दिवाली पर कितने दीपक? संक्षिप्त उत्तर
शास्त्रों में दीपकों की कोई एक निश्चित संख्या नहीं बताई गई है; मूल नियम यह है कि दिवाली की रात घर का कोई भी कोना अंधेरा न रहे। लोक परंपरा के अनुसार दिवाली की रात (8 नवंबर 2026) कम से कम 5 दीपक — पूजा स्थान, मुख्य द्वार, तुलसी, रसोई और जल स्थान पर — अवश्य जलाएं, और फिर घर के आकार व सामर्थ्य के अनुसार विषम संख्या में — जैसे 11, 21, 51 या 108 — दीपक बढ़ाएं। पारंपरिक दिनवार संख्या है — धनतेरस (6 नवंबर) पर 13 दीपक और छोटी दिवाली (7 नवंबर की शाम) पर 14 दीपक।
दीपकों की संख्या और उनका अर्थ
| संख्या | अर्थ (पारंपरिक मान्यता) |
|---|---|
| 1 (मुख्य घी का दीपक) | दिव्य ज्योति; पूजा स्थान पर रात भर जलता है |
| 5 | पंच तत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और पंचदेव (गणेश, विष्णु, शिव, दुर्गा, सूर्य) |
| 7 | सात चक्र / सप्तर्षि |
| 11 | एकादश रुद्र; संकल्प के लिए शुभ |
| 13 | त्रयोदशी — धनतेरस की तेरहवीं तिथि |
| 14 | चतुर्दशी — नरक चतुर्दशी की चौदहवीं तिथि |
| 21 | उत्सव के लिए पूर्ण और शुभ संख्या |
| 51 | 51 शक्तिपीठ |
| 108 | जप माला और ब्रह्मांड की पवित्र संख्या |
हिंदू अनुष्ठानों में सामान्यतः विषम संख्या को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि इसे "बढ़ने वाली" (वृद्धि) संख्या माना जाता है — पूर्ण या बंद नहीं। सम संख्या को पूर्णता और ठहराव का प्रतीक माना जाता है, जबकि विषम संख्या निरंतर प्रगति का।
दिवाली 2026 के लिए दिनवार दीपक संख्या
| तारीख | पर्व | पारंपरिक संख्या |
|---|---|---|
| 6 नवंबर (शुक्र) | धनतेरस | 13 दीपक + 1 चौमुखा यम दीपक (दक्षिणमुखी) |
| 7 नवंबर (शनि) | छोटी दिवाली / काली चौदस | शाम को 14 दीपक |
| 8 नवंबर (रवि) | दिवाली / लक्ष्मी पूजा | मुख्य घी दीपक + कम से कम 5; आदर्श रूप से 21, 51 या 108 |
| 10 नवंबर (मंगल) | गोवर्धन पूजा | गोवर्धन आकृति के चारों ओर और द्वार पर दीपक |
| 11 नवंबर (बुध) | भाई दूज | तिलक की थाली में दीपक; द्वार पर दीया |
धनतेरस पर 13 दीपक क्यों?
धनतेरस त्रयोदशी (तेरहवीं) तिथि को आती है, इसलिए लोक परंपरा में इस दिन 13 दीपक जलाने का चलन है। इनमें से एक विशेष चौमुखा दीपक यमराज के लिए मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर रखा जाता है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। मान्यता है कि इससे परिवार में अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। 2026 में यह दीपक 6 नवंबर को प्रदोष काल (दिल्ली में शाम 5:33 से 8:09) में जलाएं। पढ़ें — धनतेरस 2026 कब है?
छोटी दिवाली पर 14 दीपक क्यों?
नरक चतुर्दशी चौदहवीं तिथि है, इसलिए इस दिन 14 दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि ये दीपक घर के कोनों के अंधकार और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करते हैं और पितरों को मार्ग दिखाते हैं। 2026 में चतुर्दशी 7 नवंबर सुबह 10:47 से 8 नवंबर सुबह 11:27 तक है, इसलिए छोटी दिवाली के 14 दीपक 7 नवंबर की शाम जलाना उचित रहेगा। पढ़ें — नरक चतुर्दशी 2026 कब है?
दिवाली की रात के 5 अनिवार्य दीपक
- 1पूजा स्थान — मुख्य घी का दीपक, रात भर जलता रहे।
- 2मुख्य द्वार — मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए।
- 3तुलसी — पौधे के रूप में लक्ष्मी स्वरूपा।
- 4रसोई — मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद।
- 5जल स्थान — वरुण देव का आशीर्वाद और शुद्धता।
शेष दीपक कहां रखें, यह पढ़ें — दिवाली 2026 पर घर में दीपक कहां-कहां जलाएं?
