दिवाली 2026 के 5 दिन: संक्षिप्त उत्तर
2026 में पांच दिवसीय दीपोत्सव इस प्रकार है: (1) धनतेरस – शुक्रवार, 6 नवंबर; (2) छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी – 7 नवंबर की शाम (काली चौदस) और 8 नवंबर की सुबह अभ्यंग स्नान; (3) दिवाली / लक्ष्मी पूजा – रविवार, 8 नवंबर; (4) गोवर्धन पूजा – मंगलवार, 10 नवंबर; (5) भाई दूज – बुधवार, 11 नवंबर। सोमवार, 9 नवंबर लक्ष्मी पूजा और गोवर्धन पूजा के बीच आता है, क्योंकि उस दिन दोपहर 12:31 बजे तक अमावस्या रहेगी।
| दिन | तारीख (2026) | पर्व | मुख्य मुहूर्त (नई दिल्ली) |
|---|---|---|---|
| 1 | शुक्र, 6 नवंबर | धनतेरस, धन्वंतरि जयंती, यम दीपदान | पूजा शाम 6:02–7:57; प्रदोष 5:33–8:09 |
| 2 | शनि, 7 नवंबर | छोटी दिवाली की शाम, काली चौदस, हनुमान पूजा | चतुर्दशी सुबह 10:47 से |
| 2/3 | रवि, 8 नवंबर (सुबह) | नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान | सुबह 5:41–6:38 |
| 3 | रवि, 8 नवंबर (शाम) | दिवाली – लक्ष्मी पूजा | शाम 5:54–7:50 |
| — | सोम, 9 नवंबर | दिवाली स्नान, देव पूजा | अमावस्या दोपहर 12:31 तक |
| 4 | मंगल, 10 नवंबर | गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, गुजराती नववर्ष | प्रातःकाल 6:40–8:50 |
| 5 | बुध, 11 नवंबर | भाई दूज, यम द्वितीया, चित्रगुप्त पूजा | अपराह्न 1:10–3:20 |
दीपोत्सव से पहले गोवत्स द्वादशी (वसु बारस) गुरुवार, 5 नवंबर को है, जिस दिन गाय और बछड़े की पूजा की जाती है।
पहला दिन: धनतेरस (6 नवंबर)
धनतेरस (धनत्रयोदशी) देवताओं के वैद्य भगवान धन्वंतरि की जयंती है, जो समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन लोग धातु के बर्तन, सोना, चांदी और नई झाड़ू खरीदते हैं; धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करते हैं; और परिवार को अकाल मृत्यु से बचाने के लिए दक्षिण दिशा की ओर चौमुखा यम दीपक जलाते हैं। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह 10:30 से 7 नवंबर सुबह 10:47 तक है।
धनतेरस की मुख्य परंपराएं: धातु के बर्तन की खरीद, धन्वंतरि पूजा (आरोग्य के लिए), कुबेर-लक्ष्मी पूजा, 13 दीपक, यम दीपदान। पढ़ें — धनतेरस 2026 कब है?, धनतेरस पर क्या खरीदें? और धनतेरस पूजा विधि।
दूसरा दिन: छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी (7–8 नवंबर)
चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर सुबह 10:47 से 8 नवंबर सुबह 11:27 तक है। 7 नवंबर की रात काली चौदस और हनुमान पूजा होगी, और कई परिवार इसी शाम 14 दीपक जलाएंगे। अभ्यंग स्नान (सूर्योदय से पहले उबटन और तेल स्नान) 8 नवंबर को सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर वध और 16,100 कन्याओं की मुक्ति की स्मृति में मनाया जाता है। इसे रूप चौदस भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन उबटन से स्नान करके सौंदर्य और आरोग्य की कामना की जाती है।
2026 की विशेष बात यह है कि अभ्यंग स्नान और लक्ष्मी पूजा एक ही दिन (8 नवंबर) हैं — सुबह रूप चौदस और शाम को बड़ी दिवाली। पढ़ें — नरक चतुर्दशी 2026 कब है?
तीसरा दिन: दिवाली – लक्ष्मी पूजा (8 नवंबर)
यह मुख्य पर्व है। अमावस्या सुबह 11:27 बजे आरंभ होगी; लक्ष्मी-गणेश पूजा प्रदोष काल में वृषभ लग्न के दौरान — दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50 — की जाएगी। घरों को दीयों से सजाया जाता है, रंगोली बनती है और व्यापारी नए बही-खातों की पूजा करते हैं। बंगाल, असम और ओडिशा में इसी रात काली पूजा होती है। यह भगवान राम के अयोध्या लौटने, मां लक्ष्मी के प्राकट्य, भगवान महावीर के निर्वाण और सिख परंपरा के बंदी छोड़ दिवस का पर्व भी है। पढ़ें — दिवाली 2026 कब है? और दीपावली 2026 पूजा विधि।
बीच का दिन: 9 नवंबर
9 नवंबर को अमावस्या दोपहर 12:31 बजे तक है। इस दिन सुबह स्नान-दान और देव पूजा का विधान है। कई परिवार इसी दिन रिश्तेदारों से मिलने और उपहारों के आदान-प्रदान का कार्यक्रम रखते हैं। दोपहर 12:31 बजे से प्रतिपदा तिथि आरंभ होगी, लेकिन सूर्योदय के नियम के अनुसार गोवर्धन पूजा अगले दिन होगी।
चौथा दिन: गोवर्धन पूजा और अन्नकूट (10 नवंबर)
प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर दोपहर 12:31 से 10 नवंबर दोपहर 2:00 बजे तक है, इसलिए गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को होगी (दिल्ली में प्रातःकाल मुहूर्त सुबह 6:40 से 8:50)। यह श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की इंद्र के प्रकोप से रक्षा करने की स्मृति है। भक्त गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजा करते हैं और अन्नकूट (व्यंजनों का पर्वत) अर्पित करते हैं। यह बलि प्रतिपदा और गुजराती नववर्ष भी है। पढ़ें — गोवर्धन पूजा 2026 कब है? और अन्नकूट क्यों बनाया जाता है?
