (माउंट आबू) और जयपुर के झारखंड महादेव जैसे शिवालयों में महाशिवरात्रि पर विशाल मेले और रात्रि जागरण होते हैं।
प्रदोष व्रत से संबंध
महाशिवरात्रि से एक दिन पहले, 5 मार्च 2027 को शुक्र प्रदोष व्रत है। प्रदोष के बारे में पढ़ें — प्रदोष व्रत क्या है?
महाशिवरात्रि व्रत कथा (शिकारी की कथा)
शिव पुराण में एक शिकारी की कथा आती है। एक बार वह शिकार की तलाश में दिन भर भूखा-प्यासा जंगल में भटकता रहा और रात होने पर एक बेल के पेड़ पर चढ़कर बैठ गया। उस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग था, जो पत्तों से ढका था। रात भर शिकार की प्रतीक्षा में जागते हुए वह अनजाने में बेल के पत्ते तोड़कर नीचे गिराता रहा, जो शिवलिंग पर गिरते रहे, और उसकी पानी की थैली से जल की बूंदें भी शिवलिंग पर टपकती रहीं। रात में जब भी कोई हिरण आया, उसने हिरण के परिवार की विनती सुनकर उसे छोड़ दिया। इस तरह अनजाने में उसने महाशिवरात्रि का व्रत, जागरण, बेलपत्र और जल से पूजा, और दया — सब कर लिया। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे मोक्ष प्रदान किया। यह कथा बताती है कि सच्चे मन से की गई सरल पूजा भी शिव को प्रिय है।
मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि होती है — यानी वर्ष में 12 (अधिक मास वाले वर्ष में 13) शिवरात्रियां। इनमें फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की शिवरात्रि सबसे बड़ी है, इसलिए उसे महाशिवरात्रि कहते हैं। श्रावण मास की शिवरात्रि (सावन शिवरात्रि) भी विशेष रूप से मनाई जाती है, जब कांवड़ यात्री गंगाजल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं।
12 ज्योतिर्लिंग
महाशिवरात्रि पर इन बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का विशेष महत्व है:
- 1सोमनाथ (गुजरात)
- 2मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश)
- 3महाकालेश्वर (उज्जैन, मध्य प्रदेश)
- 4ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)
- 5केदारनाथ (उत्तराखंड)
- 6भीमाशंकर (महाराष्ट्र)
- 7काशी विश्वनाथ (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
- 8त्र्यंबकेश्वर (नासिक, महाराष्ट्र)
- 9वैद्यनाथ (देवघर, झारखंड — परंपरा के अनुसार)
- 10नागेश्वर (द्वारका, गुजरात)
- 11रामेश्वरम (तमिलनाडु)
- 12घृष्णेश्वर (औरंगाबाद, महाराष्ट्र)
उज्जैन के महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर विशेष भस्म आरती और कई दिनों का शिव-नवरात्रि उत्सव होता है।
व्रत में क्या खाएं?
फलाहारी व्रत रखने वाले फल, दूध, दही, साबूदाने की खिचड़ी, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की पूरी, आलू, मखाने और ठंडाई ले सकते हैं; नमक के स्थान पर सेंधा नमक। अनाज, दाल, प्याज-लहसुन और सामान्य नमक से परहेज़ करें।
सारांश
महाशिवरात्रि 2027 शनिवार, 6 मार्च को है। चारों प्रहर में, विशेषकर निशीथ काल (दिल्ली में रात 12:07–12:57) में शिव पूजा करें, और 7 मार्च को दोपहर 1:46 से पहले पारण करें। हर हर महादेव!



