घटस्थापना मुहूर्त 2026: संक्षिप्त उत्तर
शारदीय नवरात्रि 2026 की घटस्थापना रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को की जाएगी। नई दिल्ली में घटस्थापना का प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक (3 घंटे 53 मिनट) और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक (47 मिनट) है। 11 अक्टूबर को पूरे दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग रहने के कारण इस वर्ष अभिजीत मुहूर्त कलश स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर रात 9:19 बजे से 11 अक्टूबर रात 9:30 बजे तक रहेगी।
घटस्थापना क्या है?
घटस्थापना, जिसे कलश स्थापना भी कहते हैं, नवरात्रि का पहला और सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इसमें पवित्र जल से भरे कलश (घट) की स्थापना करके उसमें मां दुर्गा का आवाहन किया जाता है। कलश के पास मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं। कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है और अंकुरित होते जौ सुख-समृद्धि और वृद्धि का संकेत देते हैं। नौ दिनों तक प्रतिदिन कलश की पूजा होती है और नवमी या विजयादशमी पर उसका विधिपूर्वक विसर्जन किया जाता है।
शास्त्रों में कहा गया है —
अर्थात कलश के मुख में भगवान विष्णु, कंठ में रुद्र, मूल में ब्रह्मा और मध्य भाग में मातृकाओं का वास होता है। इसीलिए घटस्थापना शुभ मुहूर्त में ही करने का विधान है।
शहरवार घटस्थापना मुहूर्त 2026
| शहर | प्रातःकालीन मुहूर्त | अवधि | अभिजीत मुहूर्त |
|---|---|---|---|
| नई दिल्ली | सुबह 6:19 – 10:12 | 3 घंटे 53 मिनट | 11:44 – 12:31 |
| जयपुर | सुबह 6:24 – 10:17 | 3 घंटे 53 मिनट | 11:50 – 12:37 |
| लखनऊ | सुबह 6:03 – 9:56 | 3 घंटे 53 मिनट | 11:30 – 12:16 |
| मुंबई | सुबह 6:31 – 10:27 | 3 घंटे 56 मिनट | 12:01 – 12:49 |
| पुणे | सुबह 6:27 – 10:23 | 3 घंटे 56 मिनट | — |
| कोलकाता | सुबह 5:31 – 9:26 | 3 घंटे 55 मिनट | 11:00 – 11:47 |
| बेंगलुरु | सुबह 6:09 – 10:07 | 3 घंटे 58 मिनट | 11:42 – 12:30 |
| चेन्नई | सुबह 5:59 – 9:57 | 3 घंटे 58 मिनट | 11:32 – 12:19 |
छोटे शहरों के लिए स्थानीय सूर्योदय के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे करें, या अपने शहर का पंचांग देखें।
घटस्थापना मुहूर्त के शास्त्रीय नियम
निर्णय सिंधु और देवी पुराण जैसे ग्रंथों में घटस्थापना के लिए ये नियम बताए गए हैं:
- 1प्रतिपदा तिथि अनिवार्य: कलश स्थापना प्रतिपदा तिथि रहते ही होनी चाहिए। 2026 में 11 अक्टूबर को रात 9:30 बजे तक पूरे दिन प्रतिपदा है।
- 2दिन का पहला एक-तिहाई भाग श्रेष्ठ: सूर्योदय के बाद दिनमान का प्रथम तिहाई भाग सबसे उत्तम है — ऊपर दिया गया प्रातःकालीन मुहूर्त यही है।
- 3मध्याह्न से पहले: यदि प्रातःकाल का मुहूर्त छूट जाए, तो दोपहर के आसपास अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना पूरी कर लेनी चाहिए।
- 4चित्रा और वैधृति से बचें: शास्त्र चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग को टालने की सलाह देते हैं। यदि इन्हें टालना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में स्थापना का विधान है।
- 5रात्रि और अमावस्या में निषेध: सूर्यास्त के बाद और अमावस्या तिथि रहते घटस्थापना नहीं की जाती।
2026 में चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग
11 अक्टूबर 2026 को चित्रा नक्षत्र 10 अक्टूबर रात 9:42 बजे से 11 अक्टूबर रात 10:32 बजे तक, और वैधृति योग 10 अक्टूबर रात 10:02 बजे से 11 अक्टूबर रात 9:05 बजे तक रहेगा। यानी पूरा दिन इनके प्रभाव में है और इनसे मुक्त कोई समय उपलब्ध नहीं है। ऐसे वर्षों में अधिकांश पंचांगकार और आचार्य शास्त्रीय नियम का पालन करते हुए अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना की सलाह देते हैं। अभिजीत मुहूर्त को अनेक दोषों का शमन करने वाला माना गया है — विस्तार से पढ़ें: अभिजीत मुहूर्त क्या है?। यदि आपके लिए अभिजीत मुहूर्त संभव न हो, तो प्रातःकालीन मुहूर्त भी मान्य है, क्योंकि चित्रा-वैधृति "त्याज्य" हैं, "निषिद्ध" नहीं।
11 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया (नई दिल्ली, अनुमानित)
| चौघड़िया | समय | प्रकृति |
|---|---|---|
| उद्वेग | सुबह 6:19 – 7:46 | त्याज्य |
| चर | सुबह 7:46 – 9:12 | सामान्य (मान्य) |
| लाभ | सुबह 9:12 – 10:39 | शुभ |
| अमृत | सुबह 10:39 – दोपहर 12:05 | सर्वश्रेष्ठ |
| काल | दोपहर 12:05 – 1:32 | त्याज्य |
अमृत चौघड़िया (10:39 से 12:05) अभिजीत मुहूर्त के आरंभिक भाग के साथ मेल खाता है। इसलिए दिल्ली में सुबह 11:44 से दोपहर 12:05 बजे तक का समय प्रतिपदा, अभिजीत मुहूर्त और अमृत चौघड़िया — तीनों का संगम है, जो कलश स्थापना के लिए अत्यंत उत्तम है। रविवार को राहुकाल शाम लगभग 4:25 से 5:51 बजे तक है, इसलिए यह घटस्थापना के समय को प्रभावित नहीं करता। अधिक जानें: चौघड़िया कैसे देखें? और राहु काल क्या होता है?
