🌸व्रत एवं त्यौहारप्रामाणिक वैदिक शास्त्र सूत्र

गोवर्धन पूजा 2026 कब है? पूजा मुहूर्त, अन्नकूट और पूजा विधि

गोवर्धन पूजा 2026 मंगलवार 10 नवंबर को है। जानें प्रातःकाल मुहूर्त (दिल्ली सुबह 6:40–8:50), प्रतिपदा तिथि, चरणबद्ध पूजा विधि, अन्नकूट, परिक्रमा और गोवर्धन कथा।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·6 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 9 अक्टू॰ 2026
WhatsApp शेयर
0%
गोवर्धन पूजा 2026 कब है? पूजा मुहूर्त, अन्नकूट और पूजा विधि
✨प्रामाणिक वैदिक संदर्भ सचित्र

मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

गोवर्धन पूजा 2026 मंगलवार 10 नवंबर को है। जानें प्रातःकाल मुहूर्त (दिल्ली सुबह 6:40–8:50), प्रतिपदा तिथि, चरणबद्ध पूजा विधि, अन्नकूट, परिक्रमा और गोवर्धन कथा।

📜 प्रामाणिक ग्रंथ सूत्र⏱️ 6 मिनट में पूर्ण समझ🙏 सटीक ज्योतिषीय उपाय

गोवर्धन पूजा 2026: संक्षिप्त उत्तर

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट 2026 मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को है। नई दिल्ली में प्रातःकाल मुहूर्त सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक (2 घंटे 10 मिनट) है। प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे से 10 नवंबर दोपहर 2:00 बजे तक रहेगी, इसलिए गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को होगी, जब सूर्योदय के समय प्रतिपदा है। इसी दिन बलि प्रतिपदा और गुजराती नववर्ष भी है।

विवरणसमय (नई दिल्ली)
गोवर्धन पूजा / अन्नकूटमंगलवार, 10 नवंबर 2026
प्रतिपदा आरंभ9 नवंबर, दोपहर 12:31
प्रतिपदा समाप्त10 नवंबर, दोपहर 2:00
प्रातःकाल मुहूर्तसुबह 6:40 – 8:50
पूजा पूर्ण करेंदोपहर 2:00 से पहले (प्रतिपदा समाप्ति)

9 नवंबर को क्यों नहीं?

9 नवंबर को अमावस्या दोपहर 12:31 बजे तक है, इसलिए उस दिन सुबह अमावस्या रहेगी (दिवाली स्नान और देव पूजा का दिन)। सूर्योदय के समय प्रतिपदा केवल 10 नवंबर को है, इसलिए गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को होगी। कुछ विदेशी कैलेंडरों में समय क्षेत्र के अंतर के कारण 9 नवंबर दिखाई दे सकता है, लेकिन भारत में 10 नवंबर ही सही है। दिवाली के पूरे पांच दिन देखें — दिवाली 2026 के 5 दिन।

गोवर्धन पूजा की कथा

ब्रजवासी हर वर्ष वर्षा के देवता इंद्र की भव्य पूजा करते थे। बालक श्रीकृष्ण ने उनसे पूछा कि यह पूजा क्यों होती है, और समझाया कि हमारी गायों को चारा, हमें जल और आश्रय तो गोवर्धन पर्वत देता है — इसलिए पूजा गोवर्धन की होनी चाहिए। ब्रजवासियों ने कृष्ण की बात मानकर गोवर्धन की पूजा की और उसे अन्नकूट का भोग लगाया।

इससे क्रोधित होकर इंद्र ने सात दिनों तक मूसलाधार वर्षा कराई। तब श्रीकृष्ण ने अपनी बाएं हाथ की सबसे छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सात दिनों तक सभी ब्रजवासियों और पशुओं को उसके नीचे आश्रय दिया। अंत में इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ, वे श्रीकृष्ण की शरण में आए और क्षमा मांगी। कामधेनु ने श्रीकृष्ण का अभिषेक किया और उन्हें "गोविंद" नाम मिला। तभी से कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन और गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण की पूजा होती है।

