दशहरा पूजा सामग्री 2026: संक्षिप्त उत्तर
दशहरा 2026 (मंगलवार, 20 अक्टूबर) के लिए सामग्री को पांच समूहों में तैयार रखें: (1) मूल पूजा सामग्री — रोली, हल्दी, अक्षत, कलावा, दीपक, धूप, फूल; (2) शमी पूजा — शमी के पत्ते या पौधा, जल, कलावा; (3) अपराजिता पूजा — अपराजिता के फूल, चंदन, अष्टदल कमल बनाने के लिए स्वच्छ स्थान; (4) शस्त्र पूजा — लाल कपड़ा, गंगाजल, शस्त्र या औज़ार; और (5) राम दरबार पूजा और भोग — राम दरबार का चित्र, जलेबी, पान, मिठाई और फल। इस वर्ष 20 अक्टूबर की सुबह नवमी पूजन और नवरात्रि विसर्जन भी है, इसलिए उसकी सामग्री भी तैयार रखें।
दशहरा 2026: एक नज़र में
| विवरण | समय (नई दिल्ली) |
|---|---|
| तारीख | मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 |
| नवमी तिथि समाप्त | दोपहर 12:50 |
| दशमी तिथि आरंभ | दोपहर 12:50 |
| अपराह्न पूजा (लगभग) | दोपहर 1:14 – 3:30 |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 1:59 – 2:45 |
| रावण दहन | सूर्यास्त (लगभग 5:46) के बाद |
तारीख और मुहूर्त की पूरी जानकारी के लिए पढ़ें — दशहरा 2026 कब है?
1. मूल पूजा सामग्री
- •रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन
- •अक्षत (साबुत चावल)
- •कलावा (मौली)
- •घी का दीपक, रुई की बत्तियां, माचिस
- •अगरबत्ती, धूप, कपूर
- •फूल और मालाएं (गेंदा, गुलाब, अपराजिता)
- •पान के पत्ते और साबुत सुपारी
- •गंगाजल और जल से भरा लोटा
- •पूजा की थाली, घंटी
- •नारियल
- •आसन
2. शमी पूजा सामग्री
- •पास में शमी का वृक्ष या गमले में लगा शमी का पौधा
- •अर्पण के लिए जल (थोड़ा गंगाजल मिलाकर)
- •रोली, अक्षत, कलावा, फूल
- •घी का छोटा दीपक
- •शमी के पत्ते घर लाने के लिए साफ कपड़ा या लिफाफा
ध्यान दें: शमी की टहनियां न तोड़ें। केवल कुछ पत्ते सम्मानपूर्वक लें। शमी के पत्तों को "सोना" मानकर घर की तिजोरी, पूजा स्थान या पर्स में रखा जाता है और रिश्तेदारों-मित्रों को भेंट किया जाता है।
3. अपराजिता पूजा सामग्री
- •अपराजिता (नीले फूल वाली बेल) के फूल या बेल
- •अष्टदल कमल बनाने के लिए चंदन या रोली
- •अक्षत, फूल, नैवेद्य
- •दीपक और धूप
अपराजिता पूजा अपराह्न काल में घर के ईशान कोण में की जाती है। इसमें मध्य में मां अपराजिता, दाहिनी ओर जया और बाईं ओर विजया का आवाहन होता है।
4. शस्त्र पूजा सामग्री
- •लाल या पीला कपड़ा और चौकी
- •गंगाजल और पोंछने के लिए साफ कपड़ा
- •पूजा के लिए शस्त्र / औज़ार / वाहन की चाबी / पुस्तकें / वाद्य यंत्र
- •तिलक और स्वास्तिक के लिए रोली-हल्दी
- •बांधने के लिए कलावा
- •गेंदे के फूल, शमी पत्र
- •प्रसाद के लिए मिठाई
विधि पढ़ें — विजयादशमी पर शस्त्र पूजा कैसे करें?
