अक्षय तृतीया 2027: संक्षिप्त उत्तर
अक्षय तृतीया (आखा तीज) 2027 रविवार, 9 मई 2027 को है। नई दिल्ली में पूजा मुहूर्त सुबह 5:35 से 9:03 तक (3 घंटे 28 मिनट) है। तृतीया तिथि 8 मई सुबह 11:42 से 9 मई सुबह 9:03 तक रहेगी। सोना खरीदने का शुभ समय पूरी तृतीया तिथि में है — 8 मई सुबह 11:42 से 9 मई सुबह 9:03 तक। परशुराम जयंती शनिवार, 8 मई को मनाई जाएगी (प्रदोष काल में तृतीया के आधार पर)।
| विवरण | 2027 |
|---|---|
| अक्षय तृतीया | रविवार, 9 मई |
| पूजा मुहूर्त (दिल्ली) | सुबह 5:35 – 9:03 |
| तृतीया तिथि | 8 मई सुबह 11:42 – 9 मई सुबह 9:03 |
| सोना खरीदने का समय | 8 मई सुबह 11:42 – 9 मई सुबह 9:03 |
| परशुराम जयंती | शनिवार, 8 मई |
जयपुर सहित अन्य शहरों में सूर्योदय के अनुसार पूजा मुहूर्त कुछ मिनट आगे-पीछे होगा — [पंचांग](/panchang) देखें।
अक्षय तृतीया 9 मई को ही क्यों?
अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है, और नियम यह है कि जिस दिन पूर्वाह्न (सुबह) में तृतीया हो, उसी दिन यह पर्व मनाया जाए। 8 मई को तृतीया सुबह 11:42 से शुरू होती है, यानी उस दिन का सूर्योदय द्वितीया में है; 9 मई को सूर्योदय तृतीया में है और तृतीया सुबह 9:03 तक रहती है। इसलिए अक्षय तृतीया 9 मई को है। चूंकि तिथि सुबह जल्दी समाप्त हो रही है, इसलिए मुख्य पूजा, दान और ख़रीदारी सुबह 9:03 से पहले करना सबसे उत्तम है। इस नियम के बारे में विस्तार से — सूर्योदय के अनुसार व्रत की तारीख कैसे तय होती है?
परशुराम जयंती 8 मई को क्यों? भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल (संध्या) में माना जाता है, और 8 मई की शाम तृतीया तिथि में है — इसलिए परशुराम जयंती अक्षय तृतीया से एक दिन पहले, 8 मई को है।
अबूझ मुहूर्त: बिना मुहूर्त देखे शुभ कार्य
अक्षय तृतीया साढ़े तीन अबूझ मुहूर्तों में से एक है — चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया, विजयादशमी (पूरे दिन) और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (आधा दिन)। इन दिनों विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय, भूमि-भवन या वाहन ख़रीदना, और सोना-चांदी ख़रीदना बिना अलग मुहूर्त देखे किया जा सकता है। फिर भी राहुकाल से बचना और तिथि रहते कार्य करना उचित है। विवाह के लिए पढ़ें — विवाह मुहूर्त कैसे देखें?
अक्षय तृतीया का महत्व
"अक्षय" का अर्थ है — जिसका कभी क्षय (नाश) न हो। मान्यता है कि इस दिन किया गया जप, तप, दान, स्नान और शुभ कार्य अक्षय फल देता है। इस दिन से जुड़ी प्रमुख मान्यताएं:
- •भगवान परशुराम का अवतरण (विष्णु के छठे अवतार)।
- •त्रेता युग का आरंभ।
- •मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण।
- •भगवान कृष्ण ने निर्धन सुदामा को इसी दिन समृद्धि का आशीर्वाद दिया।
- •पांडवों को अक्षय पात्र मिलने की कथा।
- •इसी समय के आसपास बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते हैं और वृंदावन के बांके बिहारी जी के चरण दर्शन वर्ष में केवल इसी दिन होते हैं।
अक्षय तृतीया पूजा विधि
- 1सुबह जल्दी उठकर स्नान करें (संभव हो तो गंगाजल मिलाकर)।
- 2भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
- 3पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, अक्षत और जौ या गेहूं अर्पित करें।
- 4सत्तू, खीर, ककड़ी, चने की दाल और मौसमी फलों का भोग लगाएं।
- 5"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" और "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद" मंत्र का जाप करें।
- 6विष्णु सहस्रनाम या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
- 7आरती करके दान करें।
अक्षय तृतीया पर क्या दान करें?
