ब्रह्म मुहूर्त भोर से पहले का पहर है। सामान्य पंचांग सूर्योदय से दो मुहूर्त (96 मिनट) पहले शुरू और एक मुहूर्त (48 मिनट) पहले समाप्त करता है। जैसलमेर का सूर्योदय भरतपुर का नहीं, इसलिए घड़ी शहर के साथ चलती है।
यह जागने, जप और पढ़ाई के लिए है। RPSC रिपोर्टिंग भोर के बाद होती है, इससे मेल नहीं खाती। सड़क असुरक्षित हो तो केवल “शुभ” कहकर अंधेरे में घर से न निकलें।
अपना पंचांग दिन पृष्ठ पर ब्रह्म उसी दिन के संग्रहीत सूर्योदय से लिखता है। दूसरी खगोल रचना नहीं। ड्रिक से तुलना हो तो मिनट की गोलाई में छोटा अंतर सामान्य है।
अभिजित दोपहर है; ब्रह्म रात का अंतिम भाग। ये एक-दूसरे की जगह नहीं।
