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नवरात्रि में कन्या पूजन कब करें? अष्टमी या नवमी, जानें सही दिन

कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को? शास्त्रीय मत, कुल परंपरा, 2026 की तारीख और मुहूर्त, कन्याओं की सही आयु और देवी भागवत में कन्या पूजन का महत्व।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र·8 मिनट पठन·अंतिम अपडेट: 9 अक्टू॰ 2026
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नवरात्रि में कन्या पूजन कब करें? अष्टमी या नवमी, जानें सही दिन
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मुख्य वैदिक बिंदु (Key Highlights)

कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को? शास्त्रीय मत, कुल परंपरा, 2026 की तारीख और मुहूर्त, कन्याओं की सही आयु और देवी भागवत में कन्या पूजन का महत्व।

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कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी? संक्षिप्त उत्तर

कन्या पूजन के लिए अष्टमी और नवमी — दोनों ही दिन शास्त्रसम्मत हैं; चुनाव आपकी कुल परंपरा पर निर्भर करता है। जिन परिवारों में अष्टमी पर कुलदेवी की पूजा होती है, वे दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन करते हैं, जबकि जो परिवार हवन के साथ नवरात्रि अनुष्ठान पूर्ण करते हैं, वे नवमी पर कन्या पूजन करते हैं। यदि आपकी कोई निश्चित परंपरा नहीं है, तो नवमी को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि इससे नौ दिनों की उपासना पूर्ण होती है। 2026 में अष्टमी का कन्या पूजन सोमवार, 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे से पहले और नवमी का कन्या पूजन मंगलवार, 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे से पहले होगा (दुर्गा पूजा परंपरा में 19 अक्टूबर को 10:51 बजे के बाद)।

विकल्पतारीख और समय (नई दिल्ली)सामान्यतः कौन मानते हैं
अष्टमी कन्या पूजनसोम 19 अक्टूबर, सूर्योदय से 10:51 तकअष्टमी पर कुलदेवी पूजा वाले परिवार; पंजाब, हिमाचल, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्से
नवमी कन्या पूजन (उदया तिथि)मंगल 20 अक्टूबर, सूर्योदय से 12:50 तकहवन से नवरात्रि पूर्ण करने वाले परिवार; उत्तर भारत का बड़ा भाग
नवमी (दुर्गा पूजा परंपरा)सोम 19 अक्टूबर, 10:51 के बादबंगाल/दृक् पंचांग आधारित महानवमी मानने वाले

शास्त्र क्या कहते हैं?

देवी भागवत पुराण (तृतीय स्कंध) में कुमारी पूजन को नवरात्रि का अनिवार्य अंग बताया गया है। इसमें कहा गया है कि कन्याओं में साक्षात देवी का वास होता है, और नवरात्रि में उनका पूजन मां को किसी भी अन्य भेंट से अधिक प्रसन्न करता है। ग्रंथ वास्तव में नवरात्रि के प्रत्येक दिन कन्या पूजन की सलाह देता है — कुछ परंपराओं में पहले दिन एक कन्या और हर दिन एक-एक बढ़ाते हुए, तो कुछ में प्रतिदिन नौ कन्याओं का पूजन। समय के साथ अधिकांश परिवारों ने इसे अष्टमी या नवमी पर एक बार के कन्या पूजन में समेट लिया।

शास्त्रों में अष्टमी को नवमी से या नवमी को अष्टमी से श्रेष्ठ नहीं बताया गया है। शास्त्र इन बातों पर ज़ोर देते हैं:

  • •कन्याएं 2 से 10 वर्ष की आयु की हों।
  • •उनका सम्मान सच्चे भाव से — साक्षात देवी मानकर — किया जाए।
  • •पूजन उसी तिथि में हो जिसे आपने चुना है, तिथि समाप्त होने के बाद नहीं।

कुछ परिवार अष्टमी क्यों चुनते हैं?

  • •कुलदेवी परंपरा: उत्तर भारत के अनेक परिवारों में अष्टमी कुलदेवी पूजन का दिन है, और कन्या पूजन उसी के साथ स्वाभाविक रूप से जुड़ा है।
  • •दुर्गा अष्टमी का महत्व: अष्टमी को सबसे शक्तिशाली दिन माना जाता है — मां महागौरी का दिन और चंड-मुंड वध का दिन।
  • •अष्टमी व्रत: जो परिवार केवल अष्टमी का व्रत रखते हैं, वे कन्या पूजन के बाद ही व्रत खोलते हैं।
  • •पंजाब और हिमाचल की "कंजक" परंपरा में अष्टमी का विशेष स्थान है।

कुछ परिवार नवमी क्यों चुनते हैं?