5. राम दरबार पूजा और भोग
- •राम दरबार का चित्र (श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान)
- •तुलसी दल (भगवान राम के लिए)
- •जलेबी, लड्डू, गुड़-चना
- •पान (कई परिवारों में रावण दहन के बाद पान अर्पित करके खाया जाता है)
- •मौसमी फल
- •पाठ के लिए रामचरितमानस या सुंदरकांड की पुस्तक
दशहरे के दिन सुंदरकांड या रामरक्षा स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
6. नवमी और नवरात्रि विसर्जन (20 अक्टूबर सुबह)
- •हवन सामग्री, आम की लकड़ी, घी, सूखा नारियल
- •कन्या पूजन की सामग्री (यदि नवमी को पूजन है)
- •कलश का जल रखने के लिए पात्र और छिड़कने के लिए आम के पत्ते
- •जौ के अंकुर (जवारे) रखने का पात्र
नवमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे समाप्त होगी; दशहरे के अनुष्ठानों से पहले ये कार्य पूरे करें। पढ़ें — महानवमी 2026 कब है?
7. वाहन पूजा और नए कार्य के लिए सामग्री
दशहरे पर नया वाहन लेने या पुराने वाहन की पूजा करने वालों के लिए:
- •स्वास्तिक बनाने के लिए रोली या सिंदूर
- •वाहन पर बांधने के लिए कलावा और गेंदे की माला
- •नारियल (वाहन के सामने फोड़ने के लिए)
- •नींबू (पहियों के नीचे रखने की लोक परंपरा)
- •मिठाई
नया व्यापार या कार्य आरंभ करने के लिए गणेश जी का चित्र, बही-खाता या नया रजिस्टर, कलम और लाल कपड़ा रखें। मुहूर्त जानें — दशहरा 2026 विजय मुहूर्त।
खरीदारी की समय-सारणी
| कब | क्या खरीदें |
|---|---|
| 18 अक्टूबर तक | रोली, कलावा, दीपक, धूप, लाल कपड़ा, हवन सामग्री, राम दरबार का चित्र |
| 19 अक्टूबर | फल, मेवे; शस्त्र और औज़ारों की सफाई |
| 20 अक्टूबर सुबह | ताज़े फूल, अपराजिता, शमी पत्र, जलेबी, पान |
क्षेत्र के अनुसार विशेष सामग्री
- •महाराष्ट्र: आपटा के पत्ते "सोना" के रूप में बांटने के लिए, और घर के दरवाजे पर गेंदे का तोरण।
- •राजस्थान और गुजरात: जलेबी-फाफड़ा, और राजपूत परिवारों में पारंपरिक शस्त्रों के लिए विशेष पूजन सामग्री।
- •बंगाल: बिजोया दशमी (21 अक्टूबर) के लिए सिंदूर, पान, मिठाई और दुर्गा विसर्जन की सामग्री।
- •कर्नाटक: आयुध पूजा के लिए केले के पत्ते, कुमकुम और फूलों से सजावट।
- •हिमाचल (कुल्लू): देव यात्रा में शामिल होने के लिए पारंपरिक वस्त्र और भेंट।
पर्यावरण-अनुकूल सुझाव
- •घर या मोहल्ले के लिए कागज़ और बांस से बने, बिना पटाखों वाले छोटे पर्यावरण-अनुकूल पुतले चुनें।
- •शमी की टहनियां न तोड़ें — केवल कुछ पत्ते सम्मानपूर्वक लें।
- •पूजा के फूलों को नाली में फेंकने के बजाय खाद बनाएं।
- •प्लास्टिक की सजावट के बजाय फूलों और आम के पत्तों का तोरण लगाएं।
- •रावण दहन देखने जाते समय बच्चों को आतिशबाज़ी से सुरक्षित दूरी पर रखें।
रावण दहन देखने जाने से पहले की तैयारी
- •बच्चों और बुजुर्गों के लिए पानी, हल्का नाश्ता और आवश्यक दवाइयां साथ रखें।
- •भीड़ वाले स्थानों पर बच्चों की जेब में आपका मोबाइल नंबर लिखी पर्ची रखें।
- •आतिशबाज़ी से कम से कम सुरक्षित दूरी बनाकर रखें और सूती कपड़े पहनें।
- •कोटा, कुल्लू या मैसूरु जैसे बड़े मेलों में जा रहे हैं, तो यातायात और पार्किंग की जानकारी पहले से ले लें।
दशहरे के बाद सामग्री का क्या करें?
