अखंड ज्योत: संक्षिप्त उत्तर
अखंड ज्योत वह दीपक है जिसे घटस्थापना के समय प्रज्वलित करके नवरात्रि समाप्त होने तक दिन-रात लगातार जलाए रखा जाता है। इसे पूजा स्थल के आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में या मां के ठीक सामने रखें; गाय का घी (या तिल का तेल) इस्तेमाल करें; लंबी रुई या कलावे की बाती लगाएं; लौ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें; कांच की चिमनी से सुरक्षित करें; और ज्योत जलते समय घर को कभी खाली न छोड़ें। 2026 में इसे 11 अक्टूबर को घटस्थापना मुहूर्त में प्रज्वलित करें और 20 अक्टूबर को नवमी पूजन के बाद इसका समापन होने दें।
अखंड ज्योत क्या है और क्यों जलाई जाती है?
अखंड का अर्थ है जो खंडित न हो, और ज्योत का अर्थ है लौ। पूरे नौ दिनों तक दीपक को निरंतर जलाए रखना अखंड भक्ति और घर में मां की निरंतर उपस्थिति का प्रतीक है। अग्नि देवताओं तक हमारी आहुतियां पहुंचाने वाले दूत हैं, और दीपक को स्वयं मां की ज्योति का स्वरूप माना गया है। अनेक परिवार अखंड ज्योत किसी मनोकामना की पूर्ति के संकल्प के रूप में या पीढ़ियों से चली आ रही कुल परंपरा के रूप में जलाते हैं। माना जाता है कि अखंड ज्योत से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध रहता है।
ध्यान रखें, अखंड ज्योत अनिवार्य नहीं है। यदि आप नौ दिनों तक इसकी देखभाल नहीं कर सकते — जैसे यात्रा, अकेले रहना, या घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर — तो सुबह-शाम दीपक जलाना भी उतना ही फलदायी है। एक बार अखंड ज्योत का संकल्प ले लिया जाए, तो उसका पूरी निष्ठा से पालन करना चाहिए।
घी या तेल — क्या इस्तेमाल करें?
| ईंधन | कब उपयोग करें | रखने का स्थान (प्रचलित परंपरा) |
|---|---|---|
| गाय का घी | देवी उपासना, आध्यात्मिक उन्नति और शांति के लिए सर्वश्रेष्ठ | अधिकांश परंपराओं में मां के दाहिनी ओर |
| तिल का तेल | बाधाओं और ग्रह-दोष निवारण के लिए | बाईं ओर |
| सरसों का तेल | कुछ परिवारों में, मुख्यतः रक्षा के लिए | बाईं ओर |
संभव हो तो शुद्ध गाय का घी ही प्रयोग करें। एक ही दीपक में घी और तेल को न मिलाएं। दस दिनों के लिए पर्याप्त मात्रा पहले से रख लें — सटीक मात्रा दीये और बाती के आकार पर निर्भर करती है, पर बड़ी अखंड ज्योत के लिए अधिकांश घरों में लगभग 2 से 3 किलो घी लगता है।
अखंड ज्योत किस दिशा में रखें?