व्यावहारिक मार्गदर्शन
| घर का प्रकार | सुझाई गई संख्या |
|---|---|
| छोटा फ्लैट (1-2 कमरे) | 11 या 21 दीपक |
| मध्यम घर (3-4 कमरे) | 21 या 31 दीपक |
| स्वतंत्र मकान, छत और आंगन सहित | 51 या अधिक |
| दुकान / दफ्तर | 11 या 21, साथ में कैश काउंटर पर एक दीपक |
| मंदिर में दीपदान | 5, 11 या 21 |
दीपक जलाने के नियम
- •पूजा का मुख्य दीपक गाय के घी का हो; अन्य दीयों में सरसों या तिल का तेल उपयोग करें।
- •दीयों को एक दिन पहले पानी में भिगोकर सुखा लें, ताकि वे कम तेल सोखें और देर तक जलें।
- •सभी दीपक मुख्य पूजा दीपक से ही प्रज्वलित करें — इसे लक्ष्मी जी की ज्योति को पूरे घर में फैलाने का प्रतीक माना जाता है।
- •टूटे या दरार वाले दीये उपयोग न करें।
- •दीपक बुझ जाए तो उसे फूंक मारकर न बुझाएं और न ही दोबारा जलाने में संकोच करें — बस श्रद्धा से फिर प्रज्वलित कर दें।
- •दीपक जलाते समय यह मंत्र बोलें:
मिट्टी के दीये ही क्यों?
मिट्टी पंच तत्वों में पृथ्वी का प्रतीक है और अग्नि के साथ मिलकर संतुलन बनाती है। मिट्टी के दीये पर्यावरण के अनुकूल हैं और इन्हें खरीदने से कुम्हारों व स्थानीय कारीगरों की आजीविका को सहारा मिलता है। बिजली की लड़ियां सजावट के लिए ठीक हैं, लेकिन पूजा और दीपदान के लिए मिट्टी के दीयों का कोई विकल्प नहीं है।
संख्या से अधिक महत्वपूर्ण है भाव
शास्त्र दीपकों की संख्या से अधिक श्रद्धा, स्वच्छता और सही समय पर बल देते हैं। प्रदोष काल (8 नवंबर को दिल्ली में शाम 5:31 से 8:09) में श्रद्धापूर्वक जलाए गए कुछ स्वच्छ मिट्टी के दीये, लापरवाही से जलाए गए सैकड़ों दीयों से बेहतर हैं। यदि बजट या स्थान सीमित है, तो केवल 5 अनिवार्य दीपक जलाकर भी पूर्ण फल प्राप्त होता है।
दिवाली के पांच दिनों में दीपदान का महत्व
कार्तिक मास को दीपदान का मास कहा गया है। पद्म पुराण के अनुसार कार्तिक में किया गया दीपदान अनंत पुण्य देता है। दिवाली के पांच दिन इस दीपदान के शिखर हैं — धनतेरस पर यमराज के लिए, छोटी दिवाली पर पितरों और नकारात्मकता दूर करने के लिए, दिवाली पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए, गोवर्धन पूजा पर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता के लिए और भाई दूज पर भाई की दीर्घायु के लिए। कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली के साथ यह दीपोत्सव पूर्ण होता है।
दीपकों की व्यवस्था का सरल तरीका
21 दीपक जला रहे हों, तो इस तरह बांट सकते हैं:
| स्थान | दीपक |
|---|---|
| पूजा स्थान | 1 बड़ा घी का + 4 छोटे |
| मुख्य द्वार | 2 |
| तुलसी | 1 |
| रसोई | 1 |
| जल स्थान | 1 |
| तिजोरी/उत्तर दिशा | 1 |
| हर कमरा | 1-1 (लगभग 4) |
| बालकनी/खिड़कियां | 4 |
| पिछला दरवाज़ा | 1 |
| कुल | 21 |
इसी तरह 51 या 108 दीपकों में छत, आंगन, सीढ़ियों और चारदीवारी पर अधिक दीये रखें।
विभिन्न परंपराओं में दीपदान
- •उत्तर भारत: मिट्टी के दीयों में सरसों का तेल; घर के हर कोने और छत पर दीपमाला।
- •राजस्थान: हवेलियों और महलों में दीयों की पंक्तियां; जयपुर के बाज़ार रोशनी के लिए प्रसिद्ध।
- •गुजरात: दिवाली से लाभ पंचमी तक घरों के बाहर दीपक और रंगोली।
- •बंगाल: काली पूजा की रात 14 दीपक (चौद्दो प्रदीप) पितरों के लिए जलाए जाते हैं।
- •दक्षिण भारत: कार्तिगई दीपम पर तेल के दीयों की पंक्तियां; दिवाली पर भोर में दीपक।
- •गोवा और महाराष्ट्र: आकाश कंदील (आकाशदीप) — ऊंचाई पर टांगे जाने वाले कागज़ के लालटेन।
आकाशदीप: कार्तिक मास में घर की छत पर ऊंचे बांस पर दीपक टांगने की परंपरा को आकाशदीप कहते हैं। मान्यता है कि यह पितरों को मार्ग दिखाता है।
सारांश
8 नवंबर 2026 को कम से कम 5 अनिवार्य दीपक और फिर विषम संख्या (11, 21, 51, 108) में और दीपक जलाएं। परंपरा के अनुसार धनतेरस (6 नवंबर) पर 13 और छोटी दिवाली (7 नवंबर) पर 14 दीपक जलाएं। असली नियम यही है — घर का कोई कोना अंधेरा न रहे।
शुभ दीपावली!



