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जोधपुर में दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा का समय

जोधपुर में दिवाली 2026 रविवार 8 नवंबर को। लक्ष्मी पूजा शाम 6:15–8:12, प्रदोष काल 5:52–8:28, चोपड़ा पूजन दोपहर 1:40–3:10, महानिशीथ और सिंह लग्न का समय।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·6 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 9 अक्टू॰ 2026
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जोधपुर में दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा का समय
✨प्रामाणिक वैदिक संदर्भ सचित्र

मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

जोधपुर में दिवाली 2026 रविवार 8 नवंबर को। लक्ष्मी पूजा शाम 6:15–8:12, प्रदोष काल 5:52–8:28, चोपड़ा पूजन दोपहर 1:40–3:10, महानिशीथ और सिंह लग्न का समय।

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जोधपुर में दिवाली 2026: संक्षिप्त उत्तर

दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। जोधपुर में लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:15 से 8:12 तक (1 घंटा 57 मिनट) है — जब प्रदोष काल (शाम 5:52 से 8:28) और स्थिर वृषभ लग्न (6:15 से 8:12) साथ होते हैं। अमावस्या तिथि 8 नवंबर सुबह 11:27 से 9 नवंबर दोपहर 12:31 तक है। पश्चिमी राजस्थान में सूर्यास्त देर से होने के कारण जोधपुर का मुहूर्त जयपुर से लगभग 12 मिनट बाद है।

मुहूर्त (जोधपुर)समय
लक्ष्मी पूजा (प्रदोष + वृषभ)शाम 6:15 – रात 8:12
प्रदोष कालशाम 5:52 – रात 8:28
कुंभ लग्न (चोपड़ा पूजन, दुकान)दोपहर 1:40 – 3:10
महानिशीथ कालरात 11:56 – 12:48
सिंह लग्न9 नवंबर रात 12:44 – 2:59
अमावस्या तिथि8 नवंबर सुबह 11:27 – 9 नवंबर दोपहर 12:31

समय दृक् पंचांग की गणना पर आधारित हैं। दैनिक पंचांग — [पंचांग](/panchang)।

जोधपुर और जयपुर के मुहूर्त में अंतर क्यों?

अमावस्या तिथि पूरे भारत में एक ही क्षण — 8 नवंबर सुबह 11:27 — शुरू होती है, लेकिन प्रदोष काल स्थानीय सूर्यास्त से और लग्न स्थानीय क्षितिज से गिने जाते हैं। जोधपुर जयपुर से लगभग 2.8 देशांतर पश्चिम में है, इसलिए यहां सूर्यास्त लगभग 12 मिनट बाद (5:52) होता है और वृषभ लग्न भी उतना ही देर से (6:15) उदित होता है।

जयपुरजोधपुर
लक्ष्मी पूजा6:03 – 7:596:15 – 8:12
प्रदोष काल5:40 – 8:165:52 – 8:28
कुंभ लग्न1:30 – 2:591:40 – 3:10

इसलिए जयपुर का मुहूर्त जोधपुर में इस्तेमाल न करें — विशेषकर शाम 6:03 से 6:15 के बीच जोधपुर में वृषभ लग्न शुरू नहीं हुआ होता।

चोपड़ा पूजन: मारवाड़ी व्यापारियों की परंपरा

जोधपुर और पूरे मारवाड़ के व्यापारी परिवारों में दिवाली पर चोपड़ा पूजन (बही-खाता पूजन) का विशेष महत्व है। मारवाड़ी परंपरा में नया वित्तीय वर्ष दिवाली से ही माना जाता रहा है।

चोपड़ा पूजन की विधि:

1. नए लाल कपड़े वाले बही-खाते (चोपड़ा), कलम और दवात (अब पेन) पूजा की चौकी पर रखें।

2. बही के पहले पन्ने पर रोली या केसर से स्वस्तिक बनाएं और "श्री गणेशाय नमः", "शुभ-लाभ" तथा "श्री लक्ष्मी जी सदा सहाय" लिखें।

3. स्वस्तिक के नीचे संवत, तिथि और वार लिखें — "विक्रम संवत 2083, कार्तिक अमावस्या, रविवार"। संवत के बारे में — विक्रम संवत क्या है?

