धनतेरस पूजा विधि 2026: संक्षिप्त उत्तर
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को धनतेरस की पूजा प्रदोष-वृषभ मुहूर्त — नई दिल्ली में शाम 6:02 से 7:57 बजे (जयपुर में 6:11–8:07, मुंबई में 6:35–8:35) में करें। क्रम है: गणेश पूजा → धन्वंतरि पूजा (आरोग्य के लिए) → कुबेर और लक्ष्मी पूजा (धन के लिए), खरीदी गई नई वस्तुओं सहित → 13 दीपक → मुख्य द्वार के बाहर दक्षिणमुखी यम दीपदान। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह 10:30 से 7 नवंबर सुबह 10:47 तक है।
शाम की समय-सारणी (दिल्ली)
| समय | क्या करें |
|---|---|
| शाम 5:30 से पहले | घर की सफाई, रंगोली, सामग्री तैयार |
| शाम 5:33 (प्रदोष आरंभ) | पूजा स्थान और मुख्य द्वार पर दीपक |
| शाम 6:02 – 7:57 | गणेश, धन्वंतरि, कुबेर-लक्ष्मी पूजा |
| प्रदोष के भीतर (8:09 तक) | मुख्य द्वार के बाहर यम दीपदान |
अन्य शहरों के मुहूर्त — धनतेरस 2026 कब है?
पूजा सामग्री
- •भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी, कुबेर और गणेश जी का चित्र या मूर्ति
- •चौकी, लाल/पीला कपड़ा, जल से भरा कलश
- •रोली, हल्दी, अक्षत, कलावा, फूल, तुलसी दल (धन्वंतरि के लिए)
- •घी का दीपक, धूप, कपूर
- •नैवेद्य: खीर, मिठाई, फल, पंचामृत
- •नए खरीदे बर्तन, सिक्के या आभूषण
- •13 मिट्टी के दीये और सरसों के तेल वाला एक चौमुखा मिट्टी का दीपक (यम दीपक)
- •साबुत धनिया, गोमती चक्र, कौड़ियां (वैकल्पिक)
चरणबद्ध पूजा विधि
1. पवित्रीकरण और संकल्प
गंगाजल छिड़ककर स्वयं और पूजा स्थान को शुद्ध करें। उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके बैठें और संकल्प लें — "कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन, मैं अपने परिवार के आरोग्य और समृद्धि के लिए भगवान धन्वंतरि, कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा करता/करती हूं।"
2. गणेश पूजा
'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र से रोली, अक्षत, दूर्वा, फूल और लड्डू अर्पित करें।
3. भगवान धन्वंतरि की पूजा
भगवान धन्वंतरि विष्णु के अवतार और आयुर्वेद के जनक माने जाते हैं। वे समुद्र मंथन से चार भुजाओं में शंख, चक्र, जलौका (जोंक) और अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें रोली, अक्षत, पीले फूल, तुलसी दल और नैवेद्य अर्पित करें और मंत्र जपें:
या विस्तृत मंत्र:
परिवार के हर सदस्य के स्वास्थ्य की प्रार्थना करें। कई लोग इस दिन अपनी दवाइयों या आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की भी पूजा करते हैं और नियमित दिनचर्या व स्वास्थ्य का संकल्प लेते हैं।
4. कुबेर और लक्ष्मी पूजा
नए खरीदे बर्तन, सिक्के या आभूषण मां के सामने रखें। उन पर रोली लगाएं, फूल चढ़ाएं और मंत्र पढ़ें:
कुबेर मंत्र:
> ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
लक्ष्मी मंत्र:
> ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
साबुत धनिया और खीर या मिठाई अर्पित करें। नए बर्तन को खाली न रखें — उसमें जल, चावल या मिठाई भरकर रखें। तिजोरी या कैश बॉक्स पर स्वास्तिक बनाकर उसकी भी पूजा करें।
5. आरती
भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य आरती में शामिल हों।
6. 13 दीपक
13 दीये जलाकर घर में अलग-अलग स्थानों पर रखें — मुख्य द्वार, तुलसी, रसोई, जल स्थान आदि। पढ़ें — दिवाली पर घर में दीपक कहां-कहां जलाएं?
