घर पर कलश स्थापना: संक्षिप्त उत्तर
घर पर कलश स्थापना के लिए ईशान कोण को साफ करें, मिट्टी के पात्र में जौ बोएं, तांबे या मिट्टी के कलश में जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी, अक्षत, हल्दी और दूर्वा डालें, उस पर आम के पांच पत्ते और लाल चुनरी में लिपटा नारियल रखें, और मंत्रों के साथ गणेश जी, वरुण देव और मां दुर्गा का आवाहन करें — यह सब प्रतिपदा तिथि में घटस्थापना मुहूर्त के भीतर होना चाहिए। 2026 में यह दिन रविवार, 11 अक्टूबर है; इस वर्ष दिल्ली में अभिजीत मुहूर्त (11:44 से 12:31) को प्राथमिकता दें। पूरा मुहूर्त यहां देखें — नवरात्रि 2026 घटस्थापना मुहूर्त।
कलश स्थापना की पूरी सामग्री
| श्रेणी | सामग्री |
|---|---|
| जौ बोने के लिए | चौड़ा मिट्टी का पात्र, साफ मिट्टी (बगीचे या नदी किनारे की), जौ |
| कलश | तांबे/पीतल/मिट्टी का कलश, मुख ढकने के लिए ढक्कन या सकोरा |
| कलश के अंदर | जल, गंगाजल, सिक्का, साबुत सुपारी, अक्षत, हल्दी की गांठ, दूर्वा, सर्वौषधि या कुछ लौंग-इलायची (वैकल्पिक), पंचरत्न (वैकल्पिक) |
| कलश के ऊपर | आम या अशोक के 5 पत्ते, जटा वाला नारियल, लाल चुनरी, कलावा |
| पूजन सामग्री | रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, चंदन, अक्षत, फूल, माला, पान के पत्ते, धूप, घी का दीपक, कपूर |
| मां के लिए | प्रतिमा या चित्र, लकड़ी की चौकी, लाल कपड़ा, श्रृंगार सामग्री |
| भोग | फल, मिश्री, मिठाई (बिना प्याज-लहसुन वाली) |
पूरी सूची के लिए पढ़ें — नवरात्रि व्रत की पूजा सामग्री लिस्ट 2026।
सही स्थान और दिशा का चुनाव
- •ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) कलश स्थापना के लिए सबसे शुभ है, क्योंकि इसे देवताओं की दिशा माना गया है।
- •यदि यह संभव न हो, तो पूजा कक्ष के पूर्व या उत्तर भाग का चयन करें।
- •पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
- •शयनकक्ष, सीढ़ियों के नीचे या शौचालय के पास कलश स्थापित न करें।
- •स्थान स्वच्छ, शांत और रोज़ पूजा के लिए सुलभ हो, पर ऐसी जगह न हो जहां लगातार आवाजाही होती हो।
घटस्थापना की चरणबद्ध विधि
चरण 1: पवित्रीकरण और संकल्प
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। अपने ऊपर और पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कते हुए यह मंत्र पढ़ें:
इसके बाद हाथ में जल, अक्षत, फूल और एक सिक्का लेकर अपना नाम, गोत्र, तिथि और मनोकामना बोलते हुए नवरात्रि व्रत और पूजन का संकल्प लें। संकल्प का जल भूमि पर छोड़ दें।
चरण 2: मां की स्थापना
चुने हुए कोने में लकड़ी की चौकी रखें, उस पर लाल कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सामने अक्षत की छोटी ढेरी बनाकर उस पर गणेश जी (या सुपारी को गणेश मानकर) विराजमान करें।
चरण 3: जौ बोना
मिट्टी के पात्र में मिट्टी की एक परत बिछाएं। रातभर भिगोए हुए जौ बिखेरें, ऊपर से पतली परत मिट्टी डालें और जल छिड़कें। कुछ परिवार मिट्टी और जौ की तीन परतें बनाते हैं। जौ को सृष्टि का पहला अन्न माना गया है, और इसके अंकुरों को आने वाले वर्ष का संकेत माना जाता है।
चरण 4: कलश तैयार करना
कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और गले में तीन या पांच बार कलावा लपेटें। कलश को लगभग तीन-चौथाई स्वच्छ जल से भरें और गंगाजल मिलाएं। फिर इसमें सिक्का, सुपारी, अक्षत, हल्दी की गांठ, दूर्वा और उपलब्ध हो तो सर्वौषधि व पंचरत्न डालें। कलश भरते समय यह मंत्र पढ़ें:
चरण 5: आम के पत्ते और नारियल
कलश के मुख पर आम के पांच पत्ते इस प्रकार रखें कि उनके सिरे बाहर की ओर हों। चाहें तो ऊपर चावल से भरा सकोरा रखें। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और उसकी जटा (शिखा) ऊपर तथा अपनी ओर रखते हुए कलश पर स्थापित करें। नारियल को कभी लेटाकर या शिखा नीचे करके न रखें।
चरण 6: कलश को स्थापित करना
कलश को जौ वाले पात्र के बीच में या उसके पास, मां के चित्र के बगल में रखें। कलश की स्थिति के बारे में अलग-अलग परिवारों की अलग परंपराएं हैं — अपनी कुल परंपरा का पालन करें।
चरण 7: देवताओं का आवाहन
- •गणेश जी: 'ॐ गं गणपतये नमः' — रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।
- •कलश में वरुण देव: 'ॐ वरुणाय नमः' — वरुण देव और सभी पवित्र नदियों का कलश के जल में आवाहन करें। साथ में बोलें — 'गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥'
- •मां दुर्गा: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' — कलश और चित्र में मां का आवाहन करें।
चरण 8: पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन
चंदन, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य — इन पांच उपचारों से पूजा करें (पंचोपचार)। यदि आप सोलह उपचारों वाली षोडशोपचार पूजा जानते हैं, तो वह करें।
चरण 9: अखंड ज्योत (यदि परंपरा हो)
यदि आपके परिवार में अखंड ज्योत की परंपरा है, तो इसी समय उसे प्रज्वलित करें। नियम जानने के लिए पढ़ें — नवरात्रि में अखंड ज्योत कैसे जलाएं?