4. बही पर अक्षत, फूल, हल्दी की गांठ, धनिया और सिक्का रखकर लक्ष्मी-गणेश और कुबेर के साथ पूजा करें।

5. तिजोरी, कैश काउंटर और कंप्यूटर पर भी स्वस्तिक बनाकर पूजा करें।

कब करें: दुकान या फर्म पर दोपहर 1:40 से 3:10 (कुंभ लग्न) में, या घर पर शाम के मुख्य मुहूर्त (6:15–8:12) में। कई परिवार दोपहर में दुकान पर पूजा करके शाम को घर पर पूजा करते हैं।

8 नवंबर को जोधपुर में राहुकाल

रविवार का राहुकाल दिन के अंतिम आठवें भाग में होता है — जोधपुर में लगभग दोपहर 4:30 से सूर्यास्त (5:52) तक (अनुमानित)। दोपहर का कुंभ लग्न (3:10 तक) और शाम का मुख्य मुहूर्त दोनों राहुकाल से बाहर हैं। केवल दुकान की पूजा 4:30 के बाद शुरू न करें।

जोधपुर की दिवाली

सूर्यनगरी और नीली नगरी जोधपुर की दिवाली पारंपरिक रंगों से भरी होती है:

  • •घंटाघर और सरदार मार्केट के आसपास के पुराने बाज़ार धनतेरस से ही रोशनी से जगमगा उठते हैं — बर्तन, चांदी और मिठाई की ख़रीदारी के लिए यहां भीड़ रहती है।
  • •मेहरानगढ़ किले में स्थित चामुंडा माता मंदिर में दिवाली सप्ताह में दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं।
  • •मारवाड़ी मिठाइयां — मावे की कचौरी, मिर्ची बड़ा (नमकीन), घेवर और मोहनथाल — दिवाली के थाल का हिस्सा होती हैं।
  • •घरों के बाहर मिट्टी के दीयों की कतारें और मांडने (पारंपरिक राजस्थानी भित्ति-भू चित्र) बनाने की परंपरा है।

जोधपुर का दीपोत्सव 2026

तारीखपर्व
शुक्रवार, 6 नवंबरधनतेरस
शनिवार, 7 नवंबररूप चौदस (छोटी दिवाली), काली चौदस
रविवार, 8 नवंबरदिवाली — लक्ष्मी पूजा (शाम 6:15–8:12)
मंगलवार, 10 नवंबरगोवर्धन पूजा, अन्नकूट; रामा-श्यामा
बुधवार, 11 नवंबरभाई दूज

मारवाड़ में दिवाली के अगले दिनों में "रामा-श्यामा" — एक-दूसरे के घर जाकर बड़ों का आशीर्वाद लेने और शुभकामनाएं देने — की सुंदर परंपरा है। धनतेरस की जानकारी — धनतेरस 2026 कब है?

आसपास के शहरों के लिए

पाली, नागौर और बाड़मेर में मुहूर्त जोधपुर से कुछ मिनट आगे-पीछे होगा (बाड़मेर में कुछ बाद, अनुमानित)। सुरक्षित रहने के लिए इन शहरों में पूजा शाम 6:20 से 8:05 के बीच रखें, या अपने शहर का पंचांग देखें।

