अखिल भारत · लक्ष्मी पूजा · प्रदोष · अमावस्या
दीवाली 2027
Diwali 2027
29 अक्टूबर 2027 · राजस्थान · Apna Panchang
इस दिनांक का पंचांग
यह पर्व संपूर्ण भारत में मनाया जाता है। त्योहार के दिन अपने चुने हुए शहर जयपुर का पंचांग देखें।
- सूर्योदय
- 06:34 AM
- सूर्यास्त
- 05:46 PM
- राहुकाल
- 10:46 AM – 12:10 PM
- प्रदोष काल
- 05:46 PM – 08:10 PM
इस वर्ष का विशेष विवरण
दीवाली (लक्ष्मी पूजा) 2027 कार्तिक अमावस्या — 29 अक्टूबर। सूर्यास्त के बाद प्रदोष लक्ष्मी-गणेश की सामान्य घड़ी है। अमावस्या और प्रदोष नगर के सूर्य समय से खिसकते हैं।
दीवाली की तिथि
दीवाली कार्तिक कृष्ण अमावस्या है। दीप और लक्ष्मी-गणेश पूजा उसी अमावस्या की संध्या पर हैं, न कि केवल कैलेंडर की तारीख पर। अमावस्या दो नागरिक दिनों पर फैल सकती है — सूर्यास्त और प्रदोष अपने नगर के पंचांग से लें।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष)
प्रदोष सूर्यास्त से लगभग तीन मुहूर्त (करीब 2 घंटे 24 मिनट) तक माना जाता है। यही लक्ष्मी पूजा की सामान्य खिड़की है। निशीथ कुछ घरों में गहरी रात की पूजा है — परिवार की रीत देखें। राहु काल यदि प्रदोष से कटे तो संकल्प राहु से बाहर रखें।
पूजा विधि
देहरी और चौकी साफ़ करें, मांडना या रंगोली, गणेश-लक्ष्मी की स्थापना, दीप, पुष्प, मिष्ठान और नए खातों की चोपड़ा पूजन। राजस्थान की हवेलियाँ देहरी पर मांडना खींचती हैं; जोहरी बाज़ार देर तक खुलता है। विधि घर की है — पंचांग केवल घड़ियाँ देता है।
मंत्र
सामान्य जप: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। दीप के समय गणेश का एक स्मरण पहले, फिर लक्ष्मी। लंबा स्तोत्र पंडित या घर की पुस्तक से लें; यहाँ केवल स्मरण है।
संबंधित पर्व एवं त्योहार
पंचांग से जुड़े मुख्य प्रश्नोत्तर
- दीवाली 2026 और 2027 कब है?
- 2026 में दीवाली 8 नवंबर है; 2027 में 29 अक्टूबर। दोनों कार्तिक अमावस्या हैं — अपने नगर का सूर्यास्त और प्रदोष उसी दिन के पंचांग पर देखें।
- लक्ष्मी पूजा कब करें?
- सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में। यह खिड़की जयपुर और जैसलमेर में मिनट भर अलग होगी।
- राहु काल में दीया जलाएँ?
- अधिकतर परिवार नया संकल्प राहु काल से बाहर रखते हैं। पहले से जलता दीप जारी रह सकता है — घर की रीत देखें।