  • •अनुष्ठान की पूर्णता: नवमी पर नौ दिनों की पूजा, सप्तशती पाठ और हवन पूर्ण होता है; कन्या पूजन इसकी अंतिम आहुति है।
  • •मां सिद्धिदात्री: नवमी की देवी सभी सिद्धियां प्रदान करती हैं, इसलिए इस दिन का पूजन मनोकामना पूर्ण करने वाला माना जाता है।
  • •नवरात्रि पारण: जो नौ दिन का व्रत रखते हैं, वे कन्या पूजन के बाद पारण करते हैं।

क्या दोनों दिन कन्या पूजन कर सकते हैं?

हां। कुछ परिवार अष्टमी पर छोटा कन्या पूजन और नवमी पर मुख्य पूजन करते हैं, या इसके विपरीत। कुछ परिवार नवरात्रि के हर दिन एक या दो कन्याओं का पूजन करते हैं। दोनों दिन पूजन करने में कोई दोष नहीं है — महत्व सम्मान और श्रद्धा का है।

परंपरा न पता हो तो कैसे तय करें?

  • •परिवार के बुजुर्गों से पूछें — अक्सर यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही होती है।
  • •अपनी कुलदेवी के मंदिर के पुजारी से जानकारी लें।
  • •विवाह के बाद महिलाएं सामान्यतः ससुराल की परंपरा का पालन करती हैं।
  • •यदि कोई परंपरा नहीं है, तो नवमी (हवन के बाद) का कन्या पूजन श्रेष्ठ विकल्प है।

कन्या पूजन मुहूर्त 2026

अष्टमी — सोमवार, 19 अक्टूबर - अष्टमी तिथि **सुबह 10:51 बजे** समाप्त होगी, इसलिए पूजन इससे पहले पूरा करें। - सर्वश्रेष्ठ: लगभग **सुबह 6:25 से 7:50** (अमृत चौघड़िया)। - उत्तम: लगभग **सुबह 9:15 से 10:40** (शुभ चौघड़िया)। - त्याज्य: राहुकाल, लगभग सुबह 7:50 से 9:15।

नवमी — मंगलवार, 20 अक्टूबर - नवमी तिथि **दोपहर 12:50 बजे** समाप्त होगी, इसलिए पूजन इससे पहले पूरा करें। - उत्तम: लगभग **सुबह 10:40 से 12:05** (लाभ चौघड़िया) और **12:05 से 12:50** (अमृत)। - अभिजीत मुहूर्त: लगभग **सुबह 11:41 से 12:27**। - कन्याओं की सुविधा के अनुसार सुबह का पहले का समय भी मान्य है।

चौघड़िया का समय नई दिल्ली के लिए अनुमानित है। अपने शहर का समय [चौघड़िया](/choghadiya/jaipur) पेज पर देखें।

कन्याओं की आयु और उनके दिव्य नाम

देवी भागवत के अनुसार प्रत्येक आयु की कन्या देवी के एक विशेष स्वरूप का प्रतिनिधित्व करती है:

आयुनामफल (पारंपरिक मान्यता)
2 वर्षकुमारीदरिद्रता और दुःख का नाश
3 वर्षत्रिमूर्तिधर्म, धन और कामनाओं की पूर्ति
4 वर्षकल्याणीविजय, विद्या और सुख
5 वर्षरोहिणीरोगों से मुक्ति
6 वर्षकालिकाशत्रुओं पर विजय
7 वर्षचंडिकाऐश्वर्य और धन
8 वर्षशांभवीवाद-विवाद में सफलता
9 वर्षदुर्गाकठिन बाधाओं पर विजय
10 वर्षसुभद्रामनोकामनाओं की पूर्ति

कन्याओं के साथ एक बालक को बटुक भैरव (या लांगुर) के रूप में भी आमंत्रित किया जाता है, क्योंकि भैरव मां के रक्षक माने जाते हैं।

कितनी कन्याएं बुलाएं?

  • •आदर्श: नौ कन्याएं और एक बालक।
  • •कम उपलब्ध हों तो: एक, दो, तीन, पांच या सात कन्याएं भी मान्य हैं। एक कन्या का भी पूरे भाव से पूजन करें।
  • •कन्याएं उपलब्ध न हों तो: भोजन और उपहार मां को अर्पित करें और बाद में किसी मंदिर, अनाथालय या ज़रूरतमंद परिवार की कन्याओं को भेंट करें।

कन्या पूजन के संक्षिप्त चरण

  1. 1एक दिन पहले कन्याओं को आमंत्रित करें।
  2. 2पैर धोएं, आसन पर बैठाएं, तिलक लगाएं और कलावा बांधें।
  3. 3चुनरी और फूल अर्पित करें और आरती करें।
  4. 4हलवा, पूरी और काले चने परोसें।
  5. 5दक्षिणा और उपहार दें, चरण स्पर्श करें और आशीर्वाद लें।

पूरी विधि के लिए पढ़ें — दुर्गा अष्टमी 2026 और कन्या पूजन विधि, और भोजन व उपहारों के लिए देखें — कन्या पूजन सामग्री सूची।