चरण 10: शैलपुत्री पूजा, पाठ और आरती
पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा करें, दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें, आरती करें और अंत में क्षमा प्रार्थना करें:
कलश की रोज़ाना देखभाल (दिन 2 से 9)
- •प्रतिदिन सुबह-शाम रोली, अक्षत, फूल और दीपक से कलश की पूजा करें।
- •जौ पर रोज़ थोड़ा जल छिड़कें — बहुत अधिक पानी न डालें, वरना बीज सड़ सकते हैं।
- •नौ दिनों तक कलश को उसके स्थान से न हिलाएं।
- •यदि नारियल खराब होने लगे, तो सम्मानपूर्वक बदल सकते हैं, हालांकि ऐसा कम ही होता है।
- •स्थान को स्वच्छ रखें और अशुद्ध हाथों से कलश को न छुएं।
- •मासिक धर्म के दौरान महिलाएं परिवार के किसी अन्य सदस्य से पूजा करवा सकती हैं — यह पारिवारिक परंपरा पर निर्भर है।
नवरात्रि के बाद कलश विसर्जन
नवमी पूजा के बाद या विजयादशमी (2026 में 20 अक्टूबर) की सुबह अंतिम आरती करके कलश को धीरे से उठाएं। आम के पत्तों से कलश का जल पूरे घर में छिड़कें। सिक्का और सुपारी तिजोरी या पूजा स्थान में रखें। जौ के अंकुर प्रसाद के रूप में बांटें और शेष बहते जल में प्रवाहित करें या किसी पेड़ के नीचे रखें। नारियल को फोड़कर प्रसाद के रूप में परिवार में बांट दें। मिट्टी के पात्र की मिट्टी गमले में डाल सकते हैं।
कलश स्थापना में आम गलतियां
- •प्लास्टिक, स्टील या टूटे हुए पात्र का उपयोग — तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश ही श्रेष्ठ है।
- •कलश को दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण दिशा में रखना।
- •रात्रि में या प्रतिपदा तिथि समाप्त होने के बाद कलश स्थापना करना।
- •नारियल को लेटाकर या शिखा नीचे की ओर करके रखना।
- •जौ को सूखा छोड़ देना या जरूरत से ज्यादा पानी डालना।
- •कलश के पास जूते-चप्पल या अशुद्ध वस्तुएं रखना।
कलश स्थापना से जुड़ी आम समस्याएं और समाधान
जौ न उगें या बहुत कम उगें तो? यह प्रायः बीज की गुणवत्ता, कम धूप या अधिक पानी के कारण होता है। इसे अपशकुन न मानें। अगली बार जौ को रातभर भिगोकर बोएं और पात्र को ऐसी जगह रखें जहां हल्की रोशनी आती हो। मां से क्षमा प्रार्थना करके पूजा जारी रखें।
कलश का पानी कम हो जाए तो? मिट्टी के कलश से पानी रिस सकता है। ऐसे में नारियल हटाए बिना, आम के पत्तों के बीच से धीरे से थोड़ा गंगाजल मिला शुद्ध जल डाल सकते हैं।
नारियल गिर जाए या कलश हिल जाए तो? घबराएं नहीं। हाथ धोकर नारियल को सम्मानपूर्वक फिर से स्थापित करें, 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' का 11 बार जाप करें और क्षमा मांगें।
यात्रा पर जाना पड़े तो? यदि नौ दिनों तक घर पर रहना संभव न हो, तो कलश स्थापना के बजाय केवल मां का चित्र रखकर सुबह-शाम दीपक जलाने का संकल्प लें। एक बार कलश स्थापित होने के बाद उसे खाली घर में छोड़ना उचित नहीं माना जाता।
किराये के घर या छोटे फ्लैट में? छोटी चौकी, छोटा कलश और गमले जैसे छोटे पात्र में जौ बोकर भी पूरी विधि से घटस्थापना की जा सकती है। स्थान का आकार नहीं, भाव और नियम महत्वपूर्ण हैं।
कलश स्थापना का आध्यात्मिक अर्थ
कलश हमारे शरीर का प्रतीक है, उसमें भरा जल जीवन और चेतना का, आम के पत्ते प्रकृति की हरियाली का, और नारियल हमारे मस्तिष्क व अहंकार का प्रतीक है, जिसे हम मां के चरणों में समर्पित करते हैं। जौ का अंकुरण बताता है कि श्रद्धा और नियमित साधना से जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। इसीलिए कलश स्थापना केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि नौ दिनों तक मन को एकाग्र करने का संकल्प है।
सारांश
घर पर कलश स्थापना चरणबद्ध तरीके से करने पर बहुत सरल है: पवित्रीकरण, संकल्प, जौ बोना, कलश तैयार करना, आम के पत्ते और नारियल रखना, गणेश-वरुण-दुर्गा का आवाहन और प्रतिदिन पूजा। 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना मुहूर्त में ईशान कोण में कलश स्थापित करें, नौ दिनों तक उसकी सेवा करें और नवमी या दशहरे पर कृतज्ञता के साथ विसर्जन करें।
जय माता दी!