घटस्थापना की सामग्री (चेकलिस्ट)
- •चौड़ा मिट्टी का पात्र या परात और साफ मिट्टी
- •जौ (रातभर भिगोए हुए)
- •तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश
- •गंगाजल और शुद्ध जल
- •सिक्का, साबुत सुपारी, अक्षत, हल्दी की गांठ, दूर्वा
- •आम या अशोक के 5 पत्ते (पंच पल्लव)
- •जटा वाला नारियल, लाल चुनरी, कलावा (मौली)
- •रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, चंदन
- •फूल और माला — विशेष रूप से लाल फूल
- •मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, लाल कपड़ा और लकड़ी की चौकी
- •घी का दीपक, धूप, कपूर, फल और मिठाई (भोग)
घटस्थापना की संक्षिप्त पूजा विधि
- 1स्नान और संकल्प: प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें और हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर नवरात्रि व्रत का संकल्प लें।
- 2स्थान तैयार करें: घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को साफ करें। लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- 3जौ बोएं: मिट्टी के पात्र में मिट्टी की परत बिछाएं, जौ बिखेरें, ऊपर से हल्की मिट्टी डालें और जल छिड़कें।
- 4कलश तैयार करें: कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और गले में कलावा बांधें। इसमें जल और गंगाजल भरें, फिर सिक्का, सुपारी, अक्षत, हल्दी और दूर्वा डालें।
- 5पल्लव और नारियल रखें: कलश के मुख पर आम के पांच पत्ते रखें। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावा बांधें और उसकी शिखा ऊपर की ओर रखते हुए कलश पर स्थापित करें।
- 6कलश स्थापित करें: कलश को जौ वाले पात्र के बीच मिट्टी पर या उसके ठीक पास रखें।
- 7आवाहन: सबसे पहले भगवान गणेश, फिर कलश में वरुण देव और उसके बाद मां दुर्गा का आवाहन करें। रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- 8अखंड ज्योत (वैकल्पिक): यदि आपकी कुल परंपरा है, तो इसी समय अखंड ज्योत प्रज्वलित करें।
- 9मां शैलपुत्री की पूजा: पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- 10आरती और क्षमा प्रार्थना: अंत में आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें।
मंत्रों सहित पूरी चरणबद्ध विधि के लिए हमारी विस्तृत गाइड नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें? घर पर घटस्थापना की पूरी विधि पढ़ें।
घटस्थापना में इन गलतियों से बचें
- •कलश को सीधे जमीन पर न रखें; नीचे मिट्टी, अनाज या थाली का आधार अवश्य हो।
- •टूटे, दरार वाले या जंग लगे बर्तन का उपयोग न करें।
- •सूर्यास्त के बाद घटस्थापना न करें।
- •एक बार स्थापित करने के बाद नौ दिनों तक कलश को उसके स्थान से न हिलाएं।
- •जौ को सूखने न दें — प्रतिदिन थोड़ा जल छिड़कें।
- •घटस्थापना के बाद घर में तामसिक भोजन न बनाएं।
जौ का अंकुरण क्या संकेत देता है?
लोक मान्यता के अनुसार जौ का अंकुरण आने वाले वर्ष का संकेत देता है। यदि जौ तेजी से, घने और हरे-भरे उगें, तो इसे सुख-समृद्धि का शुभ संकेत माना जाता है। पीले या कमजोर अंकुर होने पर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है — यह सामान्यतः बीज की गुणवत्ता, नमी या धूप की कमी के कारण होता है। अच्छे अंकुरण के लिए जौ को एक रात पहले भिगो दें और रोज़ हल्का जल छिड़कें।
यदि घटस्थापना का मुहूर्त छूट जाए तो क्या करें?
कई बार नौकरी, यात्रा या किसी आकस्मिक कारण से सुबह और अभिजीत — दोनों मुहूर्त छूट जाते हैं। ऐसे में घबराने की आवश्यकता नहीं है। शास्त्रों के अनुसार जब तक प्रतिपदा तिथि है और सूर्यास्त नहीं हुआ है, तब तक किसी शुभ चौघड़िया (जैसे शुभ, लाभ या अमृत) में कलश स्थापना की जा सकती है। 11 अक्टूबर को दिल्ली में दोपहर लगभग 1:32 से 2:58 बजे तक शुभ चौघड़िया रहेगा। यदि यह भी संभव न हो, तो केवल मां का चित्र स्थापित करके दीपक जलाएं, संकल्प लें और अगले दिन से नियमित पूजा करें — मां भाव की भूखी हैं, विधि की नहीं। जो भक्त कलश स्थापना नहीं करते, वे भी नौ दिनों तक व्रत, पाठ और दीपदान कर सकते हैं।
सारांश
वर्ष 2026 में घटस्थापना रविवार, 11 अक्टूबर को है। दिल्ली में प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक है, लेकिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के कारण अभिजीत मुहूर्त (11:44 से 12:31) को प्राथमिकता दें। विशेष रूप से 11:44 से 12:05 तक अमृत चौघड़िया का साथ होने से यह समय और भी शुभ है। ईशान कोण में कलश स्थापित करें, जौ बोएं, मां का आवाहन करें और श्रद्धा के साथ नौ दिनों की उपासना आरंभ करें।
जय माता दी!



