मां दुर्गा के प्रिय फूल: संक्षिप्त उत्तर
मां दुर्गा को लाल फूल सबसे प्रिय हैं — विशेष रूप से लाल गुड़हल (जपा पुष्प), इसके बाद लाल गुलाब, लाल कनेर, कमल, गेंदा, चमेली, मोगरा और चंपा। नवदुर्गा के प्रत्येक स्वरूप से भी कुछ विशेष फूल और भोग पारंपरिक रूप से जुड़े हैं। मां को दूर्वा, तुलसी, आक (मदार) या धतूरे के फूल न चढ़ाएं, और बासी, ज़मीन पर गिरे या सूंघे हुए फूल कभी अर्पित न करें।
| तारीख (2026) | देवी स्वरूप | फूल (प्रचलित परंपरा) | भोग | विशेष सामग्री |
|---|---|---|---|---|
| 11 अक्टूबर | शैलपुत्री | लाल गुड़हल, सफेद कनेर | गाय का घी | लाल चुनरी |
| 12 अक्टूबर | ब्रह्मचारिणी | चमेली, गुलदाउदी | शक्कर, मिश्री | रुद्राक्ष/अक्षमाला |
| 13 अक्टूबर | चंद्रघंटा | कमल, शंखपुष्पी | दूध, खीर | घंटी |
| 14 अक्टूबर | कूष्मांडा | पीले फूल, गेंदा | मालपुआ | कुम्हड़ा (कद्दू) |
| 15 अक्टूबर | स्कंदमाता | पीले गुलाब, नीले/बैंगनी फूल | केला | पीला वस्त्र |
| 16 अक्टूबर | कात्यायनी | गेंदा, लाल गुलाब | शहद | हल्दी, पीली मिठाई |
| 17–18 अक्टूबर | कालरात्रि | रातरानी, नीलकमल, लाल गुड़हल | गुड़ | तिल के तेल का दीपक |
| 19 अक्टूबर | महागौरी | मोगरा, बेला, सफेद फूल | नारियल | श्रृंगार सामग्री |
| 19–20 अक्टूबर | सिद्धिदात्री | चंपा, गुड़हल | तिल, हलवा-पूरी-चना | कमल का आसन/फूल |
दिन के अनुसार फूलों का यह संबंध प्रचलित लोक परंपरा है, कोई निश्चित शास्त्रीय नियम नहीं। यदि कोई विशेष फूल उपलब्ध न हो, तो श्रद्धा से अर्पित कोई भी ताज़ा लाल या मौसमी फूल मान्य है।
लाल फूल मां को प्रिय क्यों हैं?
देवी परंपरा में लाल रंग शक्ति, ऊर्जा, मंगल और सौभाग्य का प्रतीक है। गुड़हल (जपा पुष्प) का उल्लेख देवी उपासना के ग्रंथों में बार-बार आता है, और यह दुर्गा, काली और लक्ष्मी — तीनों को अर्पित किया जाता है। कालिका पुराण और संबंधित ग्रंथों में मां को लाल पुष्प अर्पित करना विशेष प्रसन्नता देने वाला बताया गया है। यही कारण है कि मां को लाल चुनरी, लाल चूड़ियां और सिंदूर भी अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि में प्रतिदिन मां को एक लाल गुड़हल अर्पित करने से घर में सुख-शांति और आर्थिक स्थिरता आती है।
दिन के अनुसार फूल और भोग — विस्तार से
पहला दिन: मां शैलपुत्री (11 अक्टूबर) लाल गुड़हल या सफेद कनेर अर्पित करें और भोग में **गाय का घी** चढ़ाएं। मान्यता है कि पहले दिन घी के भोग से आरोग्य मिलता है। कई लोग बाद में यह घी किसी ज़रूरतमंद को दान कर देते हैं। घटस्थापना के समय मां को लाल चुनरी भी अर्पित करें।
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी (12 अक्टूबर) तपस्विनी मां को **चमेली** जैसे सफेद सुगंधित फूल प्रिय हैं। भोग में **शक्कर या मिश्री** चढ़ाएं — मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों को दीर्घायु मिलती है।
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा (13 अक्टूबर) संभव हो तो **कमल** का फूल, अन्यथा शंखपुष्पी अर्पित करें। **दूध या खीर** का भोग मां को प्रसन्न करता है। पूजा के समय घंटी अवश्य बजाएं।
