भाई दूज तिलक का समय 2026: संक्षिप्त उत्तर
बुधवार, 11 नवंबर 2026 को भाई दूज पर तिलक का सही समय अपराह्न काल (दोपहर बाद का समय), जब द्वितीया तिथि हो — नई दिल्ली में दोपहर 1:10 से 3:20 बजे और जयपुर में दोपहर 1:16 से 3:27 बजे तक। चूंकि इस बुधवार को राहुकाल अपराह्न के आरंभ से टकरा रहा है (दिल्ली में लगभग 12:04 से 1:25 और जयपुर में लगभग 12:12 से 1:33), इसलिए व्यावहारिक रूप से श्रेष्ठ समय दिल्ली में लगभग 1:25 से 3:20 और जयपुर में 1:33 से 3:27 है। द्वितीया तिथि पूरे भारत में दोपहर 3:53 बजे समाप्त होगी।
शहरवार अपराह्न मुहूर्त (11 नवंबर 2026)
| शहर | अपराह्न तिलक मुहूर्त |
|---|---|
| नई दिल्ली | दोपहर 1:10 – 3:20 |
| जयपुर | दोपहर 1:16 – 3:27 |
| चंडीगढ़ | दोपहर 1:11 – 3:19 |
| लखनऊ | दोपहर 12:56 – 3:07 |
| पटना | दोपहर 12:39 – 2:51 |
| कोलकाता | दोपहर 12:27 – 2:41 |
| अहमदाबाद | दोपहर 1:30 – 3:43 |
| मुंबई | दोपहर 1:30 – 3:46 |
| पुणे | दोपहर 1:26 – 3:42 |
| हैदराबाद | दोपहर 1:08 – 3:25 |
| बेंगलुरु | दोपहर 1:13 – 3:32 |
| चेन्नई | दोपहर 1:02 – 3:21 |
स्रोत: प्रमुख पंचांगों में प्रयुक्त दृक् गणना। राहुकाल का समय अनुमानित है; अपने शहर का [राहुकाल](/rahukaal/jaipur) अवश्य देखें।
दिल्ली और जयपुर के लिए अनुशंसित समय
| शहर | अपराह्न | राहुकाल (लगभग) | अनुशंसित समय |
|---|---|---|---|
| नई दिल्ली | 1:10 – 3:20 | 12:04 – 1:25 | लगभग 1:25 – 3:20 |
| जयपुर | 1:16 – 3:27 | 12:12 – 1:33 | लगभग 1:33 – 3:27 |
जिन शहरों में अपराह्न जल्दी शुरू होता है (जैसे कोलकाता, पटना, लखनऊ), वहां भी अपराह्न का आरंभिक भाग राहुकाल से टकरा सकता है; अपने शहर का राहुकाल देखकर उसके बाद तिलक करें। मुंबई, पुणे और अहमदाबाद में अपराह्न देर से शुरू होता है, इसलिए वहां टकराव की संभावना कम है।
तिलक दोपहर में ही क्यों?
शास्त्रों (जैसे निर्णय सिंधु) में यम द्वितीया की पूजा अपराह्न काल में करने का विधान है — दिन को पांच भागों में बांटने पर चौथा भाग अपराह्न कहलाता है। परंपरा के अनुसार यमराज अपनी बहन यमुना के घर दोपहर के समय पहुंचे थे और उन्होंने बहन के हाथ का बना भोजन किया था। इसलिए भाई को तिलक लगाना और बहन के घर भोजन करना आदर्श रूप से दोपहर में ही होता है। कथा पढ़ें — भाई दूज 2026 कब है? (यम-यमुना कथा)।
अपराह्न काल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिनमान को पांच बराबर भागों में बांटा जाता है — प्रातः, संगव, मध्याह्न, अपराह्न और सायाह्न। चौथा भाग अपराह्न है। उदाहरण के लिए, 11 नवंबर को दिल्ली में दिनमान लगभग 10 घंटे 50 मिनट है; इसका पांचवां हिस्सा लगभग 2 घंटे 10 मिनट होता है, और सूर्योदय के बाद तीन भाग बीतने पर दोपहर 1:10 बजे अपराह्न आरंभ होता है। इसीलिए हर शहर में अपराह्न का समय वहां के सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार अलग होता है।
भाई दूज 10 नहीं, 11 नवंबर को क्यों?
द्वितीया तिथि 10 नवंबर को दोपहर 2:00 बजे शुरू होती है, इसलिए उस दिन का अधिकांश अपराह्न प्रतिपदा (गोवर्धन पूजा) में है। 11 नवंबर को द्वितीया दोपहर 3:53 बजे तक पूरे अपराह्न में रहती है। इसलिए भाई दूज 11 नवंबर को ही मनाया जाएगा।
किन समयों से बचें?