- •आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) अग्नि की दिशा है, इसलिए दीपक रखने के लिए आदर्श है।
- •वैकल्पिक रूप से इसे मां के ठीक सामने चौकी पर या दीपक स्टैंड पर रखें।
- •लौ का मुख पूर्व (आरोग्य और दीर्घायु के लिए) या उत्तर (धन-समृद्धि के लिए) की ओर हो।
- •लौ को दक्षिण दिशा की ओर रखने से बचें — परंपरा में इसे अशुभ माना गया है।
- •दीपक को सीधे ज़मीन पर न रखें; थाली, अक्षत की ढेरी या स्टैंड पर रखें।
आवश्यक सामग्री
- •पीतल, तांबे या मिट्टी का बड़ा दीपक (टंकी वाला अखंड दीया सबसे सुविधाजनक है)
- •गाय का घी या तिल का तेल
- •लंबी रुई की बाती या कलावे (रक्षा सूत्र) से बनी बाती
- •हवा से लौ को बचाने के लिए कांच की चिमनी या लैंप कवर
- •अक्षत वाली थाली या दीपक स्टैंड
- •एक छोटा अतिरिक्त दीपक, ताकि ज़रूरत पड़ने पर उससे ज्योत दोबारा जलाई जा सके
अखंड ज्योत जलाने की विधि
- 1कलश स्थापना के बाद चुने हुए स्थान पर अक्षत की ढेरी बनाकर उस पर दीपक रखें।
- 2दीपक में घी या तेल भरें और बाती इस तरह लगाएं कि उसका लंबा हिस्सा ईंधन में डूबा रहे।
- 3माचिस या घी के छोटे दीपक से ज्योत प्रज्वलित करें (परंपरा के अनुसार अगरबत्ती या लाइटर से सीधे न जलाएं)।
- 4दीपक मंत्र का जाप करें:
- 5प्रार्थना करें: "हे मां, मैं नवरात्रि के नौ दिनों के लिए यह अखंड ज्योत प्रज्वलित कर रहा/रही हूं। आप इसे स्वीकार करें और इसकी रक्षा करें।"
- 6कांच की चिमनी से ढकें और सुनिश्चित करें कि दीपक पर्दों, कपड़ों और कागज़ से दूर हो।
रोज़ाना देखभाल
- •दिन में कम से कम तीन बार — सुबह, दोपहर और सोने से पहले — घी/तेल जांचें और धीरे से भरें।
- •बाती को सावधानी से ठीक करें — साफ धातु की तीली से, ताकि लौ स्थिर और धुआं रहित रहे।
- •घर को कभी खाली न छोड़ें। कोई न कोई सदस्य हमेशा घर पर रहे।
- •रात में बारी तय करें या बड़ी टंकी वाला दीपक उपयोग करें, जो पूरी रात जल सके।
- •बच्चों और पालतू जानवरों को दूर रखें, और सुरक्षा के लिए पास में पानी की बाल्टी या रेत रखें।
- •ज्योत के पास बैठकर रोज़ कुछ समय नवार्ण मंत्र या दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
अखंड ज्योत बुझ जाए तो क्या करें?
कभी-कभी हवा, खराब बाती या घी खत्म होने के कारण ज्योत बुझ जाती है। यह कोई अपशकुन नहीं है। बस ये करें:
- 1हाथ धोकर मां से क्षमा मांगें।
- 2पास में जल रहे अतिरिक्त दीपक से (एक छोटा दीपक हमेशा जलाकर रखें) या माचिस से ज्योत दोबारा प्रज्वलित करें।
- 3नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' का 11 या 108 बार जाप करें।
- 4उसी श्रद्धा के साथ पूजा जारी रखें।
कई परिवार इसी उद्देश्य से अखंड ज्योत के पास एक छोटा "साक्षी दीपक" जलाकर रखते हैं।
2026 में अखंड ज्योत का समापन कैसे करें?