चौथा दिन: मां कूष्मांडा (14 अक्टूबर) पीले फूल अर्पित करें और भोग में **मालपुआ** चढ़ाएं। कुम्हड़ा (कूष्मांड) अर्पित करना पारंपरिक है, जिससे आरोग्य और बुद्धि में वृद्धि मानी जाती है।
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता (15 अक्टूबर) पीले गुलाब या नीले/बैंगनी फूल उपयुक्त हैं। **केले** का भोग लगाएं — मान्यता है कि इससे अच्छा स्वास्थ्य और संतान को आशीर्वाद मिलता है।
छठा दिन: मां कात्यायनी (16 अक्टूबर) गेंदे या लाल गुलाब के फूल और भोग में **शहद** अर्पित करें। योग्य जीवनसाथी की कामना करने वाली कन्याएं हल्दी और पीली मिठाई चढ़ाती हैं।
सातवां–आठवां दिन: मां कालरात्रि (17–18 अक्टूबर) रात में खिलने वाले फूल जैसे रातरानी, नीलकमल या लाल गुड़हल अर्पित करें। **गुड़** का भोग पारंपरिक है; बाद में यह गुड़ किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को दान करें। कई घरों में इस दिन तिल के तेल का दीपक जलाया जाता है। 2026 में सप्तमी वृद्धि के कारण 18 अक्टूबर को भी यही पूजा सामग्री रखें।
नौवां दिन: मां महागौरी (19 अक्टूबर, अष्टमी) गौर वर्ण और शांत स्वरूप वाली मां महागौरी को **मोगरा और बेला** जैसे सफेद फूल प्रिय हैं। **नारियल** और *सोलह श्रृंगार* अर्पित करें। सुहागिन महिलाएं दांपत्य सुख के लिए श्रृंगार सामग्री चढ़ाती हैं।
दसवां दिन: मां सिद्धिदात्री (19–20 अक्टूबर, नवमी) **चंपा** या गुड़हल अर्पित करें, और हलवा-पूरी-चने के साथ **तिल** का भोग लगाएं। मान्यता है कि तिल का भोग अचानक आने वाले संकटों से रक्षा करता है।
देवी पूजा में कौन से फूल न चढ़ाएं?
- •दूर्वा घास — गणेश जी को अर्पित की जाती है, परंपरागत रूप से मां को नहीं।
- •तुलसी दल — भगवान विष्णु को प्रिय है; सामान्यतः देवी को नहीं चढ़ाया जाता।
- •आक (मदार) और धतूरा — भगवान शिव को चढ़ाए जाते हैं, मां को नहीं।
- •बासी, मुरझाए या ज़मीन पर गिरे फूल, किसी के सूंघे हुए फूल या कीड़े लगे फूल।
- •बिना अनुमति किसी और के बगीचे से तोड़े गए फूल।
- •प्लास्टिक के कृत्रिम फूल — अर्पण के लिए नहीं, केवल सजावट के लिए (यदि आवश्यक हो)।
बेलपत्र मां दुर्गा को अर्पित किया जा सकता है; बंगाल की दुर्गा पूजा में बिल्व वृक्ष में देवी का आवाहन (बिल्व निमंत्रण) होता है।
फूल चढ़ाने का सही तरीका
- 1फूलों को हल्का धोकर साफ थाली में रखें।
- 2फूल दाहिने हाथ से, अंगूठे, मध्यमा और अनामिका उंगलियों के बीच पकड़कर अर्पित करें।
- 3फूल का मुख ऊपर की ओर रखते हुए मां के चरणों में या प्रतिमा पर चढ़ाएं।
- 4अर्पण करते समय 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' या उस दिन की देवी का नाम मंत्र बोलें।
- 5आरती के समय पुष्पांजलि दें — दोनों हथेलियों में फूल लेकर मंत्र के साथ अर्पित करें।
- 6हर सुबह नई पूजा से पहले पिछले दिन के फूल हटा दें (कलश पर रखे फूल अपनी परंपरा के अनुसार रखें)।
पुष्पांजलि मंत्र:
> नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोद्भवानि च।
> पुष्पाञ्जलिर्मया दत्ता गृहाण परमेश्वरि॥
यदि ताज़े फूल उपलब्ध न हों तो?