7. यम दीपदान
चौमुखे मिट्टी के दीपक में सरसों का तेल भरकर उसे प्रदोष काल में मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें। थोड़ा जल अर्पित करें और मंत्र पढ़ें:
परंपरा के अनुसार दीपक रखने के बाद पीछे मुड़कर न देखें। कई परिवारों में घर का सबसे बड़ा सदस्य यम दीपक जलाता है।
धनतेरस पर धन्वंतरि पूजा का विशेष महत्व
शास्त्रों में कहा गया है — "शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्", अर्थात शरीर ही सभी धर्म-कर्म का पहला साधन है। इसलिए दीपावली के पांच दिनों की शुरुआत धन (वित्त) से नहीं, बल्कि आरोग्य के देवता की पूजा से होती है। "धनतेरस" में "धन" का गहरा अर्थ स्वास्थ्य रूपी धन भी है। इस दिन स्वास्थ्य से जुड़े संकल्प लें — जैसे नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन या किसी बुरी आदत को छोड़ना।
पूजा के बाद
- •नई वस्तुओं को दिवाली की लक्ष्मी पूजा (8 नवंबर) तक पूजा स्थान पर ही रखें।
- •साबुत धनिया, गोमती चक्र और सिक्का दिवाली पूजा के लिए संभालकर रखें।
- •रात में हल्का, सात्विक भोजन करें।
- •सोने से पहले मुख्य द्वार का दीपक जांच लें; यम दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखा हो।
धनतेरस पूजा में ध्यान रखने योग्य बातें
- •पूजा राहुकाल में न करें; प्रदोष काल सर्वश्रेष्ठ है।
- •यम दीपक को घर के भीतर न रखें।
- •पूजा स्थान उत्तर या ईशान दिशा में हो — उत्तर कुबेर की दिशा है।
- •इस दिन घर में कलह न करें और किसी को उधार न दें।
- •खरीदी गई वस्तु पर से मूल्य का स्टिकर हटाकर पूजा में रखें।
धनतेरस पर खरीदारी के बारे में पढ़ें — धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस पर कुबेर पूजा का महत्व
कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष और उत्तर दिशा के स्वामी हैं। मां लक्ष्मी धन की अधिष्ठात्री देवी हैं, तो कुबेर उस धन के संरक्षक। इसलिए धनतेरस पर दोनों की पूजा साथ की जाती है — ताकि धन आए भी और टिके भी। कुबेर पूजा के लिए तिजोरी या कैश बॉक्स को उत्तर दिशा में रखें, उस पर स्वास्तिक बनाएं और कुबेर यंत्र या चित्र स्थापित करें। पूजा के बाद तिजोरी में हल्दी की गांठ, धनिया और एक चांदी का सिक्का लाल कपड़े में बांधकर रखें।
धनतेरस पर आयुर्वेदिक परंपराएं
- •कई घरों में इस दिन नीम, तुलसी और गिलोय के पौधे लगाए जाते हैं।
- •आयुर्वेदिक वैद्य इस दिन धन्वंतरि पूजन करके नई औषधियां बनाना आरंभ करते हैं।
- •घर के फर्स्ट-एड बॉक्स की जांच करके पुरानी दवाइयां बदलना एक उपयोगी आधुनिक परंपरा हो सकती है।
- •गुड़-धनिया का प्रसाद आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
संक्षिप्त धनतेरस पूजा (समय कम हो तो)
दीपक जलाएं → गणेश स्मरण → 'ॐ धन्वन्तरये नमः' 11 बार → 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' 11 बार → नई वस्तु पर तिलक → आरती → यम दीपक बाहर दक्षिण दिशा में। यह पूरी प्रक्रिया लगभग 15 मिनट में हो जाती है।
भगवान धन्वंतरि का स्वरूप और ध्यान
पूजा से पहले भगवान धन्वंतरि के स्वरूप का ध्यान करें — श्याम वर्ण, पीतांबर धारण किए, चार भुजाएं: एक में शंख, दूसरी में चक्र, तीसरी में जलौका (जोंक, जो शल्य चिकित्सा का प्रतीक है) और चौथी में अमृत से भरा कलश। उनके मुख पर करुणा और शांति है। यह स्वरूप बताता है कि चिकित्सा में ज्ञान (शंख), अनुशासन (चक्र), शल्य कौशल (जलौका) और जीवनदायी औषधि (अमृत) — सभी आवश्यक हैं।
धनतेरस पर परिवार के स्वास्थ्य का संकल्प
पूजा के अंत में पूरा परिवार मिलकर एक स्वास्थ्य संकल्प ले सकता है — जैसे प्रतिदिन टहलना, चीनी और तले भोजन में कमी, समय पर सोना, या धूम्रपान-मदिरा छोड़ना। यही भगवान धन्वंतरि के प्रति सच्ची श्रद्धा होगी। बच्चों को आयुर्वेद के सरल नियम बताएं — गुनगुना पानी, मौसमी फल और नियमित दिनचर्या।
धनतेरस पर क्या न करें
- •यम दीपक को घर के भीतर न रखें; यह बाहर दक्षिण की ओर ही जलता है।
- •राहुकाल में पूजा या खरीदारी से बचें।
- •इस दिन किसी को उधार न दें।
- •खाली बर्तन घर न लाएं।
- •घर में कलह और कटु वचन से बचें।
सारांश
6 नवंबर 2026 को दिल्ली में शाम 6:02 से 7:57 के बीच धनतेरस पूजा करें: गणेश पूजा, आरोग्य के लिए धन्वंतरि पूजा, नई खरीद के साथ कुबेर-लक्ष्मी पूजा, घर भर में 13 दीपक और प्रदोष काल में दक्षिणमुखी यम दीपक। आपके परिवार को आरोग्य, धन और दीर्घायु प्राप्त हो।
शुभ धनतेरस!