- •राहुकाल — दिल्ली में लगभग 12:04 से 1:25, जयपुर में लगभग 12:12 से 1:33।
- •दोपहर 3:53 के बाद — जब द्वितीया तिथि समाप्त हो जाती है।
- •क्रोध या कलह के माहौल में — तिलक का भाव प्रेम और आशीर्वाद है; शांत मन से करें।
मुहूर्त छूट जाए तो क्या करें?
- •राहुकाल से बचते हुए दोपहर 3:53 से पहले किसी भी समय तिलक कर सकते हैं।
- •कुछ क्षेत्रों (बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ भाग) में गोधन पूजा के बाद सुबह तिलक करने की कुल परंपरा है — उसका पालन करें।
- •भाई-बहन अलग शहरों में हों, तो बहन के शहर का समय मानें; वीडियो कॉल पर तिलक की रस्म भी स्वीकार्य है।
- •यदि द्वितीया भी बीत जाए, तो भी प्रेम से तिलक और भोजन करें — भाव सबसे बड़ा मुहूर्त है।
तिलक के समय क्या ध्यान रखें?
- •भाई उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे।
- •बहन अनामिका उंगली से रोली-अक्षत का तिलक लगाए।
- •भाई के सिर पर रूमाल या टोपी रखने की परंपरा है।
- •तिलक के बाद आरती, मिठाई और फिर बहन के हाथ का भोजन।
पूरी विधि — भाई दूज पर भाई को तिलक लगाने की सही विधि।
भाई दूज के दिन की समय-सारणी (दिल्ली)
| समय | क्या करें |
|---|---|
| सुबह | स्नान, यमुना या किसी पवित्र जल में स्नान (संभव हो तो), चित्रगुप्त पूजा |
| दोपहर 12:00 तक | भोजन और थाली की तैयारी |
| 12:04 – 1:25 | राहुकाल — प्रतीक्षा करें |
| 1:25 – 3:20 | तिलक, आरती, भोजन |
| 3:53 से पहले | सभी रस्में पूर्ण |
| शाम | मुख्य द्वार पर दीपक, परिवार के साथ समय |
भाई दूज पर चौघड़िया क्यों नहीं, अपराह्न क्यों?
चौघड़िया का उपयोग मुख्यतः यात्रा और सामान्य शुभ कार्यों के लिए होता है, जबकि पर्व-विशेष अनुष्ठानों के लिए शास्त्रों ने अलग-अलग काल निर्धारित किए हैं — जैसे दिवाली के लिए प्रदोष काल, दशहरे के लिए अपराह्न और विजय मुहूर्त, और भाई दूज के लिए अपराह्न काल। इसलिए भाई दूज पर अपराह्न काल को ही मुख्य मानें और केवल राहुकाल से बचें। चौघड़िया के बारे में पढ़ें — चौघड़िया कैसे देखें?
भाई दूज पर एक दिन की पूरी योजना
बहन के घर पहुंचने से लेकर विदा होने तक का समय सुनियोजित हो, तो रस्में आराम से पूरी होती हैं:
- 1सुबह — बहन घर की सफाई, भोजन और तिलक की थाली की तैयारी करे।
- 2दोपहर 12 बजे तक — भाई बहन के घर पहुंचे।
- 3राहुकाल समाप्त होने तक — परिवार के साथ बातचीत, बच्चों से मिलना।
- 4राहुकाल के बाद अपराह्न में — तिलक, आरती, भोजन।
- 5शाम — उपहार, आशीर्वाद और विदाई।
तिलक की विधि विस्तार से पढ़ें — भाई दूज पर भाई को तिलक लगाने की सही विधि।
भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा का समय
11 नवंबर को कायस्थ समाज भगवान चित्रगुप्त की पूजा (कलम-दवात पूजा) भी करता है। यह पूजा सामान्यतः सुबह या दोपहर में की जाती है, और इसके बाद अपराह्न में भाई दूज का तिलक होता है। जिन परिवारों में दोनों परंपराएं हैं, वे सुबह चित्रगुप्त पूजा और राहुकाल के बाद अपराह्न में तिलक की योजना बना सकते हैं।
सारांश
11 नवंबर 2026 को अपराह्न में तिलक करें — आदर्श रूप से राहुकाल के बाद दिल्ली में 1:25 से 3:20 और जयपुर में 1:33 से 3:27 — और हर हाल में द्वितीया के दोपहर 3:53 बजे समाप्त होने से पहले। अपने शहर के लिए ऊपर दी गई तालिका देखें।
शुभ भाई दूज!