शहरों में कई बार सुबह-सुबह ताज़े फूल मिलना कठिन होता है। ऐसे में ये विकल्प अपनाएं:
- •अक्षत से पुष्प अर्पण: शास्त्रों में विधान है कि फूल उपलब्ध न होने पर 'पुष्पाणि समर्पयामि' कहकर अक्षत (साबुत चावल) अर्पित किए जा सकते हैं।
- •घर में फूलों के पौधे: नवरात्रि से पहले गमलों में गुड़हल, गेंदा, चमेली या अपराजिता लगाएं — ये आसानी से उगते हैं और रोज़ ताज़े फूल देते हैं।
- •एक दिन पहले खरीदे फूल: उन्हें गीले कपड़े में लपेटकर या पानी में डंठल डुबोकर ठंडी जगह रखें। हालांकि सूंघे हुए या मुरझाए फूल न चढ़ाएं।
- •कमल का फूल: मान्यता है कि कमल का फूल कई दिनों तक बासी नहीं माना जाता, इसलिए इसे एक दिन पहले भी लाया जा सकता है।
फूलों की माला का महत्व
मां को फूलों की माला अर्पित करना विशेष सम्मान का प्रतीक है। अष्टमी और नवमी पर कई भक्त 108 लाल फूलों (गुड़हल या गुलाब) की माला बनाकर अर्पित करते हैं — यह संख्या जप माला के 108 मनकों के समान पूर्णता का प्रतीक है। माला बनाते समय हर फूल पर मां का नाम या नवार्ण मंत्र बोलते जाएं, तो माला स्वयं एक जप साधना बन जाती है।
नवरात्रि में फूलों से जुड़े सरल उपाय
- •आर्थिक तंगी दूर करने के लिए: नौ दिनों तक प्रतिदिन मां को एक लाल गुड़हल और एक लौंग अर्पित करें।
- •विवाह बाधा के लिए: षष्ठी (16 अक्टूबर) को मां कात्यायनी को पीले फूल और हल्दी की गांठ चढ़ाएं।
- •घर में शांति के लिए: अष्टमी (19 अक्टूबर) को मां महागौरी को सफेद फूलों की माला अर्पित करें।
- •शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए: सप्तमी को मां कालरात्रि को नीले या गहरे लाल फूल चढ़ाएं।
फूलों से रंगोली और सजावट
नवरात्रि में पूजा स्थल के सामने ताज़े फूलों की पंखुड़ियों से रंगोली बनाना शुभ माना जाता है। गेंदे की पीली-नारंगी पंखुड़ियां, गुलाब की लाल पंखुड़ियां और आम या अशोक के पत्तों से सुंदर स्वास्तिक, कमल या त्रिशूल की आकृति बनाई जा सकती है। आप उस दिन के शुभ रंग के फूलों को रंगोली में प्रमुखता दे सकते हैं — जैसे 13 अक्टूबर को लाल और 15 अक्टूबर को पीले फूल। रंगोली को प्रतिदिन बदलें और पुरानी पंखुड़ियों को खाद में डाल दें।
पूजा के बाद फूलों का क्या करें?
पूजा के फूलों को कूड़ेदान या नाली में न फेंकें। इन्हें एक टोकरी में इकट्ठा करें और:
सारांश
मां दुर्गा को लाल फूल, विशेषकर गुड़हल, सबसे प्रिय हैं। नवरात्रि 2026 में दिन के अनुसार फूल और भोग अर्पित करें — 11 अक्टूबर को घी, 12 को मिश्री, 13 को खीर, 14 को मालपुआ, 15 को केला, 16 को शहद, 17–18 को गुड़, 19 को नारियल और 20 को तिल — और दूर्वा, तुलसी, आक व बासी फूलों से बचें। सबसे बढ़कर, जो भी अर्पित करें, सच्चे मन से करें। हर देवी के मंत्र के लिए पढ़ें — नवरात्रि 2026 देवी पूजा मंत्र सहित।
जय माता दी!