यह कथा सिखाती है कि अहंकार चाहे देवताओं का ही क्यों न हो, टिकता नहीं; और प्रकृति — पर्वत, जल, वन और पशु — के प्रति कृतज्ञता ही सच्ची पूजा है।

गोवर्धन पूजा की सामग्री

  • •ताज़ा गोबर (गोवर्धन आकृति बनाने के लिए)
  • •फूल, दूब घास, छोटी टहनियां, रुई
  • •रोली, अक्षत, हल्दी, कलावा
  • •खील-बताशे, दूध, दही, गंगाजल
  • •घी का दीपक, धूप
  • •अन्नकूट के व्यंजन, मिठाई, फल
  • •गाय-बछड़े और ग्वाल-बाल की छोटी आकृतियां (मिट्टी या गोबर की)

गोवर्धन पूजा विधि

  1. 1गोवर्धन आकृति बनाएं: आंगन में ताज़े गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाएं — प्रायः लेटे हुए मानव रूप में या पर्वत के आकार में। इसे फूलों, घास, छोटी टहनियों और गायों, ग्वालों व श्रीकृष्ण की आकृतियों से सजाएं।
  2. 2नाभि में दीपक: आकृति के बीच (नाभि स्थान) में घी का दीपक या एक कटोरी रखें, जिसमें दूध, दही, गंगाजल और बताशे डाले जाते हैं।
  3. 3पूजन: रोली, अक्षत, खील-बताशे, दूध, दही, फूल और मिठाई अर्पित करें।
  4. 4मंत्र:
ॐवैदिक शास्त्र सूत्र एवं श्लोक (Scriptural Shloka)
गोवर्धन धराधार गोकुलत्राणकारक।
विष्णुबाहुकृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रदो भव॥

अर्थ: हे पृथ्वी को धारण करने वाले, गोकुल की रक्षा करने वाले गोवर्धन, जिन्हें भगवान विष्णु (कृष्ण) ने अपनी भुजा पर उठाया — आप हमें करोड़ों गायों (समृद्धि) का वरदान दें।

  1. 5अन्नकूट भोग: व्यंजनों का पर्वत अर्पित करें (नीचे देखें)।
  2. 6परिक्रमा: गोवर्धन आकृति की सात परिक्रमा करें; परिक्रमा करते समय एक व्यक्ति लोटे से दूध या जल की धार गिराता है और दूसरा जौ या अनाज बिखेरता है।
  3. 7गौ पूजा: गायों को स्नान कराकर सजाएं, तिलक लगाएं और गुड़-रोटी खिलाएं।
  4. 8आरती: गोवर्धन और श्रीकृष्ण की आरती करें और प्रसाद बांटें।

अन्नकूट

अन्नकूट का अर्थ है — "अन्न का पर्वत"। इस दिन परिवार अनेक प्रकार के शाकाहारी व्यंजन — प्रायः 56 (छप्पन भोग) — बनाकर श्रीकृष्ण को अर्पित करते हैं। सबसे प्रसिद्ध व्यंजन है अन्नकूट की सब्जी, जिसमें कई मौसमी सब्जियां एक साथ पकाई जाती हैं। मंदिरों में अन्नकूट महोत्सव और भंडारे होते हैं। विस्तार से पढ़ें — गोवर्धन पूजा में अन्नकूट क्यों बनाया जाता है?

10 नवंबर 2026 को अन्य पर्व

  • •बलि प्रतिपदा (पाड़वा): राजा बलि की स्मृति; महाराष्ट्र में पति-पत्नी एक-दूसरे को उपहार देते हैं। यह साढ़े तीन अबूझ मुहूर्तों में "आधा" मुहूर्त भी माना जाता है।
  • •गुजराती नववर्ष (बेसतु वरस): गुजराती पंचांग के अनुसार नया विक्रम संवत आरंभ होता है; लोग "साल मुबारक" कहकर शुभकामनाएं देते हैं।
  • •द्यूत क्रीड़ा: परंपरा में इसे खेलों का दिन कहा गया है, परंतु जुआ खेलने से अवश्य बचें।