- •पूजा के फूल और पत्ते खाद में डालें या किसी पेड़ के नीचे रखें।
- •शमी के पत्ते तिजोरी या पूजा स्थान पर अगले दशहरे तक रख सकते हैं।
- •पूजित शस्त्रों और औज़ारों को साफ करके सुरक्षित स्थान पर वापस रखें।
- •राम दरबार का चित्र पूजा स्थान पर स्थायी रूप से रखा जा सकता है।
- •बची हुई मिठाई और फल ज़रूरतमंदों में बांट दें।
सामग्री से जुड़े सामान्य प्रश्न
क्या शमी के पत्ते बाज़ार से खरीद सकते हैं? हां, कई पूजा सामग्री की दुकानों पर दशहरे के दिन शमी और आपटा के पत्ते मिलते हैं। लेकिन ताज़े पत्ते ही लें।
अपराजिता के फूल न मिलें तो? अपराजिता की जगह कोई भी नीला या सफेद फूल, या केवल अक्षत अर्पित करके भी मां अपराजिता की पूजा की जा सकती है।
क्या दशहरे पर नई झाड़ू या बर्तन खरीदते हैं? यह परंपरा मुख्य रूप से धनतेरस से जुड़ी है। दशहरे पर वाहन, सोना, संपत्ति और नए कार्य की शुरुआत अधिक प्रचलित है।
दशहरे का पारंपरिक भोजन
दशहरे पर घर में बनने वाले व्यंजन भी पूजा का हिस्सा हैं। उत्तर भारत में पूरी, आलू की सब्जी, खीर और जलेबी; राजस्थान में दाल-बाटी-चूरमा और गट्टे की सब्जी; गुजरात में फाफड़ा-जलेबी; महाराष्ट्र में श्रीखंड-पूरी; और बंगाल में बिजोया दशमी पर नारकेल नाड़ू (नारियल के लड्डू) और रसगुल्ले बनाए जाते हैं। चूंकि 2026 में इसी दिन नवरात्रि का पारण भी है, इसलिए व्रत खोलने वालों के लिए हल्का और सात्विक भोजन पहले बनाएं, फिर उत्सव के पकवान।
दशहरा पूजा की संक्षिप्त विधि
- 1दोपहर 12:50 के बाद (दशमी लगने पर) स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- 2पूजा स्थान पर राम दरबार और मां दुर्गा का चित्र रखें, दीपक जलाएं।
- 3गणेश जी का स्मरण करें, फिर अपराह्न काल में अपराजिता पूजा करें।
- 4शमी वृक्ष या पौधे की पूजा करें और शमी मंत्र पढ़ें।
- 5शस्त्र, औज़ार, वाहन और पुस्तकों पर तिलक लगाकर कलावा बांधें।
- 6विजय मुहूर्त में नए कार्य का संकल्प लें।
- 7भगवान राम को जलेबी, पान और फल का भोग लगाएं, आरती करें।
- 8शाम को रावण दहन के बाद बड़ों का आशीर्वाद लें।
इस क्रम से पूजा करने पर सारी सामग्री का उपयोग सहज रूप से हो जाता है और कुछ छूटता नहीं।
सारांश
दशहरा 2026 की सामग्री समूहों में तैयार करें — मूल पूजा सामग्री, शमी, अपराजिता, शस्त्र पूजा, राम दरबार पूजा और भोग — और 20 अक्टूबर की सुबह के लिए नवमी व विसर्जन की सामग्री भी रखें। सूखी सामग्री 18 अक्टूबर तक और ताज़े फूल दशहरे की सुबह खरीदें। दशहरे पर किए जाने वाले शुभ कार्यों के लिए पढ़ें — दशहरा 2026 पर कौन सा काम करना शुभ माना जाता है?
जय श्री राम!