- •अखंड ज्योत को नवरात्रि पूजा पूर्ण होने तक जलाए रखें — यानी 20 अक्टूबर 2026 को नवमी पूजन और पारण तक (नवमी दोपहर 12:50 बजे समाप्त होगी)। इस वर्ष सप्तमी वृद्धि के कारण नवरात्रि दस दिनों की है, इसलिए घी की मात्रा उसी अनुसार रखें।
- •ज्योत को कभी फूंक मारकर न बुझाएं। घी या तेल समाप्त होने पर उसे स्वाभाविक रूप से शांत होने दें।
- •यदि समापन करना ही हो, तो अंतिम आरती के बाद कई परिवार लौ पर एक फूल रखकर या बाती को घी में डुबोकर उसे शांत करते हैं।
- •बचा हुआ घी हवन में उपयोग करें या प्रसाद के रूप में माथे पर लगाएं; इसे लापरवाही से न फेंकें।
ज्योत की लौ से जुड़ी लोक मान्यताएं
लोक परंपरा में अखंड ज्योत की लौ को कुछ संकेतों से जोड़ा जाता है। ध्यान रखें कि ये मान्यताएं हैं, शास्त्रीय नियम नहीं, और इनसे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है:
- •स्थिर, सुनहरी और ऊपर उठती लौ — मां की प्रसन्नता और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संकेत मानी जाती है।
- •बहुत अधिक धुआं या कालिख — प्रायः घी की अशुद्धता या बाती के ठीक न होने का संकेत है। घी बदलें और बाती छोटी करें।
- •बार-बार फड़फड़ाती लौ — सामान्यतः हवा के कारण होता है। दीपक को चिमनी से ढकें या हवा के रास्ते से हटाएं।
- •बाती पर फूल जैसा आकार (गुल) — कई परिवारों में इसे शुभ समाचार का संकेत माना जाता है।
मनोकामना ज्योत और मंदिर में ज्योत
कई शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में भक्त नवरात्रि के दौरान "मनोकामना ज्योत" जलवाते हैं। यदि घर पर अखंड ज्योत की देखभाल संभव न हो, तो आप अपने नज़दीकी देवी मंदिर में ज्योत के लिए घी दान कर सकते हैं या वहां ज्योत जलवाने का संकल्प ले सकते हैं। ऐसे में घर पर सुबह-शाम दीपक जलाकर पूजा जारी रखें।
अखंड ज्योत की बाती कैसे बनाएं?
बाज़ार में अखंड ज्योत के लिए लंबी बत्तियां मिलती हैं, पर घर पर भी इन्हें आसानी से बनाया जा सकता है। साफ रुई को हल्का भिगोकर हथेलियों के बीच बटते हुए लगभग 8 से 10 इंच लंबी, मोटी बाती बनाएं। कई परिवार कलावे (रक्षा सूत्र) की कई लड़ियों को एक साथ बटकर बाती बनाते हैं, जिसे विशेष शुभ माना जाता है। बाती को पहले घी में अच्छी तरह भिगो लें, ताकि वह समान रूप से जले। नौ दिनों के लिए दो-तीन अतिरिक्त बत्तियां तैयार रखें।
अखंड ज्योत और वास्तु
वास्तु शास्त्र के अनुसार आग्नेय कोण में जलता दीपक घर में ऊर्जा और उत्साह बढ़ाता है। पूर्व दिशा की ओर लौ स्वास्थ्य के लिए और उत्तर दिशा की ओर लौ आर्थिक उन्नति के लिए शुभ मानी जाती है। जिन घरों में पूजा स्थल छोटा है, वहां दीपक को कलश के सामने थोड़ी दूरी पर रखें, ताकि कलश के पत्ते और नारियल की चुनरी आग की चपेट में न आएं।
क्या करें और क्या न करें
करें: स्थान को स्वच्छ रखें, शुद्ध घी का प्रयोग करें, अतिरिक्त दीपक रखें, रोज़ दीपक मंत्र का जाप करें, सात्विक आचरण बनाए रखें।
न करें: घर पर ताला लगाकर बाहर न जाएं, ज्योत को फूंक मारकर न बुझाएं, अशुद्ध हाथों से दीपक न छुएं, ज्वलनशील वस्तुओं के पास न रखें, और इसे दिखावे के लिए न जलाएं — मां को दीपक का आकार नहीं, भक्ति का भाव प्रिय है।
सारांश
11 अक्टूबर 2026 को कलश स्थापना के समय अखंड ज्योत प्रज्वलित करें, उसे आग्नेय कोण में या मां के सामने रखें, लौ पूर्व या उत्तर की ओर हो, गाय का घी प्रयोग करें, चिमनी से सुरक्षित रखें और कभी अकेला न छोड़ें। ज्योत बुझ जाए तो शांत मन से दोबारा जलाएं। 20 अक्टूबर को नवमी पूजन के बाद इसे स्वाभाविक रूप से शांत होने दें। कलश स्थापना की पूरी विधि के लिए पढ़ें — घर पर घटस्थापना की पूरी विधि।
जय माता दी!



