निर्जला एकादशी

भीमसेनी / निर्जल एकादशी — सूर्योदय तिथि और पारण के नगर पंचांग के साथ।

व्रत विधि. कठोर रूप सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक निर्जल है। वृद्ध या अस्वस्थ घर प्रायः फलाहार रखते हैं — यह घर का निर्णय है, पंचांग की आज्ञा नहीं।

पारण. निर्जला समाप्ति के बाद अगली सुबह पारण। पहले जल, फिर हलका भोजन; तिथि समाप्ति जाँचें।

मंत्र. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। पुण्य चौबीस एकादशियों के बराबर बताया जाता है — यह परंपरा है, चिकित्सा दावा नहीं।