आज का चौघड़िया भिलाई — दिन और रात का चौघड़िया

13 सितंबर 2026 · Durg, Chhattisgarh

🟢 अमृत🟢 शुभ🟢 लाभ🟡 चर🔴 रोग🔴 काल🔴 उद्वेग

दिन का चौघड़िया

सूर्य सिद्धांत पर आधारित अष्टम भाग चौघड़िया मुहूर्त

3 शुभ मुहूर्त
  1. ⚠️

    उद्वेग

    अशुभ / त्याज्य

    मानसिक अशांति, सरकारी कार्य से बचें

    05:51 AMसे 07:23 AM
  2. चल

    सामान्य / चर

    यात्रा, वाहन व गतिशीलता के कार्य

    07:23 AMसे 08:55 AM
  3. लाभ

    उत्तम व शुभ

    व्यापार, धन लाभ व नया कार्य आरंभ

    08:55 AMसे 10:28 AM
  4. अमृत

    उत्तम व शुभ

    सर्व कार्य सिद्धि, अमृत तुल्य फल

    10:28 AMसे 12:00 PM
  5. ⚠️

    काल

    अशुभ / त्याज्य

    हानि व कलह भय, सर्वथा त्याज्य

    12:00 PMसे 01:32 PM
  6. शुभ

    उत्तम व शुभ

    विवाह, धार्मिक व मांगलिक कार्य

    01:32 PMसे 03:05 PM
  7. ⚠️

    रोग

    अशुभ / त्याज्य

    रोग भय, नया कार्य वर्जित

    03:05 PMसे 04:37 PM
  8. ⚠️

    उद्वेग

    अशुभ / त्याज्य

    मानसिक अशांति, सरकारी कार्य से बचें

    04:37 PMसे 06:09 PM

रात का चौघड़िया

सूर्य सिद्धांत पर आधारित अष्टम भाग चौघड़िया मुहूर्त

4 शुभ मुहूर्त
  1. शुभ

    उत्तम व शुभ

    विवाह, धार्मिक व मांगलिक कार्य

    06:09 PMसे 07:37 PM
  2. अमृत

    उत्तम व शुभ

    सर्व कार्य सिद्धि, अमृत तुल्य फल

    07:37 PMसे 09:05 PM
  3. चल

    सामान्य / चर

    यात्रा, वाहन व गतिशीलता के कार्य

    09:05 PMसे 10:32 PM
  4. ⚠️

    रोग

    अशुभ / त्याज्य

    रोग भय, नया कार्य वर्जित

    10:32 PMसे 12:00 AM
  5. ⚠️

    काल

    अशुभ / त्याज्य

    हानि व कलह भय, सर्वथा त्याज्य

    12:00 AMसे 01:28 AM
  6. लाभ

    उत्तम व शुभ

    व्यापार, धन लाभ व नया कार्य आरंभ

    01:28 AMसे 02:55 AM
  7. ⚠️

    उद्वेग

    अशुभ / त्याज्य

    मानसिक अशांति, सरकारी कार्य से बचें

    02:55 AMसे 04:23 AM
  8. शुभ

    उत्तम व शुभ

    विवाह, धार्मिक व मांगलिक कार्य

    04:23 AMसे 05:51 AM

संपूर्ण पंचांग देखें · आज का राहुकाल

पंचांग से जुड़े मुख्य प्रश्नोत्तर

आज भिलाई में चौघड़िया कब है?
भिलाई का दिन चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त तक आठ पहरों में बँटा है। रात चौघड़िया सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक चलता है।
कौन से चौघड़िया शुभ माने जाते हैं?
अमृत, शुभ और लाभ सामान्यतः अनुकूल हैं; चर मिश्रित है; रोग, काल और उद्वेग नए काम के लिए आमतौर पर टाले जाते हैं। जहाँ हो सके राहुकाल से बाहर शुभ पहर चुनें।