मथुरा में गोवर्धन परिक्रमा

इस दिन मथुरा के पास गोवर्धन पर्वत की लगभग 21 किलोमीटर की परिक्रमा करने लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। जतीपुरा और मानसी गंगा क्षेत्र में विशेष उत्सव होता है। यदि आप जाने की योजना बना रहे हैं, तो सुबह जल्दी आरंभ करें, पानी साथ रखें और भीड़ के अनुसार यात्रा की योजना बनाएं।

राजस्थान में गोवर्धन पूजा

राजस्थान में नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में अन्नकूट उत्सव विश्व प्रसिद्ध है, जहां चावल के विशाल ढेर और सैकड़ों व्यंजनों का भोग लगता है और भोग के बाद आसपास के आदिवासी समुदायों द्वारा "अन्नकूट लूट" की अनोखी परंपरा निभाई जाती है। गांवों में इस दिन गायों को रंगों और मोरपंखों से सजाया जाता है।

गौ पूजा का महत्व

गोवर्धन पूजा मूल रूप से गौवंश और कृषि संस्कृति का पर्व है। श्रीकृष्ण को "गोपाल" और "गोविंद" कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने गायों की सेवा और रक्षा की। इस दिन गायों और बैलों को नहलाकर, उनके सींगों पर रंग लगाकर, गले में घंटियां और फूलों की माला पहनाकर सजाया जाता है। उन्हें गुड़, हरा चारा और रोटी खिलाई जाती है। शहरों में रहने वाले परिवार किसी गौशाला में जाकर गौ सेवा या दान कर सकते हैं।

घर में गोबर उपलब्ध न हो तो?

  • •गौशाला या डेयरी से थोड़ा गोबर मंगवा सकते हैं।
  • •गोवर्धन की प्रतीकात्मक आकृति मिट्टी या आटे से बनाई जा सकती है।
  • •श्रीकृष्ण का गोवर्धनधारी चित्र रखकर उसके सामने अन्नकूट अर्पित करें।
  • •पर्वत के प्रतीक के रूप में अनाज का छोटा ढेर बनाकर उस पर दीपक रखें।

भाव और कृतज्ञता ही इस पूजा का मूल है।

बलि प्रतिपदा की कथा

गोवर्धन पूजा के दिन ही बलि प्रतिपदा भी मनाई जाती है। कथा के अनुसार असुरराज बलि अत्यंत दानवीर थे, पर उनके अहंकार और देवताओं पर अधिकार को समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया। वामन ने बलि से तीन पग भूमि मांगी और दो पगों में पृथ्वी और आकाश नाप लिए। तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। उनकी दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया और वरदान दिया कि वर्ष में एक दिन वे पृथ्वी पर अपनी प्रजा से मिलने आएंगे। केरल में ओणम और महाराष्ट्र-कर्नाटक में बलि प्रतिपदा इसी की स्मृति में मनाए जाते हैं। महाराष्ट्र में इस दिन "इडा पीडा जावो, बळीचे राज्य येवो" (कष्ट दूर हों, बलि का राज्य आए) कहा जाता है।

सारांश

गोवर्धन पूजा 2026 मंगलवार, 10 नवंबर को है। सुबह (दिल्ली में 6:40 से 8:50) पूजा करें, दोपहर 2:00 बजे प्रतिपदा समाप्त होने से पहले अनुष्ठान पूरे करें, गोवर्धन की आकृति बनाएं, अन्नकूट अर्पित करें और परिक्रमा करें। इसके अगले दिन, 11 नवंबर को भाई दूज है — पढ़ें भाई दूज 2026 कब है?

जय श्री कृष्ण!

यूट्यूब शॉर्ट्स वीडियोनवीनतम सूत्र

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

नित्य संध्या एवं पूजा में भगवान विष्णु की आरती का आध्यात्मिक महत्व।

मात्र 60 सेकंड में संपूर्ण नियम व वैदिक सूत्र समझें
प्रमाणिक गणना व सरल भाषा में व्याख्या
ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा
Shorts

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

▶ 60 सेकंड में देखेंYouTube पर खोलें
🌸 व्रत एवं पर्व

आगामी व्रत, त्यौहार व पूजा विधि की संपूर्ण सूची

एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा, अमावस्या एवं सभी प्रमुख पर्वों की सटीक शास्त्रसम्मत तिथियां देखें।

पर्व व त्यौहार कैलेंडर देखें →
पाठक समीक्षा

क्या यह ज्योतिषीय लेख आपके लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक रहा?