कन्या पूजन से जुड़ी लोक कथा

कन्या पूजन से जुड़ी एक प्रसिद्ध लोक कथा माता वैष्णो देवी से संबंधित है। कथा के अनुसार कटरा के पास हंसाली गांव में पंडित श्रीधर नाम के मां के निर्धन भक्त रहते थे। एक बार नवरात्रि में उन्होंने कन्या पूजन के लिए कन्याओं को बुलाया, तो उनके बीच मां वैष्णो स्वयं एक कन्या के रूप में आ बैठीं। पूजन के बाद बाकी कन्याएं चली गईं, पर वह दिव्य कन्या रुक गई और उसने श्रीधर से पूरे गांव के लिए भंडारा आयोजित करने को कहा। निर्धन होते हुए भी श्रीधर ने मां की आज्ञा मानकर गांव को आमंत्रित किया, और मां की कृपा से भंडारा बिना किसी कमी के संपन्न हुआ। यह कथा बताती है कि कन्या पूजन में साक्षात मां स्वयं उपस्थित हो सकती हैं — इसलिए हर कन्या का आदर देवी की तरह करना चाहिए।

कन्या पूजन का सामाजिक संदेश

कन्या पूजन केवल एक दिन का अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देने वाली परंपरा है कि बेटियां शक्ति का स्वरूप हैं। जिस घर में कन्याओं का सम्मान होता है, वहां मां स्वयं निवास करती हैं — यही इसका मूल भाव है। नवरात्रि के बाद भी बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहना ही कन्या पूजन का सच्चा फल है।

कन्या पूजन में ध्यान रखने योग्य बातें

  • •कन्याओं को ज़बरदस्ती अधिक भोजन न कराएं; उनकी इच्छा का सम्मान करें।
  • •एक ही दिन कई घरों में जाने वाली कन्याओं को थोड़ा-थोड़ा प्रसाद दें और बाकी पैक करके दें।
  • •कन्याओं के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव (जाति, वर्ग या रंग के आधार पर) न करें — हर कन्या मां का स्वरूप है।
  • •पूजन के बाद ही परिवार भोजन करे।
  • •कन्या पूजन का वास्तविक अर्थ है — वर्ष भर बेटियों का सम्मान और उनकी शिक्षा व सुरक्षा का संकल्प।

कन्या पूजन के बाद क्या करें?

कन्याओं को विदा करने के बाद पूजा स्थल पर लौटकर मां को धन्यवाद दें और किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें। कन्याओं के जूठे बर्तन तुरंत साफ करें और स्थान को शुद्ध करें। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करें। यदि आपने अष्टमी का व्रत रखा था, तो इसी प्रसाद से पारण करें। बचा हुआ प्रसाद ज़रूरतमंदों में बांट दें — इसे फेंकना उचित नहीं है।

सारांश

कन्या पूजन अष्टमी (19 अक्टूबर 2026, सुबह 10:51 से पहले) या नवमी (20 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:50 से पहले) को किया जा सकता है — अपनी कुल परंपरा का पालन करें। यदि कोई परंपरा नहीं है, तो नवमी पर कन्या पूजन से नवरात्रि अनुष्ठान सुंदर ढंग से पूर्ण होता है। 2 से 10 वर्ष की कन्याओं और एक बालक को आमंत्रित करें, उन्हें साक्षात देवी मानकर सम्मान दें और तिथि समाप्त होने से पहले पूजन पूरा करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?

दोनों दिन शास्त्रसम्मत हैं। अपनी कुल परंपरा का पालन करें; परंपरा न हो तो नवमी पर हवन के बाद कन्या पूजन श्रेष्ठ माना जाता है।

2026 में अष्टमी का कन्या पूजन कब है?

सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे (अष्टमी समाप्ति) से पहले। लगभग 6:25–7:50 और 9:15–10:40 का समय उत्तम है।

2026 में नवमी का कन्या पूजन कब है?

उदया तिथि के अनुसार मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 बजे से पहले। दुर्गा पूजा परंपरा में 19 अक्टूबर को 10:51 के बाद भी नवमी पूजन होता है।

कन्या पूजन में कितनी उम्र की कन्याएं होनी चाहिए?

देवी भागवत के अनुसार 2 से 10 वर्ष की कन्याओं का पूजन करना चाहिए। हर आयु की कन्या देवी के एक विशेष स्वरूप का प्रतीक है।

कन्या पूजन में बालक को क्यों बुलाते हैं?

बालक को बटुक भैरव या लांगुर के रूप में बुलाया जाता है, क्योंकि भैरव मां दुर्गा के रक्षक माने जाते हैं।

अगर 9 कन्याएं न मिलें तो क्या करें?

एक, तीन, पांच या सात कन्याओं का भी पूजन मान्य है। कोई कन्या न मिले तो भोजन मां को अर्पित करके बाद में ज़रूरतमंद कन्याओं को भेंट करें।

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