जोधपुर में लक्ष्मी पूजा का क्रम

  1. 1सूर्यास्त (5:52) पर: मुख्य द्वार पर पहला दीपक जलाएं, घर में गंगाजल छिड़कें।
  2. 2चौकी: ईशान कोण में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी जी को गणेश जी के दाहिनी ओर स्थापित करें; कलश स्थापित करें।
  3. 36:15 के बाद (वृषभ लग्न): संकल्प लें — "विक्रम संवत 2083, कार्तिक अमावस्या, रविवार, जोधपुर नगर..."।
  4. 4गणेश पूजा: दूर्वा, मोदक/लड्डू, सिंदूर।
  5. 5लक्ष्मी पूजा: कमल, कुमकुम, खील-बताशे, मिठाई; श्री सूक्त या लक्ष्मी मंत्र का जाप।
  6. 6कुबेर और चोपड़ा पूजन: तिजोरी और बही पर स्वस्तिक, धनिया और सिक्के।
  7. 7आरती और दीपदान: 8:12 से पहले आरती करके घर भर में दीपक जलाएं।

लक्ष्मी मंत्र: "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" — 108 बार जाप श्रेष्ठ माना जाता है। अन्य मंत्र — दिवाली लक्ष्मी पूजा मंत्र।

मांडने: मारवाड़ की दिवाली सजावट

मारवाड़ में दिवाली पर रंगोली के साथ-साथ पारंपरिक मांडने बनाने की परंपरा है। ये गेरू (लाल मिट्टी) की पृष्ठभूमि पर खड़िया या चूने से बनाए जाते हैं।

  • •कहां: मुख्य द्वार की देहरी, आंगन, पूजा स्थान के सामने और तुलसी के पास।
  • •आकृतियां: लक्ष्मी जी के पगल्ये (पदचिह्न), स्वस्तिक, दीपक, कमल, बेल-बूटे और चौकोर ज्यामितीय आकृतियां।
  • •कैसे: फर्श पर गेरू का लेप लगाकर सूखने दें, फिर रुई या कपड़े की बत्ती को खड़िया के घोल में डुबोकर उंगलियों से आकृतियां बनाएं।
  • •लक्ष्मी के पगल्ये: द्वार से पूजा स्थान की ओर जाते हुए बनाए जाते हैं, जो घर में लक्ष्मी के प्रवेश का प्रतीक है।

आजकल पक्के फर्श पर गेरू-खड़िया की जगह रंगोली रंगों से मांडने की आकृतियां बनाई जा सकती हैं।

दिवाली पर जोधपुर में क्या करें

  • •धनतेरस (6 नवंबर) पर घंटाघर क्षेत्र के बर्तन और चांदी बाज़ार से ख़रीदारी करें।
  • •दिवाली की शाम मेहरानगढ़ किले की ओर से नीली नगरी की रोशनी का नज़ारा देखने लायक होता है।
  • •पड़ोसियों और रिश्तेदारों को मिठाई देने के साथ बुजुर्गों का आशीर्वाद लें — "रामा-श्यामा"।

सारांश

जोधपुर में लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को शाम 6:15 से 8:12 के बीच करें। व्यापारी चोपड़ा पूजन दोपहर 1:40 से 3:10 में कर सकते हैं, और रात्रि साधना महानिशीथ (11:56–12:48) में। पूजा विधि — दीपावली 2026 पूजा विधि। शुभ दीपावली, रामा-श्यामा!

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

जोधपुर में दिवाली 2026 कब है?

जोधपुर में दिवाली रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।

जोधपुर में लक्ष्मी पूजा का समय क्या है?

शाम 6:15 से रात 8:12 तक (प्रदोष काल और वृषभ लग्न)।

जोधपुर में प्रदोष काल कब है?

8 नवंबर को शाम 5:52 से रात 8:28 तक।

जोधपुर में चोपड़ा पूजन किस समय करें?

दोपहर 1:40 से 3:10 के कुंभ लग्न में, या शाम 6:15 से 8:12 के मुख्य मुहूर्त में।

जोधपुर और जयपुर के मुहूर्त में कितना अंतर है?

लगभग 12 मिनट — जोधपुर में सूर्यास्त और वृषभ लग्न जयपुर से बाद में होते हैं।

जोधपुर में महानिशीथ काल कब है?

8 नवंबर रात 11:56 से 12:48 तक।

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