मई की भीषण गर्मी में यह दान विशेष पुण्यदायी माने गए हैं:
- •जल से भरा मिट्टी का घड़ा (मटका) — सबसे प्रमुख दान
- •सत्तू, गुड़, चीनी
- •पंखा, छाता, जूते-चप्पल
- •अनाज (जौ, गेहूं, चावल)
- •वस्त्र, फल (आम, ककड़ी, तरबूज)
- •प्याऊ लगवाना और पक्षियों के लिए पानी रखना
सोना ख़रीदने के अलावा क्या ख़रीदें?
सोना महंगा हो तो चांदी, पीतल या तांबे के बर्तन, जौ, मिट्टी का घड़ा, या नई पुस्तकें भी ख़रीद सकते हैं — शास्त्रों में "जौ" ख़रीदना सोने के समान फलदायी बताया गया है।
राजस्थान में आखा तीज
राजस्थान में अक्षय तृतीया को आखा तीज कहा जाता है। यह किसानों के लिए नए कृषि वर्ष का शुभारंभ है — इस दिन शगुन के रूप में हल चलाया जाता है और वर्षा का अनुमान लगाया जाता है। आखा तीज पर राजस्थान में बड़ी संख्या में विवाह होते हैं। (ध्यान दें — बाल विवाह कानूनन अपराध है।) घरों में बाजरे का खीचड़ा और इमली का पानी बनाने की परंपरा है।
सुदामा और कनकधारा की कथाएं
सुदामा की कथा: भगवान कृष्ण के बचपन के मित्र सुदामा अत्यंत निर्धन थे। पत्नी के कहने पर वे एक पोटली चावल लेकर द्वारका पहुंचे। श्रीकृष्ण ने प्रेम से वे चावल खाए और सुदामा के कुछ मांगे बिना ही उनकी झोपड़ी को महल में बदल दिया। मान्यता है कि यह प्रसंग अक्षय तृतीया का था — इसलिए यह दिन निःस्वार्थ प्रेम और दान का प्रतीक भी है।
कनकधारा की कथा: एक प्रचलित कथा के अनुसार आदि शंकराचार्य भिक्षा के लिए एक निर्धन स्त्री के घर गए। उसके पास देने को केवल एक सूखा आंवला था, जो उसने श्रद्धा से दे दिया। उसकी दरिद्रता देखकर शंकराचार्य ने माता लक्ष्मी की स्तुति में कनकधारा स्तोत्र की रचना की, और कहा जाता है कि उसके घर सोने के आंवलों की वर्षा हुई। परंपरा इस घटना को भी अक्षय तृतीया से जोड़ती है, इसलिए इस दिन कनकधारा स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
अक्षय तृतीया पर क्या करें और क्या न करें
करें:
न करें:
अक्षय तृतीया पर नया काम कैसे शुरू करें?
अबूझ मुहूर्त होने पर भी 2027 में ये बातें ध्यान रखें:
- 1तृतीया के रहते: 9 मई सुबह 9:03 से पहले, या 8 मई सुबह 11:42 के बाद।
- 2राहुकाल से बचें: रविवार (9 मई) को राहुकाल सामान्यतः शाम 4:30 से 6 बजे के आसपास होता है, और शनिवार (8 मई) को सुबह 9 से 10:30 के आसपास — सटीक समय पंचांग में देखें।
- 3शुभ चौघड़िया चुनें — चौघड़िया कैसे देखें?
- 4गृह प्रवेश के लिए — गृह प्रवेश मुहूर्त।
सारांश
अक्षय तृतीया 2027 रविवार, 9 मई को है; पूजा मुहूर्त सुबह 5:35 से 9:03 (दिल्ली)। सोना 8 मई सुबह 11:42 से 9 मई सुबह 9:03 के बीच ख़रीदें, और परशुराम जयंती 8 मई को मनाएं। 2027 के सभी त्योहार — हिंदू कैलेंडर 2027।