ॐ

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र

प्रमाणित वैदिक शोध मंडल

यह आलेख महर्षि पराशर विरचित वृहत्पाराशर होराशास्त्र, नारद संहिता, मुहूर्त चिंतामणि एवं शास्त्रीय सूर्यसिद्धांत के सूत्रों के गहन अध्ययन व शोध के आधार पर संकलित किया गया है।

व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श

क्या आपकी कुंडली में यह योग या दोष सक्रिय है?

हमारे 24x7 दैविक AI ज्योतिषी से अपनी जन्म तिथि व समय के आधार पर सटीक विश्लेषण प्राप्त करें।

AI ज्योतिषी से पूछें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

गोवर्धन पूजा 2026 कब है?

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को है।

गोवर्धन पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में प्रातःकाल मुहूर्त 10 नवंबर को सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक है। प्रतिपदा दोपहर 2:00 बजे समाप्त होगी।

गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को क्यों नहीं है?

9 नवंबर की सुबह अमावस्या है; सूर्योदय के समय प्रतिपदा 10 नवंबर को है, इसलिए गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को होगी।

गोवर्धन पूजा क्यों की जाती है?

श्रीकृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया था। यह प्रकृति और गौवंश के प्रति कृतज्ञता का पर्व है।

गोवर्धन पूजा का मंत्र क्या है?

'गोवर्धन धराधार गोकुलत्राणकारक। विष्णुबाहुकृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रदो भव॥'

गोवर्धन की परिक्रमा कितनी बार करते हैं?

घर पर बनी गोवर्धन आकृति की सात परिक्रमा की जाती है, जबकि मथुरा में पर्वत की लगभग 21 किलोमीटर की परिक्रमा होती है।

आज का पंचांग (जयपुर)2026-10-16
तिथिषष्ठी
नक्षत्रमूल
सूर्योदय06:26 AM
अभिजित मुहूर्त11:49 AM - 12:35 PM
आज का संपूर्ण पंचांग देखें
@ApnaPanchang
🪐विशेष सूत्र

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

नित्य संध्या एवं पूजा में भगवान विष्णु की आरती का आध्यात्मिक महत्व।

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा
Shorts

ॐ जय जगदीश हरे आरती | भगवान विष्णु की असीम कृपा

▶ 60 सेकंड में देखेंYouTube पर खोलें
YouTube पर सब्सक्राइब करें
नित्य पंचांग एवं वैदिक उपायसभी शॉर्ट्स
आधिकारिक मोबाइल ऐप4.8·100K+ डाउनलोड्स
पंचांग 2026: कुंडली एवं AI ज्योतिषी
टॉप ज्योतिष ऐप

पंचांग 2026: कुंडली एवं AI ज्योतिषी

दैनिक पंचांग, चौघड़िया, व्रत-त्योहार, वैदिक जन्म कुंडली एवं 24/7 AI ज्योतिषी परामर्श।

  • सटीक दैनिक पंचांग व सूर्योदय गणना
  • चौघड़िया, अभिजित व राहुकाल मुहूर्त
Google Play से निःशुल्क पाएं
🔮 निःशुल्क जन्म पत्रिका

अपनी संपूर्ण जन्म कुंडली बनाएं

सटीक लग्न, नवमांश, चंद्र राशि, महादशा, कालसर्प व मांगलिक दोष की गणना तुरंत प्राप्त करें।

कुंडली बनाएं (100% Free) →

अन्य संबंधित ज्योतिष लेख

सभी लेख →
🌸 व्रत एवं त्यौहार6 min

एकादशी क्या होती है?

🌸 व्रत एवं त्यौहार5 min

पुष्कर मेला और कार्तिक पंचांग