पांचवां दिन: भाई दूज (11 नवंबर)
द्वितीया तिथि 10 नवंबर दोपहर 2:00 से 11 नवंबर दोपहर 3:53 बजे तक है। बहनें अपराह्न काल — दिल्ली में दोपहर 1:10 से 3:20 बजे — में भाइयों को तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं। यह यमुना द्वारा अपने भाई यमराज के आतिथ्य की कथा से जुड़ा है। इसी दिन कायस्थ समाज चित्रगुप्त पूजा (कलम-दवात पूजा) करता है। पढ़ें — भाई दूज 2026 कब है? और भाई दूज तिलक विधि।
पांच दिन ही क्यों?
ये पांच दिन जीवन की यात्रा को दर्शाते हैं: आरोग्य (धन्वंतरि), शुद्धि (नरक चतुर्दशी), समृद्धि (लक्ष्मी), प्रकृति के प्रति कृतज्ञता (गोवर्धन) और रिश्तों में प्रेम (भाई दूज)। पहले स्वास्थ्य, फिर मन की शुद्धि, फिर धन, फिर प्रकृति और अंत में परिवार — यही संतुलित जीवन का क्रम है।
पांच दिनों की तैयारी की चेकलिस्ट
| कब | क्या करें |
|---|---|
| 5 नवंबर तक | घर की सफाई पूरी, रंगोली-सजावट का सामान |
| 6 नवंबर | धनतेरस की खरीदारी, धन्वंतरि पूजा, यम दीपक |
| 7 नवंबर | छोटी दिवाली के 14 दीपक, हनुमान पूजा, उबटन तैयार |
| 8 नवंबर | सुबह अभ्यंग स्नान, शाम लक्ष्मी पूजा, दीपदान |
| 9 नवंबर | स्नान-दान, रिश्तेदारों से भेंट |
| 10 नवंबर | गोवर्धन पूजा, अन्नकूट भोग |
| 11 नवंबर | भाई दूज तिलक, चित्रगुप्त पूजा |
पांचों दिनों के पारंपरिक पकवान
| दिन | पारंपरिक व्यंजन |
|---|---|
| धनतेरस | धनिये की पंजीरी, खीर, मिठाई |
| छोटी दिवाली | उबटन स्नान के बाद हल्का भोजन; कई घरों में उड़द दाल के बड़े |
| दिवाली | खील-बताशे, लड्डू, पूरी-सब्जी, खीर, मिठाइयां |
| गोवर्धन पूजा | अन्नकूट की सब्जी, कढ़ी-चावल, बाजरे की खिचड़ी |
| भाई दूज | बहन के हाथ का भोजन, भाई की पसंद की मिठाई |
दीपोत्सव में सुरक्षा और स्वास्थ्य
- •पांच दिनों में मिठाई और तले भोजन की अधिकता से बचें; मधुमेह और हृदय रोगी विशेष ध्यान रखें।
- •पटाखों का धुआं अस्थमा के रोगियों के लिए हानिकारक है; ग्रीन पटाखे और कम आवाज़ वाले विकल्प चुनें।
- •दीयों और मोमबत्तियों से आग की घटनाओं से बचने के लिए पर्दों से दूरी रखें।
- •पालतू जानवरों को पटाखों के शोर से बचाने के लिए घर के भीतर शांत स्थान पर रखें।
दीपोत्सव के बाद आने वाले पर्व
दिवाली के पांच दिन समाप्त होते ही कार्तिक मास के अन्य पर्वों की शृंखला चलती है। भाई दूज के कुछ दिन बाद पूर्वी भारत का महापर्व छठ पूजा आता है, जिसमें डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। फिर देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और तुलसी विवाह के साथ विवाह आदि मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली और गुरु नानक जयंती के साथ यह पावन मास पूर्ण होता है। इन पर्वों की तिथियां हमारे व्रत एवं त्योहार पेज पर देखें।
सारांश
दिवाली 2026 धनतेरस (6 नवंबर) से भाई दूज (11 नवंबर) तक है, जिसमें लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर (दिल्ली में शाम 5:54–7:50) को है। धनतेरस पर खरीदारी की योजना बनाएं, 7–8 नवंबर को छोटी दिवाली और मुख्य पूजा के लिए रखें, और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा व 11 नवंबर को भाई दूज मनाएं। आप सभी को दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं!
शुभ दीपावली!



